Tuesday, April 7, 2026
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वित्त वर्ष 2021-22 में बढ़कर 66,440 हुई पेटेंट आवेदनों की संख्या

नयी दिल्ली । वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने मंगलवार को कहा कि पेटेंट दाखिल करने की संख्या वित्त वर्ष 2014-15 के 42,763 से बढ़कर वित्त वर्ष 2021-22 में 66,440 हो गई। मंत्रालय ने कहा है कि सरकार द्वारा देश में बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर) व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कदम उठाए गए हैं जिसकी वजह से पेटेंट आवेदनों की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है।

मंत्रालय ने कहा कि भारत ने वित्त वर्ष 2014-15 में 5,978 की तुलना में वित्त वर्ष 2021-22 में 30,074 पेटेंट प्रदान किए, जो लगभग पांच गुना ज्यादा है। 2016 में पेटेंट की समीक्षा में जहां 72 महीनों का समय लगता था वह अब घटकर 5-23 महीने रह गया है। मंत्रालय ने कहा, ‘‘पिछले 11 वर्षों में पहली बार, घरेलू पेटेंट दाखिल करने की संख्या ने जनवरी-मार्च, 2022 की तिमाही में भारतीय पेटेंट (आईपी) कार्यालय में अंतरराष्ट्रीय पेटेंट दाखिल करने के आंकड़े को पार कर लिया है।’’

उन्होंने कहा कि उद्योग और आंतरिक व्यापार (डीपीआईआईटी) और आईपी कार्यालय को बढ़ावा देने के लिए विभाग के समन्वित प्रयासों से समाज के सभी वर्गों में जागरूकता बढ़ी है। इन प्रयासों से एक ओर आईपीआर फाइलिंग की संख्या में वृद्धि हुई है और दूसरी ओर पेटेंट आवेदनों के लंबित होने में कमी आई है।

 

आ गया टाटा का सुपर ऐप ‘टाटा न्यू’, एक ही जगह मिलेंगी कई सुविधाएं

नयी दिल्ली । टाटा समूह ने अपना सुपर ऐप ‘टाटा न्यू’ लॉन्च कर दिया है। यह ऐप टाटा ग्रुप के सभी ब्रांड्स को एक प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराएगा। इस सुपरऐप का लंबे वक्त से इंतजार किया जा रहा था। इस ऐप के जरिए समूह का उद्देश्य ऐमजॉन और फ्लिपकार्ट के प्रभुत्व वाले घरेलू ई-कॉमर्स क्षेत्र में प्रमुख भूमिका निभाना है।

टाटा सन्स के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने एक लिंक्डइन पोस्ट में लिखा कि टाटा, न्यू प्रौद्योगिकी के आधुनिक स्वभाव के साथ समूह के पारंपरिक ‘उपभोक्ता सबसे पहले’ के दृष्टिकोण को प्रौद्योगिकी के आधुनिक लोकाचार के साथ जोड़ता है। उन्होंने कहा, ‘आज एक ‘न्यू डे’ है। टाटा परिवार के सबसे छोटे सदस्य टाटा डिजटल ने टाटा न्यू ऐप पेश किया है।’

इन कामों के लिए ‘ऑल इन वन’ प्लेटफॉर्म
टाटा के सुपरऐप पर टाटा समूह के सभी ब्रांड एक प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होंगे। एयर एशिया, बिग बास्केट, क्रोमा, आईएचसीएल, क्यूमिन, स्टार बक्स, टाटा 1 एम जी, टाटा क्लिक, वेस्टसाइड इस सुपरऐप पर पहले से मौजूद हैं। आगे चलकर टाटा न्यू पर विस्तारा, एयर इंडिया, टाइटन, तनिष्क, टाटा मोटर्स भी जुड़ेंगे। इसका अर्थ है कि यूजर ग्रॉसरी ऑर्डर करना, फ्लाइट टिकट बुक करना, दवा ऑर्डर करना, इलेक्ट्रॉनिक्स व कंज्यूमर ड्यूरेबल्स आइटम्स की खरीद आदि टाटा न्यू ‘ऑल इन वन’ प्लेटफॉर्म की मदद से कर सकेंगे।

