Thursday, April 2, 2026
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पन्ना डायमंड वर्ल्ड ने हावड़ा में खोला अपना तीसरा स्टोर

हावड़ा : शादियों का मौसम आने ही वाला है और इस सीजन में खरीदार खरीददारी करने के लिए उमडेंगे। ऐसे में हावड़ा शहर के हावड़ा एसी मार्केट के पास राघव प्लाजा में अपना तीसरा स्टोर खोला है। भारत के विश्वसनीय ब्रांडों में से एक पन्ना डायमंड वर्ल्ड शोरूम के निदेशक पिंटू अग्रवाल ने कहा कि हावड़ा में नये शोरूम के साथ हमारा लक्ष्य विश्वस्तरीय और डायमंड की अनूठी ज्वैलरी खरीदने का अनुभव प्रदान करना है। इसके साथ ही ग्राहकों को रिटेल का बेजोड़ माहौल भी मिलेगा। इस शोरूम में हम अपने ग्राहकों को एक ही छत के नीचे हर अवसर के लिए खरीदारी करने का आनंद प्रदान करेंगे। उन्होंने कहा कि पन्ना डायमंड वर्ल्ड की शहर और देश के पूर्वी क्षेत्र में और विस्तार योजनाएं हैं और पन्ना डायमंड वर्ल्ड की यूएसपी फ्री डायमंड रिप्लेसमेंट, सबसे कम मेकिंग चार्ज और सबसे कम डायमंड रेट, बीआईएस हॉलमार्क और एसजीएल, आईजीआई प्रमाणित ज्वैलरी, प्रशंसा के साथ आजीवन मेंटेनेंस है। हीरों की, 15 दिनों के भीतर मुफ्त एक्सचेंज, ऑनलाइन शॉपिंग की सुविधा उपलब्ध है।

पिंटू अग्रवाल ने कहा कि नए स्टोर के लॉन्च के मौके पर पन्ना डायमंड वर्ल्ड अपने ग्राहकों को मेकिंग चार्ज पर 50 फीसदी की छूट, हीरे की कीमतों पर 25 फीसदी और 50,000/- की खरीद पर 0.25 ग्राम सोने का सिक्का मुफ्त दे रहा है। उन्होंने कहा कि हमारे सभी आभूषण हॉलमार्क वाले हैं और हीरे एसजीएल और आईजीआई जैसी दुनिया की सर्वश्रेष्ठ प्रमाणन कंपनी से प्रमाणित हैं।

बता दें कि पन्ना डायमंड वर्ल्ड ने अपना पहला स्टोर 2018 में कैमक स्ट्रीट कोलकाता में और दूसरा स्टोर, ग्लोब मॉल, लिंडसे स्ट्रीट में खोला था। पन्ना डायमंड वर्ल्ड के अनुसार हावड़ा ज़ोन एक बहुत ही परिपक्व और आभूषण प्रेमी ग्राहकों से भरा है, जो नवीन डिजाइनों की सराहना करते हैं और हीरे के बारे में बहुत जानकार हैं।

