Tuesday, April 7, 2026
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पुस्तक समीक्षा – टुकड़ा टुकड़ा सच काव्य संग्रह पढ़ते हुए

– डॉ. वसुंधरा मिश्र

सत्ता प्राप्ति के खेले हैं नित नए निराले खेले हैं
नाच नाच कर करतब अजीब दिखा रहे हैं
लगा कर मुखौटे देशभक्ति जता रहे हैं
ये पंक्तियाँ जोधपुर राजस्थान के रमेश बोराणा की हैं जो स्वयं राजनीति की बारिकियों से रूबरू हैं। राजस्थान मुख्यमंत्री के संस्कृति सलाहकार, राजस्थान कला साहित्य संस्थान जोधपुर के संस्थापक अध्यक्ष के साथ-साथ कई महत्वपूर्ण पदों पर प्रतिष्ठित हैं।
रमेश बोराणा सबसे पहले एक संवेदनशील व्यक्ति हैं जो राजनीति में रहते हुए भी अपने शब्दों को ईमानदारी से कविता में ढालते हैं। कवि नाट्यकला के पारखी हैं। रंगकर्मी होने के साथ बहुप्रतिभा के धनी हैं। गद्य , पद्य, नाटक, निबंध, समसामयिक आलेख, जैन फिल्मों के गीतकार, स्तवन, स्क्रिप्ट आदि विविध विधाओं पर आपकी लेखनी चलती रही।
हिंदी और राजस्थानी भाषा पर समान अधिकार रखने वाले कवि ने प्रेम, प्यार, मोहब्बत, जीवन दर्शन आदि पर अपनी लेखनी चलाई है। एक रंगकर्मी का यह काव्य संग्रह निश्चित रूप से विविध अनुभवों का संग्रह साबित होगा। राजस्थान के वरिष्ठ रंग अभिनेता, निर्देशक लेखक रंग तकनीकी विशेषज्ञ के रूप में राष्ट्रीय पहचान हासिल करने वाले कवि रमेश बोराणा ने सौ से अधिक नाटकों में अभिनय, सत्रह का निर्देशन, नौ नाटकों का लेखन, मंचन, प्रसारण किया है, कई पुरस्कार भी मिले हैं। जीवन अनुभवों का टुकड़ा टुकड़ा सच 74 कविताओं की बगिया है जो अँधेरे से उजाले की ओर जाने की यात्रा करवाती है। पहली कविता ‘अंधेरे की ख़ामोशी ‘में महाभारत में फैले षडयंत्र के पासों से उपजा यह संसार अंधेरों की ख़ामोशी को उजागर करती हैं। कवि आपसी विश्वास और आशा के दीपक जलाने का संदेश देता है क्योंकि वह उन्हीं सड़कों से होकर गुजरा है। ‘अनहद नाद’ कबीर दास जी के अनहद नाद की ओर ले जाती है जहाँ कवि’ अहं ब्रह्मास्मि ‘ की गंभीरता को समझाने का प्रयास करता है। वह फटकारता नहीं है बल्कि ज्ञान बघारने वालों पर व्यंग करता है –
जीवन ज्ञान बघारने वालों
अभी खुद से खुद की पहचान बाक़ी है
अभी तो जहांँ सारा बाक़ी है
समझने की समझ अभी बाक़ी है
कुछ ही समझे हैं
बहुत कुछ बाक़ी है (टुकड़ा टुकड़ा सच, पृष्ठ 15)
जीवन इतना आसान नहीं है। मनुष्य सोचता है वह सर्वशक्तिमान है, सबकुछ कर लेगा। अपने इस झूठे अहंकार से निकलना होगा। अहंकार को छोड़ना होगा–
सफ़र ज़िन्दगी का पार नहीं होता मंसूबी घोड़ों से
ये जहाँ अनंत है
जो चलता है अपनी ही फ़ितरत से
ऐ मैं सुन
चल उठ वक्त को पहचान लेते हैं
चल उठ नियति को समझ लेते हैं (पृष्ठ 14)
कवि कहता है – –
दोस्त दूरियांँ बेशक रखना
पर दिल को नजदीक ही रखना (पृष्ठ 15)
वर्तमान समय की विभीषिका से कवि चिंतित है–
पहचानो तुम /लौट आओ /पांवों तले की जमीन /धंसने से पहले (पृष्ठ 16)
अपने अस्तित्व के प्रति कवि आश्वस्त है क्योंकि उसका अस्तित्व सर्वकालिक है – – जंगल में आदमी है या /आदमी में जंगल और अजगर कौन है? जो सबको अपने – अपने सामने सबके अस्तित्व को नकारता है।
कवि बैचेन है वह आदमी को ढूँढता है। उसके अहसास को, उसके चरित्र को, उसके मुखौटों को, उसके दंभीपन को, उसकी निर्दयता को जिसने धर्म – मज़हब को बाज़ारू और मज़ाक बनाकर रख दिया है – –
‘दो मुंँहा हो गया है आदमी ‘और ‘सत्य से भटक गया है’ आदमी /अपने ही साये से /डरने लगा है आदमी यह कैसी विडंबना है (पृष्ठ 19-20)।कवि मनुष्य के इस भयावह जंगल में ‘भयावह अर्थहीन विदूषक सा लगता है’ वह ‘अज़ानों’ व ‘आरतियों’ के बेसुरे सुर से दुखी है लेकिन जानना चाहता है कि आस्था के पर्दे में हाथ डाले कौन है?( पृष्ठ 21) समाज के ऐसे लोगों से दुखी है जो इस तरह के भ्रम फैला रहे हैं। अच्छा इंसान कैसे बनाया जाए, इस पर विचार करता है – नियति अटल /नहीं मिलता इक कुँआ दूजे कुएँ से कभी /ज़िन्दा है इंसानियत तो आओ इंसान से मुलाकात को निकलो( पृष्ठ 22) ‘कविता क़ागजी पहचान का मोहताज़ है आदमी’ कविता में वर्तमान व्यक्ति की पहचान काग़ज़ों तक सिमट कर रह गई है। ‘कोरा कागज’ में प्रतीकात्मक प्रयोग है जहाँ उस ‘मासूम’ पवित्र और निश्छल व्यक्ति को बदरंग बना दिया जाता है। ‘खंडित अक्षर’ में ढाई अक्षर वाले शब्द ‘प्यार’ को अभिशप्त माना है क्योंकि जिसका ‘पहला हर्फ़ ही खंडित है’ तो वह क्या देगा। कवि की यह कल्पना उसकी अनूठी सोच है जो पाठकों के साथ एकमतता दर्शाती है।
