Thursday, April 2, 2026
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राजा नरेंद्र लाल खान महिला कॉलेज (स्वायत्त) में सोलर ट्री स्थापित

मिदनापुर। मिदनापुर के प्रतिष्ठित राजा नरेंद्र लाल खान महिला कॉलेज (स्वायत्त) में एक सोलर ट्री (सौर ऊर्जा के लिए उपकरण) की प्रतिस्थापना की गई। मेदिनीपुर की जिला कलेक्टर डॉ. रश्मि कमल और दुर्गापुर स्थित सी एस आई आर के निदेशक प्रो. हरीश हिरानी ने कॉलेज परिसर में सौर ऊर्जा उपकरण का उद्घाटन किया। इस अवसर पर कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ. जयश्री लाहा ने बताया कि भारत सरकार द्वारा संचालित स्वच्छता अभियान के तहत महाविद्यालय को डिस्ट्रिक्ट चैंपियनशिप का पुरस्कार मिला है, इसलिए अब इस अभियान को और व्यापक बनाने के लिए हम सभी ऊर्जा प्रबंधन की दिशा में 11.55 kwp. की क्षमता वाला यह सोलर ट्री स्थापित कर रहे हैं।
आशा करते हैं कि आने वाले समय में हमारा यह प्रयास स्वच्छ भारत अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। जिला कलेक्टर डॉ रश्मि कमल और दुर्गापुर सी एस आई आर के डायरेक्टर प्रो. हरीश हिरानी ने इसे एक सराहनीय कदम बताते हुए महाविद्यालय की प्रशंसा की ।इस अवसर पर बड़ी संख्या में शिक्षक और विद्यार्थी उपस्थित थे।

 

हेरिटेज लॉ कॉलेज में यूनिफॉर्म सिविल कोड पर वाद – विवाद प्रतियोगिता

कोलकाता । कोविड के बाद पहली बार हेरिटेज लॉ कॉलेज ने एक इंटर कॉलेज वाद – विवाद प्रतियोगिता आयोजित की। प्रतियोगिता का विषय था, “सदन मानता है कि यूनिफ़ॉर्म सिविल कोड भारत में एक दूर का सपना है”। इस प्रतियोगिता में कलकत्ता विश्वविद्यालय के विधि विभाग, जोगेश चंद्र चौधरी लॉ कॉलेज, साउथ कलकत्ता लॉ कॉलेज, सिस्टर निवेदिता यूनिवर्सिटी , यूनिवर्सिटी ऑफ इंजीनियरिंग एंड मैनेजमेंट के साथ-साथ हेरिटेज लॉ कॉलेज के विद्यार्थियों ने भाग लिया था।
कलकत्ता हाईकोर्ट के अधिवक्ता सत्य सुंदर सारंगी ने निर्णायक की भूमिका निभायी। सारंगी कलकत्ता हाईकोर्ट के अतिरिक्त सुप्रीम कोर्ट एसोसिएशन एवं इंडियन काउंसिल ऑफ आर्ब्रिट्रेशन विद लीगल एड सर्विसेज, पश्चिम बंगाल के सदस्य भी हैं।
हेरिटेज लॉ कॉलेज के डीन प्रो. एस.एस. चटर्जी ने विषय पर अपनी बात रखी। जोगेश चंद्र चौधरी लॉ कॉलेज की छात्र टीम विजेता बनी और विजेता टीम से अद्रिता चौधरी सर्वश्रेष्ठ वक्ता बनीं। हेरिटेज लॉ कॉलेज उपविजेता रहा।

