हिंदुस्तान यूनिलीवर में कर चुकी हैं शानदार काम
नई दिल्ली । कोलगेट पामोलिव इंडिया ने हाल ही में प्रभा नरसिम्हन को कंपनी की नई सीईओ और एमडी के तौर पर चुना है। पर्सनल प्रोडक्ट बनाने वाली इस कंपनी की मार्केट वैल्यू अभी 40,723 करोड़ रुपये है। उनकी नियुक्ति इस साल 1 सितंबर से प्रभावी होगी।
इससे पहले प्रभा नरसिम्हन हिंदुस्तान यूनिलीवर यानी एचयूएल की एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर के तौर पर काम कर रही थीं। इस नियुक्ति को देखते हुए एचयूएल ने प्रभा नरसिम्हन को उनके पद से मुक्त कर दिया है। अब वे एचयूएल की एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर होम केयार और वाइस प्रेसिडेंट होम केयर यूनिलीवर साउथ एशिया के पद से मुक्त हो जाएंगी।
एचयूएल प्रोडक्ट्स गांवों तक पहुंचाए, हुआ जबरदस्त मुनाफा
प्रभा नरसिम्हन की लीडरशिप में 2016 से 2019 के बीच एचयूएल के स्किन केयर बिजनेस में शानदार प्रदर्शन हुआ। इसके बाद एचयूएल को दिसंबर 2021 तिमाही में 2,243 करोड़ रुपये का स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट हुआ है। पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि के मुकाबले एचयूएल का नेट प्रॉफिट 17 फीसदी बढ़ा है। दिसंबर 2020 तिमाही में हिंदुस्तान यूनिलीवर को 1,921 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ था। शहरी और ग्रामीण दोनों ही क्षेत्रों में हिंदुस्तान यूनिलीवर की बाजार हिस्सेदारी बढ़ी है।
कॅरिअर की ऐसे की शुरुआत
47 साल की प्रभा नरसिम्हन इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (आईआईएम), बैंगलोर से पास आउट हैं। शुरुआत में प्रभा ने मदुरा गारमेंट्स जैसी कंपनियों में अपने काम का लौह मनवाया। साल 2006 से पहले उन्होंने इसमें मैनेजर स्ट्रैटजी के तौर पर काम किया था। इसके बाद साल 2006 में हिंदुस्तान यूनिलीवर में रीजनल मार्केटिंग मैनेजर के तौर पर काम करना शुरू किया। यहां वह अलग-अलग पदों पर 15 साल तक कार्य कर चुकी हैं।
मार्केटिंग की दुनिया में 23 साल का अनुभव
प्रभा नरसिम्हन के एक्सपीरियंस की अगर बात की जाए तो प्रभा को मार्केटिंग की दुनिया में 23 साल का अनुभव है। प्रभा कंज्यूमर मार्केटिंग, कस्टमर डेवलपमेंट और इससे जुड़े कई सेगमेंट में मार्केटिंग का अनुभव रखती हैं। प्रभा को दुनिया के अलग-अलग देशों जैसे-भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका और नेपाल में मार्केटिंग का बेहतरीन अनुभव है। प्रभा नरसिम्हन की लीडरशिप में 2016 से 2019 के बीच एचयूएल के स्किन केयर बिजनेस में शानदार प्रदर्शन हुआ।
दक्षिण एशिया में बिजनेस और मार्केटिंग का लिया जिम्मा
प्रभा नरसिम्हन के नेतृत्व में हचयूएल का होम केयर बिजनेस पूरे दक्षिण एशिया में तेजी से फैला। प्रभा ने इस क्षेत्र में कंज्यूमर मार्केटिंग और कस्टमर डेवलपमेंट एवं मार्केटिंग में अहम भूमिका निभाई। अलग-अलग श्रेणी और भौगोलिक क्षेत्रों के बावजूद प्रभा ने अपनी काबिलियत को साबित करके दिखाया है।
चुनौतियां कम नहीं
