Saturday, April 4, 2026
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चैत्र नवरात्रि विशेष : कसार देवी मंदिर, जहाँ देवी कात्यायनी के रूप में मां दुर्गा ने लिया था अवतार

उत्तराखंड अल्मोड़ा जिले में जिला मुख्यालय से लगभग 08 किलोमीटर दूर कसार देवी नमक एक गावं है। इसी कसार देवी गांव के कश्यप पर्वत माँ भगवती का मंदिर है। इस मंदिर में माँ भगवती के कात्यायनी रूप की पूजा की जाती है। और यह मंदिर कसार देवी मंदिर अल्मोड़ा के नाम से जगत विख्यात है। कसार देवी , ध्यान के लिए विश्व प्रसिद्ध कालीमठ पर्वत श्रृंखलाओं में आता है। यहाँ योग ध्यान के लिए लोग देश विदेश से आतें हैं। कसर देवी टेम्पल  अल्मोरा क्षेत्र और कालीमठ क्षेत्र को आधात्मिक ऊर्जा का आदर्श केंद्र माना गया है।

कसार देवी मंदिर का इतिहास और पौराणिक कहानी 

दूसरी शताब्दी में बने कसार देवी मंदिर में १९७०-८० डच सन्यासियों का प्रमुख आश्रय था। कहा जाता है की १९९० में स्वामी विवेकानंद  ध्यान के लिए यहाँ आये थे। यहाँ १९६०-७० के दशक में हिप्पी आंदोलन बहुत प्रसिद्ध हुवा था। पौराणिक कथाओं के अनुसार ,मंदिर में माँ दुर्गा के आठ रूपों में से एक रूप “देवी कात्यायनी” की पूजा की जाती है। इस स्थान में “माँ दुर्गा” ने शुम्भ-निशुम्भ नाम के दो राक्षसों का वध करने के लिए “देवी कात्यायनी” का रूप धारण किया था।

कसार देवी मंदिर का रहस्य 

दुनियाभर में वैसे तो ऐसी जगहों की कोई कमी नहीं है, जो अपनी चमत्कारी वजह से जानी जाती हैं। ये वही जगहें होती हैं जिनके चमत्कारी हचलचों को देखने के लिए भारी तादाद में लोग यहां आते हैं और अनुभव प्राप्त करते हैं। ऐसा नहीं है कि ये चमत्कारी जगहें सिर्फ विदेशों में ही है। बल्कि भारत में भी ऐसे कई चमत्कारी जगहें मौजूद हैं। उन्हीं में से आज हम एक ऐसी ही जगह की बात करेंगे जो  अपने चमत्कारी शक्ति के लिए जाना जाता है। दरअसल हम जिस जगह की बात कर रहे हैं वो एक मंदिर है ,जो उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले में स्थित है। उत्तराखंड के अल्मोड़ा ज़िले में स्थित ये चमत्कारी मंदिर, जो अपनी खास चुंबकीय शक्ति के लिए जाना जाता है। इस मंदिर की शक्ति से नासा के वैज्ञानिक भी है हैरान।

इस मंदिर का यह रहस्यमयी चमत्कार अब इतना प्रसिद्ध हो चुका है कि यहां नासा के वैज्ञानिकों ने भी खूब रिसर्च की, लेकिन वे यहां से खाली हाथ ही वापस लौट गए। दरअसल मंदिर के आस-पास का पूरा इलाका एक शक्तिशाली चुंबकीय ताकत से परिपूर्ण है। इस चमत्कारी मंदिर का नाम कसार देवी मंदिर है। कसार देवी में रेडिओएक्टिव  चुम्बकीय पुंज मिलने के कारण विश्व प्रसिद्ध खोजी संस्था  नासा इसकी खोज कर रही है। और नासा वालों ने इस क्षेत्र को चिह्नित  करने के लिए इसका नाम kasar devi Devi GPS -8 रखा गया है।उत्तराखंड का यह पूरा क्षेत्र ठीक उसी तरह से मैगनेटिक एनर्जी से चार्ज रहता है जैसे ब्रिटेन का स्टोन हेंग और पेरू केमाचू- पिच्चू। ये दोनों इलाके भी ठीक ऐसी ही विषेश शक्ति से चार्ज रहते हैं। इस मंदिर के लिए कहा जाता है कि यह जगह आध्यात्मिक साधना के लिए एक उत्तम जगह है। इतना ही नहीं खुद स्वामी विवेकानंद भी इस जगह साधना के लिए आए थे।इस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि यहां खुद मां दुर्गा प्रकट हुईं थी। मंदिर तक पहुंचने के लिए सैकड़ों सीढ़ियों को चढ़ना होता है, जिसे भक्त बिना किसी दिक्कत के आसानी से चढ़ जाते हैं।यह वह पवित्र स्थान है , जहां भारत का प्रत्येक सच्चा धर्मालु व्यक्ति अपने जीवन का अंतिम काल बिताने को इच्छुक रहता है। अनूठी मानसिक शांति मिलने के कारण यहां देश-विदेश से कई पर्यटक आते हैं प्रतिवर्ष कार्तिक पूर्णिमा में (नवम्बर-दिसम्बर) को कसार देवी का मेला लगता है |
(साभार – देवभूमिदर्शन डॉट इन)