बारूद पर बैठी दुनिया को एक शांतिदूत चाहिए

दुनिया इस समय ऐसे मोड़ पर खड़ी हैं जहाँ सब कुछ अनिश्चित लग रहा है। दुनिया बारूद के ढेर पर बैठी है, लोग मर रहे हैं, शिक्षा प्राप्त कर कुछ बनने के इरादे से परदेस जाने वाले युवाओं के सामने जीवन को बचा लेना ही चुनौती बन गया है। रूस और यूक्रेन की जंग का शिकार बन रहे हैं बच्चे, युवा, आम नागरिक। कुछ समय तक यूक्रेन और यूक्रेन की जनता पीड़ित लग रहे थे और वह पीड़ित हैं मगर गौर से देखने पर लग रहा है कि यूक्रेन कुछ और नहीं, अमेरिका के हाथ का खिलौना है, मोहरा है। असल युद्ध तो चिर प्रतिद्वंद्वी रूस और अमेरिका का ही है। यूक्रेन को बचाने की आड़ में पश्चिमी देश एक बार फिर से एक हो रहे हैं और भारत तटस्थता की स्थिति में है। यह वर्चस्व और साम्राज्यवाद के साथ रंगभेद की लड़ाई भी बनती जा रही है। भारतीय विद्यार्थियों को प्रताड़ित करना और यूक्रेन का नर्म लहजे में धमकी देना कि 20 हजार भारतीय छात्र यूक्रेन में हैं…इसका प्रमाण है। भारत की तटस्थता से नाराज यूक्रेन की पुलिस अब भारतीयों को निशाना बना रही है।
ऐसा लग रहा है कि रूस को रोकने और अकेला करने के लिए अब सारे देश एक होने लगे हैं और युद्ध का सीधा लाभ अमेरिका को होगा। रूबल कमजोर हो रहा है, डॉलर मजबूत हो रहा है। अमेरिका प्राकृतिक गैस का निर्यात बढ़ाने की तैयारी में है जबकि रूस का निर्यात घट रहा है। रूस की ताकत कम करने के लिए यह युद्ध अमेरिका की एक चाल भी हो सकता है। अगर उसे वास्तव में शांति की जरूरत थी तो वह तालिबान के हाथों में अफगानिस्तान की जनता को कभी न छोड़ता। एशियाई लोगों के प्रति यूरोप में रंगभेद का भाव अभी तक है मगर इन दो देशों की लड़ाई में पिस रहा है आम नागरिक और भारतीय। यह समय कदम फूँक – फूँक कर रखने का है मगर फिलहाल तो अपने बच्चों को सकुशल घर लाने का है।

महाशिवरात्रि पर विशेष – आदियोगी- प्रथम योगी

योग संस्कृति में, शिव भगवान के रूप में नहीं, बल्कि आदियोगी या प्रथम योगी- योग के जनक के रूप में जाने जाते हैं। सबसे पहले उन्होंने ही मानव मन में इसका बीजारोपण किया था। योग कथाओं के अनुसार, लगभग पंद्रह हज़ार साल से भी पहले, हिमालय पर पूर्ण आत्मज्ञान प्राप्त करके शिव अत्यंत आनंदविभोर हो झूम उठे। उन्होंने हिमालय पर उन्मुक्त होकर परमानंद नृत्य किया। जब वह हद से परे चला गया, तो वे बिलकुल निश्चल हो गए।

लोगों ने देखा कि वो कुछ ऐसा अनुभव कर रहे हैं जिसके बारे में पहले किसी को पता तक नहीं था, वो उसकी कल्पना तक करने में असमर्थ थे। यह जानने की उत्सुकता में, कि यह क्या है – लोग उनके आसपास इकट्ठा होने लगे। वे आए, उन्होंने प्रतीक्षा की और वे चले गए क्योंकि वह व्यक्ति अन्य लोगों की उपस्थिति से बेखबर थे। वो या तो उन्मुक्तता से झूमते थे या पूरी तरह निश्चल हो जाते थे। अपने आसपास होने वाली घटनाओं से पूरी तरह बेपरवाह। जल्द ही, सब चले गए …

इन सात लोगों ने ठान लिया था कि वे वो सब सीखेंगे, जो इस आदमी के भीतर है, लेकिन शिव ने उन पर ध्यान नहीं दिया। उन्होंने उनसे विनती की, याचना की और कहा – “हम जानना चाहते हैं कि आप क्या हैं।” शिव ने उनकी प्रार्थना टालते हुए कहा,” अरे मूर्खों, तुम लोग जिस हाल में हो, दस लाख साल में भी जान नहीं पाओगे। इसके लिए जबरदस्त तैयारी की जरूरत है। यह कोई हँसी-मज़ाक नहीं है।”