वह युद्ध मिलने – बिछुड़ने का मेला, टूटे ख़वाबों का मंजर, बेसुधी, बेखुदी, अरमानों की अर्थी, बर्बादी, विरह का आर्तनाद, मृगतृष्णा का समंदर, भ्रम आदि से वाकिफ़ है लेकिन ‘प्यार’ को जिसने समझा है, उसके लिए सबकुछ है (पृष्ठ 25)।
‘बूंँदे छोटी-छोटी ‘कविता में ‘धरा आंँगन को तृप्ति’ देने वाली छोटी-छोटी बूंँदों के महत्वपूर्ण योगदान को बताया गया है जो जीवन को रंगों से भर देती हैं। बूँदों से ही सागर भरते हैं।
कवि अकेले ही रहना चाहता है क्योंकि उसने दुनिया को अच्छी तरह देख लिया है इसलिए उसे लोगों की संगत से डर लगता है (पृष्ठ 27)’ घुटन’ कविता में जीवन के सत्य को दर्शाया है जहांँ ‘भीतर और बाहर घुटन ही घुटन है’ जिसे कवि ‘सृष्टि का कालचक्र’ मानता है।’चाह की राह’ कविता में जागरण गीत गाता कवि ‘भरोसे का मंगल गीत’ और ‘धोरों पर सोनल दांडी ‘बनाने का आह्वान करता है।उसकी नज़रों में जननायक वही बन सकता है जो’ जन के मन ‘में चढ़ जाए।
दूसरों का कल्याण करना ही ‘सत्य कर्म’ का पालन करना है, मानवता की सेवा करने वाले सेनानी ही सच्चे पुजारी हैं।
देश की आन- बान – शान और गौरव पर लिखी कविता ‘जय जय तिरंगा’ में देश के लिए प्राणों तक को न्योछावर करना हर देशवासी का धर्म माना है क्योंकि ‘जन – मन की धड़कन है तिरंगा’। कवि विश्व गौरव की कामना करता है।उसका मानना है कि मनुष्य जीवन मिला है तो अवसर भी मिला है। अवसर का लाभ उठाने का संदेश देता और अपने देश के लिए लिए हर देशवासी को अपने-अपने क्षेत्र में कार्यों को करते हुए ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ की भावना रखनी चाहिए। छोटे-मोटे संघर्षों से घबड़ाना नहीं चाहिए, कवि ऐसी दृष्टि रखता है।
संपूर्ण रूप से कोई भी व्यक्ति सब कुछ न प्राप्त कर सकता है और न ही पूरा कर पाता है। हम जितना ही जीवन और संसार के पास जाते हैं, सोचते हैं, देखते हैं, उससे कहीं और ‘अनंत अथाह पहेली है ‘यह संसार। (पृष्ठ 39)
यह सच है कि हम अलग – अलग धर्म, जन्म – मरण, ईश्वर – अल्लाह, गॉड, धर्म सब अलग – अलग टुकडों में समझते हैं। इंसान के व्यवहार में ‘सबका अपना टुकड़ा टुकड़ा सच है ‘तो सूरज – चाँद एक ही क्यों है?, मनुष्य का खून और उसकी पीड़ा का अहसास एक क्यों है? कवि निष्ठा – भरोसा और समर्पण को हर मनुष्य की पूंँजी उस सत्य को मानता है जो वह टुकड़े टुकड़े में समझता है।
कवि प्रकृति के झरने की बात करता है जो चट्टानों के थपेड़े खाकर भी ऊपर से अविरल गिरता है, अपनी चोटों को सीने में छिपा लेता है। डॉ एस एन सुब्बाराव की राष्ट्र भक्ति का अलख जगाते हैं। कवि का मानना है कि धर्म, मजहब, नैतिक मूल्य, गाँधी का सपना देश धर्म निभाने वाले ही अंँधेरे में उजाले खोज रहे हैं, ऐसे लोग धन्य हैं। तभी भारत स्वराज प्राप्त कर सकता है। (पृष्ठ 40)
गाँधी को शुद्ध विचारों में खोजा जा सकता है – –
मैं मरा नहीं हूँ
न ही कहीं गया हूँ
* * *
सत्य – अहिंसा में
अस्तेय – अपरिग्रह
सत्याग्रह – अनशन में
शुद्ध विचारों में
गाँधी हर एक व्यक्ति के हृदय में शुद्ध विचारों के रूप में विराजित हैं।
झरना, तितली, मोह लिप्सा, धूप, नारीत्व, नियति, परछाइयाँ, पानी, पसीना, समंदर, बेटी की अभिलाषा, माँ, रंग, रिश्ते, घुंँघरू, मुझमें, होली, धूल, हिम्मत आदि कई कविताएँ कवि की विभिन्न संवेदनाओं को नए रंग प्रदान करती हैं जिनमें वह बच्चा बन जाता है। निश्छल और सत्य का संधान करता है। ‘षड्यंत्र हो गया हो जैसे’ , ‘महाभारत’, ‘वक्त का कमाल’ , ‘बाजार’ , ‘यह बहुरूपियों के टोले हैं’ , ‘सुन सके तो सुन वक्त’आदि कविताएँ कवि के विविध तेवर की कविताएँ हैं।
वर्तमान राजनीति की बखिया उधेड़ते दिखाई पड़ता है कवि – –
वाचालता से जन – मन को बहला लेते हैं
कुर्सी भी धड़ल्ले से हथिया लेते हैं (पृष्ठ 78)

