Wednesday, April 8, 2026
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ओलंपिक पदक जीतने के बाद आंखों के सामने घूम गया 21 साल का सफर : श्रीजेश

नयी दिल्ली । तोक्यो में जर्मनी के खिलाफ कांस्य पदक के मुकाबले में पेनल्टी पर गोल बचाकर 41 साल बाद ओलंपिक पदक दिलाने वाले भारत के स्टार गोलकीपर पी आर श्रीजेश ने कहा कि उस पल उनका 21 साल का कॅरियर उनकी आंखों के सामने घूम गया ।
भारत के पूर्व कप्तान 33 वर्ष के श्रीजेश हाल ही में वर्ल्ड गेम्स एथलीट का पुरस्कार जीतने वाले दूसरे भारतीय बने । श्रीजेश ने जर्मनी के खिलाफ पेनल्टी कॉर्नर पर गोल बचाकर भारत का कांस्य पदक सुनिश्चित किया ।
उन्होंने कहा ,‘‘ मैच खत्म होने से छह सेकंड पहले पेनल्टी कॉर्नर गंवाने से मैं भी हर हॉकी प्रेमी की तरह दुखी था क्योंकि जर्मनी मैच का पासा पलटने में माहिर है ।’’
उन्होंने कहा ,‘‘हमने पहले भी मैच के आखिरी पलों में गोल गंवाये हैं और वह सब यादें ताजा हो गई । लेकिन मैं जानता था कि मुझे फोकस बनाये रखना है । मैने सभी को उनकी जिम्मेदारी सौंपी क्योंकि इतने दबाव में अपनी जिम्मेदारी पर फोकस बनाये रखना मुश्किल होता है ।’’
उन्होंने कहा ,‘‘ वह गोल बचाने और मैं जीतने के बाद मैं भावुक हो गया । मेरी आंखों के सामने 21 साल का मेरा सफर घूम गया । जीवी राजा स्पोटर्स स्कूल से लेकर तोक्यो ओलंपिक तक का सफर ।’’
इस सफर में 2017 के दौरान एसीएल चोट के कारण उनका कैरियर खत्म होने की कगार पर पहुंच गया था । उन्होंने ‘हॉकी ते चर्चा’ पॉडकास्ट में कहा ,‘‘ चोट से निपटना मेरे लिये सबसे कठिन था क्योंकि उस समय मेरा कैरियर चरम पर था । मैं भारतीय टीम का कप्तान था और अच्छा खेल रहा था । लोग मुझे पहचानने लगे थे ।’’
श्रीजेश ने कहा ,‘ मेरे लिये हॉकी सबसे अहम है और चोट लगने के बाद भी मेरी अनुपस्थिति में भारतीय टीम अच्छा खेल रही थी । मुझे लगा कि लोग मुझे भूल रहे हैं ।मेरे लिये वह कठिन समय था लेकिन उस अनुभव से मुझमें परिपक्वता आई और मैं वापसी कर सका ।’’
उन्होंने कहा ,‘‘लेकिन भारत में उम्र काफी नाजुक मसला है और चोट के साथ बढती उम्र के कारण लोग मुझे चुका हुआ मानने लगे । विश्व कप 2018 के दौरान लोगों ने काफी आलोचना की । मेरे पिता भी उस समय काफी बीमार थे तो मेरे लिये वह बहुत कठिन दौर था । मैने हॉकी से संन्यास लेने के बारे में भी सोचा ।’’ उन्होंने कहा ,‘‘ मैं नीदरलैंड के गोलकीपर याप स्टॉकमैन का शुक्रगुजार हूं जिनकी सलाह से मैं उस दौर से निकल सका ।’’

जगदीश कुमार बने यूजीसी के अध्यक्ष

नयी दिल्ली । जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के कुलपति एम जगदीश कुमार को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।
कुमार का जेएनयू में कार्यकाल विवादों से भरा रहा था। पिछले साल अपना कार्यकाल समाप्त होने के बाद वह वर्तमान में कार्यवाहक कुलपति के रूप में कार्यभार संभाल रहे हैं।
शिक्षा मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा, ‘‘जगदेश कुमार को यूजीसी का नया अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।’’ 65 वर्ष की आयु हो जाने पर प्रोफेसर डीपी सिंह के जीसी अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने के बाद सात दिसंबर से यह पद खाली था। सिंह ने 2018 में यूजीसी अध्यक्ष का कार्यभार संभाला था।
उच्च शिक्षा नियामक के उपाध्यक्ष का पद भी खाली है। मंत्रालय ने अभी तक जेएनयू में कुमार के उत्तराधिकारी की नियुक्ति नहीं की है।