प्रभा नरसिम्हन ने अपने दो दशक से ज्यादा के अनुभव में मार्केटिंग में कई उतार-चढ़ाव देखे हैं पर, जहां तक अब नई जिम्मेदारी की बात है तो कोलगेट पामोलिव को सबसे ज्यादा चुनौती पतंजलि, डाबर जैसे नेचुरल प्रोडक्ट से मिल रही है। ऐसे में प्रभा की लीडरशिप में कंपनी कितना बेहतर करने वाली है यह आने वाला समय बताएगा।
प्रभा नरसिम्हन होंगी कोलगेट इंडिया की नयी सीईओ
बागी औरतें, जिनकी जिद ने औरतों के लिए खोला आसमान
नयी दिल्ली । एक वक्त था जब दुनिया को अहसास ही नहीं था कि कोई गैर-बराबरी का मसला है। तब से लेकर आज तक कई चीजें बदलीं और आगे भी इनके बेहतर होने की गुंजाइश है। सैकड़ों साल के संघर्ष में ऐसी कई महिलाएं आईं जो अपने वक्त से बहुत दूर तक देख सकती थीं।
इन महिलाओं ने ही दिखाया कि कहां-कहां पर उनके लिए कम जगह छोड़ी गई है। अपने वक्त से आगे चलने वाली इन महिलाओं को बेवकूफ, सनकी, पागल, गद्दार और अपराधी तक करार दिया गया, लेकिन इनकी नीयत और समझ दोनों साफ थी। इसलिए वक्त ने उन्हें सही साबित किया। जानते हैं ऐसी ही महिलाओं को –
जब महिलाओं ने एक दिन की हड़ताल से ठप कर दिया पूरा देश
एक टापू जैसे छोटे से देश आइसलैंड में 1975 में महिलाओं के एक दिन के फैसले ने दुनिया को हिला दिया। घर और दफ्तर में होने वाले भेदभाव के खिलाफ इन महिलाओं ने एक दिन अपने काम से छुट्टी ले ली। न दफ्तर गईं, न चूल्हा-चौका किया और न ही बच्चे संभाले। उस दिन इस देश की 90 फीसदी महिलाएं सड़कों पर उतरीं और जमकर नारेबाजी की। मौका था यूनाइटेड नेशंस का इस साल को महिला वर्ष घोषित करना।
इस हड़ताल को ‘आइसलैंडिक वुमंस स्ट्राइक’ के नाम से जाना जाता है और इस दिन को ‘लॉन्ग फ्राइडे’ भी कहा जाता है। यानी इतना लंबा दिन कि पूरे देश के पुरुषों के लिए इसे काटना भारी पड़ गया। पुरुषों को बच्चों को ऑफिस लेकर जाना पड़ा और सारे दफ्तर रोते-भागते बच्चों से भर गए। महिलाओं ने खाना नहीं बनाया तो सुपर मार्केट में सारे फूड पैकेट खत्म हो गए। बच्चों को मनाने के लिए पुरुषों ने सारी गिफ्ट्स शॉप खाली कर दीं। अगले साल ही सरकार को एक जैसे काम की एवज में बराबर वेतन का कानून बनाना पड़ा।
सूज़न बी एंथनी: ऐसी महिला जो वोट डालने के लिए अदालत से भिड़ गयीं
महिलाओं की वोटिंग राइट्स को लेकर सूज़न बी एंथनी ने अदालत से सीधी लड़ाई लड़ी। 1872 में अमेरिकी राष्ट्रपति के लिए वोटिंग हो रही थी। सूज़न अपनी 14 सहेलियों के साथ गईं और वोटिंग की। तब महिलाओं के पास वोटिंग राइट्स नहीं थे। सूज़न को तीन दिन बाद गिरफ्तार कर लिया गया। सूज़न की निडरता को देखने के लिए उस दिन अदालत में देश भर का मीडिया मौजूद था। कोर्ट में सूज़न ने बेबाकी से कहा कि ये कानून पुरुषों के बनाए हैं। जज उसे शांत रहने को कहते रहे, लेकिन सूज़न चुप नहीं रही। जज ने उसे गलती मानने को कहा, उसने इनकार कर दिया।
उन पर 100 डॉलर का फाइन लगाया गया तो उन्होंने भरने से इनकार कर दिया। जब रिकवरी करने को उनके घर मार्शल भेजा गया तो वहां से एक भी ऐसी चीज नहीं मिल सकी, जिसे नीलाम करके 100 डॉलर वसूले जा सकें। सूज़न के मरने के 58 साल बाद महिलाओं को कानूनी तौर पर वोट डालने का हक मिला।
बॉबी गिब और कैथरीन: जिन्होंने महिलाओं को दौड़ने का हक दिलाया