पिछले एक साल से चल रही थी टेस्टिंग
टाटा सन्स पिछले साल से ऐप का परीक्षण कर रही थी क्योंकि यह तेजी से बढ़ते ई-कॉमर्स क्षेत्र में एक बड़ी भूमिका निभाना चाहती है। समूह ने इस कड़ी में कई क्षेत्रों की ऑनलाइन कंपनियों का भी अधिग्रहण किया है। इसमें किराना का सामान आपूर्ति करने वाले मंच बिग बास्केट और ऑनलाइन फार्मेसी कंपनी 1एमजी शामिल हैं। टाटा सुपरऐप को टाटा डिजिटल संभाल रही है।

अब बिना कार्ड के निकलेगा एटीएम से पैसा – आरबीआई

करोड़ों ग्राहकों को मिली बड़ी सौगात
नयी दिल्ली। भारतीय रिज़र्व बैंक ने गत शुक्रवार को द्विमासिक मौद्रिक नीति जारी की है। आरबीआई ने इस बार भी रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया है। इस तरह रेपो रेट चार फीसद पर और रिवर्स रेपो रेट 3.35 फीसद पर बरकरार है। आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने बैठक के फैसलों के बारे में जानकारी दी है। आरबीआई ने ग्राहकों को आज एक बड़ी सुविधा भी दी है। केंद्रीय बैंक ने कार्डलेस पेमेंट की सुविधा के विस्तार की घोषणा की है। इससे आप बिना कार्ड के भी एटीएम से पैसा निकाल सकेंगे। आरबीआई ने देश के सभी बैकों के एटीएम में कार्डलेस निकासी की सुविधा उपलब्ध कराने की बात कही है। इससे पहले यह सुविधा कुछ बैकों के एटीएम तक ही सीमित थी।
कार्डलेस निकासी की सुविधा के विस्तार से देश के करोड़ों ग्राहकों को फायदा होगा। दास ने कहा कि ग्राहकों को यह सुविधा यूपीआई  के जरिए मिलेगी। दास ने कहा, ‘इस समय एटीएम से कार्डलेस नकदी निकासी की सुविधा कुछ बैंकों तक ही सीमित है। अब यूपीआई नेटवर्क का उपयोग करने वाले देश के सभी बैकों के एटीएम में इस सुविधा को उपलब्ध कराने का प्रस्ताव दिया गया है।’

बिना कार्ड के निकलेगा पैसा
दास ने आगे कहा, ‘इससे लेनदेन में आसानी बढ़ेगी और इस तरह के लेनदेन में फिजिकल कार्ड्स की आवश्यकता नहीं होने से धोखाधड़ी में भी कमी आएगी, क्योंकि कार्ड स्किमिंग और कार्ड क्लोनिंग आदि से धोखाधड़ी के मामले सामने आते हैं।’ इस सुविधा से अब लोग बिना कार्ड के ही एटीएम से पैसे निकाल सकते हैं।
बैकों द्वारा दी जा रही सुविधाओं की होगी समीक्षा
आरबीआई गवर्नर ने कहा कि आरबीआई बैंकों द्वारा दी जा रही सुविधाओं की समीक्षा करेगा। उन्होंने कहा कि नई तकनीकों के चलते डिजिटल प्लेटफॉर्म का काफी विस्तार हो रहा है। केंद्रीय बैंक उससे संबद्ध बैंकों की स्थिति की जांच करेगा और समीक्षा करेगा। इसमें बैंकों द्वारा ग्राहकों को दी जा रही सुविधाओं की समीक्षा की जाएगी और खामियों का पता लगाया जाएगा। इसके लिए एक कमेटी के गठन का प्रस्ताव रखा गया है।

कार्डलेस निकासी की सुविधा कोरोना काल में हुई थी शुरू
बैंक एटीएम से बिना कार्ड के नकदी निकासी की सुविधा कोरोना काल से शुरू हुई थी। कोरोना काल में संक्रमण को फैलने से रोकने के उद्देश्य से इस सुविधा को शुरू किया गया था। देश के प्रमुख बैंकों एसबीआई, आईसीआईसीआई, एक्सिस बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा ने इस सुविधा को शुरू किया था।