तवांग में फहराया गया 104 फुट ऊँचा तिरंगा

ईटानगर । अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने बृहस्पतिवार को चीन की सीमा से लगे बौद्ध तीर्थ शहर तवांग में नगंगपा नटमे (बुद्ध पार्क) में 104 फुट लंबा स्मारकीय राष्ट्रीय ध्वज फहराया।
खांडू ने राज्य के लोगों को इस मौके पर बधाई दी और मीडिया से बातचीत में कहा कि स्मारक झंडा अरुणाचल प्रदेश के सभी देशभक्तों को समर्पित करते हुये फहराया गया है और 10,000 फुट की ऊंचाई पर दूसरा सबसे ऊंचा स्मारक राष्ट्रीय ध्वज है।
उन्होंने सेना, सशस्त्र सीमा बल, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस, तवांग जिला प्रशासन और विधायक शेरिंग ताशी को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी।
खांडू ने ट्विटर पर कहा, ‘‘अरुणाचल के देशभक्त लोगों को 104 फीट का राष्ट्रीय ध्वज समर्पित करते हुए गर्व हो रहा है, जिसे आज तवांग के नगंगपा नटमे (बुद्ध पार्क) में फहराया गया।’’ उन्होंने एक अन्य ट्वीट में कहा, “10,000 फुट (की ऊंचाई)पर, यह स्मारकीय राष्ट्रीय ध्वज ऊंचाई के मामले में देश में दूसरा सबसे ऊंचा है । जय हिंद ।’’

अभिनेता रमेश देव का 93 साल की आयु में निधन

मुंबई । हिन्दी और मराठी सिनेमा के अभिनेता रमेश देव का दिल का दौरा पड़ने से गत 2 फरवरी को एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। उनके पुत्र अभिनय देव ने यह जानकारी दी। रमेश देव 93 साल के थे। उनके परिवार में पत्नी अभिनेत्री सीमा देव, बेटे अजिंक्या देव और अभिनय देव हैं। अभिनय ने ‘डेल्ही बेली’ और ‘फोर्स’ जैसी फिल्मों का निर्देशन किया है।
देव ने अपने लंबे कॅरियर में हिन्दी और मराठी फिल्मों में काम किया है। देव ने अपने करियर की शुरूआत 1962 में हिन्दी फिल्म ‘आरती’ से की। उन्होंने ‘आनंद’, ‘आप की कसम’, ‘मेरे अपने’ और ‘ड्रीम गर्ल’ में अमिताभ बच्चन, राजेश खन्ना, शत्रुघ्न सिन्हा, धर्मेन्द्र और हेमा मालिनी के साथ काम किया है।

फाइजर ने पांच साल तक के बच्चों के लिए कोविड-19 रोधी टीके हेतु मंजूरी माँगी

वाशिंगटन । फाइजर ने अमेरिका से पांच साल तक की आयु वाले बच्चों के लिए उसके कोविड-19 रोधी टीके को स्वीकृति देने के लिए कहा है, जिससे बेहद कम उम्र के अमेरिकी बच्चों को भी मार्च तक टीके लगाने की शुरुआत हो सकती है। खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने अप्रत्याशित कदम उठाते हुए फाइजर तथा उसके सहयोगी बायोएनटेक से पूर्व नियोजित कार्यक्रम से पहले ही आवेदन करने के लिए कहा था।
देश में पांच साल तक के आयुवर्ग के 1.9 करोड़ बच्चे ही कोरोना वायरस के खिलाफ टीकाकरण के योग्य नहीं है। कई अभिभावक बच्चों को भी टीके लगाने पर जोर दे रहे हैं खासतौर से ऐसे वक्त में जब ओमीक्रोन संक्रमण के कारण रिकॉर्ड संख्या में बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
अगर एफडीए स्वीकृति देता है तो फाइजर के टीके छह महीने तक के बच्चे को भी लगाए जा सकते हैं। इन टीकों की खुराक वयस्कों को दी जाने वाली खुराक का दसवां हिस्सा है। फाइजर ने कहा कि उसने एफडीए को आंकड़ें देना शुरू कर दिया है और उसे कुछ दिनों में यह प्रक्रिया पूरी होने की उम्मीद है।
एक प्रमुख सवाल यह है कि इन बच्चों को कितनी खुराक देने की आवश्यकता होगी। प्रारंभिक जांच में शिशुओं के लिए दो खुराकें पर्याप्त मानी गयी लेकिन स्कूलों में दाखिला लेने वाले बच्चों के लिए यह पर्याप्त नहीं मानी गयी। फाइजर तीन खुराकों की जांच कर रहा है और अंतिम आंकड़ें मार्च अंत तक आने की उम्मीद है। एफडीए ने ओमीक्रोन से अधिक संख्या में बच्चों के संक्रमित होने के कारण फाइजर से आवेदन देने के लिए कहा था। एजेंसी की एक प्रवक्ता ने बताया कि पांच साल तक की आयु के बच्चों में ओमीक्रोन स्वरूप के रिकॉर्ड मामले सामने आए हैं।
एफडीए का अंतिम फैसला कुछ महीनों के भीतर आ सकता है लेकिन यह एकमात्र बाधा नहीं हैं। रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र से भी मंजूरी लेनी होगी।
राष्ट्रपति जो बाइडन का प्रशासन बच्चों के लिए कोविड-19 रोधी टीके की खुराक को मंजूरी देने की प्रक्रिया तेज करने की कोशिश कर रहा है। उसकी दलील है कि स्कूलों को फिर से खोलने तथा उन्हें खुला रखने के लिए इस आयु वर्ग का टीकाकरण महत्वपूर्ण है।

