Monday, April 6, 2026
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“बस मेरा सम्मान करो”

-दीपा ओझा

नहीं मांगती कुछ मैं तुमसे
बस मेरा सम्मान करो
सपना सबके जैसा ही
मेरा भी साकार करो
अपने जैसा समझ मुझे भी
मेरा ना तुम अपमान करो
सुनो समाज हितैषियों
गर कुछ ना कर पाओ तो
बस इतना तुम ध्यान करो
केवल मेरा तुम मान करो
बस मेरा सम्मान करो

विनती नहीं
है मेरी ये घोर गर्जना
इसको ना नज़रअंदाज़ करो
सुनो धर्म पुजारियों
कर अधर्म तुम
अब ना धर्म की बात करो
केवल मेरा तुम मान करो
बस मेरा सम्मान करो

तुम धर्म- धर्म चिल्लाते हो
धर्म का मर्म समझ क्या पाते हो
पूज कर शक्ति स्वरूपा जगदम्बा को
निज मिथ्या शक्ति पर
अति अभिमान जताते हो

अबला कह मुझे
खुद को बलवान बताते हो
रख पर्दे में मुझको तुम
सुरक्षा का एहसान जताते हो
रख घर में महंगी वस्तु सा
सुख- सुविधा का गान सुंनाते हो

तो सुनो अब यह कथन सुनो
जागीर नहीं तुम्हारी सम्पत्ति नहीं मैं
लाज- साज सम्मान हूँ कुल की
मुझको तुम शिरोधार्य करो
केवल मेरा तुम मान करो
बस मेरा सम्मान करो

“नारियां”

  • प्रीति साव

हम है शक्ति,
हम है बुद्धि,
हम ही है
इस सृष्टि के निर्माता,
हम न हो तो
यह धरती कैसी?
नारी से ही यह संसार सारा।
हम ही है फूलों की कोमलता,
हम ही है प्राकृतिक की सुन्दरता,
हम ही प्रकाश प्रेम का
इस प्रेम से ही धरती उजियाली,
वक्त पड़े तो चट्टानों को तोड़,
खोज लेती है
अपनी मंजिल की राह नारी
वर्तमान में,
बोल उठी है,
खिल चुकी है
हर क्षेत्र में
कदम आगे बढ़ा रही है
नारियां।
बाजारीकरण हो,
शैक्षणिक संस्थान हो,
टेक्नोलॉजी हो
या हो फिर सैनिक,
राजनीतिक,सामाजिक
कोई भी क्षेत्र
आज हर राह में,
हर क्षेत्र में,
बढ़ रही है नारियां,
हर क्षेत्र में अपना परचम
लहरा रही है नारियां,
हर बेड़ियों को तोड़,
आगे बढ़,समाज को
एक नई दिशा दे रही है
नारियां,
खुद शिक्षित हो कर
समाज के लिए
प्रेरणादायक बन रही है
नारियां,
अपने विवेक से
हर अन्याय पर न्याय
दिला रही है नारियां,
विश्व में अपनी
अलग पहचान बना रही है
नारियां।

राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर उत्सव आयोजित

कोलकाता ।  भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज के प्लेसमेंट हॉल में राष्ट्रीय विज्ञान दिवस का उत्सव मनाया गया। राष्ट्रीय विज्ञान दिवस सर सी. वी. रमन के नाम पर मनाया जाता है जिन्होंने विज्ञान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण खोज की। कॉलेज के विज्ञान विभाग के सभी विद्यार्थियों और शिक्षक गणों द्वारा भव्य समारोह का आयोजन किया गया । गत 28 फरवरी, 2022 को विज्ञान अनुभाग से जुड़े छात्रों के बीच प्रश्नोत्तरी और पोस्टर प्रस्तुति प्रतियोगिता का आयोजन किया। कार्यक्रम टीआईसी डॉ सुभब्रत गंगोपाध्याय के स्वागत भाषण के साथ शुरू हुआ। .सुभब्रत गांगुली, उप-प्राचार्या डॉ पिंकी साहा सरदार ने राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर शिक्षकों, विद्यार्थियों और मैनेजमेंट के पदाधिकारियों के सहयोग की प्रशंसा की। डॉ. एस. के. दत्ता, विज्ञान के डीन; प्रो. समीर कुमार बंदोपाध्याय, अनुसंधान सलाहकार और प्रो. दिलीप शाह, कॉलेज के छात्र मामलों के डीन गणमान्य व्यक्तियों ने राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के महत्व को समझाया। डॉ. एस. के. दत्ता ने तकनीकी क्षेत्रों में कॅरियर विकल्प के रूप में बुनियादी विज्ञान को चुनने की आवश्यकता पर जोर दिया। इसके बाद अर्थशास्त्र के एक छात्र ने उद्घाटन गीत गाया। उनके प्रदर्शन के बाद, विज्ञान अनुभाग के छात्रों ने पोस्टर प्रस्तुत करना शुरू कर दिया। डॉ. एस. के. दत्ता, प्रो. समीर कुमार बंदोपाध्याय और डॉ. अनूप सिकदर इस सत्र के विशेषज्ञ थे। चौथे और छठें सेमेस्टर  में से प्रत्येक के 6 छात्रों ने कुल मिलाकर 12 छात्रों ने कई विषयों पर पोस्टर प्रस्तुत किए, जिनमें से कुछ निम्नलिखित हैं: भारतीय विज्ञान का अतीत गौरव, भारतीय विज्ञान में महिलाएं, विज्ञान और प्रौद्योगिकी में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की भूमिका, कटिंग विज्ञान के किनारे नवाचार और प्रौद्योगिकी। उत्सव मुखर्जी द्वारा आयोजित प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता की गई जिसमें विज्ञान खंड के 6 विभागों के छात्रों ने भाग लिया। सत्र के तीन दौर के बाद, भौतिकी विभाग ने प्रतियोगिता जीती। भौतिकी विभाग ने पोस्टर प्रेजेंटेशन भी जीतकर चैंपियन की ट्रॉफी अपने नाम की। दिन भर चलने वाले इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों की उपस्थिति रही। कार्यक्रम की जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।