तो उन्होंने इसके लिए तैयारी शुरू कर दी। दिन-ब-दिन, सप्ताह-दर-सप्ताह, महीने-दर-महीना, साल-दर-साल वे तैयारी करते रहे। शिव उनकी उपेक्षा करते रहे। चौरासी साल की साधना के बाद एक पूर्णिमा को, जब संक्रांति ग्रीष्म संक्रांति से शीत संक्रांति में प्रवेश करी- जिसे पारंपरिक तौर पर दक्षिणायन कहा जाता है- आदियोगी ने इन सात लोगों पर दृष्टि डाली और देखा कि ज्ञान के दैदीप्यमान पात्र बन गये हैं। वे ग्रहण करने के लिए पूरी तरह से योग्य हो गए थे। अब शिव उनको अनदेखा नहीं कर सकते थे। उन्होंने शिव का ध्यान अपनी ओर कर लिया था।

उन्होंने अगले कुछ दिनों तक उन्हें ध्यान से देखा और जब अगली पूर्णिमा आई, तो उन्होंने गुरु बनने का फैसला किया।आदियोगी ने स्वयं को आदिगुरु में बदल लिया; उस दिन प्रथम गुरु का जन्म हुआ जिसे आज गुरू पूर्णिमा के रूप में जाना जाता है। केदारनाथ से कुछ किलोमीटर ऊपर एक झील – कांति सरोवर – के तट पर, उन्होंने मानव जाति पर अपनी कृपा बरसाने के लिए दक्षिण की ओर रुख किया और इन सात लोगों पर योग विज्ञान की दीक्षा प्रारंभ हुए। योग विज्ञान उन योग कक्षाओं के बारे में नहीं है जिसमें आप सीखते हैं कि शरीर को कैसे मोड़ा जाए- ये तो हर नवजात शिशु को पता है- या अपना साँस कैसे रोका जाए- जो कि हर अजन्में बच्चे को मालूम है। ये संपूर्ण मानव तंत्र की प्रक्रिया को समझने का विज्ञान है।

कई सालों के पश्चात, दीक्षा पूर्ण होने पर, इसने सात पूर्ण आत्मज्ञानी जनों को जन्म दिया- प्रसिद्ध सात योगी जो आज सप्तऋषि के नाम से जाने जाते हैं और भारतीय संस्कृति में पूजित और सम्मानित हैं। शिव ने इनमें से हरेक के अंदर योग का एक अलग आयाम स्थापित किया और ये आयाम योग के सात मूल रूप बन गए। आज भी, योग ने इन सात विशिष्ट रूपों को बनाए रखा है ।

सात ऋषियों को योग विज्ञान की दीक्षा

सप्तर्षियों को इस आयाम के प्रसार के लिए सात अलग-अलग दिशाओं में दुनिया के विभिन्न हिस्सों में भेजा गया, ताकि मनुष्य अपनी मौजूदा सीमाओं के परे विकसित हो सके। इस ज्ञान और तकनीक से सुसज्जित होकर कि इस संसार में मनुष्य कैसे स्वयं ही सृजनकर्ता बन कर रहे- वे शिव के अंग बन गए। समय ने बहुत सी चीजों को उजाड़ दिया है, पर उन स्थानों की संस्कृति को ध्यान से देखने पर पता चलता है कि वहाँ इन लोगों के कामों के कुछ अंश अभी भी जीवित हैं।

आदियोगी इस संभावना को लेकर आए कि मनुष्य को अपनी प्रजाति की निर्धारित सीमाओं में ही संतुष्ट हो जाने की जरूरत नहीं है। भौतिकता में संतुष्ट होते हुए भी उसपर निर्भर नहीं रहने के लिए एक तरीका है। शरीर में रहते हुए भी शरीर न बन जाएँ इसका एक उपाय है। अपने मन को उसके सर्वोच्च संभावित क्षमता तक उपयोग करते हुए भी उसकी पीड़ाओं से अछूते रहने का एक उपाय है। आप अस्तित्व के किसी भी आयाम में हों, आप उससे परे जा सकते हैं- जीने का एक और भी तरीका है। उन्होंने कहा,” अगर आप स्वयं पर जरूरत के अनुसार काम करते हैं तो आप अपने वर्तमान सीमाओं के परे विकसित हो सकते हैं,”। वही आदियोगी की महत्ता है।

