अम्बेडकर जयंती : हिन्दी दलित साहित्य पर संगोष्ठी आयोजित
सत्य, अहिंसा का पाठ पढ़ाने वाले 24वें जैन तीर्थंकर भगवान महावीर

भगवान महावीर जैन धर्म के चौंबीसवें तीर्थंकर थे। भगवान महावीर का जन्म करीब ढाई हजार वर्ष पहले (ईसा से 599 वर्ष पूर्व), वैशाली गणराज्य के कुण्डग्राम में अयोध्या इक्ष्वाकुवंशी क्षत्रिय परिवार हुआ था। तीस वर्ष की आयु में महावीर ने संसार से विरक्त होकर राज वैभव त्याग दिया और संन्यास धारण कर आत्मकल्याण के पथ पर निकल गये। 12 वर्षों की कठिन तपस्या के बाद उन्हें कैवल्य ज्ञान प्राप्त हुआ जिसके पश्चात् उन्होंने समवशरण में ज्ञान प्रसारित किया।
72 वर्ष की आयु में उन्हें पावापुरी से मोक्ष की प्राप्ति हुई। इस दौरान महावीर स्वामी के कई अनुयायी बने जिसमें उस समय के प्रमुख राजा बिम्बिसार, कुणिक और चेटक भी शामिल थे। जैन समाज द्वारा महावीर स्वामी के जन्मदिवस को महावीर-जयंती तथा उनके मोक्ष दिवस को दीपावली के रूप में धूम धाम से मनाया जाता है।
जैन ग्रन्थों के अनुसार समय समय पर धर्म तीर्थ के प्रवर्तन के लिए तीर्थंकरों का जन्म होता है, जो सभी जीवों को आत्मिक सुख प्राप्ति का उपाय बताते है। तीर्थंकरों की संख्या चौबीस ही कही गयी है। भगवान महावीर वर्तमान अवसर्पिणी काल की चौबीसी के अंतिम तीर्थंकर थे और ऋषभदेव पहले। हिंसा, पशुबलि, जात-पात का भेद-भाव जिस युग में बढ़ गया, उसी युग में भगवान महावीर का जन्म हुआ। उन्होंने दुनिया को सत्य, अहिंसा का पाठ पढ़ाया।
तीर्थंकर महावीर स्वामी ने अहिंसा को सबसे उच्चतम नैतिक गुण बताया। उन्होंने दुनिया को जैन धर्म के पंचशील सिद्धांत बताए, जो हैं – अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह, अचौर्य (अस्तेय) ,ब्रह्मचर्य। उन्होंने अनेकांतवाद, स्यादवाद और अपरिग्रह जैसे अद्भुत सिद्धान्त दिए।
महावीर के सर्वोदयी तीर्थों में क्षेत्र, काल, समय या जाति की सीमाएँ नहीं थीं।
भगवान महावीर का आत्म धर्म जगत की प्रत्येक आत्मा के लिए समान था। दुनिया की सभी आत्मा एक-सी हैं इसलिए हम दूसरों के प्रति वही विचार एवं व्यवहार रखें जो हमें स्वयं को पसन्द हो। यही महावीर का ‘जियो और जीने दो’ का सिद्धान्त है।
भगवन महावीर का जन्म ईसा से 599 वर्ष पहले वैशाली गणतंत्र के कुण्डग्राम में इक्ष्वाकु वंश के क्षत्रिय राजा सिद्धार्थ और रानी त्रिशला के यहाँ चैत्र शुक्ल तेरस को हुआ था। ग्रंथों के अनुसार उनके जन्म के बाद राज्य में उन्नति होने से उनका नाम वर्धमान रखा गया था।
जैन ग्रंथ उत्तरपुराण में वर्धमान, वीर, अतिवीर, महावीर और सन्मति ऐसे पांच नामों का उल्लेख है। इन सब नामों के साथ कोई कथा जुडी है। जैन ग्रंथों के अनुसार, २३वें तीर्थंकर पार्श्वनाथ जी के निर्वाण (मोक्ष) प्राप्त करने के 188 वर्ष बाद इनका जन्म हुआ था।
