नयी दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि संयुक्त परिवार की संपत्ति का बंटवारा सभी हिस्सेदारों की सहमति से ही किया जा सकता है। न्यायमूर्ति एस ए नजीर और न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी की पीठ ने कहा कि बंटवारा उन हिस्सेदारों के कहने पर निरस्त किया जा सकता है जिनकी सहमति प्राप्त नहीं की गई हो। शीर्ष अदालत ने कहा कि यह स्पष्ट कानून है कि कर्ता/संयुक्त परिवार की संपत्ति का प्रबंधक केवल तीन स्थितियों में संयुक्त परिवार की संपत्ति का बंटवारा कर सकता है – कानूनी आवश्यकता, संपत्ति के लाभ के लिए, और परिवार के सभी हिस्सेदारों की सहमति से।
पीठ ने कहा, यह स्थापित कानून है कि जहां सभी हिस्सेदारों की सहमति से बंटवारा नहीं किया गया हो, यह उन हिस्सेदारों के कहने पर निरस्त हो सकता है जिनकी सहमति प्राप्त नहीं हुई है। शीर्ष अदालत ने कर्नाटक उच्च न्यायालय के उस आदेश के खिलाफ एक अपील पर यह टिप्पणी की जिसमें एक व्यक्ति द्वारा बंटवारे और उसकी एक तिहाई संपत्ति के पृथक कब्जे के लिए अपने पिता तथा उसके द्वारा लाए गए एक व्यक्ति के खिलाफ दायर मुकदमे को खारिज कर दिया गया था।
न्यायालय ने कहा कि इस मामले में, दूसरे प्रतिवादी की ओर से यह स्वीकार किया गया है कि निपटान विलेख एक उपहार विलेख है जिसे पिता ने अपने पक्ष में ‘प्यार और स्नेह से’ निष्पादित किया था। इसने कहा यह अच्छी तरह से स्थापित है कि एक हिंदू पिता या हिंदू अविभाजित परिवार के किसी अन्य प्रबंध सदस्य के पास पैतृक संपत्ति का उपहार केवल ‘पवित्र उद्देश्य’ के लिए देने की शक्ति है और जिसे ‘पवित्र उद्देश्य’ शब्द से समझा जाता है वह है धर्मार्थ और/या धार्मिक उद्देश्य के लिए एक उपहार।
पीठ ने कहा इसलिए, प्यार और स्नेह से निष्पादित पैतृक संपत्ति के संबंध में उपहार का एक विलेख ‘पवित्र उद्देश्य’ शब्द के दायरे में नहीं आता है। न्यायालय ने कहा कि इस मामले में उपहार विलेख किसी धर्मार्थ या धार्मिक उद्देश्य के लिए नहीं है। हमारा विचार है कि पहले प्रतिवादी द्वारा दूसरे प्रतिवादी के पक्ष में निष्पादित निपटान विलेख / उपहार विलेख को प्रथम अपीलीय अदालत और उच्च न्यायालय द्वारा सही रूप से अमान्य घोषित किया गया था।
संयुक्त परिवार की संपत्ति का बंटवारा कैसे हो सकता है, सुप्रीम कोर्ट ने बताया
कोलकाता के आईटी केंद्र में 348 फुट ऊंची इमारत बनाएगा मर्लिन समूह
कोलकाता । कोलकाता की रियल्टी क्षेत्र की कंपनी मर्लिन ग्रुप शहर के आईटी केंद्र सॉल्ट लेक के सेक्टर-पांच में 200 करोड़ रुपये की लागत से गगनचुंबी इमारत का निर्माण करेगी। कंपनी के अधिकारियों ने कहा कि प्रस्तावित वाणिज्यिक केंद्र ‘द समिट’ में 28 मंजिले होंगी और यह 348 फुट ऊंची इमारत होगी। यह सेक्टर-पांच का सबसे ऊंचा व्यावसायिक स्थान होगा। अभी सबसे ऊंची इमारत पीएस सृजन कॉपोरेट पार्क ‘आईटी ब्लॉक’ की है जो 295 फुट ऊंची है।
कोलकाता की सबसे ऊंची आवासीय इमारत ‘द 42’ है। यह 853 फुट ऊंची है और इसमें 65 मंजिले हैं। ‘द समिट’ पूर्वी भारत का पहला आईटी और आईटीईएस टॉवर होगा, जिसे भारतीय हरित इमारत परिषद से हरित इमारत और हेल्थ एंड वेलनेस का दोहरा प्रमाणीकरण मिलेगा।
मर्लिन ग्रुप के प्रबंध निदेशक साकेत मोहता ने कहा, ‘‘कोविड-19 महामारी अब खत्म हो रही है, कंपनियां अपने कार्यालयों को फिर से खोल रही हैं और कर्मचारियों को कार्यालय से काम करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। हमने ‘द समिट’ में स्टार्टअप और एमएसएमई क्षेत्र की जरूरतों को पूरा करने के लिए छोटे कार्यालयों की योजना बनाई है जिनका क्षेत्रफल 800 वर्ग फुट से शुरू होगा।’’मोहता ने कहा कि यह व्यावसायिक परियोजना 2025 तक पूरा हो जाएगी।