हेटेरो को सी.डी.एस.सी.ओ. की मंजूरी, बना सकेगी स्पूतनिक लाइट वैक्सीन

कोलकाता । दुनिया की जानी-मानी वर्टिकली इंटीग्रेटेड फार्मास्युटिकल ऑर्गनाइजेशन ‘हेटेरो’ ने घोषणा की है कि उसकी बायोलॉजिक्स शाखा ‘हेटेरो बायोफार्मा’ को सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (सी.डी.एस.सी.ओ.) से भारत में सीमित आपात इस्तेमाल के लिए ‘स्पुतनिक लाइट’ के निर्माण की मंज़ूरी मिल गई है। ‘हेटेरो’ भारत में पहली ऐसी बायोफार्मास्युटिकल कंपनी है, जिसे 18 वर्ष से अधिक उम्र के वयस्कों में कोविड-19 की रोकथाम के लिए,0.5 मिली की एकल खुराक वाले, स्थानीय रूप से निर्मित उत्पाद के निर्माण और मार्केटिंग (एम और एम) की मंज़ूरी मिली है। इस समय भारत में मंजूरशुदा अन्य सभी वैक्सीन की दो खुराकें लेनी पड़ती हैं।
स्पुतनिक लाइट, स्पुतनिकV का पहला घटक (पुनः संयोजक ह्यूमन एडेनोवायरस सीरो टाइप नंबर 26 (rAd26)) है –जो कि कोरोनावायरस रोग, कोविड-19 के लिए दुनिया की पहली पंजीकृत वैक्सीन है। फरवरी 2022 में, ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डी.सी.जी.आई.) ने भारत में एकल-खुराक वाली कोविड-19 वैक्सीन‘स्पुतनिक लाइट’ के आपात इस्तेमाल की अनुमति दी है।
डॉ. शुभदीप सिन्हा , सीनियर वी. पी. एंड हेड – क्लिनिकल डेवलपमेंट एंड मेडिकल अफेयर्स (सी.डी.एम.ए.) हेटेरो, ने कहा कि स्पुतनिक लाइट (स्पुतनिकVका घटक I) में, दोनों ग्लाइकोप्रोटीन विशिष्ट और वायरस – न्यूट्रलाइजिंग एंटीबॉडी के साथ-साथ सी डी 4 और आईएफएन – वाई  स्तरों के साथ,कोविड -19 के खिलाफ विशेष रूप से एंटीबॉडी के उच्च टाइटर्स पाए गए थे। स्पुतनिक लाइट ने भी SARS CoV-2 वायरस की ओमिक्रॉन किस्म के खिलाफ अपनी निष्क्रिय करने की गतिविधि दिखाई थी। इससे पहले किए गएस्पुतनिक Vके नैदानिक परीक्षणों ने विश्व स्तर पर कोविड-19 वायरसकी अन्य उप-किस्मों से सुरक्षा के लिए काफी अच्छे संकेत दिए हैं।”

एचआईटीके का सौम्यजीत गेट 2022 की परीक्षा में देश में तीसरे स्थान पर

कोलकाता । हेरिटेज इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एचआईटीके) के विद्यार्थी सौम्यजीत कुंडू ने गेट 2022 की परीक्षा में देश भर में तीसरा स्थान प्राप्त किया है। वह बी.टेक केमिकल इंजीनियरिंग के 2022 बैच का विद्यार्थी है। इस साल 9 लाख विद्यार्थियों ने गेट की परीक्षा दी और केमिकल इंजीनियरिंग विभाग के 1500 से अधिक विद्यार्थी परीक्षा में बैठे थे। सौम्यजीत का कुल स्कोर 929 है। एचआईटीके के मुताबिक वह एकमात्र स्वायत्त निजी संस्थान है जो केमिकल इंजीनियरिंग के लिए शीर्ष 3 रैंक धारकों में शामिल है। देश भर में बी.टेक. बायोटेक्नोलॉजी (बैच -2022) के विद्यार्थियों, शुभ्रज्योति घोष (13वां स्थान) एवं देबस्मिता शर्मा चौधरी (20वां स्थान), ने बेहतरीन प्रदर्शन किया। कोर इंजीनियरिंग में बी.टेक. – इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग (बैच – 2022) के तथागत राय ने देश भर में 136वाँ स्थान प्राप्त किया। गेट -2022 में कोर इंजीनियरिंग की परीक्षा में देश भर के 2 लाख विद्यार्थी परीक्षा में बैठ थे। एचआईटीके के सीईओ पी.के. अग्रवाल, प्रिंसिपल बासव चौधरी ने विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए उनकी सराहना की। सौम्यजीत पब्लिक सेक्टर में काम करना चाहता है जबकि शुभ्रज्योति आईआईटी में बायोटेक्नोलॉजी से इंटीग्रेटेड पीएचडी की तैयारी कर रहा है।