(साभार – ईशा सद्गुरू की वेबसाइट)

कर प्रणाली को सरल बनाने के लिए सरकारें आगे आएँ – जस्टिस शुभ्रकमल मुखर्जी

ऑल इंडिया फेडरेशन ऑफ टैक्स प्रैक्टिशनर्स एआईएफटीपी के पूर्वी क्षेत्र ने किया आयोजन

कोलकाता । कर्नाटक हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस शुभ्र कमल मुखर्जी ने कर प्रणाली और प्रक्रिया को सरल बनाने पर जोर दिया है। ऑल इंडिया फेडरेशन ऑफ टैक्स प्रैक्टिशनर्स (एआईएफटीपी) के पूर्वी क्षेत्र द्वारा गत 26 एवं 27 फरवरी को आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए उन्होंने यह बात कही। जस्टिस मुखर्जी ने कहा कि कर आम जनता के लिए होते हैं इसलिए उनको भरा जाना चाहिए मगर कर प्रक्रिया सरल होनी चाहिए जिससे आम जनता को रिटर्न भरने में परेशानी न हो। इसके लिए सभी सरकारों को साथ आना चाहिए। वहीं उद्घाटन सत्र पर में वाणिज्यिक कर निदेशालय, पश्चिम बंगाल के आयुक्त खालिद अजीज अनवर ने कर प्रणाली को लेकर राज्य की चिंता पर बात की और फर्जी पंजीकरण की समस्या भी उठायी। इस सम्मेलन की थीम “न्यू टैक्स लॉ इम्पैक्ट एंड प्रमोशन थी। आयोजन में देश भर के 400 से अधिक प्रख्यात टैक्स प्रैक्टिशनर्स ने भाग लिया।
यह राष्ट्रीय सम्मेलन के जरिए प्रोफेशनल टैक्स प्रैक्टिशनर्स की दक्षताओं को बनाए रखने और उन्हे इस बारे में उनकी जानकारी को और विकसित करने के लिए, जिससे कोर्ट में मुकदमेबाजी और विभिन्न क्षेत्रों में उनके ज्ञान, विशेषज्ञता और कौशल सेट को बढ़ाने के लिए एक प्रयास किया गया है।
इसके साथ इस सम्मेलन में डी.के. गांधी (एआईएफटीपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष), माननीय न्यायमूर्ति मोहम्मद निजामुद्दीन, (न्यायाधीश कलकत्ता उच्च न्यायालय), अचिंत्य भट्टाचार्जी (सम्मेलन अध्यक्ष) उपस्थित थे।
सम्मेलन सचिव और राष्ट्रीय संयुक्त सचिव एआईएफटीपी विवेक अग्रवाल ने कहा, यह  अन्तरराष्ट्रीय सम्मेलन टैक्स प्रैक्टिशनर्स के प्रोफेशन का एक अभिन्न अंग है, जो टैक्स प्रोफेशनल्स को उनके ज्ञान को बढ़ाने में मदद करता है। डॉ. अशोक सराफ और एन.डी. साहा के कुशल मार्गदर्शन में फेडरेशन नई ऊंचाई और उपलब्धि के शिखर पर बढ़ता जा रहा हैं।