 

इंग्लैंड की महिला फुटबॉलरों को अब 14 सप्ताह का मातृत्व अवकाश

लंदन । इंग्लैंड की महिला फुटबॉल खिलाड़ियों के लिये मातृत्व अवकाश नीति में बदलाव किया गया है और अगले सत्र से उन्हें नियमित वेतन और अतिरिक्त भत्तों के साथ 14 सप्ताह का अवकाश मिलेगा ।
इंग्लैंड फुटबॉल संघ ने बताया कि महिला सुपर लीग और महिला चैम्पियनशिप खेलने वाली खिलाड़ियों को यह सुविधायें मिलेंगी । इससे पहले यह क्लब पर निर्भर करता था कि वह कितनी छुट्टी देना चाहता है और उसके लिये भी यह अनिवार्य था कि खिलाड़ी क्लब के साथ कम से कम 26 सप्ताह खेल चुकी हो । नयी नीति के तहत ऐसी कोई बाध्यता नहीं है ।
चेलसी की मैनेजर एम्मा हायेस ने कहा ,‘‘ यह सही दिशा में एक और कदम है । यह सिर्फ इंग्लैंड की नहीं बल्कि पूरी दुनिया में लागू होना चाहिये ।’’ करार के तहत चोट और बीमारी की दशा में कवरेज भी अधिक होगा ।