बीएचएस अल्यूमनी ने विद्यार्थियों को करवाया देशभक्तिपरक भ्रमण

विद्यार्थियों ने देखे बैरकपुर के स्मारक
कोलकाता । बिड़ला हाई स्कूल अल्यूमनी एसोसिएशन और प्रबन्धन ने बीएचएस के विद्यार्थियों का देशभक्तिपरक भ्रमण करवाया। विद्यार्थियों को बैरकपुर का भ्रमण करवाया गया जहाँ उन्होंने देशभक्ति की भावना को जागृत करने वाले स्मारक देखे। विद्या मंदिर के महासचिव सेवानिवृत्त मेजर जनरल वी.एन. चतुर्वेदी ने प्रेरक वक्तव्य दिया। विद्यार्थियों ने स्वाधीनता सेनानी बिन्दी तिवारी, मंगल पांडेय के बारे में जाना और 30 जनवरी को आयोजित होने वाले शहीद दिवस के महत्व से भी वे अवगत हुए। इसके साथ ही पीपीटी प्रस्तुति के माध्यम से बैरकपुर का इतिहास भी विद्यार्थियों ने जाना। इसके साथ ही पुलिस अकादमी, मोतीझील विद्यार्थियों ने देखे।

लंदन के टावर ब्रिज पर प्रवासी भारतीयों ने मनायी होली

लंदन । ब्रिटेन में रहनेवाले बंगाली महिला समुदाय द्वारा गठित एक गैर-लाभकारी संगठन “हेरिटेज बंगाल ग्लोबल” (एचबीजी) की ओर से लंदन के टॉवर ब्रिज में भव्यता के साथ मनाया गया। यह पहली बार है जब टॉवर ब्रिज पर इस तरह के उत्सव को इतने उत्साह और विविधता में एकता की सच्ची भावना के साथ मनाया गया है, यहां रहनेवाले विभिन्न जाति धर्म के भारतीय समुदाय के प्रवासी लोगों ने शामिल होकर पोस्ट-कोविड उत्सवों का आनंद उठाया। इस कार्यक्रम में एचबीजी के सदस्यों द्वारा आयोजित फ्लैश डांस में बांग्ला लोक गीतों का प्रदर्शन किया गया, जिसमें प्रियंका, शेमंती, तमालिका, अंजी, नमन, निर्लिप्ता और श्रेया, पियाली, डोयल, कार्तिका, ध्रुवी और देबाश्री ने अरित्री द्वारा किए गए कोरियोग्राफी में फ्लैश डांस का भव्य प्रस्तुतिकरण किया। एचबीजी के उपाध्यक्ष महुआ बेज और अरिजीत सरकार चंद्रेयी के साथ यास्मिता एवम् पद्मदास के तत्वाधान में इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। इसमें शामिल अतिथियों ने तरह-तरह के भारतीय स्वादिष्ट भोजन का आनंद उठाया।

हेरिटेज बंगाल ग्लोबल (एचबीजी) के निदेशक अनिर्बान मुखोपाध्याय ने कहा, इस आयोजन का मुख्य आकर्षण भारत की आजादी के 75 साल पूरे होने का जश्न था, जिसे फ्लैश डांस के दौरान तिरंगे के प्रदर्शन और पश्चिम बंगाल की बहू पौराणिक सांस्कृतिक उत्सव दुर्गा पूजा को यूनेस्को की मान्यता मिलने की खुशी के रूप में दर्शाया गया था। इस भव्य अयोजन में लंदन में रहनेवाले अन्य विदेशी नागरिकों ने भी बड़ी संख्या में शामिल होकर इस उत्सव का भरपूर आनंद लिया।  सुर साम्राज्ञी कोकिला स्वर्गीय लता मंगेशकर और बॉलीवुड के डिस्को किंग स्वर्गीय बाप्पी लाहिड़ी को एचबीजी के सदस्यों व कार्यक्रम में उपस्थित लोगों की तरफ से भावपूर्ण श्रद्धांजलि देकर कार्यक्रम का समापन किया गया।