वापसी

प्रो. प्रेम शर्मा

आरती को लगभग 14 वर्ष हो गए थे लता के घर काम करते हुए। इतनी जिम्मेदारी और निपुर्णता से वह घर के सारे काम करती कि लता उसके काम में कभी कोई त्रुटि न निकाल पाती। घर की सफाई करना, बर्तन मांजना, बाजार करना-यह सब तो उसके काम थे ही-खाना बनाने की जिम्मेदारी भी उसी की थी। लता नौकरी करती थी। उसकी अनुपस्थिति में उसके दोनों बच्चे जब विद्यालय से घर लौटते तो आरती आकर खाना गर्म करती और उन्हें खिलाती। आरती का घर लता के घर के पीछे वाली गली में ही था, इसलिए उसे बार-बार आने में परेशानी नहीं होती थी।
लता के पति विकास ने एक दिन लता से कहा था-” तुम बहुत आलसी हो गई हो हर काम आरती पर छोड़ देती हो। घर संभालना तुम्हारी जिम्मेदारी है।”
“मुझे आरती पर पूरा विश्वास है।”
संक्षिप्त सा उत्तर दिया था लता ने।
बुधवार का दिन था। लता अपने कमरे में बैठी एक पुस्तक पढ़ रही थी। आरती उसके बेटे मोहित के कमरे में सफाई कर रही थी। अचानक किसी चीज के गिरने की आवाज आई। गर्दन घुमा कर लता ने बेटे के कमरे की तरफ देखा। आरती किसी चीज को साड़ी में लपेटकर कमर में ठूंँस रही थी। वह अवाक उसे देखे जा रही थी पर कुछ कहा नहीं। प्रतिदिन की तरह टाटा— बाय-बाय- करते हुए हंँसते-हंँसते हाथ हिलाते हुए आरती चली गई।
अगले दिन लता तैयार होकर विद्यालय चली गई। रह-रहकर उसकी आंखों के सामने वह दृश्य घूम जाता ।बार बार एक प्रश्न उसके मन में उठता -“आरती क्या ले गई?”
विद्यालय से लौटकर उसने मोहित के कमरे की अनगिनत चीजें हिलाकर –उठाकर –जानने की कोशिश की- आखिर वह क्या ले गई? हर वस्तु कमरे में यथास्थान थी। आरती शाम को काम पर नहीं आई। अगले दिन भी वह अनुपस्थित रही। संदेह विश्वास में बदल गया। लता ने अपने दरबान को उसके घर भेजा । उत्तर मिला -आरती घर पर नहीं है।
लता बेचैन हो उठी। रात्रि के भोजन के पश्चात लता ने बात शुरू करते हुए विकास से कहा-
“आज आरती आई नहीं।”
विकास-” वह भी तो इंसान है, कभी तो छुट्टी लेगी।”
लता-” बात वह नहीं है कुछ गड़बड़ है।”
विकास-क्या हुआ?
लता-“हूं—आरती परसों यानि बुधवार को जब मोहित का कमरा साफ कर रही थी उस समय मैंने उसे कमर में कुछ ठूंँसते हुए देखा था। वह कुछ ले गई है । मैंने सुनील को उसके घर भेजा था वह घर पर नहीं है। वह कल भी नहीं आई थी।
विकास-“और सिर चढ़ाओ। जो काम करना हो ,आरती करे। अब भुगतो!”पहले पता लगाओ क्या गायब है।”
लता-” मैंने अलमारी शेल्फ सब देख लिया है।”
विकास-“उसी समय उसे क्यों नहीं टोका?”
लता-“मैंने सपने में भी कभी नहीं सोचा था कि आरती कोई गलत काम कर सकती है।”
विकास-“खैर भूल जाओ। अब उसकी वापसी तो तुम्हारे घर होगी नहीं। तुम किसी और काम वाली को ढूंढना शुरू करो।”
लता के दिल और दिमाग में एक तूफान मचा हुआ था। एक तो अनुत्तरित प्रश्न था- क्या ले गई? दूसरे गत 14 वर्षों में आरती ने उसे जो आराम दिया वह दूसरा कोई देगा नहीं।
अगले दिन विद्यालय से जब लता घर लौटी तो आरती को दरवाजे के बाहर खड़ा पाया। क्रोध से लता का चेहरा लाल हो गया। विचित्र नजरों से उसने आरती को देखा।अपने बैग से चाबी निकाल दरवाजा खोला और अंदर प्रवेश किया। आरती एक कदम आगे बढ़ी और दहलीज पर आकर खड़ी हो गई।
आरती-“भाभी जी मुझसे एक गलती हो गई।”
लता- बड़ी निर्लज्ज है! गलती करके फिर यहां आकर खड़ी हो गई।
आरती-“भाभी जी मोहित भैया का कमरा जब साफ कर रही थी तो शेल्फ से उनका चश्मा नीचे गिर गया और टूट गया। मैं वह आंँचल में बांधकर दुकान पर ले गई। दुकानदार ने कागज मांगे। मैंने उससे कहा-जैसा दायाँ कांँच है वैसा ही बाँयां भी लगा दो। भाभी जी उसने कल नहीं दिया। मैं डर गई थी इसीलिए कल नहीं आई। सॉरी–भाभी जी”
आरती कहती जा रही थी और लता शर्मिंदगी और पश्चाताप के मिले-जुले भावों में बहती जा रही थी पश्चात्ताप के आंँसुओं की झड़ी नैनों के माध्यम से बह चली। आरती को लता ने गले से लगा लिया और फूट पड़ी। पश्चात्ताप के आंँसुओं के साथ आरती की वापसी के एहसास ने लता को राहत भी पहुंँचाई।