विमेन्स सेल और आईक्यूएसी के सौजन्य से आयोजित हुआ महिला दिवस

कोलकाता ।  भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज के वोमेन सेल और आईक्यूएसी ने मनाया अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस। इस अवसर पर टीआईसी डॉ सुभब्रत गंगोपाध्याय ने प्रमुख अतिथि विद्यासागर विश्वविद्यालय की ऐसोसिएट प्रोफेसर डॉ. भास्वती चटर्जी का स्वागत करते हुए अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर शुभकामनाएं दीं। ‘विमेन एंड सोशयल रिफार्म्स’ पर अपना शोध पेपर पढा़ । 19वीं शताब्दी भारत में स्त्रियों की स्थितियों पर विभिन्न एक्टों का पूर्ण विवेचन किया। विवाह, विधवा विवाह, स्त्री अधिकारों की चर्चा की। विवाह और संपत्ति अधिकार आदि सुधारों पर भी चर्चा की। 20वीं शताब्दी में होने वाले हिंदू और मुस्लिम स्त्रियों के अधिकारों पर भी चर्चा की। विवाह, तलाक बहुपत्नी विवाह की समाप्ति, संपत्ति अधिकार नये रिफार्म्स नियम आए। विवाह पर 28 बिल, तलाक पर 12 बिल, संपत्ति पर 19 बिल आए।स्त्री से संबंधित विवाह के कई बिलों के विषय पर अपना महत्वपूर्ण वक्तव्य दिया। पॉलिटिकल साइंस विभाग के प्रो. करन वोरा ने लिंग पर चर्चा करते हुए कई उदाहरणों से अपनी बात रखी। पुरुषों और स्त्रियों, दोनों लिंग की असमानता जो समाज में परंपरागत रूप से चली आ रही है, उसमें समय, कार्य तथा परिवर्तन की आवश्यकता है। प्रो देवज्यानी गांगुली ने अध्यक्षता करते हुए दोनों अतिथि वक्ताओं को धन्यवाद दिया और कहा कि स्त्री की लड़ाई की कहानी यात्रा लंबी है लेकिन वर्तमान में बहुत हद तक कई क्षेत्रों में बदलाव आया है। पितृसत्तात्मक समाज, विवाह की उम्र, यूनीफॉर्म सिविल कोड, भारत की न्यायिक प्रणाली, एक्ट आदि की अनदेखी आदि कई विषयों पर प्रश्नोत्तर सेशन में शिक्षक और विद्यार्थियों ने प्रश्न किए। अंत में, सांस्कृतिक कार्यक्रम में अंग्रेजी विभाग की प्रोफेसर सौरजा टैगोर ने रवीन्द्र नाथ टैगोर के अनछुए गीतों पर भाव, लय, अभिनय और अभिव्यक्ति से पूर्ण नृत्य प्रस्तुति दी। उनमें महिला दिवस विषय को ध्यान में रखते हुए ‘आमार मोतन के आछे’अर्थात् स्त्री जैसा कौन है, ‘रवीन्द्र नाथ टैगोर के गीतों पर नायिका और सखी की कहानी, भानुसिंह पदावली, चंडालिका से नृत्य प्रस्तुति दी जो बहुत ही सराही गई। शांतिनिकेतन से आई मनीषा मुरली नायर साथ में तबला पर पं बिप्लव मंडल और श्रीमती अरुंधति राय रहे। सांस्कृतिक कार्यक्रम का संयोजन किया प्रो तथागत सेन ने।प्रो देवांजना चक्रवर्ती ने धन्यवाद ज्ञापन किया। इस कार्यक्रम की जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।

‘विविधता में एकता का प्रतीक है मातृभाषा’

कोलकाता ।  भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज के बांग्ला विभाग के विद्यार्थियों और शिक्षकों ने अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस 2022 उत्सव मनाया। अपनी भावनाओं और इच्छाओं को व्यक्त करने में हमारी मातृभाषा संवाद और कौशल की सूचक होती है। मातृभाषा हमारी पहचान है। मातृभाषा में बोलने पर गर्व का अनुभव होता है। इस अवसर पर कॉलेज ने अपने वीर महापुरुषों को नमन करते हुए उन्हें स्मरण किया।’ अंतरजाति मातृभाषा दिबोश’।  दो दिवसीय19-21फरवरी के कार्यक्रम था जिसमें नाटक, बहुभाषी भाषणों का वितरण, एकल और बहुसांस्कृतिक नृत्य प्रदर्शन हुए ।19 फरवरी को, एक सनसनीखेज स्ट्रीट प्ले (नुक्कड़ नाटक) सैकत घोष द्वारा निर्देशित ‘रोक्तोस्नातो भाषा’ का प्रदर्शन रानूछाया के खुले मैदान में छात्रों द्वारा किया गया जिसने भाषा संघर्ष की याद दिलाई। 1952 में भाषा के लिए शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई। कार्यक्रम में प्रख्यात रंगमंच हस्ती मुख्य अतिथि श्री गौतम हलदरी की गरिमामयी उपस्थिति रही ।
कार्यक्रम के प्रतिभागियों में संस्थान के छात्र और प्रोफेसर भी शामिल हुए। इस यादगार दिन में रंगभवन में लगभग 150 लोगों की उपस्थिति रही। 21 फरवरी को कॉलेज के सभागार में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया जिसमें दीप प्रज्ज्वलित कर उद्घाटन करते हुए गीत प्रस्तुति दी गई। इसके बाद महत्वपूर्ण घोषणाएंँ, समृद्ध भाषण, और सांस्कृतिक कार्यक्रम जिसमें सस्वर पाठ, संगीत कार्यक्रम, ऑडियो शामिल थे। नाटक, बहुभाषी भाषण, एकल और बहुसांस्कृतिक नृत्य प्रदर्शनों की प्रस्तुति दी गई।
बांग्ला विभाग की डॉ. मिली समद्दर ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए कहा कि मातृभाषा विविधता में एकता है। कार्यक्रम की जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।