 

सदियों पुराना है गुझिया का इतिहास

गुजिया की शुरुआत काफी पुरानी है। यह एक मध्यकालीन व्यंजन है जो मुगल काल से पनपा और कालांतर में त्योहारों की स्पेशल मिठाई बन गई। इसका सबसे पहला जिक्र तेरहवीं शताब्दी में एक ऐसे व्यंजन के रूप में सामने आता है जिसे गुड़ और आटे से तैयार किया गया था। ऐसा माना जाता है कि पहली बार गुजिया को गुड़ और शहद को आटे के पतले खोल में भरकर धूप में सुखाकर बनाया गया था और यह प्राचीन काल की एक स्वादिष्ट मिठाई थी। लेकिन जब आधुनिक गुजिया की बात आती है तब इसे सत्रहवीं सदी में पहली बार बनाया गया। गुजिया के इतिहास में ये बात सामने आती है कि इसे सबसे पहली बार उत्तरप्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में बनाया गया था और वहीं से ये राजस्थान, मध्यप्रदेश, बिहार और अन्य प्रदेशों में प्रचलित हो गई। कई जगह इस बात का जिक्र भी मिलता है कि भारत में समोसे की शुरुआत के साथ ही गुजिया भी भारत आयी और यहां के ख़ास व्यंजनों में से एक बन गयी। यह भी कहा जाता है कि गुझिया को ब्रज में भगवान कृष्ण को भोग के रूप में चढ़ाया जाता था, और वहीं से यह व्यंजन देश भर में फैल गया।

गुजिया और गुझिया में है अंतर 

अक्सर आपने लोगों को इस मिठाई के दो नाम लेते हुए सुना होगा गुजिया और गुझिया, आपमें से ज्यादातर लोग शायद नहीं जानते होंगे कि ये दोनों ही मिठाइयां अलग तरह से बनाई जाती हैं। वैसे तो दोनों ही मिठाइयों में मैदे के अंदर खोए या सूजी और ड्राई फ्रूट्स की फिलिंग होती है लेकिन इनका स्वाद थोड़ा अलग होता है। दरअसल जब आप गुजिया की बात करते हैं तब इसे मैदे के अंदर खोया भरकर बनाया जाता है, लेकिन जब आप गुझिया के बारे में बताते हैं तब इसमें मैदे की कोटिंग के ऊपर चीनी की चाशनी भी डाली जाती है। दोनों ही मिठाइयां अपने -अपने स्वाद के अनुसार पसंद की जाती हैं।

गुजिया के हैं अलग-अलग नाम 

इस स्वादिष्ट मिठाई गुजिया को देशभर में अलग-अलग नामों से जाना जाता है जहां महाराष्ट्र में इसे करंजी कहा जाता है वहीं गुजरात में इसे घुघरा कहा जाता है, बिहार में इस मिठाई को पेड़किया नाम दिया गया है वहीं उत्तर भारत में से गुजिया और गुझिया नाम से जानी जाती है।