लता ‘माँ’ से मिला चेक आज तक कैश नहीं करवाया साड़ी व्यवसायी अरमान ने

वाराणसी: स्वर साम्राज्ञी, क्वीन ऑफ़ मेलोडी पर दुनिया लता मंगेशकर को एक और वजह से भी पहचानती है, और वह वजह है भाषा और व्यहार में उनकी सादगी, सरलता, और सौम्यता। टीवी स्क्रीन पर और मंचों पर देश ने उन्हें देखा और सुना है, लेकिन एक आम आदमी के साथ उनका कैसा व्यवहार रहता है और कैसे कोई उनका मुरीद हो जाता है, यह वाराणसी के एक साधारण साड़ी व्यवसायी अरमान से बेहतर कौन बता सकता है।
लता मंगेशकर ने अरमान को दिया अपने बेटे जैसा स्नेह
व्यवहार ऐसा कि अरमान रिजवान ने लता मंगेशकर को अपनी मां का दर्जा दिया, और बदले में लता जी ने भी उन्हें हमेशा अपने बेटे जैसा स्नेह दिया। 2016 में पहली बार अरमान साड़ी दिखाने के लिए मुंबई गए थे। लता जी के विराट व्यक्तित्व होने के बावजूद उनके सरल व्यवहार से अरमान इतने प्रभावित हो गए कि उन्हें अपनी मां का दर्जा दिया।
आज तक अरमान ने ‘मां’ के दिए चेक को नहीं कराया कैश
साल में तीन से चार बार साड़ियों को लेकर अरमान लता मां के पास मुंबई जाते थे। वहां से उन्हें लता मां चेक में पेमेंट करती थीं। लेकिन अरमान ने आज तक कभी भी किसी चेक को कैश नहीं कराया, वह लता से मां से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने सभी चेक को लैमिनेट कराकर सुरक्षित रखा हुआ है। और अब वह उसे एक यादगार के तौर पर संजोकर रख लिया। इन सात वर्षों में अरमान ने करीब 100 से ज्यादा साड़ियां लता मां को दी हैं।
बनारसी साड़ियों के निर्माता और व्यापारी अरमान और उनका पूरा परिवार लता जी के निधन से शोकाकुल है। भावुक होते हुए अरमान ने बताया कि 2016 में पहली बार वह लता मंगेशकर से मिले और इस मुलाकात का जरिया बने थे उनके भाई हृदयनाथ मंगेशकर। जब वह काशी आए थे, उसी वक्त उन्होंने फोन पर लता मां से उनकी पहली बार बात कराई थी। इसके बाद वह बनारसी साड़ियां लेकर मुंबई उनके प्रभाकुंज स्थित आवास पर गए थे। बनारसी साड़ियों की ऐसी दीवानगी की साल में तीन से चार बार लता मां अरमान से साड़ियां मंगवाती थी। इनमें से कुछ वह खुद पहनती थी और कुछ लोगों को उपहार के तौर पर दिया करती थीं।
अरमान ने एनबीटी ऑनलाइन को वह ऑडियो क्लिप्स भी सुनवाई जब कोरोना के पहली और दूसरी लहर में पूरी दुनिया परेशान थी, लता मां का व्यवहार ऐसा था कि उन्होंने अरमान को फोन करके पूरे परिवार का हाल लिया और साथ ही वो दुआ करती थीं कि जल्द से इस कोरोना से दुनिया को मुक्ति मिले। फोन पर लता मंगेशकर ने योगी सरकार के कोरोना के कार्यों को लेकर योगी आदित्यनाथ के कार्यों की सराहना भी की थी। इतना ही नहीं लता मां ने अरमान के व्यवसाय से जुड़ी दिक्कतों के बारे में भी पूछा।
लता मां के अंतिम दर्शन को ​जाना चाहते थे अरमान
अरमान ने बीते 20 जनवरी को काशी विश्वनाथ धाम में लता मंगेशकर के स्वास्थ्य में सुधार के लिए काशी विश्वनाथ धाम में रुद्राभिषेक भी करवाया था। अरमान भी अपनी लता मां के अंतिम दर्शन के लिए मुंबई जाना चाहते थे, उनके निजी सहायक से बात भी हुई थी तो उन्होंने कहा कि कोविड प्रोटोकॉल का पालन करते हुए बहुत कम लोगों को बुलाया गया है। इसलिए उनका आना उचित नहीं होगा। अरमान ने अपनी लता मां के लिए शाम को परिवार के साथ फातिहा पढ़ते हुए दुआ ख्वानी भी की।

(साभार – नवभारत टाइम्स)

शांतिश्री धुलीपुड़ी पंडित बनीं जेएनयू की पहली महिला वाइस चांसलर 

नयी दिल्‍ली : प्रतिष्ठित जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी की कमान पहली बार किसी महिला के हाथ में है। पुणे यून‍िवर्सिटी की प्रफेसर शांतिश्री धुलीपुड़ी पंडित को जेएनयू का नया वाइस चांसलर नियुक्‍त किया गया है। वह जेएनयू की पहली महिला वीसी हैं। निवर्तमान वीसी जगदीश कुमार ने कहा कि वह सोमवार को ही चार्ज प्रफेसर पंडित को सौंप देंगे। पुणे यूनिवर्सिटी में पॉलिटिक्‍स और पब्लिक एडमिनिस्‍ट्रेशन पढ़ाने वाली प्रफेसर पंडित की पैदाइश रूस के सेंट पीटर्सबर्ग की है। शुरुआती पढ़ाई मद्रास (अब चेन्‍नै) में हुई जेएनयू से एम.फिल में टॉप किया। फिर यहीं से पीएचडी भी की। 1996 में उन्‍होंने स्‍वीडन की उप्‍पसला यूनविर्सिटी से डॉक्‍टोरल डिप्‍लोमा हासिल किया। हिंदी, अंग्रेजी, मराठी, तमिल जैसी छह भाषाओं में दक्ष प्रफेसर पंडित कन्‍नड़, मलयालम और कोंकणी भी समझ लेती हैं।
प्रोफेसर पंडित के पिता सिविल सर्विसिज में थे। मां लेनिनग्राद (अब सेंट पीटर्सबर्ग) ओरियंटल फैकल्‍टी डिपार्टमेंट में तमिल और तेलगू की प्रोफेसर थीं। शिक्षण में 34 साल से ज्‍यादा का अनुभव रखने वाली प्रफेसर शांतिश्री धुलीपुड़ी पंडित ने पुणे यूनिवर्सिटी के अलावा गोवा यूनिवर्सिटी, ओस्‍मानिया यूनिवर्सिटी, रक्षाशक्ति यूनिवर्सिटी, मद्रास यूनिवर्सिटी में भी बढ़ाया है। इसके अलावा वह केंद्र सरकार की कई अहम समितियों में भी शामिल रही हैं। अंतराष्‍ट्रीय विषयों पर बेहतरीन पकड़ रखने वाली प्रफेसर ने कई रिसर्च प्रॉजेक्‍ट्स में महती भूमिका अदा की। दुनिया के कई नामी संस्‍थानों में उनकी फेलोशिप है। राष्‍ट्रीय-अंतरराष्‍ट्रीय स्‍तर पर उन्‍हें कई सम्‍मानों से भी नवाजा जा चुका है।
इसके अलावा प्रोफेसर पंडित ने कई बुकलेट्स तैयार की हैं। कई किताबों में उनके चैप्‍टर्स हैं। प्रफेसर पंडित ने भारत और दुनिया के राजनीतिक परिदृश्‍यों पर कई रिसर्च पेपर प्रकाशित किए हैं जिनका ब्‍योरा पुणे यूनिवर्सिटी की वेबसाइट पर मौजूद उनके सीवी में है।