दिगम्बर परम्परा के अनुसार महावीर बाल ब्रह्मचारी थे। भगवान महावीर शादी नहीं करना चाहते थे क्योंकि ब्रह्मचर्य उनका प्रिय विषय था। भोगों में उनकी रुचि नहीं थी। परन्तु इनके माता-पिता शादी करवाना चाहते थे। दिगम्बर परम्परा के अनुसार उन्होंने विवाह के लिए मना कर दिया था।
श्वेतांबर परम्परा के अनुसार भगवान महावीर का विवाह यशोदा नामक सुकन्या के साथ सम्पन्न हुआ था और कालांतर में प्रियदर्शिनी नाम की कन्या उत्पन्न हुई जिसका युवा होने पर राजकुमार जमाली के साथ विवाह हुआ।
भगवान महावीर का साधना काल १२ वर्ष का था। दीक्षा लेने के उपरान्त भगवान महावीर ने दिगम्बर साधु की कठिन चर्या को अंगीकार किया और निर्वस्त्र रहे।
श्वेतांबर सम्प्रदाय जिसमें साधु श्वेत वस्त्र धारण करते है के अनुसार भी महावीर दीक्षा उपरान्त कुछ समय छोड़कर निर्वस्त्र रहे और उन्होंने केवल ज्ञान की प्राप्ति भी दिगम्बर अवस्था में ही की।
अपने पूरे साधना काल के दौरान महावीर ने कठिन तपस्या की और मौन रहे। इन वर्षों में उन पर कई ऊपसर्ग भी हुए जिनका उल्लेख कई प्राचीन जैन ग्रंथों में मिलता है।
महावीर के पाँच व्रत इस प्रकार हैं – –
सत्य ― सत्य के बारे में भगवान महावीर स्वामी कहते हैं, हे पुरुष! तू सत्य को ही सच्चा तत्व समझ। जो बुद्धिमान सत्य की ही आज्ञा में रहता है, वह मृत्यु को तैरकर पार कर जाता है।
अहिंसा – इस लोक में जितने भी त्रस जीव (एक, दो, तीन, चार और पाँच इंद्रीयों वाले जीव) है उनकी हिंसा मत कर, उनको उनके पथ पर जाने से न रोको। उनके प्रति अपने मन में दया का भाव रखो। उनकी रक्षा करो। यही अहिंसा का संदेश भगवान महावीर अपने उपदेशों से हमें देते हैं।
अचौर्य – दूसरे के वस्तु बिना उसके दिए हुआ ग्रहण करना जैन ग्रंथों में चोरी कहा गया है।
अपरिग्रह – परिग्रह पर भगवान महावीर कहते हैं जो आदमी खुद सजीव या निर्जीव चीजों का संग्रह करता है, दूसरों से ऐसा संग्रह कराता है या दूसरों को ऐसा संग्रह करने की सम्मति देता है, उसको दुःखों से कभी छुटकारा नहीं मिल सकता। यही संदेश अपरिग्रह का माध्यम से भगवान महावीर दुनिया को देना चाहते हैं।
ब्रह्मचर्य- महावीर स्वामी ब्रह्मचर्य के बारे में अपने बहुत ही अमूल्य उपदेश देते हैं कि ब्रह्मचर्य उत्तम तपस्या, नियम, ज्ञान, दर्शन, चारित्र, संयम और विनय की जड़ है। तपस्या में ब्रह्मचर्य श्रेष्ठ तपस्या है। जो पुरुष स्त्रियों से संबंध नहीं रखते, वे मोक्ष मार्ग की ओर बढ़ते हैं।
जैन मुनि, आर्यिका इन्हें पूर्ण रूप से पालन करते है, इसलिए उनके महाव्रत होते है और श्रावक, श्राविका इनका एक देश पालन करते है, इसलिए उनके अणुव्रत कहे जाते है।
जैन ग्रंथों में दस धर्म का वर्णन है। पर्युषण पर्व, जिन्हें दस लक्षण भी कहते है के दौरान दस दिन इन दस धर्मों का चिंतन किया जाता है।