वर्तमान परिस्थितियों से कवि दुखी है,’ ख़ुद को इंसान कहते हुए भी शर्म आती है ‘और व़क्त के चेहरे को काग़ज़ पर उतार कर उसे कोसता है (पृष्ठ 86)।
ख़ामोशी भी बिना कुछ कहे बहुत कुछ कह जाती है – –
चुप्पी से शब्द को औक़ात बता देती हैं
अल्फाज़ कंगूरों की मानिंद जता देते हैं
ख़ामोशियाँ नींव भाँति भार छुपा लेती हैं।( पृष्ठ 90)इस संघर्षों से भरे संसार में वह पीछे नहीं हटता, सभी को प्रोत्साहित करता है। कवि आशावादी है और वह हौसला देता है – –
यह सारा फ़लक तेरा है
हर सफलता तेरे कदमों में है (पृष्ठ 91)
समाज में स्त्री के अस्तित्व को सही स्थान न मिलने पर दुखी और पीड़ा से भरा हुआ है और उसको इस सृष्टि की संवाहिका मानता है।
‘माँ’ कविता में स्त्री कहती है, ‘स्नेह, प्यार और वात्सल्य से पगी /एक स्त्री होती हुई भी /आखिर/जननी ही तो हूँ तुम्हारी’ (पृष्ठ 65)।
माँ से होती हुई एक स्त्री की जीवन यात्रा के सभी रूपों पर चार भागों में लिखी लंबी कविताएँ उसका प्रमाण है।
‘अपेक्षा’ और ‘उपेक्षा’ इन अचूक मंत्रों से कवि मनुष्य मात्र को आश्वासन देता है कि जीवन को सुखद बनाने के ही ये दो मंत्र काफ़ी है।
अंधेरों से उजाले की ओर कवि की रचनात्मक यात्रा है ‘टुकड़ा टुकड़ा सच ‘ मन का उजास की सकारात्मक सोच लिए समाप्त होती है जहाँ वह इसी निष्कर्ष पर पहुँचता है कि – – ‘गर ढूंँढना ही है /किसी को तो /अपने भीतर ढूंँढ वह तो वहीं बैठा है /तेरे इंतजार में /उसके लिए चिराग़ नहीं /मन का उजास चाहिए (पृष्ठ 96)
कवि रमेश बोराणा ने उर्दू और हिंदी के शब्दों का प्रयोग किया है जो बोलचाल में रचे बसे हुए हैं। शिल्प विधान की दृष्टि से कहीं – कहीं शिथिलता दिखाई पड़ती है। कवि ने भारतीय संस्कृति और संस्कार के भावों को प्रमुखता से लिखा है जो रचनाकार की प्रमुख विशेषता है कवि का प्रथम संस्करण 2021 में प्रकाशित काव्य संग्रह ‘टुकड़ा टुकड़ा सच’ का आवरण पद्मश्री शाकिर अली, जयपुर द्वारा रेखाओं का उत्कृष्ट रेखांकन है।मात्र 150 रूपये की यह पुस्तक राजस्थानी ग्रंथागार, प्रथम मंजिल , गणेश मंदिर के सामने, सोजती गेट, जोधपुर – 342001 से प्रकाशित हुई है।
कला और संस्कृति के संरक्षण और विकास के लिए प्रतिबद्ध रंगकर्मी रमेश बोराणा के मित्र उपन्यासकार और शायर ने ‘दो शब्द’में सही लिखा है, ‘सादगी में सौन्दर्य इनकी कविताओं का गुण है जिसे इन्होंने राजनीति में रहते हुए भी बरकरार रखा। – – – किताब के बगैर बात नहीं बनती’।