संगीत को शोर से मुक्त करना ही है लता जी के प्रति वास्तविक श्रद्धा

फरवरी का महीना शुरू हो चुका है। वसन्त पंचमी के साथ ही वसन्त का आगमन हो चुका है मगर इस बार माँ सरस्वती अपने साथ अपनी सुर साम्राज्ञी पुत्री और हमारी भारत रत्न लता मंगेशकर को भी ले गयीं। जब यह पँक्तियाँ लिखी जा रही हैं तो मन में विषाद है, दुःख है और गर्व भी है। हम सौभाग्यशाली हैं हम लता जी के युग में जीये, उनके गीत सुनकर बड़े हुए। रफी, मुकेश और किशोर की जुगलबंदी जितनी खूबसूरती से लता जी की आवाज के साथ होती रही, उसकी कोई तुलना नहीं हो सकती। लता दीदी भारत की आवाज थीं, एक संघर्ष भरा बचपन जीया और जब वह नहीं हैं तो एक ऐसी विरासत छोड़कर गयी हैं जिसे सहेजना औऱ सम्भालना आज के कलाकारों की जिम्मेदारी है मगर इससे भी बड़ी जिम्मेदारी आम जनता की है जो संगीत और शोर के अन्तर को समझे।

एक तरफ लता दीदी की अंतिम यात्रा और दूसरी तरफ अश्लील, फूहड़ और द्विअर्थी गीत की फौज खड़ी है और यही तो माता सरस्वती का अपमान है। तमाम देवियों को पंडाल में रखकर एक से एक भद्दे गीत बजाकर कौन सी पूजा होती है, यह तो समझना किसी के वश की बात नहीं है। सोचने वाली बात है कि जिन गीतों में आप अपनी बहन – बेटियों की कल्पना नहीं कर सकते, वैसे गीत आप किसी और की बेटी के लिए कैसे लिख सकते हैं, गा सकते हैं…आज तो स्थिति यह है कि भोजपुरी छोड़िए…किसी भी भाषा को लें…अश्लीलता का राक्षस हर जगह है,….माता सरस्वती से यही प्रार्थना है कि कि एक बार फिर उतरें और अश्लीलता के महिषासुर का वध करें जिससे सृष्टि की रक्षा हो सके…। लता जी को सबसे बड़ी श्रद्धांजलि यही होगी कि हम संगीत के वास्तविक स्वरूप को समझें, प्रसार करें और संगीत को शोर से मुक्त करें। स्वर कोकिला को नमन।

सरस्वती वंदना

प्रो. प्रेम शर्मा
ज्ञान का दीप जला दो मां
कर्म कुशलता बुद्धि बल दो
स्वर में मेरे मधुर रस भर दो ,
शब्दों में सिंचन शक्ति दो।
नमन करूं हे शारदे मां ,
सद्गुण का विस्तार करो,
शुद्ध आचरण मन पवित्र दो,
शब्दों में स्नेह सुधा भर दो।
वेद पुराण की वाणी समझें
हमको उज्जवल राह दिखा दो,
तम अज्ञान का दूर करो मां,
विद्या ,बुद्धि, ज्ञान का वर दो।
हे हंस वाहिनी ज्ञान दायिनी,
वंदनीय मां तुझे प्रणाम,
शीश झुकाकर नमन करें हम,
हे सरस्वती मां तुझे प्रणाम।