धरती प्राकृतिक नववर्ष गुड़ी पड़वा यानी ध्वज प्रतिपदा

संपूर्ण भारत में यह पर्व मनाया जाता है भले ही इस पर्व का नाम भारत के सभी प्रांतों में अलग-अलग हो। सवाल यह उठता है कि गुड़ी पड़वा क्यों मनाया जाता है। आओ जानते हैं।

– गुड़ी पड़वा यानी ध्वज प्रतिपदा का पर्व नव वर्ष के रूप में मनाया जाता है, जिसे हिन्दू नव संवत्सर कहते हैं। गुड़ी पड़वा मनाए जाने के कई कारण है। पहला यह कि भगवान ब्रह्मा ने सूर्योदय होने पर सबसे पहले चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को सृष्टि की संरचना शुरू की थी। उन्होंने इस प्रतिपदा तिथि को सर्वोत्तम तिथि कहा था इसलिए इसको सृष्टि का प्रथम दिवस भी कहते हैं। ब्रह्म पुराण अनुसार चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के दिन ब्रह्मा ने सृष्टि रचना की शुरुआत की थी।

– भारतीय मान्यता के अनुसार इसी दिन से वसंत का प्रारंभ होता है। चैत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा वसंत ऋतु में आती है। इस ऋतु में संपूर्ण सृष्टि में सुंदर छटा बिखर जाती है। पतझड़ के बाद नए पत्ते आने प्रारंभ होते हैं। प्रकृति का एक चक्र पूरा होकर दूसरा चक्र प्रारंभ होता है। इसीलिए गुड़ी पड़वा मनाई जाती है।

– चैत्र माह में प्रकृति और धरती का एक चक्र पूरा होता है। धरती के अपनी धूरी पर घुमने और धरती के सूर्य का एक चक्कर लगाने लेने के बाद जब दूसरा चक्र प्रारंभ होता है असल में वही नववर्ष होता है। नववर्ष में नए सिरे से प्रकृति में जीवन की शुरुआत होती है। वसंत की बहार आती है। इसीलिए गुड़ी पड़वा मनाते हैं। वैज्ञानिक कहते हैं कि 21 मार्च को पृथ्वी सूर्य का एक चक्कर पूरा कर लेती है, ‍उस वक्त दिन और रात बराबर होते हैं। वैज्ञानिक कहते हैं कि इसी दिन से धरती प्राकृतिक नववर्ष प्रारंभ होता है। इसी दिन से रात्रि की अपेक्षा दिन बड़ा होने लगता है।

– ‘प्रतिपदा’ के दिन ही पंचांग तैयार होता है। महान गणितज्ञ भास्कराचार्य ने इसी दिन से सूर्योदय से सूर्यास्त तक दिन, महीने और वर्ष की गणना करते हुए ‘पंचांग’ की रचना की। इसी दिन से ग्रहों, वारों, मासों और संवत्सरों का प्रारंभ गणितीय और खगोल शास्त्रीय संगणना के अनुसार माना जाता है।

– इसी दिन से सतयुग की शुरुआत भी मानी जाती है। इसी दिन भगवान विष्णु ने मत्स्य अवतार लिया था। इसी दिन से नवरात्र की शुरुआत भी मानी जाती है। इसी दिन को भगवान राम का राज्याभिषेक हुआ था और पूरे अयोध्या नगर में विजय पताका फहराई गई थी।