क्षमा के बारे में भगवान महावीर कहते हैं- ‘मैं सब जीवों से क्षमा चाहता हूँ। जगत के सभी जीवों के प्रति मेरा मैत्रीभाव है। मेरा किसी से वैर नहीं है। मैं सच्चे हृदय से धर्म में स्थिर हुआ हूँ। सब जीवों से मैं सारे अपराधों की क्षमा माँगता हूँ। सब जीवों ने मेरे प्रति जो अपराध किए हैं, उन्हें मैं क्षमा करता हूँ।’
वे यह भी कहते हैं ‘मैंने अपने मन में जिन-जिन पाप की वृत्तियों का संकल्प किया हो, वचन से जो-जो पाप वृत्तियाँ प्रकट की हों और शरीर से जो-जो पापवृत्तियाँ की हों, मेरी वे सभी पापवृत्तियाँ विफल हों। मेरे वे सारे पाप मिथ्या हों।’
धर्म सबसे उत्तम मंगल है। अहिंसा, संयम और तप ही धर्म है। महावीरजी कहते हैं जो धर्मात्मा है, जिसके मन में सदा धर्म रहता है, उसे देवता भी नमस्कार करते हैं।
भगवान महावीर ने अपने प्रवचनों में धर्म, सत्य, अहिंसा, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह, क्षमा पर सबसे अधिक जोर दिया। त्याग और संयम, प्रेम और करुणा, शील और सदाचार ही उनके प्रवचनों का सार था।
129 वीं अम्बेडकर जयन्ती – ज्ञान और समानता का सन्देश देने वाले बाबा साहेब अम्बेडकर

डाॅ. भीमराव अम्बेडकर जिन्हें डॉ. बाबा साहेब अम्बेडकर के नाम से भी जाना जाता है, का जन्म दिन 14 अप्रैल को पर्व के रूप में भारत समेत पूरे विश्व में मनाया जाता है। इस दिन को ‘समानता दिवस’ और ‘ज्ञान दिवस’ के रूप में भी मनाया जाता है, क्योंंकि जीवन भर समानता के लिए संघर्ष करने वाले अम्बेडकर को समानता और ज्ञान के प्रतीक माना जाता है। अम्बेडकर को विश्व भर में उनके मानवाधिकार आंदोलन संविधान निर्माता और उनकी प्रकांड विद्वता के लिए जाने जाते हैं और यह दिवस उनके प्रति सम्मान व्यक्त करने के लिए मनाया जाता है। अम्बेडकर की पहली जयंती 14 अप्रैल 1928 में पुणे नगर में मनाई थी।
अम्बेडकर के जन्मदिन पर हर साल उनके करोड़ों अनुयायी उनके जन्मस्थल भीम जन्मभूमि महू (मध्य प्रदेश), बौद्ध धम्म दीक्षास्थल दीक्षाभूमि, नागपुर, उनका समाधी स्थल चैत्य भूमि, मुंबई जैसे कई स्थानीय जगहों पर उन्हें अभिवादन करने लिए इकट्टा होते है। विश्व के 100 से अधिक देशों में अम्बेडकर जयन्ती मनाई जाती है।
संयुक्त राष्ट्र नेे भीमराव अम्बेडकर को “विश्व का प्रणेता” कहकर उनका गौरव किया। संयुक्त राष्ट्र के ७० वर्ष के इतिहास में वहांँ पहली बार किसी भारतीय व्यक्ति का जन्मदिवस मनाया गया था। उनके अलावा विश्व में केवल दो ऐसे व्यक्ति हैं जिनकी जयंती संयुक्त राष्ट्र ने मनाई हैं – मार्टिन लूथर किंग और नेल्सन मंडेला। आंबेडकर, किंग और मंडेला ये तीनों व्यक्ति अपने अपने देश में मानवाधिकार संघर्ष के सबसे बडे नेता के रूप में जाने जाते हैं। डॉ भीमराव अम्बेडकर को बाबा साहेब नाम से भी जाना जाता है। अम्बेडकर जी उनमें से एक है जिन्होंने भारत के संविधान को बनाने में अपना अहम योगदान दिया था