भवानीपुर कॉलेज ने गैर शिक्षण कर्मियों को दिया ‘फगुआ 2022 सम्मान’

कौलकाता । भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज के डीन्स ऑफिस और कॉलेज की ओर से गैर शिक्षण कर्मियों को होली के अवसर पर सम्मानित किया। पिछले छह वर्षों से फगुआ कार्यक्रम में यह कार्यक्रम बड़े ही जोरशोर से मनाया जाता है। सिक्युरिटी, मेंटेनेंस, एकाउंट्स, कम्प्यूटर सेंटर, इन्फ्रास्ट्रक्चर, गेम्स एंड स्पोर्ट्स, एनसीसी, लाइब्रेरी, हाउस कीपिंग, आदि सभी विभागों के प्रमुख और अन्य सभी को उपहार स्वरूप डिनर सेट प्रदान किए गए। डीन प्रो दिलीप शाह ने अपने वक्तव्य में कहा कि लगभग 225 से अधिक गैर शिक्षण कर्मी ही कॉलेज को सुचारू रूप से चलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, तभी कॉलेज अपनी संपूर्ण गतिविधियों को आसानी से कर लेता है। ये सभी हमारे कॉलेज की रीढ़ हैं। उन्होंने सभी को उपहार प्रदान किए। सबसे पुराने सुरक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी हरि सिंह को प्रो दिलीप शाह ने विशेष रूप से सम्मानित किया ।
कार्यक्रम के आरंभ में विद्यार्थियों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए जिसमें गीत – संगीत और होली उत्सव के नृत्य और हास्य नाटिका की प्रस्तुति दी। कॉलेज के फ्लेम कलेक्टिव ने इस्टर्न और वेस्टर्न नृत्य, इन-एक्ट ने हमारे मंत्री नाटिका और फैशनिस्टा ने श्वेत परिधान और फागुनी लहरिया में फैशन शो किया। क्रिसेंडो ने हिंदी, बांग्ला और अन्य गीतों को वाद्ययंत्रों के साथ फागुन के गीत गाए और सभी को रस से सराबोर कर दिया। फूलों से खोली गई इस होली में कॉलेज के शिक्षकगणों ने भाग लिया। शिक्षक संयोजक प्रो मीनाक्षी चतुर्वेदी, प्रो दिव्या उदेशी, प्रो विवेक पटवारी, प्रो चंदन झा, प्रो दर्शना झा, डॉ वसुंधरा मिश्र, प्रो कृपा शाह रहे।
विद्यार्थियों की बड़ी संख्या में उपस्थित वोलियंटर ने दिए गए अपने सभी कार्यों को जिम्मेदारी से बखूबी निभाया।
फागुन के इस रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम में जुबली सभागार और वालिया हॉल तथा नीचे कॉरिडोर सभी जगह फूलों की पंखुड़ियों से धरती पट गई थी। भोजन और ठंडाई की व्यवस्था थी जिसका सभी ने आनंद उठाया। इस कार्यक्रम की जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।