बुन्देलखंड के ‘माझी’ : संत ने 3 साल में अकेले ही खोद डाला 10 बीघे का तालाब

हमीरपुर। उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले में एक संत ने अकेले ही सूखे प्राचीन तालाब की तीन साल तक खुदाई कर ये बुन्देलखंड का मांझी बन गया है। लगातार फावड़े चलाकर इसने तालाब की सूरत ही बदल दी है जिससे अब साल भर तक तालाब पानी से लबालब रहता है। गांव के लोगों की भी इस तालाब से जरूरतें पूरी हो रही है। इसीलिए इस संत को सरकार से भी सम्मान मिला है।
हमीरपुर जिले के सुमेरपुर थाना क्षेत्र के पचखुरा बुजुर्ग गांव में एक बुजुर्ग संत ने प्राचीन तालाबों की सूरत बदलने के लिए बड़ा काम किया है। इस गांव में 10 बीघे क्षेत्रफल में एक तालाब स्थित है। ये तालाब भी सैकड़ों साल पुराना है जो कलारन दाई नाम से प्रसिद्ध भी है। तालाब की कभी खुदाई न कराए जाने से यह खेत की तरह तब्दील हो गया था। गांव के लोगों के मुताबिक किसी जमाने में यह तालाब पूरे साल तक पानी से भरा रहता था। लेकिन पिछले कुछ दशक से इस प्राचीन तालाब में धूल उड़ रही थी।
सर्दी के मौसम में गांव के नौजवान इस सूखे तालाब को क्रिकेट का मैदान बना लेते थे जिससे तालाब भी मानचित्र से ही गायब हो चुका था। फिर भी कोई तालाब की दुर्दशा को लेकर आगे नहीं आया। तालाब के खेत में तब्दील होने के कारण ग्रामीणों और मवेशियों के सामने पानी की संकट खड़ा हो गया था। इस गांव में गर्मी के मौसम में पानी को लेकर कई सालों तक संकट बना रहा लेकिन गांव के कृष्णा नंद महाराज ने इस संकट को चुनौती के रूप में लेकर फावड़े चलाए तो तीन साल में ही तालाब की सूरत बदल गई।
संत ने तालाब की खुदाई के लिए वर्षों तक चलाए फावड़े
पचखुरा बुजुर्ग गांव के रहने वाले संत कृष्णा नंद महाराज ने वर्ष 1982 में संन्यास लिया था। इन्होंने 1986 में हरिद्वार में ही आयोजित कुंभ मेला में महा मण्डलेश्वर स्वामी परमानंद गिरि महाराज से गुरुदक्षिणा लेकर वहीं पर धुनी जमाई थी। वर्ष 2014 में हरिद्वार से गांव लौटकर आए और गांव के ही रामजानकी मंदिर को अपना आसरा बनाया। उन्होंने मंदिर के पास ही प्राचीन तालाब की दुर्दशा देख बड़ा फैसला लिया और वर्ष 2015 में फावड़ा उठाकर अकेले ही तालाब की खुदाई में जुट गए। सूखे तालाब की खुदाई लगातार तीन सालों तक कर गांव के इस संत ने तीन हजार से अधिक ट्राली मिट्टी तालाब की तलहटी से खोदकर दोबारा इसे तालाब में तब्दील किया गया है।
संत कृष्णा नंद महाराज अब बुन्देलखंड के बन चुके है मांझी
संत कृष्णा नंद महाराज के समाजसेवा के जज्बे को आज हर कोई सलाम कर रहा है। तीन साल के अंदर सूखे तालाब की खुदाई कर इसे पुराने स्वरूप में लाने पर ग्रामीणों ने इन्हें अब बुन्देलखंड का मांझी कहते है। पिछले साल यह तालाब गर्मी के मौसम में पानी से लबालब रहा है। इस बार तालाब में पानी कम होते देख संत ने फिर से फावड़े उठाए है। पिछले जनवरी माह से ये बीच तालाब में फावड़े से लगातार खुदाई कर रहे है। जिससे भीषण गर्मी में इसके सूखने की संभावनाएं अब खत्म हो गयी है। गांव के इन्दल सिंह सहित तमाम ग्रामीणों ने बताया कि यह तालाब सैकड़ों साल पुराना है जिसका अस्तित्व ही समाप्त हो गया था। लेकिन बाबा कृष्णा नंद महाराज ने तीन साल के अंदर अपने बलबूते अकेले ही फावड़े चलाकर तालाब की सूरत ही बदल डाली है। इस उपलब्धि के लिए उनको कई सम्मान मिल चुके हैं।