न्यूरोसाइंटिस्ट बॉबी गिब को सिर्फ दौड़ना पसंद था। एक दिन वो अपने पिता के साथ बोस्टन गईं और वहां हर साल आयोजित होने वाली मैराथन देखा। इतने सारे पुरुषों को एक साथ दौड़ता देखना उनके सपनों को पंख दे गया।
अगले दिन से ही वह मैराथन की प्रैक्टिस करने लगीं और दो साल की तैयारी के बाद बोस्टन मैराथन के लिए अप्लाई कर दिया, लेकिन, लड़की होने की वजह से उन्हें ठुकरा दिया गया। 1966 की मैराथन में वह भाई के कपड़े पहनकर भाग लेने पहुंचीं, लेकिन उन्हें पहचान लिया गया। पहचान उजागर होने के साथ ही वो इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गईं।
बॉबी की जैसी ही एक लड़की और थी कैथरीन स्वाइटज़र। लिटरेचर और जर्नलिज्म की छात्रा कैथरीन ने 1967 के मैराथन में भाग लिया। रेस के मैनेजर को जब पता चला कि मैदान पर एक लड़की भी दौड़ रही है तो वह रेस में कूदा और उसे खींचकर बाहर करने आ गया, लेकिन, कैथरीन नहीं रुकीं। उन्होंने रेस खत्म की। इन दोनों लड़कियों के इस कारनामे के बाद 1972 में महिलाओं को आधिकारिक मैराथन में शामिल किया गया।
दुनिया को आलू और वोदका का स्वाद चखाने वाली महिला वैज्ञानिक
स्वीडन में एक महिला कृषि वैज्ञानिक हुईं। ईवा एकेब्लाड ने इंसानों को आलू का स्वाद चखाया। न केवल आलू, बल्कि इससे वोदका निकालकर दिखाई जो पहले रूस और फिर दुनिया भर में पसंदीदा शराब बनी। ईवा की इस खोज से पहले आलू मुर्गियों और भालुओं को खिलाया जाता था। ईवा ने पाया कि आलू में भरपूर मात्रा में स्टार्च होता है, जो एनर्जी का अच्छा स्रोत है।
1746 में ईवा ने अपने खेतों और रसोई में खाने को लेकर प्रयोग शुरू किए। ईवा ने आलू के फूलों का भी बखूबी इस्तेमाल किया और उससे ब्यूटी प्रोडक्ट्स बनाए। ईवा सिर्फ लैब तक नहीं सिमटी रहीं। वह यूरोप में महिलाओं को डायन बताकर जलाने के खिलाफ खड़ी होने वाली सबसे पहली महिलाओं में से एक थीं।
इकबाल बानो: जिसकी साड़ी और दमदार आवाज से हिल गया था तानाशाह
इकबाल बानो ने जिया उल हक के तानाशाही के दौर में अपनी एक नज्म से इंकलाब की मुहिम छेड़ दी थी। तब महिलाओं के साड़ी पहनने या इंकलाबी गीतों को गाने पर रोक थी। लाहौर के अलहमरा आर्ट्स काउंसिल के ऑडिटोरियम में 1986 की 13 फरवरी की रात इतनी भीड़ उमड़ी कि पैर रखने की जगह नहीं थी। बानो ने काली साड़ी पहनी थी और बैन शायर फैज अहमद फैज की नज़्म “हम देखेंगे” गाई थी। वह प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो को फांसी दिए जाने के विरोध में थीं।
पुलिस ने इस प्रोगाम की सारी रिकॉर्डिंग जब्त कर ली थी, लेकिन एक कॉपी चोरी-छिपे स्मगल हो गई। इसके बाद इकबाल बानो की शोहरत दिन दूनी और रात चौगुनी हो गयी।
ओरियाना फल्लाची: जिसके नाम से ललचाते और कांपते थे तानाशाह
इटली की ओरियाना फल्लाची ऐसी पत्रकार थीं, जिससे दुनिया भर के तानाशाह खौफ खाते थे और अपना इंटरव्यू करवाना भी चाहते थे। ओरियाना का मशहूर कथन था कि अगर उसे कभी भगवान मिलता तो वह उससे सवाल पूछती कि अगर उसने जीवन का आविष्कार किया तो मृत्यु क्यों दी? उन्होंने आयतुल्ला खुमैनी, गद्दाफी, जुल्फिकार अली भुट्टो, यासिर अराफात और चीनी तानाशाह डेंग जियाओ पिंग का इंटरव्यू लिया।