 भवानीपुर कॉलेज ने मनाया इंट्रा एथलेटिक कॉर्निवल ‘ऊर्जा 2022’

कोलकाता । गीतांजलि स्टेडियम में भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज के छात्र- छात्राओं ने इंट्रा एथलेटिक कॉर्निवल ‘ऊर्जा 2022’ के अंतर्गत स्पोर्ट्स और एथलीट्स के प्रदर्शन, कॉर्निवल फेस्ट और फनफेयर रहा। कॉलेज के सभी प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। सौ , दो सौ और चार सौ रेस, डिस्कस थ्रो, शार्ट पुट, रिले आदि विभिन्न स्पोर्ट्स में कई बैचों में छात्र और छात्राओं ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। खाने, पीने और स्नेक्स आदि के 16-17 स्टॉल लगाए गए जो विद्यार्थियों ने लगाए। एनसीसी के कैडटों ने मार्चपास्ट किया। एनसीसी के विद्यार्थियों का स्टॉल लगाया गया। एनसीसी केडट राज तिवारी, शशांक शेखर तिवारी, अनन्या सिंह, विपुल सिंह आदि उपस्थित रहे। एनसीसी दानिश तारपोल ने बेहतर प्रदर्शन किया। लडकियों में यश्वी ने. गांधी ने बेहतर प्रदर्शन किया। रक्तदान शिविर का भी आयोजन था जिसमें विद्यार्थियों ने ब्लड डोनेट किया। प्रथम द्वितीय और तृतीय स्थान पर आने वाले प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया गया। शिक्षिकाओं ने लेमन रेस और नॉन टिचिंग स्टॉफ ने रेस में हिस्सा लिया।
उद्घाटन समारोह में मशाल प्रज्वलित कर ऊर्जा 2022 का आह्वान किया गया जिसमें प्रो दिलीप शाह, प्रो मीनाक्षी चतुर्वेदी और उमेद ठक्कर प्रमुख रहे। प्रो दिव्या उदेशी, प्रो विवेक पटवारी, प्रो दर्शना त्रिवेदी, प्रो चंदन झा, प्रो कृपा शाह, प्रो पूजा अग्रवाल, प्रो डालिया शर्मा,प्रो अंकित पटवारी, प्रो रेखा नारिवाल, प्रो प्रीति शाह, अरित्रिका दूबे, डॉ वसुंधरा मिश्र और अन्य शिक्षकों की उपस्थिति रही। स्पोर्ट्स के प्रमुख रूपेश गांधी का प्रमुख सहयोग रहा।
कॉलेज के डायरेक्टर जनरल डॉ सुमन मुखर्जी और एयरफोर्स ग्रुप कमांडर विष्णु शर्मा ने सभी प्रथम द्वितीय और तृतीय स्थान को पुरस्कृत किया। इस अवसर पर भवानीपुर कॉलेज के विद्यार्थियों ने कॉर्निवाल फेस्ट में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया। इस कार्यक्रम की जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।

होली पर कामधेनु की सेल्फी प्रतियोगिता

कोलकाता । कामधेनु पेंट्स ने होली के रंग भरे उत्सव को और रंगारंग बनाते हुए सेल्फी प्रतियोगिता आयोजित की है। रंग खुशियों के नामक इस प्रतियोगिता की जानकारी देते हुए कामधेनु पेंट्स के निदेशक सौरभ अग्रवाल ने कहा कि प्रतियोगिता का उद्देश्य उत्सव में खुशियों के रंग भरना है जहाँ प्रतिभागी अपने उत्सव की तस्वीरें भेज सकते हैं। प्रतिभागी को उनके उत्सव की तस्वीरें कामधेनु के फेसबुक पेज एवं इंस्टाग्राम प्रोफाइल पर पोस्ट करनी होंगी। प्रविष्टि जमा करने की अंतिम तारीख 22 मार्च है। विजेताओं का नाम सोशल मीडिया माध्यमों पर 31 मार्च को घोषित किया जाएगा।