 

बीएचएस में वार्षिक खेलकूद प्रतियोगिता

कोलकाता । बिड़ला हाई स्कूल में हाल ही में वार्षिक खेलकूद प्रतियोगिता आयोजित की गयी। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में जैवलिन थ्रोवर व ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता नीरज चोपड़ा उपस्थित थे। विद्या मंदिर सोसायटी के महासचिव मेजर जनरल वी. एन. चतुर्वेदी (सेवानिवृत्त) ने ध्वजारोहण कर खेलों की शुरुआत की। कार्यक्रम की शुरुआत स्कूल की प्रिंसिपल लवलीन सैगल के स्वागत भाषण से हुई। विद्यार्थी खेल सचिव (स्टूडेंट स्पोर्ट्स सेक्रेट्री) विशाल कृपलानी एवं युक्त खेमका मशाल वाहक बने। शपथ स्टूडेंट प्रेसिडेंट देवांशु चौधरी ने ली। कक्षा 6 से 12 तक के छात्रों के लिए अरबिक ड्रिल, पुश अप, एक पैर से स्कीपिंग समेत कई तरह की खेल प्रतियोगिताएँ हुई जिनमें जगलिंग द बलून इन्डेक्स, हुला हूप जैसी कई प्रतियोगिताएँ शामिल थीं। बिड़ला हाई स्कूल की निदेशक मुक्ता नैन ने विद्यार्थियों को सम्बोधित किया । पुरस्कार वितरण में विजेताओं को सम्मानित किया गया। धन्यवाद ज्ञापन खेल सचिव युक्त खेमका ने दिया।
रिपोर्ट – युक्त खेमका
खेल सचिव, बिड़ला हाई स्कूल

वेस्ट बंगाल कोल्ड स्टोरेज एसोसिएशन की 57वीं वार्षिक बैठक

कोलकाता । वेस्ट बंगाल कोल्ड स्टोरेज एसोसिएशन की 57वीं वार्षिक बैठक हाल ही में हावड़ा में हुई। बैठक का उद्घाटन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कृषि सलाहकार मुख्य अतिथि डॉ. प्रदीप कुमार मजुमदार ने किया। राज्य के एग्रीकल्चरल मार्केटिंग की निदेशक आत्मिका भारती, वेस्ट बंगाल कोल्ड स्टोरेज एसोसिएशन के अध्यक्ष तरुण कांति घोष, उपाध्यक्ष राजेश कुमार बंसल, पूर्व अध्यक्ष पतित पावन दे उपस्थित थे। राज्य के कृषि विपणन मंत्री विप्लव मित्रा आभासी यानी वर्चुअल तरीके से कार्यक्रम से जुड़े। बैठक में संतुलित मात्रा में आलू की खेती करने, पूरे भारत से आँकड़े एकत्र करने, कृषकों को प्रशिक्षित करने समेत कई अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई।

भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज को सर्वश्रेष्ठ कॉलेज मदर टेरेसा इंटरनेशनल अवार्ड 2022