(साभार – नवभारत टाइम्स)

6 दशक में नगालैंड की दूसरी महिला सांसद बनीं फांगनोन कोन्याक

 छात्र राजनीति से बढ़ीं आगे
कोहिमा । आजादी के 75 सालों में संसद के दोनों सदनों में महिलाओं की तादाद बढ़ी है, लेकिन पिछले दिनों राज्यसभा में देश के सुदूर नगालैंड से आने वाली महिला ने जब सदन की सदस्यता ली, तो वह अपने आप में इतिहास बन गया। दरअसल, लगभग छह दशक के नगालैंड के इतिहास में एस फांगनोन कोन्याक राज्य की दूसरी ऐसी महिला बनीं, जिन्होंने देश के लोकतंत्र की सबसे बड़ी पंचायत संसद में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई।
इससे लगभग साढ़े चार दशक पहले 1977 में रानो एम शाजा लोकसभा के लिए चुनी गई थीं। नगालैंड में महिलाओं के लिए यह छलांग कितनी अहम है, यह बात इसी से समझ में आती है कि वहां अभी तक कोई महिला विधायक तक नहीं बन पाई है। कोन्याक को भाजपा ने राज्यसभा तक पहुंचने का मौका दिया। कोन्याक नगालैंड की भाजपा महिला मोर्चा की अध्यक्ष हैं।

पारंपरिक वेशभूषा में शपथ लेने पहुंची
कोन्याक एक तरह से निर्विरोध ही राज्यसभा पहुंचीं। उनके सामने किसी ने पर्चा ही नहीं भरा था। कोन्याक हाल ही में संपन्न बजट सत्र के आखिरी हफ्ते में अपनी परंपरागत वेशभूषा में सदस्यता की शपथ लेने राज्यसभा पहुंची थीं। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा था कि उनकी पारंपरिक वेशभूषा और संस्कृति उन्हें संसद के भीतर अपने लोगों की आवाज उठाने की हिम्मत और प्रेरणा देगी।

छात्र राजनीति से शुरुआत
कोन्याक ने सक्रिय राजनीतिक जीवन की शुरुआत छात्र राजनीति से की। राजनीति के अलावा, वह सामाजिक क्षेत्र में भी सक्रिय हैं। 2017 में वह भाजपा से जुड़ीं और कई भूमिकाओं में संगठन के लिए काम किया। 2020 में उन्हें राज्य में महिला मोर्चा को जमीनी तौर पर मजबूत करने की जिम्मेदारी सौंपी गयी।

मोन जिले से आती हैं कोन्याक
44 वर्षीय कोन्याक नगालैंड के मोन जिले से आती हैं। उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से 2002 में इंग्लिश लिटरेचर में एमए किया था। इससे पहले उन्होंने दीमापुर के होली क्रॉस हायर सेकेंडरी स्कूल से स्कूलिंग की थी। गौरतलब है कि कोन्याक मोन जिले के उसी गांव ओटिंग से आती हैं, जहां बीते दिसंबर में हुए एक हादसे में स्थानीय आदिवासी मारे गए थे। कोन्याक भी उसी आदिवासी समुदाय से आती हैं। कोन्याक का कहना है कि उनकी प्राथमिकता में अगले साल नगालैंड में होने वाले चुनाव हैं, जहां उनकी पूरी कोशिश रहेगी कि वह अपने प्रदेश की महिलाओं को जीत दिलवा कर उनमें असेंबली पहुंचने का हौसला भर सकें।

 