खुमैनी के सामने इंटरव्यू में हिजाब पर बात इतनी गहमागहमी तक पहुंची कि ओरियाना ने इसे उतारकर फेंक दिया। ओरियाना की इंदिरा गांधी से अच्छी दोस्ती थी और इंदिरा ने उससे कहा था कि मेरे चारों ओर इतने बेवकूफ लोग हैं, मैं कैसे काम करूं, समझ नहीं आता।
इंटरव्यू के दौरान चीनी तानाशाह डेंग एक बार ओरियाना पर चिल्लाने लगा लेकिन ओरियाना उसकी सादगी, विनम्रता और होशियारी से बहुत प्रभावित हुईं। डेंग ने 3 घंटे का इंटरव्यू खत्म होने के बाद खुद पूछा था कि क्या वह उसका एक इंटरव्यू और करना चाहेंगी और ओरियाना ने उसे चूम लिया था। ओरियाना ने पूर्व अमेरिकी विदेश मंत्री हेनरी किसिंजर से कुबूल करवा लिया था कि वियतनाम युद्ध व्यर्थ था।
(साभार – दैनिक भास्कर)
प्रदान किये गये 2020 -21 के नारी शक्ति पुरस्कार
नयी दिल्ली । राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर गत 8 मार्च को महिलाओं के सशक्तिकरण में उत्कृष्ट योगदान देने वाली 29 महिलाओं को 2020-21 के लिए नारी शक्ति पुरस्कार प्रदान किया। इनमें 2020 के लिए 14 और 2021 के लिए 14 पुरस्कार शामिल हैं। यह पुरस्कार महिला और बाल विकास मंत्रालय की तरफ से महिलाओं के विकास की दिशा में उल्लेखनीय काम करने वालों को दिया जाता है।
कई क्षेत्र की महिलाओं को मिला पुरस्कार
वर्ष 2020 के लिए नारी शक्ति पुरस्कार विजेताओं में विभिन्न क्षेत्रों की महिलाएं शामिल हैं। मसलन उद्यमशीलता, कृषि, नवोन्मेष, सामाजिक कार्य, कला, दस्तकारी, एसटीईएमएम और वन्यजीव संरक्षण। वर्ष 2021 के लिए नारी शक्ति पुरस्कार विजेताओं में भाषा-विज्ञान, उद्यमशीलता, कृषि, सामाजिक कार्य, कला, दस्तकारी, मर्चेंट नेवी, एसटीईएमएम, शिक्षा, साहित्य, दिव्यांगजन अधिकार आदि क्षेत्र की महिलाएं शामिल हैं।
14 राज्यों की ये महिलाएं सम्मानित
पुरस्कार प्राप्त करने वालों में मर्चेंट नेवी की कप्तान राधिका मेनन, सामाजिक उद्यमी अनीता गुप्ता, आर्गेनिक खेती करने वाली आदिवासी कार्यकर्ता ऊषाबेन दिनेशभाई वसावा, नवाचार के लिए विख्यात नासिरा अख्तर, इंटेल इंडिया की प्रमुख निवृति राय, डाउन सिंड्रोम से पीड़ित कथक नृत्यांगना सायली नन्दकिशोर अगवाने, सांपों को बचाने वाली पहली महिला वनिता जगदेव बोराडे और गणितज्ञ नीना गुप्ता शामिल हैं।
12 से 14 वर्ष के बच्चों का कोविड रोधी टीकाकरण 16 मार्च से
नयी दिल्ली । केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने कहा कि देश में 12 से 14 वर्ष के आयुवर्ग के बच्चों का कोविड-19 रोधी टीकाकरण 16 मार्च से शुरू होगा। उन्होंने कहा कि देश में अब 60 से अधिक आयु के सभी लोगों को कोविड-19 रोधी टीकों की एहतियाती खुराक दी जाएगी। पहले इस आयु वर्ग के गंभीर बीमारी से पीड़ित लोगों को ही यह खुराक दी जा रही थी। बारह से 14 वर्ष के आयु वर्ग के बच्चों को हैदराबाद स्थित ‘बायोलॉजिकल इवांस’ द्वारा निर्मित कोविड-19 रोधी ‘कोर्बेवैक्स’ टीके की खुराक दी जाएगी।
मांडविया ने ट्वीट किया, ‘‘ बच्चे सुरक्षित तो देश सुरक्षित। मुझे बताते हुए खुशी है की 16 मार्च से 12 से 13 तथा 13 से 14 वर्ष के आयु वर्ग के बच्चों का कोविड-19 रोधी टीकाकरण शुरू हो रहा है। साथ ही 60 से अधिक आयु के सभी लोग अब एहतियाती खुराक ले पाएंगे। मेरा बच्चों के परिजन तथा 60 से अधिक आयु के लोगों से आग्रह है वे टीका जरूर लगवाएं।’’