बजाज हाउसिंग फाइनेंस का एयूएम 50 हजार करोड़ के पार

कोलकाता ।  बजाज हाउसिंग फाइनेंस का एसेट अंडर मैनेजमेंट (एयूएम) 50,000 करोड़ रुपये के पार पहुँच गया है। कंपनी ने मार्च 2018 में एक स्वतंत्र इकाई के रूप में काम करना शुरू किया था, और सिर्फ चार सालों के कारोबार के दौरान ही कंपनी ने यह उपलब्धि हासिल की। कारोबार के पहले साल, यानी वित्त-वर्ष 2019 में बजाज हाउसिंग फाइनैंस ने पहली उपलब्धि हासिल करते हुए, अपने एसेट अंडर मैनेजमेंट को 10,000 करोड़ रुपये तक पहुँचाने में सफलता प्राप्त की। अगले ही साल, कंपनी का एयूएम 25,000 करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर गया, जो वित्त-वर्ष 2020 के अंत तक 32,705 करोड़ रुपये गया।

वित्त-वर्ष 2021 में बजाज हाउसिंग फाइनैंस ने 38,871 करोड़ रुपये का एयूएम दर्ज किया। उसी साल, कंपनी ने बाहरी बेंचमार्क (रेपो रेट) से जुड़े होम लोन के रूप में एक नई पहल की शुरुआत की हो – और इस तरह यह ग्राहकों को अपने होम लोन को बाहरी बेंचमार्क, यानी आरबीआई के रेपो रेट से लिंक करने का विकल्प देने वाली पहली हाउसिंग फाइनैंस कंपनी (एचएफएस) बन गई। हालांकि, आरबीआई के आदेशानुसार बैंकों के लिए अपने होम लोन को रेपो रेट जैसे बाहरी बेंचमार्क से लिंक करना अनिवार्य है, लेकिन एचएफसीएस अपने होम लोन को आंतरिक बेंचमार्क से जुड़े ब्याज़ दरों के साथ लिंक करने का विकल्प चुन सकते हैं, जिसे फ़्लोटिंग रेफरेंस रेट भी कहा जाता है।

आइवा अवार्ड्स में सम्मानित की गयीं 21 महिलाएं

शुभजिता प्रतिनिधि राधा कुमारी ठाकुर की रपट
कोलकाता । शगुफ्ता हनाफी इवेन्ट्स यानी शी की ओर से हाल ही में इन्सपायरिंग विमेन एचीवर्स अवार्ड्स यानी आइवा अवार्ड्स आयोजित किया गया। इस पुरस्कार समारोह में विभिन्न क्षेत्रों की 21 महिलाओं को सम्मानित किया गया। इस पुरस्कार के लिए शी को देश भर से 75 और विदेशों से 13 आवेदन प्राप्त हुए थे। विदेशों से एक प्रतिभागी महिला अचीवर को यह सम्मान दिया गया।
पुरस्कार विजेताओं ने कहा
गुलशन बानो (उद्यमी) – आपके कामों की अगर कोई सराहना करें तो आपकी हिम्मत और बढ़ जाती है और आगे बढ़ने का जोश दुगना हो जाता है हम अगर अपने ऊपर भरोसा रखें तो हम बहुत आगे जा सकते हैं |

प्रीत वालिया (समाज सेवा ) – मुझे खुद के बारे में ना सोच कर दूसरों के बारे में सोचना और उनके लिए कुछ अच्छा करना अच्छा लगता है जो मौका मुझसे शगुफ्ता ने दिया जो सुकून हमें दूसरों की भलाई करके मिलता है वो और कहीं नहीं मिल सकता |
पामिता साधुखान (ग्रूमिंग एक्सपर्ट) – यहाँ विजयी प्रतिभागी महिलाओं से बात करके पता चला कि कितना काम हो रहा है अलग-अलग क्षेत्रो, में यहां तक कि गृहिणियाँ भी अपने आप में एक वूमेन अचीवर्स हैं। |
आयोजक
शगुफ्ता हनाफी (शी की संस्थापक एवं एम डी) -मैं यकीन रखती हूं अपने यकीन पर कि मेरे यकीन को आगे लेकर लोग चले यह पूरा कारवां ऐसे ही आगे बढ़ता रहे|।