नहीं रहे वरिष्ठ पत्रकार राधा कृष्ण प्रसाद

कोलकाता : कोलकाता में हिन्दी पत्रकारिता के एक स्तम्भ के रूप में गिने जाने वाले वरिष्ठ पत्रकार राधा कृष्ण प्रसाद नहीं रहे। पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे प्रसाद जी ने गत 26 फरवरी की रात कोलकाता के मारवाड़ी रिलीफ़ सोसाइटी में अन्तिम साँस ली। वे 74 वर्ष के थे।

वे ‘सन्मार्ग’ दैनिक में समाचार संपादक समेत विभिन्न पदों पर कई दशकों तक जुड़े रहे। आर.के. प्रसाद ने हिन्दी पत्रकारों की एक पौध खड़ी की। पत्रकारिता की हर विधा पर मजबूत पकड़ रखने वाले प्रसाद जी ने युवा पत्रकारों को तराशने में अहम भूमिका निभायी। वे पश्चिम बंग हिन्दी अकादमी के सदस्य भी थे। प्रसाद जी के परिवार में पत्नी, ३ पुत्र, दो पुत्रियाँ और पुत्रवधू हैं। शुभजिता की ओर से सादर नमन

फिल्म लेखक और समीक्षक जयप्रकाश चौकसे का निधन

इंदौर । फिल्म लेखक और समीक्षक जयप्रकाश चौकसे का इंदौर में दिल का दौरा पड़ने से 82 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। वह फेफड़ों के कैंसर से जूझ रहे थे।
चौकसे पिछले सात साल से फेफड़ों के कैंसर से पीड़ित थे और विगत तीन महीने से उनकी तबीयत ज्यादा खराब चल रही थी।
जयप्रकाश चौकसे ने ‘‘शायद’’ (1979), ‘‘कत्ल’’ (1986) और ‘‘बॉडीगार्ड’’ (2011) सरीखी हिन्दी फिल्मों की पटकथा तथा संवाद लिखे थे। उन्होंने महाभारत पर आधारित एक टीवी धारावाहिक के लेखन विभाग के प्रमुख का जिम्मा भी संभाला था।
चौकसे ने हिन्दी अखबार ‘‘दैनिक भास्कर’’ में लगातार 26 साल ‘‘परदे के पीछे’’ के शीर्षक से रोजाना स्तंभ लिखा जिसमें वह फिल्म संसार के अलग-अलग पहलुओं पर बात करते थे।
खराब सेहत से जूझ रहे फिल्म समीक्षक ने अपनी मृत्यु से पांच दिन पहले ही इस स्तंभ की आखिरी किश्त लिखकर इसे विराम दिया था।
इस बीच, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने चौकसे के देहांत पर शोक जताते हुए ट्वीट किया, ‘‘अद्भुत लेखन प्रतिभा के धनी, हिन्दी फिल्म जगत पर लगभग तीन दशक तक लिखने वाले वरिष्ठ पत्रकार जयप्रकाश चौकसे जी के निधन की खबर दुखद है।’’
मुख्यमंत्री ने ट्विटर पर आगे लिखा, ‘‘ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति हेतु प्रार्थना करते हुए विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। अपनी रचनाओं से आप (चौकसे) सदैव हमारे बीच बने रहेंगे।’’चौकसे, फिल्म वितरकों के संगठन सेंट्रल सर्किट सिने एसोसिएशन के अध्यक्ष भी रहे थे।