– ज्योतिषियों के अनुसार इसी दिन से चैत्री पंचांग का आरम्भ माना जाता है, क्योंकि चैत्र मास की पूर्णिमा का अंत चित्रा नक्षत्र में होने से इस चैत्र मास को नववर्ष का प्रथम दिन माना जाता है। इसीलिए गुड़ी पड़वा मनाया जाता है।

‘प्रयोगधर्मी और विद्यार्थियों पर केंद्रित होगी भविष्य की शिक्षा प्रणाली’

कोलकाता। शिक्षा का क्षेत्र प्रयोगधर्मी होगा और यह विद्यार्थियों पर केन्द्रित होगा। सीआईआई द्वारा आयोजित एडुकेशन ईस्ट समिट को सम्बोधित करते हुए आईआईईएसटी के पूर्व निदेशक डॉ. अजय राय ने उक्त बातें कहीं। उन्होंने विद्यार्थियों को, विशेषकर स्कूली विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने के लिए शिक्षकों का आह्नान किया। वे समिट के उद्घाटन सत्र को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सामान्य शैक्षणिक गतिविधियों से आगे जाकर शिक्षकों को काम करना होगा…वे कहानी सुनाने की शैली अपना सकते हैं। उन्होंने प्रश्न पूछने पर भी जोर दिया और सीआईआई को इस क्षेत्र में सभी के साथ काम करने का परामर्श देते हुए कहा कि कोलकाता में लॉजिक/ स्टैटिस्टक्स एवं गणित के लिए शिक्षण केन्द्र स्थापित किये जाने चाहिए।
एडोब इंडिया की उपाध्यक्ष एवं प्रबन्ध निदेशक प्रतिभा महापात्र ने अपने मूल वक्तव्य में मष्तिष्क को विकसित करने वाली शिक्षण व्यवस्था पर जोर दिया। तकनीक, संरचना, संसाधन का उपयोग करने पर एडुटेक कम्पनियों के लिए शिक्षा के क्षेत्र में काफी सम्भावनाएं हैं। सीआईआई की राष्ट्रीय शिक्षा परिषद के चेयरमैन डॉ. बी. वी. आर. मोहन रेड्डी ने कहा कि शिक्षा का भविष्य प्रयोगधर्मी और विद्यार्थी केन्द्रित होगा। उन्होंने शिक्षकों के प्रशिक्षण पर जोर देने और शिक्षा को स्किल यानी कौशल पर केन्द्रित करने की भी बात कही। ब्रिटिश काउंसिल के निदेशक (पूर्व एवं उत्तर पूर्व) डॉ. देवांजन चक्रवर्ती ने कहा कि डिजिटल शिक्षा के प्रभावों का आकलन करना होगा।
उद्घाटन सत्र में सीआईआई पूर्वी क्षेत्र की की एडुकेशन सबकमेटी के मेंटर मदन मोहनका ने विशेष वक्तव्य दिया। सीआईआई की पूर्वी क्षेत्र की की एडुकेशन सबकमेटी के चेयरमैन एवं हेरिटेज ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के सीईओ ने शिक्षा के क्षेत्र में हो रहे सुधारों पर चर्चा की। धन्यवाद ज्ञापन इस सबकमेटी की को – चेयरपर्सन ब्रतती भट्टाचार्य़ ने दिया।
इस दो दिवसीय सम्मेलन में शिक्षा से सम्बन्धित कई अन्य विषयों पर चर्चा हुई।