बिहार का लोकपर्व सतुआन 

ध्रुव गुप्त

आज बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश के एक लोकपर्व सतुआन का दिन है। इसे लोग सतुआ संक्रांति या बिसुआ भी कहते हैँ ! बिहार के अंग क्षेत्र में यह पर्व ‘टटका बासी’ के नाम से जाना जाता है। कुछ लोग इस दिन के साथ पूजा-पाठ का कर्मकांड भी जोड़ देते हैं, लेकिन सतुआन वस्तुतः आम के पेड़ों पर लगे नए-नए फल और खेतों में चने एवं जौ की नई फसल के स्वागत का उत्सव है।

आज इन नई फसलों के लिए सूर्य का आभार प्रकट करने के बाद नवान्न के रूप में आम के नए-नए टिकोरों की चटनी के साथ नए चने और जौ का सत्तू खाया जाता है। सत्तू भोजपुरिया लोगों का सर्वाधिक प्रिय भोजन है। इसे देशी फ़ास्ट फ़ूड भी कहते हैं। सत्तू चने का हो सकता है, जौ का हो सकता है, मकई का हो सकता है और इन सबके मिश्रण का भी।

इसमें नमक मिलाकर, पानी में सानकर कभी भी, कहीं भी, कैसे भी खा लिया जा सकता है, लेकिन सत्तू खाने का असली मज़ा तब है जब उसके कुछ संगी-साथी भी साथ हों। भोजपुरी में कहावत है – सतुआ के चार यार / चोखा, चटनी, प्याज, अचार। एक और कहावत है – आम के चटनी, प्याज, अचार / सतुआ खाईं पलथी मार। चटनी अगर मौसम के नए टिकोरे की हो तो सत्तू के स्वाद में चार चांद लग जाते हैं।

आप सबको लोकपर्व सतुआन की बहुत बधाई ! सतुआ खाईं चटनी चाटीं / मिली सवाद भोजपुरिया खांटी।
सतुआन

’कवरिंग्स 2022’, में दिखे निट्को के मार्बल और स्टोन के खूबसूरत डिजाइन

अमेरिका के लास वेगास में 5 -8 अप्रैल तक चली यह प्रदर्शनी
कोलकाता । भारत की अग्रणी सरफेस डिजाइन कंपनी निट्को ने हाल ही में अमेरिका के लास वेगस में आयोजित ’कवरिंग्स 2022’ में भाग लिया। गत 5 अप्रैल से 8 अप्रैल 2022 तक आयोजित यह चार दिवसीय आयोजन यूएसए और उत्तर अमेरिका में टाइल्स एवं कुदरती पत्थरों की सबसे बड़ी प्रदर्शनी है। कंपनी ने इस प्रतिष्ठित प्रदर्शनी में अपने विशिष्ट उत्पाद प्रदर्शित किए जिसमें अंतर्राष्ट्रीय पैविलियन, शो फ्लोर ऐक्ज़िबिट्स, लाइव इंस्टॉलेशन डैमो, सीआईडी अवार्ड्स और कॉम्पलिमेंट्री शैक्षिक अवसर शामिल थे।
टाइल्स व कुदरती पत्थरों के क्षेत्र में कार्यरत दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियां इस प्रदर्शनी में अपने उत्पाद लेकर आईं थी उनके बीच निट्को ने वॉल टाइल्स और मोज़ैक की नई रेंज पेश कीं। कंपनी ने लगातार दूसरे वर्ष यूएस में हुए इस आयोजन में हिस्सा लिया है। भारत की यह एकमात्र कंपनी है जिसके पास टाइल्स, मार्बल और मोज़ैक के इतने सारे प्रोडक्ट व डिजाइन उपलब्ध हैं।
कवरिंग्स उत्तर अमेरिका में टाइल एवं प्राकृतिक पत्थरों की सबसे बड़ी प्रदर्शनी है जिसमें 40 से ज्यादा देशों के प्रदर्शकों ने हिस्सा लिया तथा हज़ारों वितरक, रिटेलर, फैब्रिकेटर, कॉन्ट्रैक्टर, स्पेसिफायर्स, आर्किट्रैक्चरल व डिजाइन प्रोफेशनल, बिल्डर एवं रियल ऐस्टेट डैवलैपर इस आयोजन में पहुंचे। कवरिंग्स शो फ्लोर व उसके परे वास्तुशिल्पियों व डिजाइनरां को कस्टम टाइल व स्टोन सॉल्यूशन मुहैया कराती है। इसके अलावा, दुनिया भर के सिरेमिक स्पेस से अपडेटेड व नवीनतम ट्रैंड्स व डिजाइन की प्रेरणाएं भी कवरिंग्स में देखने को मिलीं।
कंपनी के इंटरनेशनल बिज़नेस हैड दिव्यांग छेड़ा ने कहा, ’’कवरिंग्स 2022 का हिस्सा बन कर हम बहुत उत्साहित हैं। हमने 8 गुणा 4 फीट के स्लैब साइज़ में खूबसूरत मार्बल व स्टोन डिजाइन की विशिष्ट रेंज का अनावरण किया। हमारा लक्ष्य था की एक बेहतर दुनिया की रचना की जाए और ऐसे उत्पाद तैयार किए जाएं जो प्रकृति से प्रेरित हों। हम अपने उत्पाद ग्राहकों को ध्यान में रखकर डिजाइन करते हैं, हम स्थानीय रुझानों को समझते हैं, अपनी वैश्विक विशेषज्ञता को अपने काम में लाते हैं और भरोसे के साथ अपने व्यापार सहयोगियों के साथ काम करते हैं।’’
’’अमेरिका ने वित्त वर्ष 2021 की तीसरी तिमाही में 1.68 बीलियन वर्ग फीट सिरेमिक टाइल्स का आयात किया, वित्त वर्ष 2020 की तीसरी तिमाही के मुकाबले यह 21.5 प्रतिशत अधिक था। वि.व.2021 की तीसरी तिमाही में अमेरिका ने टाइल की जितनी खपत की उसका 71.6 प्रतिशत आयातित था, जबकि 2020 की इसी अवधि में यह आंकड़ा 69.4 प्रतिशत था। आगामी वर्षों में यूएसए और लैटिन अमेरिका के बाजारों में अपनी मौजूदगी बढ़ाने के छप्ज्ब्व् के पास बहुत अवसर हैं क्योंकि हम यहां के सबसे बड़े होम इम्प्रूवमेंट स्टोर्स को पहले से ही सप्लाई दे रहे हैं,’’ दिव्यांग छेड़ा ने बताया।