स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि केन्द्र सरकार ने वैज्ञानिक निकायों के साथ विचार-विमर्श के बाद 12-13 वर्ष और 13-14 वर्ष आयुवर्ग के (2008 से 2010 में जन्मे) बच्चों के लिए कोविड-19 रोधी टीकाकरण शुरू करने का निर्णय किया है।
टाटासंस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन के हाथों में एयर इंडिया की कमान
नयी दिल्ली। टाटासंस ने एयरइंडिया के नए निदेशक की नियुक्ति की घोषणा कर दी है। टाटा समूह ने एन चंद्रशेखरन के हाथों में ही एयर इंडिया की कमान भी सौंप दी है। टाटा समूह की ओर से सोमवार को इसे लेकर बड़ा ऐलान किया गया है।काफी इंतजार के बाद अब एयरइंडिया को अपना चैयरमैन मिल गया हैं, हालांकि अभी भी सीईओ का इंतजार बाकी है। सोमवार को हुई बोर्ड बैठक में चंद्रशेखरन को एयरइंडिया के चैयरमैन पद सौंपने के फैसले पर मुहर लगा दी गई।
वहीं जनरल इंश्योरेंस कॉरपोरेशन के पूर्व सीएमडी जीवर्गीज वैद्यन और हिन्दुस्तान यूनिलीवर के चैयरमैन संजीव मेहता को बोर्ड में स्वतंत्र निदेशक के तौर पर नियुक्त किया गया है। आपको बता दें कि टाटा संस ने हाल ही में एन चंद्रशेखरन के कार्यकाल को अगले पांच सालों के लिए बढ़ा दिया था। उन्होंने 2016 में टाटासंस के चैयरमैन पद की जिम्मेदारी ली थी, जिसके बाद से लोग कंपनी को नई ऊंचाईयों पर ले जाने में सफल रहे हैं। उनके काम को देखते हुए उनके कार्यकाल को बढ़ाने का फैसला किया गया और अब उन्हें एयरइंडिया की भी कमान सौंप दी गई है। एयरइंडिया को अपना नया चैयरमैन तो मिल गया है, अभी भी सीईओ की तलाश जारी है। इसके लिए टर्किस एयरलाइंस के चेयरमैन इल्कर आयसी को प्रस्ताव भेजा गया था , लेकिन उन्होंने इंकार कर दिया।
ईपीएफओ ने 2021-22 के लिए भविष्य निधि जमा पर ब्याज दर घटाकर 8.1 फीसदी की
नयी दिल्ली । कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ने वित्त वर्ष 2021-22 के लिए भविष्य निधि (ईपीएफ) जमा पर ब्याज दर घटाकर 8.1 फीसदी करने का फैसला किया। यह बीते चार दशक से भी अधिक समय में सबसे कम ब्याज दर है, 2020-21 में यह दर 8.5 फीसदी दी। इससे पहले ईपीएफ पर ब्याज दर सबसे कम 8 फीसदी 1977-78 में थी।
ईपीएफओ के देश में करीब पांच करोड़ सदस्य हैं। एक सूत्र ने बताया, ‘‘ईपीएफओ की निर्णय लेने वाली शीर्ष संस्था सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज की शनिवार को बैठक हुई जिसमें 2021-22 के लिए ईपीएफ पर ब्याज दर 8.1 फीसदी रखने का फैसला लिया गया।’’
सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज (सीबीटी) ने 2020-21 के लिए ईपीएफ जमा पर ब्याज दर 8.5 रखने का निर्णय मार्च 2021 में लिया था। इसे अक्टूबर 2021 में वित्त मंत्रालय ने मंजूरी दी थी।
अब सीबीटी के हालिया फैसले के बाद 2021-22 के लिए ईपीएफ जमा पर ब्याज दर की सूचना वित्त मंत्रालय को अनुमोदन के लिए भेजी जाएगी।
मार्च 2020 में ईपीएफओ ने 2019-20 के लिए भविष्य निधि जमा पर ब्याज दर सात साल में सबसे कम 8.5 फीसदी करने का फैसला किया था, जो 2018-19 में 8.65 फीसदी थी।
टाइटन की अनुषंगी अमेरिकी फर्म में लेगी 17.5 फीसदी हिस्सेदारी