बेहतरीन सुविधाओं के साथ निवेश के लिए तैयार है बंगाल

कोलकाता । पश्चिम बंगाल में व्यवसाय की व्यापक सम्भावनाएं हैं। मानव संसाधन, निवेशकों के अनुकूल नीतियों के साथ बंगाल निवेश के लिए तैयार है। एसोचेम द्वारा हाल ही में चेन्नई में आयोजित सरकार व उद्योग जगत के बीच परिचयात्मक सत्र को सम्बोधित करते हुए वेस्ट बंगाल इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (डब्ल्यूबीआईडीसी) के चेयरमैन राजीव सिन्हा ने उक्त बातें कहीं। उन्होंने बंगाल को तेजी से विकसित होती अर्थव्यवस्था बताया। इस कार्यक्रम में फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्रीज एंड हॉर्टिकल्चर विभाग केअतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुब्रत गुप्ता, इन्फॉरमेशन टेक्नोलॉजी एं व इलेक्ट्रानिक्स विभाग के सचिव रणधीर कुमार, वेस्ट बंगाल मिनरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन के सीएमडी पी. मोहनगाँधी और श्रम विभाग के प्रिंसिपल सेक्रेटरी बरुण राय उपस्थित थे। इस परिचर्चा में एसोचेम के 200 उद्योगपति सदस्य शामिल थे और 20 बैठकें आयोजित हुईं। एसोचेम तमिलनाडु के को चेयरमैन अभय श्रीमाल जैन ने बंगाल में निवेश की बेहतर सम्भावनाओं पर प्रकाश डाला। एसोचेम के पूर्वी क्षेत्र के चेयरमैन एवं राष्ट्रीय कमेटी के सदस्य रवि अग्रवाल ने संरचना, औद्योगिक नीतियों के सन्दर्भ में बंगाल की सराहना की।

द ओरिएंटल चेम्बर ऑफ कॉमर्स की 89वीं वार्षिक बैठक

कोलकाता । द ओरिएंटल चेम्बर ऑफ कॉमर्स की 89वीं वार्षिक बैठक हाल ही में आयोजित की गयी। बैठक में मुख्य अतिथि के रूप में कोलकाता नगर निगम के मेयर सह शहरी विकास एवं निगम मामलों के मंत्री फिरहाद हकीम उपस्थित थे। बैठक में निकासी व्यवस्था, ठोस वर्ज्य पदार्थ प्रबन्धन, स्ट्रीट लाइट, परिवहन, आवास, शहरी विकास, निवेश के सन्दर्भ में पश्चिम बंगाल, भारत – जापान के द्विपक्षीय सम्बन्ध, मीडिया की भूमिका समेत कई मुद्दों पर चर्चा हुई। बैठक में कोलकाता में जापान के कार्यकारी कौंसुल जनरल एच. ई. यामासाकी मातसुतारो, कोलकाता में ऑस्ट्रेलिया कार्यकारी कौंसुल जनरल डैनियल सैम समेत कई अन्य लोग उपस्थित थे।

सुशीला बिड़ला गर्ल्स स्कूल में बिखरे होली के रंग

कोलकाता । सुशीला बिड़ला गर्ल्स स्कूल में प्राथमिक विभाग की छात्राओं ने जमकर होली मनायी। नर्सरी एवं किंडरगार्टन की छात्राओं ने अपने प्रिय रंग से एक नया रंग बनाना सीखा। एम एस पेंट से छात्राओं ने कई वाटरगन डिजाइन किये। शिक्षिकाओं ने उनको भक्त प्रह्लाद की कहानी सुनायी। पहली एवं दूसरी कक्षा की छात्राओं ने कविताएं व गीत सुनाकर होली मनायी। तीसरी और चौथी कक्षा की छात्राओं ने होलिका दहन की कहानी सुनी। पाँचवीं कक्षा की छात्राओं को पर्य़ावरण के अनुकूल होली खेलने के तरीके बताये गये।

भारतीय होम्योपैथी दवाओं का प्रयोग करें : एस.एन. राय

कोलकाता । एसोचैम आयुष नेशनल टास्क फोर्स के अध्यक्ष डॉ सुदीप्त नारायण रॉय ने कहा कि भारतीय होम्योपैथी क्षेत्र आयुष उत्पादों के निर्यात में अग्रणी हो सकता है। गत 27 मार्च को रथिंद्र मंच, जोड़ासांको ठाकुरबाड़ी में डॉ साहिदुल इस्लाम, राष्ट्रीय संयुक्त सचिव, एचओएमएआई के नेतृत्व में आयोजित पीसीएम अस्पताल और मेडिकल कॉलेज के पहले एलुमनी सम्मेलन में उन्होंने कहा कि आयुष एक उभरता क्षेत्र है।
डॉ रॉय ने कहा कि विश्व स्तर पर होम्योपैथी उद्योग 14 फीसदी सीएजीआर से बढ़ रहा है और 2027 तक 18.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है।
उन्होंने सम्मेलन में शामिल 450 से अधिक होम्योपैथी चिकित्सकों से भारत में निर्मित होम्योपैथिक दवाओं को बढ़ावा और संरक्षण देकर 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था की राष्ट्रीय महत्वाकांक्षा में सक्रिय रूप से भाग लेने की अपील की। उन्होंने आश्वासन दिया कि, भारतीय होम्योपैथी दवाओं के गुणवत्ता मानक आयातित यूरोपीय दवाओं के बराबर हैं।
उन्होंने कहा, उद्योग में 20 फीसदी वार्षिक वृद्धि दर के साथ भारत को होमियोपैथी का होम माना जाता है। 3 लाख से अधिक होम्योपैथ के साथ, भारत निकट भविष्य में समग्र स्वास्थ्य देखभाल का एक गंतव्य होगा।