पूरे भारत भर में गाँव, नगर तथा छोटे-बड़े शहरों में जुनून के साथ आंबेडकर जयन्ती मनायी जाती है। महाराष्ट्र में अम्बेडकर जयन्ती बडे पैमाने पर मनाई जाती है। अधिकांश रूप से अम्डबेकर जयंती भारत में मनाई जाती है, भारत के हर राज्य में, राज्य के प्रत्येक जनपद में और जनपद के लाखों गाँवों में मनाई जाती हैं। भारतीय समाज, लोकतन्त्र, राजनीति एवं संस्कृति पर आंबेडकर का गहरा प्रभाव पड़ा हैं। सौ से अधिक देशों में हर वर्ष डॉ. आंबेडकर जी की जयन्ती मनाई जाती हैं।
बेकार पड़ी चीजों से सजाएं अपना घर
अगर आपके पास घर पर पुरानी चीजें पड़ी हैं, जो कि किसी काम की नहीं हैं तो उनको बेकार समझकर फेंकिए मत बल्कि उनका इस्तेमाल सजावट की चीजें बनाने के लिए करें। आज हम आपको बताएंगे कि कैसे आप घर पर पड़ी पुरानी चीजों से अपना घर सजाने के लिए क्रिएटिव चीजें बना सकते हैं।
घर को सजाने के लिए आप पुराने बैग का इस्तेमाल कर सकते हैं
अगर आपके पास घर पर कोई भी पुराना बैग पड़ा है तो उसको फेंकिए मत क्योंकि आप उस पर अपनी कोई भी मनपसंद फोटो लगाकर उसको अपने घर की दीवार पर सजा सकते हैं। आप चाहें तो ढेर सारे बैग लेकर इनकी मदद से वर्टिकल गार्डन भी तैयार कर सकते हैं।
आप पुराने टायरों का इस्तेमाल भी सजानट के लिए कर सकते हैं
अगर आपके घर में गाड़ी का पुराना पुराना टायर पड़ा है या आपकी गाड़ी का टायर खराब हो गया है तो इनका इस्तेमाल आप बैठने के लिए कर सकते हैं या बगीचा सजाने के लिए कर सकते हैं। इन्हीं टायरों का आप टेबल भी बना सकते हैं। अगर आप इनको गाढे़ और चटक रंगों से सजाएंगे तो यह बेहद खूबसूरत लगेंगे, आप चाहे तो इनमें मिट्टी भरकर इनमें फूल वाले पौधे भी सजा सकते हैं। आप इनको कवर लगाकर सोफे की तरह दालान में भी सजा सकते हैं।

पुराने बक्से से घर सजाएं
आप घर पर पड़े पुराने बक्सों का इस्तेमाल अपने घर की इंटीरियर डैकोरेशन के लिए कर सकते हैं। इससे आपके घर को एैंटिक लुक मिलेगा, आप इन पुराने बक्सो पर पेटिंग करके इन्हें घर के कोने में सजा सकते हैं या फिर मैटल वर्क करवाकर इसे आकर्षक लुक दे सकते हैं, और फिर इनपर गद्दा बिछाकर इन्हें बैठने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं।
पुरानी कांच की बोतलें सजाएंगी घर
घर पर पड़ी पुरानी कांच की बोतले भी सजावट का काम दे सकती हैं। घर पर पड़ी पुरानी ऊन और फेवीकोल की सहायता से आप इनको नया लुक दे सकते हैं और इनका इस्तेमाल फूलदान की तरह कर सकते हैं।
(सभी चित्र गूगल से)
गर्मी में रखें खुद को ठंडा और तरोताजा
गर्मियों ने अप्रैल के महीने में ही अपना कहर बरपाना शुरु कर दिया है। आप अगर इन दिनों में दोपहर के समय कहीं किसी काम से भी बाहर जाते हैं तब आप इन दिनों में लू की चपेट में आ सकते हैं। यहां हम आपको इस भयंकर गर्मी से बचने के कुछ उपाय बताने जा रहें हैं…
प्रोटीन युक्त आहार से बचें