भारत से यात्री वाहनों का निर्यात 43 प्रतिशत बढ़ा, मारुति सुजुकी अग्रणी
नयी दिल्ली । ऑटो उद्योग के संगठन सिआम के ताजा आंकड़ों के अनुसार भारत से यात्री वाहनों का निर्यात वित्त वर्ष 2021-22 में 43 प्रतिशत बढ़ गया, जिसमें मारुति सुजुकी इंडिया 2.3 लाख से अधिक इकाइयों के साथ अग्रणी रही। आंकड़ों के मुताबिक 2021-22 में कुल यात्री वाहनों (पीवी) का निर्यात 5,77,875 इकाई रहा, जबकि 2020-21 में यह आंकड़ा 4,04,397 इकाई था।
सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (सिआम) के आंकड़ों के मुताबिक यात्री कार खंड में 42 प्रतिशत वृद्धि के साथ 3,74,986 इकाइयों का निर्यात किया गया, जबकि उपयोगिता वाहन खंड में निर्यात 46 प्रतिशत बढ़कर 2,01,036 इकाइयों पर पहुँच गया। वित्त वर्ष 2021-22 में वैन का निर्यात बढ़कर 1,853 इकाई हो गया, जो वित्त वर्ष 2020-21 में 1,648 इकाई था।
निर्यात के लिहाज से मारुति सुजुकी इंडिया (एमएसआई) अग्रणी रही, जबकि इसके बाद हुंडई मोटर इंडिया और किआ इंडिया रहे। एमएसआई ने समीक्षाधीन अवधि में 2,35,670 यात्री वाहनों का निर्यात किया, जो इससे पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले दोगुने से अधिक है।
वेदांत माधवन ने डेनिश ओपन तैराकी में स्वर्ण जीता
नयी दिल्ली । अपना शानदार फॉर्म बरकरार रखते हुए भारत के उदीयमान तैराक वेदांत माधवन ने कोपेनहेगन में डेनिश ओपन में पुरूषों की 800 मीटर फ्रीस्टाइल स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता ।
सोलह वर्ष के माधवन ने अपना निजी सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए 8:17.28 की टाइमिंग निकाली । उन्होंने स्थानीय तैराक अलेक्जेंडर एल ब्योर्न को 0.10 सेकंड से हराया ।
मशहूर अभिनेता आर माधवन के बेटे वेदांत ने हालांकि अपने प्रदर्शन में काफी सुधार लाया है । उनका प्रदर्शन टूर्नामेंट दर टूर्नामेंट बेहतर होता जा रहा है । इससे पहले उन्होंने 1500 मीटर फ्रीस्टाइल में रजत पदक जीता और 200 मीटर फ्रीस्टाइल में अपना टाइमिंग दुरूस्त किया ।
भारत के अनुभवी तैराक साजन प्रकाश पुरूषों की 100 मीटर बटरफ्लाय ए के फाइनल में 54.24 सेकंड के साथ पांचवें स्थान पर रहे । वहीं तानिश जॉर्ज मैथ्यू सी फाइनल में 56.44 के साथ शीर्ष रहे ।
हीट्स के शीर्ष आठ तैराक ए फाइनल के लिये क्वालीफाई करते हैं । अगले आठ बी में और उसके अगले आठ सी में उतरते हैं । महिला वर्ग में शक्ति बालाकृष्णन 200 मीटर फ्रीस्टाइल में 42 तैराकों में 34वें स्थान पर रही। भारत के इस टूर्नामेंट में अब तक दो स्वर्ण और एक रजत पदक हैं ।
भारत की महिला सॉफ्टबॉल टीम एशियाई खेलों में करेगी पदार्पण
नयी दिल्ली । भारतीय महिला सॉफ्टबॉल टीम वाइल्ड कार्ड मिलने के बाद हांगझोऊ में आयोजित होने वाले आगामी एशियाई खेलों में पदार्पण करेगी।
भारतीय हैंडबॉल संघ ने यह जानकारी साझा करते हुए बताया कि सॉफ्टबॉल एशिया ने 23 फरवरी को अपनी कार्यकारी समिति की बैठक के दौरान भारतीय टीम की वाइल्डकार्ड प्रविष्टि को मंजूरी दी थी।
भारतीय सॉफ्टबॉल संघ की अध्यक्ष नीतल नारंग ने कहा, ‘‘ वाइल्ड कार्ड के जरिये एशियाई खेलों में महिला टीम का प्रवेश वास्तव में भारत में सॉफ्टबॉल के लिए एक मील का पत्थर है। हांगझोऊ खेलों से हमें महिला खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने और उन्हें तैयार करने का एक अवसर मिलेगा क्योंकि सभी प्रमुख अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में महिलाओं की श्रेणी शामिल है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘एशियाई खेलों में प्रदर्शन करना हमारा पहला कदम है। इससे हमारी जिम्मेदारी और बढ़ेगी क्योंकि हम 2028 के लॉस एंजिल्स ओलंपिक से पहले एक मजबूत टीम बनने की इच्छा रखते हैं।’’