फरवरी में जीएसटी संग्रह 18 प्रतिशत बढ़कर 1.33 लाख करोड़ रुपये से अधिक

नयी दिल्ली । वित्त मंत्रालय ने कहा कि फरवरी में जीएसटी संग्रह सालाना आधार पर 18 प्रतिशत बढ़कर 1.33 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा। फरवरी में संग्रह कोविड-19 वायरस की तीसरी लहर से प्रभावित हुआ। गौरतलब है कि जनवरी 2022 में जीएसटी संग्रह 1,40,986 करोड़ रुपये था। इस तरह फरवरी का संग्रह, इससे पिछले महीने के मुकाबले कम रहा।
मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ‘‘फरवरी 2022 में सकल जीएसटी राजस्व 1,33,026 करोड़ रुपये रहा, जिसमें केंद्रीय जीएसटी 24,435 करोड़ रुपये, राज्य जीएसटी 30,779 करोड़ रुपये, एकीकृत जीएसटी 67,471 करोड़ रुपये (माल के आयात पर एकत्र 33,837 करोड़ रुपये सहित) और उपकर 10,340 करोड़ रुपये (माल के आयात पर एकत्र किए गए 638 करोड़ रुपये सहित) है।’’
फरवरी 2022 का जीएसटी संग्रह इससे पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 18 प्रतिशत अधिक है और फरवरी 2020 के मुकाबले जीएसटी संग्रह 26 प्रतिशत अधिक है।
मंत्रालय ने कहा कि 28 दिन का महीना होने के कारण आम तौर पर फरवरी में जनवरी की तुलना में कम राजस्व मिलता है।

क्षेत्रीय एयरलाइनों, हेलीकॉप्टर परिचालकों के लिए बनेगी सरकारी नीति

नयी दिल्ली । नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि सरकार क्षेत्रीय एयरलाइनों और हेलीकॉप्टर परिचालकों के लिए एक नीति तैयार कर रही है, जिसका मकसद अंतिम छोर तक संपर्क को बढ़ावा देना है।
सिंधिया ने कहा कि भारत में छोटे शहरों के हवाई अड्डों के साथ ही क्षेत्रीय संपर्क पर जोर दिया जाना चाहिए। उन्होंने उद्योग निकाय एसोचैम द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में कहा, ‘‘इसमें कुछ मुद्दे हैं – मांग का स्तर, पट्टे की लागत और मूल्य निर्धारण – इन बातों पर हम विचार कर रहे हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘हम क्षेत्रीय एयरलाइनों और हेलीकॉप्टरों के लिए उन्हें और अधिक किफायती बनाने, अधिक व्यापक बनाने और अंतिम छोर तक संपर्क मुहैया कराने के लिए एक नीति लाने जा रहे हैं, क्योंकि वृद्धि भी इसी क्षेत्र से आने वाली है।’’
मंत्री ने कहा कि वृद्धि के अवसर ओडिशा के झारसुगुडा और असम के रूपसी जैसे छोटे शहरों से आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि अंतिम छोर तक संपर्क मुहैया कराना होगा।
सिंधिया ने आगे कहा कि भारत में आज हेलीकॉप्टरों की उपलब्धता नहीं के बराबर है। भारत के पास 130-140 सिविल हेलीकॉप्टर हैं और अगर आप एक विकसित देश को देखें, तो उसके पास हजारों की संख्या में हेलीकॉप्टर हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए हमें एक ऐसी नीति लानी होगी, जो हेलीकॉप्टरों के लिए वृद्धि को गति दे, खासतौर से पूर्वोत्तर और द्वीपीय राज्यों में… मैं इस पर काम कर रहा हूँ।’’ उन्होंने कहा कि भारत में विमानन क्षेत्र वृद्धि के शुरुआती चरण में है और यह क्षेत्र हमारे देश के परिवहन की रीढ़ बनने जा रहा है।