अलग जगहों में गुजिया के रूप हैं अलग 

वैसे तो मुख्य रूप से गुजिया को बनाने के लिए मैदे को मोइन डालकर डो तैयार किया जाता है और इसकी लोई को पूड़ी की तरह से बेलकर उसमें खोया या भुनी हुई सूजी को उसमें चीनी मिलाकर भरा जाता है। फिर इस पूड़ी को मोड़कर किनारों को दबाकर गुजिया वाला आकार दिया जाता है। लेकिन कुछ और जगहों पर इसे अलग ढंग से भी बनाया जाता है। इसके ऊपर चाशनी की परत भी चढ़ाई जाती है और कुछ जगह गुजिया में ऊपर से रबड़ी मिलाकर भी खाई जाती है।
पहले सिर्फ खोया और सूजी की गुझिया ही मिलती थी लेकिन अब चाकलेट से लेकर जैम, सारे ड्रायफू्रट्स तक की ढेरों स्वाद वाली गुझिया मिलने लगी है। आहार विशेषज्ञों की मानें तो भारत में त्योहारों के अवसर पर बनाए जाने वाले व्यंजन लजीज स्वाद के साथ कैलोरी वाले भी होते हैं। गुझिया मिलाए जाने वाले सूखे मेवे, नारियल, गुड़ तथा अन्य सामग्री स्वास्थ्य के लिए पोषक होती है। सूखे मेवे में जो वसा, एंटीआक्सीडेंट्स, विटामिन ई, कैल्शियम, मैग्नेशियम, पोटेशियम से भरपूर होते हैं। वहीं नारियल के अपने ढेरों फायदे हैं। गुड़ तथा घी भी भरपूर कैलोरी वाले होते हैं। अब तो लो कैलोरी गुझिया तथा शुगर फ्री गुझिया, रोस्टेड गुझियज्ञ भी खासतौर पर बनने लगी हैं। कई दुकानदारां ने तो समोसा, मटर शेप, चंद्रकली, लौंग जैसे आकार भी दिए हैं।

बिहार में पिड़ुकिया नाम से मशहूर गुझिया का एक दिलचस्प किस्सा यूं भी है कि जब पुराने समय में 13-14 साल की उम्र में लड़कियों की शादी हो जाया करती थी तब लड़की पाक-कला का परिचय उसके गुझिया बनाने के ढंग से होता था। हांलाकि गुझिया मध्यकाल का पकवान है। गुझिया के बारे में कहा जाता है कि यह मिठाई मुख्य रूप से पश्चिमी देशों में मध्य एशिया होते हुए भारत आइ्र। आज गुझिया बनाने के लिए तरह-तरह के सांचे मिलते हैं, लेकिन मध्यकाल में गुझिया बनाने के लिए महिलाएं होली के कुछ दिनों पूर्व से ही नाखून काटना बंद कर देती थीं। गुझिया को किनारे से मोडऩे के लिए अपने नाखून का ही प्रयोग करती थीं।
(स्त्रोत साभार – हर जिंदगी एवं दैनिक जागरण एवं अन्य स्त्रोत)

वाणी प्रवाह – मार्च – प्रतियोगिता – चित्रांकन

प्रतिभागी -दिशा श्रीवास्तव, कक्षा – तीन, शिक्षण संस्थान – सेठ सूरजमल जालान बालिका विद्यालय

 

प्रतिभागी – अलीना नौशाद, कक्षा – तीन, शिक्षण संस्थान – सेठ सूरजमल जालान बालिका विद्यालय

सांस्कृतिक पुनर्निर्माण मिशन द्वारा होली मिलनोत्सव का आयोजन

कोलकाता । सांस्कृतिक पुनर्निर्माण मिशन द्वारा भारतीय भाषा परिषद में होली मिलनोत्सव का आयोजन किया गया। इस अवसर पर गीत, संगीत और नृत्य की आत्मीय व अभिनव प्रस्तुति हुई। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए मिशन के अध्यक्ष डॉ शम्भुनाथ ने कहा कि प्रेम और उल्लास के इस पर्व को हम अपने जीवन में भरें ताकि सब कुछ चटकदार हो। स्वागत वक्तव्य देते हुए विद्यासागर विश्वविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर व संस्कृतिकर्मी डॉ संजय जायसवाल ने कहा कि होली का उत्सव प्रेम, उल्लास और समानता का पर्व है। हमें अपनी सांस्कृतिक-साहित्यिक अभिरुचि एवं प्रस्तुतियों से इस प्राचीन लोकपर्व को ज्यादा व्यापक और मानवीय बना सकते हैं। राजेश मिश्रा, सेराज खान बातिश, स्कोटिश चर्च कॉलेज की प्रोफेसर डॉ गीता दुबे, खिदिरपुर कॉलेज की प्रोफेसर डॉ इतु सिंह, रमाशंकर सिंह, कालीचरण तिवारी, दीपक ठाकुर, मधु सिंह, राजेश सिंह,राजदीप साहा और सूर्यदेव रॉय ने होली की पारंपरिक गीतों से सभी को झुमाया तथा पूजा गुप्ता, रेशमी सेन शर्मा,आदित्य साव, निखिता पाण्डेय और सपना कुमारी ने नृत्य की प्रस्तुति की। कार्यक्रम का सफल संचालन अनीता राय तथा धन्यवाद ज्ञापन मृत्युंजय श्रीवास्तव ने दिया।इस अवसर पर अवधेश प्रसाद सिंह,आदित्य गिरि,सुशील कांति, मंजु श्रीवास्तव सहित बड़ी संख्या में साहित्य और संस्कृति प्रेमी उपस्थित थे।