गर्मियों के दौरान प्रोटीन से भरपूर भोजन को अपने आहार में ज्यादा मात्रा में शामिल करने से मेटाबॉलिक गर्मी बढ़ सकती है और शरीर गर्म हो सकता है। विभिन्न प्रकार के बेरी से बने प्रोटीन युक्त शेक आज़माएं, ताकि आपको आवश्यक प्रोटीन मिल सके और साथ ही आपके शरीर को ज़्यादा गरम होने से बचाया जा सके।
अपने कॉस्मेटिक्स और क्रीम को ठंडा करें
अपने लोशन, मॉइस्चराइज़र और क्रीम को रेफ्रिजरेटर में रखना एक अच्छा विचार है। पहले तो ये जल्दी खराब नहीं होंगे दूसरा आपकी स्किन पर एक रिफ्रेशिंग सेंसेशन पैदा करेंगे।
गर्म पानी की बोतल इस्तेमाल करें
इस बात से इतना चौंके नहीं यहां हम आपको सिर्फ गर्म पानी की बोतल का इस्तेमाल करने के लिए कह रहें हैं न कि गर्म पानी का प्रयोग करने के लिए। एक गर्म पानी के बोतल लें और उसमें ठंडा पानी भर लें। इसे अपने घुटनों के नीचे रखें, और ठंडक का आनंद लें, क्योंकि यह आपके पूरे शरीर में फैलती है।
मिंट का इस्तेमाल करें
पुदीने या फिर मिंट एक किस्म का भ्रम पैदा करने में सक्षम हैं जो आपको ठंडक का एहसास कराती है जब आप चिलचिलाती गर्मी में हों। यह एक अच्छा विचार है, भोजन के बाद पुदीना खाना; अपने हाथों पर मिंट एयर फ्रेशनर छिड़कें, अपने पानी में पुदीने की पत्तियां डालें और यहां तक कि ठंडे स्नान के बाद अपने शरीर पर कुछ पेपरमिंट एसेंशियल ऑयल भी लगाएं। इससे आपको ठंडक महसूस होगी।
हाइड्रेटेड रहें
गर्मियों हाइड्रेटेड रहना कितना जरूरी है इस बात को हमें आपको बतानें की जरूरत नहीं है। सुनिश्चित करें कि आपके शरीर में पानी की कमी नहीं है। गर्मी में पसीने के रूप में हमारे शरीर से बहुत पानी बह जाता है, इसलिए नियमित रूप से पानी पीकर खुद को हाइड्रेट रखें। अत्यधिक परिस्थितियों में डिहाईड्रेशन गंभीर कमजोरी, थकान और अन्य बीमारियों का कारण बन सकता है।
उपयुक्त कपड़े पहनें
गर्मियों में सूरज आपके ऊपर कहर बरपा रहा होता है ऐसे में आपको उसी के अनुसार कपड़े पहनने चाहिए। अन्य सामग्री के बजाय सूती कपड़े चुनें, क्योंकि यह बेहद हल्का और शोषक होता है। साथ ही, हल्के रंगों का प्रयोग करें, क्योंकि गहरे रंगों में गर्मी को अवशोषित करने की प्रवृत्ति होती है, जबकि हल्के रंग सूर्य के विकिरण को दर्शाते हैं।
कैंसर की रोकथाम या इलाज में भी कारगर हो सकती है मुलेठी – अध्ययन
कैंसर के इलाज के लिए रासायनिक पदार्थों से लेकर वनस्पतियों तक में संभावनाएं ढूंढी जा रही हैं। इस सूची में अब मुलेठी का नाम भी शामिल हो गया है। मुलेठी के बारे में तो हम सभी जानते हैं।
सेहत के लिए ये काफी फायदेमंद होती है। आयुर्वेद में तो इसका उपयोग औषधि के तौर पर किया जाता है। अब एक नये अध्ययन में दावा किया गया है कि कुछ विशिष्ट प्रकार के कैंसर की रोकथाम या इलाज में मुलेठी की अहम भूमिका हो सकती है. शिकागो स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ इलिनोइस के रिसर्चर्स द्वारा की गई इस स्टडी का निष्कर्ष ‘फार्मोकोलॉजिकल रिसर्च जर्नल में प्रकाशित हुआ है।