कोलकाता । भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज को शिक्षा के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान के लिए बेस्ट कॉलेज अंतर्राष्ट्रीय मदर टेरेसा अवार्ड 2022 प्रदान किया गया। कोलकाता के आईसीसीआर सभागार में 24 फरवरी को कॉलेज के डीन प्रो दिलीप शाह और विद्यार्थियों ने समवेत रूप से इस कार्यक्रम में हिस्सा लिया। यह अवार्ड मदर टेरेसा की स्मृति में 2001 से शुरू किया गया है। मदर टेरेसा इंटरनेशनल अवार्ड कमेटी के सात सदस्यों द्वारा यह अवार्ड प्रतिष्ठित व्यक्तित्वों को दिया जाता है जो शिक्षा, संस्कृति, संगीत, सामाजिक कार्य, खेल, उद्योग, मीडिया, मेडिसिन, सर्वश्रेष्ठ प्रिंसिपल, सर्वश्रेष्ठ स्कूल और कॉलेज और राजनीतिक क्षेत्रों में गत इक्कीस वर्षों से दिया जा रहा है। दो सौ से अधिक अपने-अपने क्षेत्र में विशिष्ट व्यक्तित्व और संस्थाओं को अवार्ड दिया जा चुका है। भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज को शिक्षा के क्षेत्र में सर्वश्रेष्ठ कॉलेज का मदर टेरेसा इंटरनेशनल अवार्ड देने के लिए चुना गया है। यह अवार्ड राष्ट्रीय अल्पसंख्यक और कमजोर वर्ग आयोग के अंतर्गत पंजीकृत है।
जस्टिस श्यामल सेन(पश्चिम बंगाल के पूर्व राज्यपाल, पूर्व न्यायाधीश कलकत्ता, चीफ़ पेट्रान हाईकोर्ट), एंथोनी अरुण बिश्वास (कमेटी चेयरमैन) द्वारा भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज के डीन प्रो दिलीप शाह को मदर टेरेसा अवार्ड 2022 प्रदान किया गया। इस अवसर पर पर कॉलेज के विद्यार्थियों ने उत्साहित होकर भाग लिया। इस कार्यक्रम की जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।

शानदार हैं उत्तराखंड के खूबसूरत ट्रैक

सर्दियों के मौसम में जाना बेहतर है

 उत्तराखंड के प्रसिद्ध चारधाम बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री व यमुनोत्री विश्व भर में प्रसिद्ध तो हैं ही इसके साथ यहां के विंटर ट्रैक साहसिक खेलों के शौकीनों के लिए पहली पसंद बन रहे हैं। जिस तरह उत्तराखंड की वादियों में सर्दियों में घूमने का अपना अलग ही मजा है, उसी तरह से यहां सर्दियों के मौसम में ट्रैकिंग करने का आनंद आपको किसी और रोमांचक गतिविधियों में नहीं मिल सकता। हिमालय की गोद में बसा हुआ उत्तराखंड सर्दियों में ट्रैकिंग के बहुत सारे विकल्प प्रदान करता है जो सफेद सफेद बर्फीले रास्ते और बर्फ की चादर ओढ़े हुए पहाड़ों के शानदार दृश्य से भरे होते हैं। सर्दी के दौरान ट्रैकिंग करते हुए बीच में कई खूबसूरत वादियां, सौगान के पेड़ और खूबसूरत झरने और छोटे-छोटे गांव देखने को मिलते हैं। ट्रैकिंग के शौकीनों के लिए उत्तराखंड के गढ़वाल और कुमाऊं क्षेत्र में आप प्राकृतिक सुंदरता के साथ ट्रैकिंग का मजा भी ले सकते हैं। राज्य के भीतर साहसिक पर्यटन को बढ़ावा दिए जाने को लेकर पर्यटन विभाग ने एक अलग से साहसिक विंग भी बनाया है। इस लेख के जरिए हम आपको उत्तराखंड के विभिन्न विंटर ट्रैक से रूबरू कराएंगे।

केदारकांठा ट्रैक

 समुद्र तल से लगभग 12500 फिट की ऊंचाई पर स्थित केदारकांठा, गोविन्द पशु विहार नेशनल पार्क के अंतर्गत गढ़वाल हिमालय उत्तरकाशी, उत्तराखंड क्षेत्र में स्थित है। जौनसार -बावर क्षेत्र के सांकरी गांव से केदारकांठा ट्रैक की शुरुआत होती है। केदारकांठा शिखर पर चारों तरफ बर्फ से लदी पहाड़ियों का नजारा और पहाड़ियों तक पहुंचने वाले खूबसूरत रास्ते पर्यटकों को दूर-दूर से केदारकांठा आने के लिए आकर्षित करते हैं। केदारकांठा शिखर से सूरज उदय और सूरज डूबने का नजारा बहुत अद्भुत है जिसे देखने के लिए पर्यटक, सुबह और शाम को यहां पहुंचते हैं।