 

 

‘महिलाओं को शीर्ष पदों पर लाने की जरूरत है’

कोलकाता । कलकत्ता चेम्बर ऑफ कॉमर्स ने महिला दिवस के अवसर पर विक्की की वेस्ट बंगाल मेंटल हेल्थ काउंसिल के सहयोग से महिला नेतृत्व को लेकर एक विशेष परिचर्चा आयोजित की। परिचर्चा में डॉ. पॉल ग्रुप ऑफ कम्पनीज प्रबन्ध निदेशक इन्द्राणी पॉल, ईजी नोटबुक स्टेशनरीज की संस्थापक एवं प्रबन्ध निदेशक शालिनी एस विश्वास, डिजिटल प्रकाशक एवं शिक्षाविद् जशोधरा चक्रवर्ती, कैंडिड कम्यूनिकेशन एवं कैंडिड स्कूल ऑफ कम्यूनिकेशंस की निदेशक पारोमिता घोष उपस्थित थीं।

वक्ताओं ने अपने संघर्ष की कहानियाँ साझा करते हुए महिलाओं को अधिक अवसर देने और उनको शीर्ष पदों पर लाने की बात कही। कलकत्ता चेम्बर ऑफ कॉमर्स की अध्यक्ष शैलजा मेहता ने स्वागत भाषण दिया। विक्की वेस्ट बंगाल मेंटल हेल्थ काउंसिल की उपाध्यक्ष इंद्राणी गांगुली ने सत्र का संचालन किया। धन्यवाद ज्ञापन वेस्ट बंगाल मेंटल हेल्थ काउंसिल की अध्यक्ष चयनिका भिवानीवाला ने दिया।

होरी आई

डॉ. वसुन्धरा मिश्र

होरी आई होरी आई
कान्हा की बाँसुरिया
हौले से बोली
होरी आई होरी आई
कान्हा की बाँसुरिया
हौले से बोली

राधा – रानी तू है हठीली
बईयां धर मोरी बोली
मैं तो ना डारूंगी रंग तो पै
हाथों में ले पिचकारी
उंगली की ओट से
देखूंँगी तोहे
होठों पे कटीली हंँसी छाई
होरी आई होरीआई

 

कान्हा मोहे कस कर पकड़े
अंँखियों से अंँखियांँ मारे
हंँस- हंँस के बाँसुरिया बोली
ग्वाल – बाल सब गैल पडे़ हैं
कान्हा गाए होरी
रंग-रास की मुठिया मारे
राधा रानी तू गर्वीली
बांँसुरी बन मैं हुई बावरी
करती अब मनुहार तिहारी
क्षमा चाहती राधा रानी
तू तो है कान्हा की जोड़ी
बाँसुरिया तुझमें ही खोई

होरी आई होरी आई
कान्हा की बाँसुरिया
हौले से बोली

जमुना के तट पे रास – रचईया
आओ हिलमिल खेलें होरी
राधा नाचे, बाँसुरी गावे
कान्हा की पैजनिया छम-छम
दौड़- दौड़ कर आए लोग- लुगाई
जमुना में भी आई लाली
होरी आई रे कन्हाई

होरी आई होरी आई
कान्हा की बाँसुरिया
हौले से बोली
होरी आई होरी आई

पेटीएम ने डेटा लीक के आरोपों को खारिज किया

कोलकाता । पेटीएम ने डेटा लीक के दावों से इनकार किया है. इस मामले पर कमेंट करते हुए, पेटीएम पेमेंट्स बैंक के प्रवक्ता ने डेटा लीक के दावों का खंडन किया और कहा कि “पेटीएम पेमेंट्स बैंक की हालिया ब्लूमबर्ग रिपोर्ट में चीनी फर्मों द्वारा डेटा लीक का दावा पूरी तरह से गलत और केवल सनसनीखेज है।”

पेटीएम द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है ‘पेटीएम पेमेंट्स बैंक को पूरी तरह से घरेलू बैंक होने पर गर्व है और डेटा लोकलाइजेशन पर आरबीआई के निर्देशों का पूरी तरह से अनुपालन करता है। बैंक का सारा डेटा देश के अंदर रहता है। हम डिजिटल इंडिया पहल के सच्चे विश्वासी हैं और देश में फाईनेंशियल इनक्लूजन को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है।.”