दरअसल, मुलेठी कई बीमारियों को ठीक करने में कारगर होती है। इसमें खासतौर पर प्रोटीन, एंटीबायोटिक, एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं। इसमें कैल्शियम भी मौजूद होता है। सर्दी, खांसी होने पर घर के बड़े बुजुर्ग हमें मुलेठी खाने की सलाह देते हैं क्योंकि मुलेठी का रस इन बीमारियों में काफी फायदा पहुँचाती है। कई लोग मुलेठी के गुणों को देखते हुए उसका ज्यादा उपयोग करने लगते हैं। ऐसा करना सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है।
क्या कहते हैं जानकार
रॉकफोर्ड के कॉलेज ऑफ मेडिसिन में डिपार्टमेंट ऑफ बायोमेडिकल साइंसेज में एसोसिएट प्रोफेसर ज्ञानेश्वर मुनिरथिम और उनकी रिसर्च टीम ने इस बात की स्टडी कि क्या मुलेठी से प्रोस्टेट कैंसर की रोकथाम की जा सकती है. उन्होंने लिकरिस (मुलेठी) से मिलने वाले ग्लाइसीर्रिजिन को लेकर प्रयोग किया है और कहा है कि इसके क्लिनिकल यूज को लेकर और स्टडी होने चाहिए. उन्होंने बताया कि जब हमने स्टडी डेटा का विश्लेषण किया तो पाया कि ग्लाइसीर्रिजिन और व्युत्पन्न ग्लाइसीरिर्जिन एसिड में सूजन रोधी और कैंसर रोधी एजेंट बनने का प्रचुर संभावना है।
हालांकि, उन्होंने आगाह किया है कि इसका मतलब ये नहीं कि कोई भी मुलेठी चबाने लगे, क्योंकि इससे प्रेशर भी प्रभावित होता है और कुछ दवाओं के साथ इसकी प्रतिक्रिया गंभीर साइड इफेक्ट पैदा कर सकती है जो कभी-कभी मौत का भी कारण बन सकती है।
धूप से आँखें हो जाएं लाल, कुछ ऐसे रखें ख्याल
तेज धूप या धूल और गंदगी के संपर्क में आने से आंखों में लालिमा आ सकती है। इसके अलावा कभी-कभी आंखों की रक्त वाहिकाओं में खुजली या सूजन या संक्रमण के कारण लाल दिखाई देता है।
ऐसे में आंखों में जलन, चुभन आदि की समस्या भी परेशान करने लगती है। ऐसे में आज इस लेख में हम आपको लाल आंखों के कुछ घरेलू उपचार और उनसे बचने के उपाय के बारे में बताएंगे।
इससे आंखों से जुड़ी समस्याएं होती हैं
, अधिक समय तक धूप में रहें
, धूल, गंदगी, कीचड़ आंखों में चली जाती है
आंखों के आसपास रक्त वाहिकाओं की सूजन
, आँखों को किसी भी प्रकार की एलर्जी
, बैक्टीरिया या वायरस आंखों की लाली और सूजन का कारण बन सकते हैं
, सर्दी, फ्लू या बुखार
, शुष्क हवा चल रही है
आँखों की लाली दूर करने के घरेलू उपाय
आइस पैक
यदि आपकी आंखें लाल या चिड़चिड़ी और खुजली कर रही हैं तो आप आइस पैक का उपयोग कर सकते हैं। यह आपको बाजार में आसानी से मिल जाएगा। इसे करीब 3-5 मिनट के लिए बंद आंखों पर भिगो दें। इससे आपकी आंखों की जलन, जीभ, खुजली शांत हो जाएगी। आंखों के लाल होने और सूजन की समस्या से भी राहत मिलेगी।
खीरा
आंखों की समस्या से राहत पाने के लिए आप खीरे का इस्तेमाल कर सकते हैं। ऐसा करने के लिए खीरे को गोल स्लाइस में काट लें और कुछ देर के लिए अपनी आंखें बंद कर लें। इस प्रक्रिया को दिन में 2-3 बार दोहराएं। खीरे के ठंडे गुण रक्त वाहिकाओं में सूजन को कम करेंगे और आंखों की लाली को खत्म करेंगे।