अब रेलवे स्टेशनों पर पेटीएम से कटेंगे जनरल टिकट

नयी दिल्ली । रेल यात्रा करने के लिए टिकट कटाना जरूरी होता है। टिकट कटाने के लिए अब जेब में कैश ले कर चलने की आवश्यकता नहीं रहेगी। क्योंकि अब पेटीएम के जरिए भी चालू टिकट या प्लेटफार्म टिकट कटाया जा सकेगा। इसके लिए पेटीएम ने आइआरसीटीसी के साथ एक समझौता किया है।
पेटीएम ब्रांड चलाने वाली कंपनी वन97 कम्‍युनिकेशंस लिमिटेड (ओसीएल) ने इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्‍म कॉर्पोरेशन (आईआरसीटीसी) से एक समझौता किया है।
यूं तो रेलवे के रिजर्व टिकट की खरीदारी के लिए क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड और डिजिटल भुगतान के कुछ अन्य साधनों से हो सकती है। लेकिन जनरल या चालू टिकट खरीदने के लिए लोगों को कैश ही देना पड़ता है। कुछ स्टेशनों पर ऑटोमैटिक टिकट वेंडिंग मशीनों (एटीवीएम) के जरिए डिजिटल टिकटिंग की सेवाएं मुहैया कराई जाती है। लेकिन इसके लिए भुगतान के साधन सीमित थे। अब इस मशीन पर पेटीएम से भी भुगतान हो सकता है। मतलब कि जेब में कैश रखने की कोई आवश्यकता नहीं है।

क्यूआर कोड से होगा भुगतान
जब पैसेंजर एटीवीएम से जनरल टिकट खरीदेंगे तो उन्हें भुगतान के लिए विकल्प आएगा। उस समय स्क्रीन पर आए क्यूआर कोड को स्कैन कर पेटीएम से भुगतान किया जा सकेगा। इससे यात्री ट्रेन से यात्रा करने के लिए बिना रिजर्वेशन वाले टिकट और प्‍लेटफॉर्म टिकट तो खरीद की सकेंगे, वे चाहें तो अपने एमएसटी को भी रिन्यू करा सकेंगे। पेटीएम यात्रियों को भुगतान के विभिन्‍न विकल्‍प जैसेकि पेटीएम यूपीआइ, पेटीएम वॉलेट, पेटीएम पोस्‍टपेड (बाय नाउ, पे लेटर), नेट बैंकिंग, क्रेडिट कार्ड और डेबिट कार्ड के जरिये भुगतान करने विकल्प प्रदान करेगा।

लाइव हो गया है सिस्टम
पेटीएम की तरफ से मिली जानकारी के अनुसर नया क्विक रिस्‍पॉन्‍स (क्यू आर) कोड-आधारित डिजिटल भुगतान समाधान देश भर के रेलवे स्‍टेशनों पर लगी सभी एटीवीएम मशीनों पर लाइव हो गया है। मतलब कि अब कोई भी यात्री रेलगाड़ियों के टिकट कटाने के लिए पेटीएम का उपयोग कर सकता है। सबसे पहले अपने नजदीकी रेलवे स्‍टेशन पर स्थित एटीवीएम पर टिकट बुक कराने के लिए रूट चुनें या रिचार्ज के लिए स्‍मार्ट कार्ड का नंबर दर्ज करें।
इसके बाद पेटीएम को भुगतान विकल्‍प के तौर पर चुनें। फिर लेनदेन को आसानी से पूरा करने के लिए एटीवीएम पर प्रदर्शित क्‍यूआर कोड स्‍कैन करें। स्कैन के बाद पेमेंट होते ही चुनाव के आधार पर, फिजिकल टिकट जनरेट हो जाएगा या फिर स्‍मार्ट कार्ड रिचार्ज हो जाएगा।