नयी दिल्ली । टाटा समूह की फर्म टाइटन कंपनी ने कहा कि उसकी अनुषंगी टीसीएल नॉर्थ अमेरिका इंक (टीसीएलएनए) ने अमेरिकी कंपनी ग्रेट हाइट्स इंक में 17.5 फीसदी अधिग्रहण के लिए दो करोड़ डॉलर (करीब 152 करोड़ रुपये) में करार किया है।
टाइटन ने शेयर बाजारों को सूचित किया है कि टीसीएलएनए ने ग्रेट हाइट्स इंक के साथ शेयर खरीद समझौता किया है। इस करार के तहत टीसीएलएनए को ग्रेट हाइट्स के पूंजीगत शेयर में 17.5 फीसदी मतदान हिस्सेदारी मिलेगी।
ग्रेट हाइट्स ‘‘क्लिन ओरिजिन’’ ब्रांड के तहत एलजीडी (प्रयोगशाला में विकसित हीरे) से बने गहनों की बिक्री करती है। वर्ष 2021 में इसका सकल राजस्व 2.5 करोड़ डॉलर रहा था।
आरा में ‘आईआईटीएन चायवाला’ बेचता है 10 तरह की चाय
आरा । बिहार का एक छोटा सा लेकिन ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण शहर है आरा। यह पटना से बहुत अधिक दूर नहीं है। आरा फिलहाल भोजपुर और पुराने शाहाबाद जिले का मुख्यालय है। रमना मैदान इस शहर का हृदय स्थल कहा जा सकता है, ठीक वैसे ही जैसे पटना में गांधी मैदान का इलाका है। रमना मैदान से सटी कई चाय की दुकानें हैं, लेकिन इन्हीं के बीच आईआईटियन चाय वाला नाम से चल रहा टी-स्टॉल राहगीरों को लुभा रहा है। केवल नाम से ही नहीं, स्वाद से भी यहां की चाय ने अलग पहचान बनाई है। जब चूल्हे से निकले गर्म लाल कुल्हड़ में सुगंधित चाय उड़ेली जाती है, तो उससे निकला स्वाद मन में ताजगी भर देता है। नाम के अनुरूप यह टी स्टॉल आईआईटी और विभिन्न संस्थानों में पढ़ाई कर रहे टेक्नोलॉजी के छात्रों का आइडिया है।
आईआईटी डेटा साइंस का स्टार्टअप है आइआइटियन चायवाला
अब आप सोच रहे होंगे कि टेक्नोलॉजी के छात्रों का चाय की दुकान से क्या वास्ता? मद्रास आईआईटी में डेटा साइंस में बीएससी प्रथम वर्ष के छात्र और टी-स्टॉल खोलने वाले रणधीर कुमार बताते हैं- ‘यह उनका स्टार्टअप है। उनके साथ देश के अलग-अलग संस्थानों में पढ़ रहे चार दोस्तों ने रोजगार सृजन के लिए यह स्टार्टअप शुरू किया। इसमें खड़गपुर आईआईटी में प्रथम वर्ष के छात्र जगदीशपुर के अंकित कुमार, बीएचयू में पढ़ रहे इमाद शमीम और एनआईटी सूरतकल में पढ़ रहे सुजान कुमार का आइडिया लगा है।’
कोचिंग में पढ़ाई के दौरान हुई दोस्ती
रणधीर बताते हैं कि वे लोग पहले एक ही कोचिंग संस्थान में पढ़ते थे और वहीं उनकी दोस्ती हुई। उन लोगों ने भविष्य में कुछ ऐसा करने का निर्णय लिया था, जिससे कुछ लोगों को रोजगार देकर उन्हें आत्मनिर्भर बना सकें। एक टी-स्टॉल में दो से तीन लोगों को रोजगार मिला है। अभी आरा में एक स्टॉल है और इसी महीने यहां बमपाली और बाजार समिति में स्टॉल खुलने वाला है। एक टी-स्टॉल पटना में बोरिंग रोड पर खोला गया है।
साल के अंत तक देश में 300 स्टॉल खोलने की योजना
उनकी योजना साल के अंत तक देशभर में 300 स्टॉल खोलने की है। स्टार्टअप को आगे बढ़ाने के लिए वे वित्तीय संस्थानों से मदद लेंगे। रणधीर बताते हैं कि इस स्टार्टअप से उनकी पढ़ाई बिल्कुल प्रभावित नहीं हो रही है, यह तो बस एक आइडिया है तो उन लोगों ने धरातल पर उतार दिया, बाकी काम वहां स्टाफ को करना है। पिता मनोज पांडेय गोपालगंज में बिहार पुलिस में एएसआई हैं और बीच-बीच मे आकर निगरानी करते रहते हैं।