शहद और दूध
आंखों की लाली की समस्या से छुटकारा पाने के लिए आप शहद और दूध का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके लिए एक कटोरी में 1-1 चम्मच ठंडा दूध, शहद लें। इसके बाद इस मिश्रण में एक कॉटन पैड डुबोएं और इसे 5-10 मिनट के लिए बंद आंखों पर रखें। फिर अपने चेहरे को एक नम कपड़े या ठंडे पानी से धो लें। ऐसा दिन में 2-3 बार करने से आपको आराम महसूस होगा।
एलोवेरा जेल
एलोवेरा जेल का पौधा हर घर में आसानी से मिल जाता है। ऐसे में अगर यह आपके घर में है तो भी आंखों में सूजन, आंखों में जलन, दर्द, लालिमा आदि की समस्या को खत्म कर सकते हैं। ऐसा करने के लिए एक कटोरी में 2 चम्मच एलोवेरा जेल और थोड़ा सा पानी डालकर मिक्सर में पीस लें। फिर 2 घंटे के लिए फ्रिज में रख दें। इसके बाद रुई को इस मिश्रण में डुबोकर 10 मिनट के लिए बंद आंखों पर रखें। इसमें मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी, एंटी-ऑक्सीडेंट, एंटी-बैक्टीरियल गुण लाल आंखों से जुड़ी समस्या से राहत दिलाने में मदद करेंगे।
आलू
आंखों से जुड़ी समस्याओं से बचने के लिए आप आलू का इस्तेमाल भी कर सकते हैं। इसके कसैले गुण आंखों के आसपास की रक्त वाहिकाओं को संकुचित करने में मदद करते हैं। इस तरह यह आंखों में जलन, चुभन, आंखों का लाल होना आदि से छुटकारा दिलाता है। ऐसा करने के लिए आलू को पतला-पतला काट लें और 10 मिनट के लिए आंखों को बंद करके रख दें। इस प्रक्रिया को दिन में 2 बार दोहराएं। कुछ ही दिनों में आपको फर्क नजर आने लगेगा।
आई फोन 13 भी होगा मेड इन इंडिया फोन, ऐपल ने शुरू किया निर्माण
चेन्नई । ऐपल अपने इस फोन आईफोन 13 का निर्माण चेन्नई स्थित फॉक्सकॉन प्लांट में शुरू करेगी। ईटी की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में एपल ने सिर्फ आईफोन 13 के स्टैंडर्ड मॉडल का उत्पादन शुरू किया है जबकि आईफोन 13 प्रो मॉडल का उत्पादन भारत में शुरू नहीं हुआ है। आईफोन 13 से पहले आईफोन 12 और आईफोन 11 सीरीज का उत्पादन पहले ही भारत में हो रहा है। साल 2021 में एपल ने भारत में लगभग 5 मिलियन आईफोन की बिक्री की थी। इसके बाद भारत में 4 प्रतिशत की हिस्सेदारी हो गई थी, साथ ही कंपनी ने बीते कुछ साल से भारतीय बाजार में ध्यान देना शुरू किया है।
आईफोन की विशेषताएं
आईफोन 13 (512जीबी) अमेजन पर 1.03 लाख रुपये में सूचीबद्ध है। इसमें 6.1 इंच का सुपर रेटीना एक्सडीआर डिस्प्ले दिया गया है। इस आईफोन में सिनेमैटिक मोड दिया गया है, साथ ही इसमें बैक पैनल पर डुअल कैमरा सेटअप है, जिसमें 12 मेगापिक्सल का कैमरा दिया है।
यूजीसी ने बदले नियम – अब एक साथ करें दो पूर्णकालिक डिग्री कोर्स