भारत में पर्यावरण संरक्षण क्षेत्र में ब्लॉक -चेन तकनीक लाया संकल्पतरू फाउंडेशन

पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में काम करने वाला पहला भारतीय एनजीओ बना

कोलकाता । भारत के प्रमुख आईटी इनेबल्ड एनजीओ में से एक, संकल्पतरु फाउंडेशन ने आज ब्लॉकचेन तकनीक को अपनाने के लिए पॉलीगॉन के साथ जुड़ने की घोषणा की, जिसके बाद संकल्पतरु फाउंडेशन पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में काम करने वाला पहला भारतीय एनजीओ बन जाएगा। इससे संकल्पतरु फाउंडेशन के दानदाताओं को साझा की जाने वाली जानकारियों और पेड़ों के डाटा की सत्यता की जाँच करने में मदद मिलेगी, जिससे फाउंडेशन के प्रति उनका विश्वास बढ़ेगा।

कहा जाता है कि एक प्रमुख कृषि उत्पादक के रूप में, पश्चिम बंगाल में खेती का अच्छा हस्तक्षेप है, इसके बावजूद राज्य के सीमांत किसानों को कम बिक्री दरों के कारण अपनी फसलों पर अच्छा लाभ नहीं मिलता है। संकल्प तरु ने स्थायी वृक्षारोपण कार्यक्रम के विकास के माध्यम से राज्य में जैव विविधता को बढ़ावा देने की प्रतिज्ञा के साथ परियोजना श्यामोलीमा की शुरुआत की, इस प्रकार परियोजना लाभार्थियों के लिए कुशल और प्रभावी आत्म-उत्साही मॉडल तैयार किया।

इस अवसर पर, संकल्पतरु फाउंडेशन के संस्थापक अपूर्व भंडारी ने कहा, “संकल्पतरु ने हमेशा विभिन्न रचनात्मक प्रयासों के जरिए अग्रणी भूमिका निभाई है और तकनीक को इस उद्देश्य के करीब लेकर लाया है। ब्लॉक-चैन ट्री यूआरएल जैसी डिजिटल जानकारी इकठ्ठा करने में मदद करता है, जिसमें ट्री इमेज, ट्री आईडी और उसकी जियो-लोकेशन जैसी बुनियादी जानकारी होती है। इसकी खासियत यह है कि एक बार इसमें जानकारी दर्ज करने के बाद उसमें अनधिकृत व्यक्ति द्वारा किसी तरह का बदलाव करने या उसे हटाने की कोई गुंजाइश नहीं होती है। ब्लॉक-चैन के जरिए हम अपने दानदाताओं और प्रायोजकों के बीच विश्वास पैदा करेंगे और उन्हें जलवायु परिवर्तन को रोकने के लिए लाखों पेड़ लगाने के लिए प्रोत्साहित करेंगे।”