होली पर विशेष – आन्ध्र प्रदेश के सिंहाचल में विराजमान हैं भगवान नृसिंह

होली पर्व भगवान विष्णु के चौथे अवतार नृसिंह और भक्त प्रह्लाद से जुड़ा है। अपने भक्त प्रह्लाद को उसके पिता हिरण्यकश्यप के अत्याचारों से बचाने के लिए भगवान विष्णु ने ये अवतार लिया था। आंध्रपदेश के विशाखापट्टनम से महज 16 किमी दूर सिंहाचल पर्वत पर भगवान नृसिंह का एक प्राचीन और विशाल मंदिर है। मान्यता है कि यह मंदिर सबसे पहले भगवान नृसिंह के परमभक्त प्रहलाद ने ही बनवाया था। यहां मौजूद मूर्ति हजारों साल पुरानी मानी जाती है। होली के मौके पर हम आपको इस मंदिर से जुड़ी खास बातें बता रहे हैं, जो इस प्रकार है…
चंदन के लेप से ढंकी रहती है प्रतिमा
– भगवान नृसिंह के इस मंदिर को सिंहाचलम कहा जाता है। इस मंदिर की खासियत ये है कि यहां भगवान नृसिंह लक्ष्मी के साथ हैं, लेकिन उनकी मूर्ति पर पूरे समय चंदन का लेप होता है।
– केवल अक्षय तृतीया को ही एक दिन के लिए ये लेप मूर्ति से हटाया जाता है, उसी दिन लोग असली मूर्ति के दर्शन कर पाते हैं। मान्यता है कि इस मंदिर को हिरण्यकशिपु के भगवान नृसिंह के हाथों मारे जाने के बाद प्रहलाद ने बनवाया था। लेकिन वो मंदिर सदियों बाद धरती में समा गया।
– मान्यता है कि इस मंदिर को प्रहलाद के बाद पुरुरवा नाम के राजा ने फिर से स्थापित किया था। पुरुरवा ने धरती में समाए मंदिर से भगवान नृसिंह की मूर्ति निकालकर उसे फिर से यहां स्थापित किया और उसे चंदन के लेप से ढ़ंक दिया।
– तभी से यहां इसी तरह पूजा की परंपरा है, साल में केवल वैशाख मास के तीसरे दिन अक्षय तृतीया पर ये लेप प्रतिमा से हटाया जाता है। इस दिन यहां सबसे बड़ा उत्सव मनाया जाता है। 13वीं शताब्दी में इस मंदिर का जीर्णोद्धार यहां के राजाओं ने करवाया था।

(साभार – टीवी 9 भारतवर्ष)

होली पर बिखर जाए स्वाद के रंग

उड़द दाल की चंदिया
सामग्री – उड़द की दाल ढाई सौ ग्राम धुली हुई या छिलके वाली, सरसों का तेल आवश्यकतानुसार, 50 ग्राम राई पीसी हुई, 2 हरी मिर्च, एक टुकड़ा अदरक, दो चुटकी हींग, नमक स्वादानुसार, काली मिर्च।