स्टार्टअप को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ेंगे
रणधीर बताते हैं कि भविष्य में वे अपने स्टार्टअप को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ेंगे। अभी वे लोग स्टॉल पर किसी तरह का प्लॉस्टिक का इस्तेमाल नहीं करते हैं और केवल कुल्हड़ में चाय देते हैं। भविष्य में वे लोग उपयोग में लाये गए कुल्हड़ को हाई प्रेशर पानी से धोने के बाद उसमें पौधा का बीजारोपण कराएंगे और उसे भी स्टॉल के जरिये काफी कम कीमत पर ग्राहकों को देंगे।
10 फ्लेवर में मिलती है चाय
आईआईटियन चाय दुकान में एक-दो नहीं, बल्कि 10 फ्लेवर में चाय मिलती है। इनमें, नीबू, आम, सन्तरा, पुदीना, ब्लूबेरी आदि फ्लेवर की चाय लोग पसंद करते हैं। चाय बना रहे कर्मचारी ने बताया कि 10 रुपये में यहां कुल्हड़ में चाय मिलती है। चाय देने से पहले वे लोग कुल्हड़ को चूल्हे की आग में गर्म करते हैं, जिससे इसमें अनोखा स्वाद आ जाता है। स्टॉल पर चाय की चुस्की ले रहे जिला जदयू के उपाध्यक्ष एवं चर्चित सामाजिक कार्यकर्ता डॉ शशिकांत सक्सेना ने कहा कि युवाओं में सोच बदल रही है, यह स्टॉल उसी सकारात्मक सोच का नतीजा है। और इन युवाओं की सोच उनको सब से अलग करती है और इन लोगों की बनाई हुई चाय भी अलग तरह की स्वाद देती है, तभी तो यहां सुबह से लेकर देर रात तक चाय पीने वालों की भीड़ लगी रहती है
स्टॉल की डिजाइन है खास
टी-स्टॉल की सबसे बड़ी खासियत दुकान की डिजाइनिंग है। केवल 16 वर्ग फीट में पहिये पर स्टॉल इस तरह से डिजाइन की गई है कि चाय बनाने से लेकर जरूरत का सारा सामान इसमे समा जाए। केवल कुल्हड़ को गर्म करने के लिए चूल्हा को स्टॉल से अलग रखना पड़ता है।
अर्चना संस्था ने शब्दों से खेली होली
कोलकाता । अर्चना संस्था ने जूम ऑनलाइन माध्यम पर सदस्यों के साथ शब्दों की स्वरचित खेली होली। फागुनी बयार आई रंग भरा प्यार लाई। गुनगुनाती धूप आई किशमिश ठंड लाई। विद्या भंडारी, प्रसन्न चोपड़ा ने मुझ पर क्यों चिल्लाते पत्नी जोर से चिल्लाई, भारती मेहता – रंग तो बहुत रहे मेरे पास भरूँ किसमें, अनुकूल आकृति ही न मिली !, उषा श्राफ -रंगों का इन्द्र धनुष है होली, मृदुला कोठारी ने आओ भाईलिया धूम मचावा, सतरंगी फागणियो मनावा। शशि कंकानी ने पीछे- पीछे गोप चलत हैं, आगे चले नन्द लाल।भरके हाथों में अबीर,गुलाल रे कि आयो होली रो त्यौहार। सुशीला चनानी ने होली की रंग-रंगीली गोष्ठी में खूब रंग बरसे!हम सब भीगे!आनन्द आ गया ।
सब टाइटिल की आस लगाये बैठे थे वो भी पूरी होगी छारण्डी के दिन ! । इन्दु ने भी मीठे मीठे फूलों करंग बरसाये और अन्त में हिम्मत जी ने होली का खूब हुडदंग मचाया ! सांचो कहूँ सखी वृन्दावन को सो सो आनन्द भयो आज तो!, सुशीला चनानी ने होली आयी रस भरी,बरसे चहुँ दिशा रंग।पग थिरके पायल बिना,बाजे ढोल मृदंग।। राधा कृष्ण होरी-(मन हरण छन्द)भर पिचकारी कान्हा, राधिका को मारी, हिम्मत चोरड़़िया ने गीत -कुण्डलिया- सारे रंगो से सजा, होली का बाजार, जोगीरा-आओ मिलकर खेलें होली.., बनेचंद मालू की पंक्तियाँ जब आता है फागुन का महीना,छा जाता है कुछ नशा सा!/भीना भीना!.. इन्दु चाण्डक के संचालन में हुई गोष्ठी में विद्या भंडारी ,सुशीला चनानी,मृदुला कोठारी ,बने चन्द जी मालू,नवरतन भंडारी ,प्रसन्न चोपड़ा ,हिम्मत चोरड़िया,संगीता चौधरी ,शशि कंकाणी ,भारती मेहता ,ऊषा सराफ ने शिरकत की।