सुशीला बिड़ला गर्ल्स स्कूल में छात्राओं को मिली कोविड -19 की वैक्सीन

12 से 15 वर्ष की छात्राओं को मिली पहली खुराक
कोलकाता । सुशीला बिड़ला गर्ल्स स्कूल में 12 से 15 वर्ष की छात्राओं को कोविड -19 टीके की पहली खुराक दी गयी। सुशीला बिड़ला गर्ल्स स्कूल का नया सत्र 4 अप्रैल, 2022 को शुरू हुआ। महीनों की ऑनलाइन कक्षाओं के बाद स्कूल वापस आने वाले छात्राओं के स्वास्थ्य और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए, सुशीला बिड़ला गर्ल्स स्कूल ने कोलकाता नगर निगम के सहयोग से गत 7 अप्रैल, 2022 को एक मुफ्त टीकाकरण शिविर का आयोजन किया। 12 वर्ष की आयु के छात्र – 15 साल की उम्र में डॉक्टरों और नर्सों की मेडिकल टीम द्वारा कॉर्बेवैक्स की पहली खुराक पिलाई गई। एसबीजीएस के समन्वयक, शिक्षक और सहायक कर्मचारी टीकाकरण अभियान में सक्रिय रूप से शामिल थे। छात्राओं के प्रवेश और निकास के लिए अलग-अलग मार्ग बनाए गए थे। प्रतीक्षा क्षेत्र में बैठने की उचित व्यवस्था की गयी थी और टीकाकरण अभियान के दौरान सभी सुरक्षा प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन किया गया था। छात्राओं को दूसरी खुराक पिलाने के लिए निर्धारित प्रतीक्षा अवधि के बाद एक और टीकाकरण शिविर निर्धारित किया जाएगा।