कैसे पहुंचें-  केदारकांठा की यात्रा उत्तराखंड के सांकरी गांव से शुरू होती है लेकिन आपको यहां पहुंचे के लिए सबसे पहले देहरादून पहुंचना पड़ेगा। देहरादून से सांकरी गांव की दूरी 196 किलोमीटर की है जिसे करने में आपको 10 से 11 घंटे का समय लगेगा। यह यात्रा छह दिन में पूरी होती है।

चंद्रशिला ट्रैक

 चंद्रशिला ट्रैक पंच केदार का तुंगनाथ मंदिर स्थित है। ट्रैक की शुरूआत रुद्रप्रयाग जिले के चोपता से होती है। सर्दियों के मौसम के अलावा ट्रैकिंग के शौकीन किसी भी मौसम में यहां आ सकते हैं। यह ट्रैक पर्यटकों के लिए प साल भर खुला रहता है। इस ट्रैक के जरिए आप दुनिया के सबसे ऊंचे शिव मंदिर तक पहुंच सकते हैं जो तुंगनाथ में 4000 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है।

 कैसे पहुंचें –  चंद्रशिला ट्रैक उत्तराखंड राज्य के रुद्रप्रयाग जिले में चोपता गांव के पास है। चोपता गांव से 3 से 4 किलोमीटर का ट्रैक करके तुंगनाथ मंदिर पहुंचा जाता है जो कि पंच केदार में से एक केदार है। तुंगनाथ मंदिर से ऊपर 1 से 1.5 किलोमीटर का ट्रैक और करके चंद्रशिला शिखर तक पहुंचा जा सकता है।

क्वारी पास ट्रैक

 क्वारी पास ट्रैक की यात्रा जोशीमठ से शुरू होती है जो ट्रेकर्स और तीर्थयात्रियों का मुख्य केंद्र है। यहां कुछ जगहों पर आप दुर्लभ हिमालयी भालू या तेंदुए के पैरों के निशान भी देख सकते हैं। कुआरी दर्रे की सबसे अच्छी बात यह है कि आप हरे भरे घास के मैदानों के बीच डेरा डाल सकते हैं, जिसमें हिमालय के नज़ारों वाले विशाल हरे भरे चरागाह मौजूद हैं।

 ट्रैक कैसे पहुंचे – क्वारी पास ट्रैक की यात्रा तीर्थ नगरी हरिद्वार से जोशीमठ तक शुरू होती है जोशीमठ की दूरी हरिद्वार से लगभग 265 किमी है जिसके बाद जोशीमठ से चित्रकांठा जाया जाता है जिसकी कुल ऊंचाई लगभग 3,310 मीटर अथवा 10,857 फ़ीट है। अगली यात्रा चित्रकांठा से शुरू होती है जो ताली टॉप तक होती है। इस दिन का ट्रैक आपके पूरे ट्रैक में सबसे खूबसूरत होता है। यह ट्रैक कुल 4 किमी का है तथा इस ट्रैक की कुल ऊंचाई 11,070 फ़ीट है। अगली ट्रैक ताली टॉप से शुरू होकर क्वारी पास तक जाता है।

ब्रह्मताल ट्रैक

 ब्रह्मताल माउंट त्रिशूल और नंदा घुंटी, राजसी रूपकुंड ट्रेक के विहंगम दृश्य और राजसी बर्फ से ढकी चोटी को अपने कैमरे से कैद करने के पर्याप्त अवसर प्रदान करता है। ब्रह्मताल ट्रैक में सुंदर घाटियों, शांत बस्तियों, नदियों, और शंकुधारी, और ओक के जंगलों के मनभावन दृश्य देखने को मिलते हैं। सर्दियों के मौसम में यह पूरा क्षेत्र ही बर्फ से ढका हुआ होता है और हिमालय का एक अनोखा दृश्य भी पेश करता है। ट्रेकर से पहुंच कर वहां से 16-17 किलोमीटर की पैदल दूरी तय कर ब्रह्म ताल पहुंच सकते है। ब्रह्म ताल पहुंचने से पूर्व ट्रेक पहले भेंकल ताल पहुंचता है। यह भी ट्रैकिंग के लिए एक उपयुक्त स्थान है।