गौरतलब है कि आरबीआई ने पेटीएम पेमेंट्स बैंक को नए ग्राहक जोड़ने पर पाबंदी लगाने की बात कहीं थी। साथ ही बैंक को अपने आईटी सिस्टम की व्यापक ऑडिट कराने को भी कहा गया था। इस खबर के सामने आने बाद ब्लूमबर्ग ने सोमवार को एक सूत्रों का हवाला देते हुए बताया कि आरबीआई ने पेटीएम पेमेंट्स बैंक को 11 मार्च को नए ग्राहकों को लेने से इसलिए रोक दिया था क्योंकि उसने भारत के नियमों के उल्लंघन में डेटा को विदेशों में सर्वरों में फ्लो करने की अनुमति दी थी और अपने ग्राहकों को ठीक से सत्यापित नहीं किया था। कम्पनी ने इन आरोपों का खंडन किया है।

पेटीएम पेमेंट्स बैंक की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, प्लेटफॉर्म में वर्तमान में 300 मिलियन से अधिक वॉलेट और 60 मिलियन बैंक खाते हैं। मौजूदा यूजर अभी भी ट्रांजेक्शन के लिए पेमेंट प्लेटफॉर्म का उपयोग कर सकते हैं।

सेबी की पहली महिला चेयरपर्सन बनीं माधवी पुरी बुच

नयी दिल्ली । केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने हाल ही में भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड यानी सेबी की पहली महिला चेयरपर्सन माधवी पुरी बुच को बनाया गया। 28 फरवरी से उनके कार्य की शुरुआत हो गई है। माधवी की यह नियुक्ति फिलहाल 3 साल के लिए है। इससे पहले माधवी अप्रैल 2017 से अक्टूबर 2021 के दौरान सेबी की होलटाइम मेंबर थीं।
सख्त स्वभाव और 30 साल का लंबा अनुभव
माधवी पुरी बुच बहुत ही सख्त स्वभाव के लिए जानी जाती हैं। वे कड़े फैसले लेने के लिए मशहूर रही हैं। उन्होंने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट, अहमदाबाद से एमबीए की डिग्री हासिल की। उसके पहले दिल्ली के सेंट स्टीफन कॉलेज से उन्होंने पढ़ाई की थी। माधवी के पास फाइनेंशियल सेक्टर में 30 सालों का लंबा अनुभव है और वे सेबी की तमाम कमेटियों में पहले भी काम कर चुकी हैं। वे अभी इसकी एडवाइजरी कमिटी में भी थीं।
पहली महिला प्रमुख, जिसने यह ऊंचाई तय की
माधवी पुरी बुच मार्केट रेगुलेटर सेबी के शीर्ष पद पर पहुंचने वाली पहली महिला अधिकारी हैं। वे पूर्णकालिक निदेशक बनने वाली भी पहली महिला हैं और निजी क्षेत्र से सेबी चेयरपर्सन तक पहुंचने वाली भी पहली अधिकारी हैं।

सिंगापुर, चीन के बड़े वित्तीय संस्थानों में किया काम

बुच ने अपना कॅरियर देश में निजी सेक्टर के बड़े बैंक आईसीआईसीआई बैंक से 1989 में शुरू किया था। 2007 से 2009 तक आईसीआईसीआई बैंक में कार्यकारी निदेशक थीं। वे 2009 फरवरी से मई 2011 तक आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज की एम डी एवं सीईओ थीं। 2011 में सिंगापुर चली गईं और वहां उन्होंने ग्रेटर पैसिफिक कैपिटल एलएलपी में काम किया। उन्होंने न्यू डेवलपमेंट बैंक, शंघाई, चीन में भी काम किया है। उनके पास सेबी में सर्विलांस, कलेक्टिव इन्वेस्टमेंट स्कीम, इकोनॉमिक और पॉलिसी एनालिसिस, इन्वेस्टर असिस्टेंस एंड एजुकेशन और इन्वेस्टमेंट मैनेजमेंट की जिम्मेदारी थी। सेबी में पूर्णकालिक सदस्य के कार्यकाल के बाद बुच सात सदस्यों वाले एक्सपर्ट ग्रुप की प्रमुख थीं।
अपने कार्यकाल में दो घोटालों का किया खुलासा
सेबी में अपने पहले कार्यकाल के दौरान माधवी ने दो बड़े बिजनेस टीवी पत्रकारों के शेयर बाजार में घोटाले का खुलासा किया था। इससे पहले दीप इंडस्ट्रीज इनसाइउर ट्रेडिंग के मामले में भी उन्होंने खास भूमिका निभाई थी।