नयी दिल्ली । यूजीसी के अध्यक्ष जगदीश कुमार ने घोषणा की कि छात्र अब एक ही विश्वविद्यालय या अलग-अलग विश्वविद्यालयों से एक साथ फिजिकल मोड में दो पूर्णकालिक यानी फुल टाइम डिग्री कोर्स कर सकेंगे।
हालांकि इस बारे में आयोग ने फिलहाल कोई दिशा निर्देश नहीं जारी किया है लेकिन जल्द ही जारी करने की संभावना है। उन्होंने एक प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि नयी राष्ट्रीय शिक्षा नीति(एनईपी) जारी कर दी गयी और छात्रों को विभिन्न कौशल यानी स्किल से परिपूर्ण करने की दिशा की ओर बढने के लिए यूजीसी नयी गाइडलाइन्स के साथ आया है। इसके तहत छात्र एक साथ दो फुल टाइम कोर्स कर सकते हैं और अगर वो चाहे तो दो अलग-अलग विश्वविद्यालयों से पढाई कर सकते हैं। बता दें कि यह नियम ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों मोड के लिए लागू होगा। इस निर्णय के साथ ही छात्र यूजी और पीजी दोनों के दो-दो कोर्स एक साथ पूरा कर सकेंगे, यह फिजिकल मोड में हो सकता है, यह ऑनलाइन प्लस फिजिकल मोड में किया जा सकता है, यह ऑनलाइन प्लस ऑनलाइन मोड में किया जा सकता है। कुमार ने कहा कि शीर्ष विश्वविद्यालयों को ऑनलाइन डिग्री कोर्स चलाने के चयन का अवसर दिया गया है। अगले दो सप्ताह में इसे लेकर गाइडलाइन्स भी भेज दी जाएंगी. इससे संबंधित जानकारी यूजीसी की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी की जाएगी। उम्मीदवार यूजीसी की वेबसइट पर अपडेट देखते रहें।
बेंगलुरु में पहली भारतीय शुद्ध-शून्य ऊर्जा आवास परियोजना बनाएगी महिंद्रा लाइफस्पेसेज
नयी दिल्ली । महिंद्रा समूह की रियल्टी शाखा महिंद्रा लाइफस्पेसेज डेवलपर्स लिमिटेड ने कहा कि वह बेंगलुरु में भारत की पहली शुद्ध-शून्य ऊर्जा आवास परियोजना बनाएगी, जिसके लिए 500 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा। इस आवासीय परियोजना में 550 इकाइयां शामिल हैं।
कंपनी ने यह घोषणा भी की कि वह 2030 से केवल शुद्ध-शून्य ऊर्जा आवास परियोजनाओं का विकास करेगी और समूह पेरिस समझौते के लक्ष्य से दस साल पहले 2040 तक कार्बन निरपेक्ष बन जाएगा। शुद्ध-शून्य का अर्थ उत्सर्जन को कम करके और वातावरण से कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित करके मानव गतिविधि द्वारा उत्पादित ग्रीनहाउस गैसों की मात्रा को पूरी तरह से समाप्त करना है।
इस मौके पर वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए आयोजित एक कार्यक्रम में महिंद्रा समूह के चेयरमैन आनंद महिंद्रा ने कहा, ‘‘मैं स्पष्ट रूप से एक ऐसे भविष्य की कल्पना कर सकता हूं, जहां आने वाली पीढ़ी के बच्चे हर सांस के लिए लड़ रहे हैं, और वे मेरी ओर मुड़कर कहते हैं- आप इस बारे में कुछ कर सकते थे, लेकिन आपने नहीं किया।’’
उन्होंने आगे कहा, ‘‘इसलिए मैं आज यहां अपनी प्रतिबद्धता दोहरा रहा हूं कि एक समूह के रूप में हम पेरिस समझौते के लक्ष्य से दस साल पहले, वर्ष 2040 तक कार्बन निरपेक्ष हो जाएंगे।’’