ब्लॉक-चैन एक इनफार्मेशन मैनेजमेंट टेक्नोलॉजी है जो अनधिकृत व्यक्ति द्वारा डाटा में किसी भी तरह के बदलाव करने, उसे हैक और करप्ट करने से रोकने के लिए डिस्ट्रिब्यूटेड प्रोसेसिंग आर्किटेक्चर का उपयोग करती है। यदि कोई डेटाबेस में किसी भी एक रिकॉर्ड को बदलने या उससे छेड़छाड़ करने की कोशिश करता है तो सिस्टम बाकी जानकारियों के साथ उसे क्रॉस-रेफरेंस करेगा, इस तरह आसानी से गलत जानकारी को खोजकर ठीक किया जा सकता है। यह सिस्टम घटनाओं को सटीक और पारदर्शी तरीके से दर्ज करता है। इस तरह, संकल्पतरु यह सुनिश्चित करेगा कि उसके व्यक्तिगत और कॉर्पोरेट दानदाताओं द्वारा लगाए गए पेड़ कभी भी डुप्लिकेट या किसी और को फिर से नहीं सौंपे जाते हैं। डिजिटल फ़ॉरेस्ट में लगाए गए प्रत्येक पेड़ पर यूनिक डेटा और दानदाताओं को दी गई जानकारी को क्रॉस-वेरीफाई करने के लिए एक प्लेसहोल्डर होगा।

ग्रीन पेट्रोंस पर्यावरण के प्रति जागरूक हैं और अपने ग्रह पर जीवन को बेहतर बनाने के लिए अपना भरोसा बनाये रखते हुए समय और पैसा दोनों ही देकर अपने हिस्से का कर्तव्य पूरा करते हैं। संकल्पतरु और पोलीगोनकी ब्लॉक-चेन पहल यह सुनिश्चित करती है कि हर व्यक्ति के पेड़ की जानकारी पूरी तरह से सही हो और उसमें किसी भी तरह से बदलाव करने संभावना ना हो। यह इंटीग्रेशन डेटा को इकठ्ठा करने और एक्सेस करने के तरीके में क्रांतिकारी बदलाव की उम्मीद है। यह इंटीग्रेशन तकनीकी दुनिया में नए पर्यावरण संरक्षण के लिए नए अवसर लाने का एक बेहतरीन उदाहरण है।

 

भवानीपुर कॉलेज में वार्षिक इंटर कॉलेज प्रबंधन उत्सव ‘बॉनफायर 22’ 

कोलकाता । शिक्षा तथ्यों की सीख नहीं है, बल्कि दिमाग द्वारा सोचने का प्रशिक्षण है। इस उक्ति को ध्यान में रखते हुए, भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज के बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन विभाग ने छात्रों को अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन करने के लिए एक मंच प्रदान करने के लिए, जिओआ द्वारा प्रायोजित अपने वार्षिक इंटर-कॉलेज प्रबंधन उत्सव, ‘बोनफायर’ की मेजबानी की।
बॉनफायर 22की परिकल्पना होलिका दहन में बुराइयों के विनाश के आधार पर की गई है। बॉनफायर बॉन्डिंग-ऑर्गनाइजिंग-नेगोशिएशन-फोकस-इंट्यूशन-रिस्पॉन्सिबिलिटी और एंटरप्राइज का संक्षिप्त रूप है। तीन दिवसीय उत्सव का उद्घाटन समारोह ललित ग्रेट इस्टर्न में आयोजित किया गया जिसका उद्देश्य छात्रों की प्रतिस्पर्धात्मक भावना को बाहर लाना और उन्हें परखना है।उद्घाटन समारोह 24 मार्च, 2022 को आयोजित किया गया था। कॉलेज के डायरेक्टर जनरल डॉ. सुमन मुखर्जी ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया। साथ में, प्रमुख अतिथियों में रजवाड़ा समूह के प्रवीण अग्रवाल, वुडलैंड्स मल्टी स्पेशियलिटी हॉस्पिटल लिमिटेड की निदेशक डॉ रूपाली बसु और ईज़ी नोट्स स्टेशनरी प्राइवेट लिमिटेड की संस्थापक शालिनी एस विश्वास रहीं।