विधि – रात को उड़द की दाल पानी में भिगोकर रख दें। सुबह इसे पीस लें। पीसते समय इसमें मिर्ची और अदरक शामिल कर दें। ध्यान रहे कि मिक्सचर गाढ़ा हो ताकि आसानी से चंदिया बनाई जा सकें।अब कढ़ाही में तेल को गर्म कर लें। तेल गर्म होने के बाद हथेली पर थोड़ा सा दाल का पेस्ट लें और उसे गोल करते हुए चपटा कर लें। जब तेल खूब तेज गर्म हो जाए, तो गैस को धीमा कर दें और उसमें चंदिया तल कर निकाल लें। ध्यान रहे कि चंदिया का रंग सुनहरा हो जाना चाहिए।अब एक मिट्टी की बर्नी में पानी रखें और उसमें चंदिया, राई का मसाला, नमक, हींग, काली मिर्च डाल कर तैयार कर लें। आधे घंटे रखने के बाद आप देखेगी की पानी अब खट्टा हो चुका है और आपको चंदिया गल चुकी हैं। अब यह परोसने के लिए तैयार है।

अमृतसरी आलू कुलचा
सामग्री- भरावन के लिए- 6 उबले हुए आलू, 1/2 टी स्पून लाल मिर्च पाउडर, 2 हरी मिर्च कटी , 1 टी स्पून चाट मसाला, 1 टेबलस्पून हरा धनिया पत्ती, नमक स्वादानुसार
कुलचा बनाने के लिए सामग्री- 2 कप मैदा, 1/2 कप दही, 1/2 टी स्पून बेकिंग सोडा, 2 टेबलस्पून चीनी का बूरा, सूखा मैदा, नमक स्वादानुसार


विधि- आलू कुलचा बनाने के लिए सबसे पहले आलू को उबालकर उसके छीलके निकालकर उसे एक बर्तन में मैश कर लें। अब मैश किए हुए आलूओं में लाल मिर्च पाउडर, गरम मसाला, चाट मसाला, कटी हरी मिर्च, धनिया पत्ती और नमक डालकर अच्छे से मिक्स कर दें। अब एक दूसरे बर्तन में मैदा डालकर चीनी, बेकिंग सोडा, दही और स्वादानुसार नमक डालकर मिक्स कर लें। अब इस आटे को थोड़ा-थोड़ा पानी डालकर गूंथते हुए उससे सॉफ्ट आटा तैयार कर लें। आटा गूंथने के बाद उसे 20 मिनट के लिए अलग रख दें। तय समय के बाद आटे में एक चम्मच तेल डालकर उसे एक बार फिर अच्छे से गूंथ लें। अब इस आटे की बड़ी लोइयां तैयार कर लें। अब एक बड़ी लोई लेकर उसे हल्का सा दबाएं। अब इसमें सूखा मैदा लगाकर हल्का मोटा बेल लें।
अब इसमें एक चम्मच आलू का मिश्रण रखकर चारों ओर से पैक कर उसकी लोई बना लें। अब लोई के एक तरफ धनियापत्ती रखकर उसे दबा दें। उसके बाद लोई पलटकर उसमें थोड़ा सा मैदा लगाकर आप जैसा चाहें उस आकार में कुलचा उसे बेल लें। अब मीडियम आंच पर नॉनस्टिक तवा गर्म कर लें। अब बेले हुए कुलचे पर हल्का सा पानी लगाकर तवे पर डालें। ध्यान रखें तवे पर कुलचे की उस साइड को रखें जहां धनिया पत्ती न लगी हुई हो। पानी लगाने से कुलचा तवे पर अच्छी तरह से चिपक जाएगा। जब कुलचा एक तरफ से अच्छे से सिंक जाए तो तवे को गैस की आंच पर उल्टा कर दें। ऐसा करने से धनिया की ओर का कुलचा भी अच्छे से सिक जाएगा। कुलचा जब अच्छे से सिक जाए तो उसे तवे से हटा लें और उस पर मक्खन लगा दें। आपका आलू कुलचा बनकर तैयार हो चुका है। इसे दही या रायते के साथ सर्व करें।