एचआईटीके का विद्यार्थी प्रोग्रामिंग प्रतियोगिता में देश में दूसरे स्थान पर

कोलकाता । हेरिटेज इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के बी.टेक के विद्यार्थी ने अखिल भारतीय प्रोग्रामिंग प्रतियोगिता में दूसरा स्थान प्राप्त किया। कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग, बैच -2024 के श्रृंजय राय रे ने विश्व की सबसे बड़ी प्रोग्रामिंग प्रतियोगिता टीसीएस कोड वीटा 2022 सीजन -10 राउंड -1 में अखिल भारतीय द्वितीय रैंक प्राप्त कर यह उपलब्धि हासिल की। हाल ही में परिणाम सामने आए थे और यह न केवल संस्थान के लिए बल्कि पश्चिम बंगाल राज्य के लिए भी गर्व की बात है और वह भी एक निजी इंजीनियरिंग कॉलेज से।
श्रृंजय ने कोडफोर्स से कैंडिडेट मास्टर की उपाधि भी अर्जित की थी और उन्हें कोडिंग करना बहुत पसंद है और इसके बारे में बहुत उत्साहित है। उसने फाइनल में जाने की उम्मीद जतायी और सभी शिक्षकों का आभार जताया।
हेरिटेज ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के सीईओ पी.के. अग्रवाल ने कहा, ‘इसके पूर्व इस संस्थान के ही एक छात्र ने गेट 2022 में तीसरा स्थान प्राप्त किया झा और अब हमारे विद्यार्थी टीसीएस कोड वीटा में दूसरा रैंक हासिल किया। हेरिटेज इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के प्रिंसिपल डॉ, बासव चौधरी एवं कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. सुभाष मजूमदार ने श्रृंजय की सराहना की।

युवाओं में है देश को आगे ले जाने की क्षमता : डॉ. अशोक झुनझुनवाला

इंडियन चेम्बर ऑफ कॉमर्स में परिचर्चा
कोलकाता । इंडियन चेम्बर ऑफ कॉमर्स ने हाल ही में एक परिचर्चा आयोजित की। “भारत के अगले 25 साल: एक अवसर या” पर विषयक परिचर्चा में केन्द्रीय विद्युत मंत्री, , एमएनआरई, और रेलवे के पूर्व सलाहकार पद्मश्री डॉ. अशोक झुनझुनवाला ने वक्तव्य रखा। आईआईटी मद्रास के प्रोफेसर डॉ. अशोक झुनझुनवाला ने कहा कि अगले 25 वर्षों में भारत की जीडीपी 6% से बढ़कर 9% होने की उम्मीद है। देश की प्रमुख ताकत इसकी जनसंख्या है, जो क्षमता के एक जबरदस्त पूल का प्रतिनिधित्व करती है। उन्होंने आगे कहा कि प्रमुख लाभों में से एक उचित मूल्य पर बड़ा बाजार है और बहुराष्ट्रीय फर्मों को विनिर्माण सुविधाएं स्थापित करनी चाहिए जो उद्योग के अवसरों का पता लगाने के लिए तेजी से बदलती प्रौद्योगिकी के साथ तालमेल बिठा सकें।
आईसीसी के अध्यक्ष और सुरेका समूह के रियल एस्टेट डिवीजन के निदेशक प्रदीप सुरेका ने कहा, “भारत को सकारात्मक लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। 1991 के बाद से, अर्थव्यवस्था प्रति व्यक्ति जीडीपी प्रति व्यक्ति 6.5 गुना की दर से बढ़ी है, तब से शिक्षा में सुधार हुआ है। 1980 के दशक में, 95% बच्चे स्कूलों में जा रहे थे।” इसके अलावा आईसीसी के महानिदेशक राजीव सिंह ने कहा कि “शुरुआती लाभ प्राप्त करने के लिए, हमें इंटरनेट, आईटी और स्ट्रीमुलेटर्स जैसे क्षेत्रों पर काम करना चाहिए।”
अंत में, डॉ. झुनझुनवाला ने यह उद्धृत करते हुए सत्र का समापन किया, “युवा लोगों में हमारे देश को बदलने की क्षमता है, इसलिए हमें उन्हें शिक्षित, प्रेरित, प्रेरित और सशक्त बनाने के साथ-साथ उन्हें सादा जीवन और पूजा के भारतीय आदर्शों से जोड़ना चाहिए।”