होली के सतरंगी रगों में भीगी गोष्ठी में सभी रचनाकारों ने विभिन्न भाव शब्दो में भर कर पिचकारी चलायी ।बहुत ही आनन्द और उल्लास भरी गोष्ठी में सभी सदस्यों की सहभागिता रही। डॉ वसुंधरा मिश्र ने कार्यक्रम की जानकारी दी ।
पुस्तक मेले में कुसुम खेमानी के उपन्यास ‘लावण्यदेवी’ की बांग्ला अनुदित पुस्तक का लोकार्पण
कोलकाता । कोलकाता पुस्तक मेले ( बोई प्रांगण मेला) के सौमित्र चटर्जी मुक्त मंच पर गत 12 मार्च को प्रख्यात लेखिका डॉ. कुसुम खेमानी के उपन्यास ‘लावण्यदेवी’ के बांग्ला अनुवाद के आवरण का लोकार्पण किया गया| यह उपन्यास ढाका (बांग्लादेश) के बेंगाल पब्लिकेशन्स ने छापा है| बांग्ला देश साहित्यिक सर्कल् के बिमान गुहा ने विशेष सन्देश दिया। इस अवसर पर गिल्ड के अधिकारी योगेश तन्ना, परिषद के निदेशक डॉ. शंभुनाथ, परिषद के मंत्री डॉ. केयूर मजमुदार, प्रख्यात पूर्व फुटबॉलर सुबीर मुखर्जी, नीलकमल प्रकाशन, हैदराबाद के प्रमुख सुरेश चंद्र शर्मा, अल्पना सिंह, अमित मुंदड़ा सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित थे| डॉ.कुसुम खेमानी के बांग्ला में अनूदित उपन्यास ‘लाबण्यदेबी’ का संक्षिप्त पाठ सुबीर मुखर्जी द्वारा किया गया| उपन्यास की लेखिका डॉ कुसुम खेमानी ने अपने संदेश में कहा कि यह बहुत गर्व की बात है कि उनका उपन्यास बांग्लादेश से छप रहा है। इससे भारत और बांग्लादेश के साथ-साथ हिंदी-बांग्ला का एक मैत्री संबंध भी बनता है। स्वागत वक्तव्य देते हुए परिषद के मंत्री डॉ. केयूर मजमुदार ने कहा कि जिस देश में भाषा को लेकर इतनी मुहिम रही, उसी देश में ‘लावण्यदेवी’ का बांग्ला अनुवाद किया गया जो भारतीय भाषा परिषद के लिए गौरव का विषय है।
भारतीय भाषा परिषद के निदेशक डॉ. शंभुनाथ ने कहा कि लावण्यदेवी के बांग्ला में अनूदित उपन्यास बांग्ला भाषियों द्वारा काफी आदर के साथ पढ़ा जाएगा। नीलकमल प्रकाशन के सुरेश चंद्र शर्मा ने भी अपना वक्तव्य रखा। कवयित्री अल्पना सिंह ने अपनी कविता का पाठ किया। डिजिटल पटल पर भवानीपुर एजूकेशन सोसायटी के डीन दिलीप शाह और वसुंधरा मिश्र भी जुड़ी रहीं। इन्होंने डॉ कुसुम खेमानी को अपना बधाई संदेश भिजवाया। बेंगल पब्लिकेशन के अब्दुर रज्जाक ने अपने स्टॉल से कुसुम खेमानी द्वारा हस्ताक्षरित पुस्तकों की बिक्री की। इस कार्यक्रम के साथ बांग्लादेश साहित्य सर्किल भी जुड़े रहे।
इस अवसर पर मेले में मुस्तैद पुलिस कर्मियों एवं पुस्तक प्रेमियों के बीच भारतीय भाषा परिषद द्वारा सैनिटाइजर का वितरण किया गया। धन्यवाद ज्ञापन परिषद के सचिव डॉ.केयूर मजमुदार ने दिया| साहित्य टाइम्स के रोशन झा द्वारा इस कार्यक्रम का प्रसारण भी किया गया।
मंच संचालन किया सुशील कान्ति ने। इस कार्यक्रम के सफल आयोजन में मीनाक्षी दत्ता, अमृता चतुर्वेदी और एस पी श्रीवास्तव की प्रमुख भूमिका रही।कार्यक्रम का संयोजन किया डा वसुंधरा मिश्र, अमित मुंधड़ा, अल्पना सिंह और सुरेश चंद्र शर्मा ने