उद्घाटन समारोह की शुरुआत भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज, देवज्योति बनर्जी और माधव मोहता के बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन विभाग के छात्र अध्यक्षों के परिचय भाषण के साथ हुई। एम्सीस अदा बक्स और अनुषा अकबर द्वारा एक उद्घाटन भाषण दिया गया जिसमें उन्होंने सभी कॉलेजों का स्वागत किया और कॉर्पोरेट संस्कृतियों के सभी आयामों से होने वाले तीस से अधिक होने वाले आयोजनों के बारे में चर्चा की। गणमान्य अतिथियों का परिचय कराया गया और उन्हें गिफ्ट हैम्पर्स देकर सम्मानित किया गया।
भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज के महानिदेशक प्रो. डॉ. सुमन कुमार मुखर्जी ने उद्घाटन भाषण देते हुए उन्होंने “बोनफायर” नाम के महत्व पर प्रकाश डाला और कॉलेज की ओर से कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी के लिए छात्रों की सराहना की। प्रमुख अतिथियों में रजवाड़ा समूह के युवा उद्यमी प्रवीण अग्रवाल ने अपने वक्तव्य में उद्यमशीलता की दुनिया में अपने जीवन के अनुभवों के बारे में और रियल एस्टेट की दुनिया को धन्यवाद संभालने में किन- किन चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, बातें विद्यार्थियों से साझा की । उन्होंने महत्वाकांक्षी युवा उद्यमियों के लिए आज की दुनिया में मौजूद प्रतियोगिताओं के साथ-साथ व्यवसाय को सफलतापूर्वक संचालित करने के लिए अपने नेतृत्व कौशल को सही जगहों पर कैसे इस्तेमाल किया जाए, इस पर भी चर्चा की।
वुडलैंड्स मल्टी स्पेशियलिटी हॉस्पिटल लिमिटेड की निदेशक और सीईओ डॉ रूपाली बसु ने देश के चिकित्सा मुद्दों पर चर्चा करते हुए अपने भाषण की शुरुआत की और वर्तमान समय में अपने अनुभवों और संघर्षों की चर्चा की उन्होंने इस बात पर भी चर्चा की कि वे कठिन समय में अपने रोगियों के साथ कैसे व्यवहार करते हैं और समय के साथ कैसे एक व्यवसाय का संचालन और संगठन सुचारू रूप से करते हैं। शिक्षा ग्रहण करने के बाद आपको कर्म क्षेत्र में अलग ही चुनौतियाँ आती हैं, कॉर्पोरेट जगत तो बिल्कुल ही भिन्न हैं।
ईज़ी नोट्स स्टेशनरी प्राइवेट लिमिटेड की संस्थापक शालिनी एस विश्वास व्यापारिक जगत में एक किंवदंती की तरह हैं और भारत के सबसे सफल उद्यमियों में से एक है। उनका संबोधन व्यवसाय और स्टार्ट-अप के क्षेत्र में महिला सशक्तिकरण की चर्चा के साथ शुरू हुआ। उन्होंने बताया कि महामारी कोरोना के दौरान अपने व्यवसाय को बनाए रखने के लिए हाउसिंग सोसाइटियों में स्टेशनरी कैंप लगाए। अपनी प्रबंधन टीम को समझाया कि किसी व्यवसाय या संगठन के लिए अतिरिक्त विचारों को प्रबंधित करना और उसको कार्य में परिणत करवाना महत्वपूर्ण होता है।
भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज के बीबीए विभाग के समन्वयक डॉ त्रिदीब सेनगुप्ता ने निम्नलिखित जुनून के बारे में अपने बहुमूल्य विचार सामने रखे और गणमान्य अतिथियों का परिचय दिया और बताया कि उनकी भूमिका छात्र जीवन में कैसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
कॉलेज के महानिदेशक प्रो डॉ. सुमन कुमार मुखर्जी द्वारा पूर्व अध्यक्ष दीक्षा झा और खिजिर जाफरी का अभिनंदन किया गया। बोनफायर’22 का सबसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम ‘फैशन शो’ ने धमाकेदार शुरुआत की और प्रतियोगियों और दर्शकों दोनों को उत्साहित किया। फैशन शो के प्रतिभागियों में द हेरिटेज एकेडमी, सिस्टर निवेदिता यूनिवर्सिटी, लोरेटो कॉलेज, द एडमास यूनिवर्सिटी और लैक्मे अकादमी के मेकअप कलाकारों द्वारा सेंट जेवियर्स यूनिवर्सिटी को खूबसूरत दिन में तब्दील कर दिया गया, जिसके बाद उन्होंने अपने मॉडलिंग कौशल का प्रदर्शन रैंप शो द्वारा किया।
समारोह के इवेंट मैनेजमेंट टीचर कोऑर्डिनेटर प्रो. कौशिक बनर्जी और प्रशासन का पूरा संयोजन रहा। स्वयंसेवकों, कॉलेज के प्रतिनिधियों और इवेंट मैनेजमेंट टीम का सहयोग रहा। ज्ञान को व्यावहारिक उपयोग में लाने के बाद ही ज्ञान बनता है। भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज के बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन विभाग द्वारा आयोजित तीन दिवसीय इंटर-कॉलेज मैनेजमेंट फेस्ट – बोनफायर’22 कोलकाता के आसपास के विभिन्न कॉलेजों ने भाग लिया।
फेस्ट के सभी आयोजनों में मार्केटिंग, मानव संसाधन प्रबंधन से लेकर वित्त तक की प्रतिभाओं के सभी आयामों को शामिल किया गया। सभी छात्रों ने सक्रिय भागीदारी निभाई और स्वयं को जीतने की भावना के साथ प्रस्तुति दी। बोनफायर’22 का समापन समारोह जुबली हॉल में आयोजित किया गया था। समारोह की शुरुआत छात्र अध्यक्ष माधव मोहता और देवज्योति बनर्जी ने छात्रों और पूरी इवेंट मैनेजमेंट टीम के साथ-साथ इवेंट मैनेजमेंट टीचर – कोऑर्डिनेटर, प्रो कौशिक बनर्जी को धन्यवाद दिया।
वैभव शर्मा और दिशा रूपानी ने छात्रों को एक खेल का आयोजन किया जिसमें बोर्ड की बैठक, वाद-विवाद और एआईपीपीएम जैसे प्रमुख सार्वजनिक कार्यक्रमों से लेकर खजाने की खोज जैसे मनोरंजक कार्यक्रमों थे जिसमें प्रतिभागियों ने भाग लिया।
इसके बाद विजेताओं को प्रमाण पत्र देकर भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज के छात्र मामलों के डीन प्रो दिलीप शाह अपने वक्तव्य में कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र में बोलना बहुत ही महत्वपूर्ण है और छात्रों को भागीदारी के लिए प्रेरित किया जो उनके भविष्य के लिए महत्वपूर्ण है सभी विजेताओं को प्रो. दिलीप शाह द्वारा ट्राफियाँ प्रदान की गईं। फेस्ट में तृतीय स्थान जेडी बिड़ला इंस्टीट्यूट, द्वितीय स्थान सेंट जेवियर्स विश्वविद्यालय और प्रथम स्थान भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज के बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन विभाग को प्राप्त हुआ जिसने सभी आयोजनों में बेहतर प्रदर्शन और समन्वय किया। इस कार्यक्रम की जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।

सिलीगुड़ी के फूलबाड़ी में मनाया गया बांग्लादेश का 51वाँ स्वाधीनता दिवस

भारत – बांग्लादेश की अन्तर्राष्ट्रीय सीमा के पंचगुड़ा में आयोजित हुआ समारोह

सिलीगुड़ी । सिलीगुड़ी के फुलबाड़ी में स्थित अंतरराष्ट्रीय भारत-बांग्लादेश सीमा पर गत 26 मार्च को बांग्लादेश के 51 वे स्वाधीनता दिवस समारोह धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर भारत एवं बांग्लादेश के उच्चाधिकारी उपस्थित थे। दोनों देशों के जवानों ने दोनों देशों का ध्वज फहराया एवं सलामी दी। दोनों देशों के अधिकारियों के बीच एक दूसरे को सम्मानित करने के साथ-साथ मुंह भी मीठा करवाया।

उत्तर बंगाल फ्रंटियर के आईजी अजय सिंह ने दोनों देशों की आपसी मैत्री को और मजबूत करने पर जोर दिया। इसके साथ ही सुरक्षा व्यवस्था के क्षेत्र में दोनों देशों की सहयोग की बात कही। वही बांग्लादेश के बीजेबी के कर्नल ने अपने वक्तव्य में इस दिन को विशेष बताया। गौरतलब है कि पिछले 2 सालों से कोरोना नामक के कारण भारत बांग्लादेश सीमा पर सभी गतिविधियां बंद थीं।अधिकारियों ने कहा कि अब सुरक्षा सम्बन्धी नियमों का पालन करते हुए सभी गतिविधियां बहाल कर दी जायेंगी। इस अवसर पर भारत तथा बांग्लादेश के आम लोग मौजूद थे ।