उन्होंने खेल मंत्रालय और भारतीय खेल प्राधिकरण (साइ) से और अधिक सहयोग मिलने की उम्मीद जतायी। सॉफ्टबॉल तोक्यो ओलंपिक का हिस्सा था और 2028 के लॉस एंजिल्स खेलों में भी शामिल होगा।
क्रिप्टो संपत्ति का विनियमन, डिजिटल मुद्रा है प्राथमिकता : आईएमएफ अधिकारी
वाशिंगटन । अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के एक शीर्ष अधिकारी ने कहा कि भारत के लिए मध्यावधि की प्राथमिकताओं में क्रिप्टो संपत्ति का विनियमन और डिजिटल मुद्रा शामिल हैं। आईएमएफ के वित्तीय सलाहकार और मौद्रिक तथा पूंजी बाजार विभाग के निदेशक टोबियास एड्रियन ने मंगलवार को यह बात कही।
उन्होंने पीटीआई-भाषा को बताया कि इसके अलावा बैंकिंग क्षेत्र में शेष नियामक चिंताओं को दूर करने और वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ एकीकरण जैसे संरचनात्मक मुद्दों पर भी भारत खास जोर दे रहा है।
उन्होंने कहा कि कुल मिलाकर आईएमएफ भारत को ‘‘एक बेहद सकारात्मक तरीके से देख रहा है।’’
उन्होंने आईएमएफ और विश्व बैंक की वार्षिक वसंत बैठक के मौके पर कहा, ‘‘मुझे लगता है कि कई अवसर हैं। (भारत में) पुनरुद्धार हो रहा है। नए वृद्धि के अवसरों, नए विकास के बारे में बहुत उत्साह है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘हम हमेशा मानते हैं कि विकास समावेशी है, और सभी लोगों को प्रभावित कर रहा है, लेकिन भारत को लेकर हमारा सामान्य नजरिया काफी सकारात्मक है।’’
एड्रियन ने कहा कि मध्यावधि में संरचनात्मक मुद्दों की बात करें तो भारत के एजेंडे में क्रिप्टो करेंसी परिसंपत्तियों को विनियमित करना काफी ऊपर है। देश को आने वाले वर्षों में इसका समाधान तलाशना होगा।
उन्होंने आगे कहा कि भारत का केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्राओं पर विचार कर रहा है, जो वित्तीय समावेशन और वित्तीय विकास के लिए काफी महत्वपूर्ण हो सकता है। उन्होंने कहा, ‘‘भारत क्या कर रहा है, इस पर हमारी नजर है। हम इन नीतिगत घटनाक्रमों का स्वागत करते हैं।’’
देश का पहला यूनीकॉर्न दम्पति, 74 बार खारिज हुए पर नहीं मानी हार
नयी दिल्ली । रुचि कालरा और आशीष महापात्र को अपने आप को अभिभावक कहलाना सबसे अधिक अच्छा लगता है। उनके तीन बच्चे हैं। खुशी, जो छह साल की है। ऐसा लगता है कि वह अपनी उम्र से काफी अधिक बड़ी हो गयी है। वह अभी से दुनिया भर के सपने देखती है। इसके अलावा अन्य दो भी काफी अधिक तेजी से बड़े हुए हैं। इनकी बदौलत रुचि और आशीष भारत में काफी अधिक लोकप्रिय सीईओ बन गए हैं। इन दोनों के ही पास एक-एक अरब डॉलर की कंपनियां हैं और इस तरह ये देश के पहले यूनिकॉर्न दम्पति बन गए हैं। रुचि कहती हैं, ‘ऑफबिजनेस हमारी बेटी जितनी ही उम्र की है। इसलिए, हमने 2016 में दो बच्चों को जन्म दिया और हमने काफी समझदारी से दोनों की परवरिश की है।’
ऑफबिजनेस और उसके छोटे भाई ऑक्सीजो की सफलता सिर्फ अच्छे पालन-पोषण तक ही सीमित नहीं है। इसके लिए काफी पापड़ बेलने पड़े थे। इस सफलता के पीछे 74 रिजेक्शंस छिपे हुए हैं। उनकी सीरीज बी फंडिंग पिच को 74 रिजेक्शन मिले थे, उसके बाद उन्हें सफलता हासिल हुई थी।
सुरक्षाकर्मी ने रोक लिया था गेट पर
एक बार तो आशीष को सुरक्षाकर्मी ने गेट के अंदर ही नहीं जाने दिया था। आशीष ने कहा, ‘यह छह साल पहले की बात है, जब मैं एक कंपनी के पास अपनी सेवाओं के बारे में बताने गया था। तब गार्ड ने मुझे अंदर नहीं जाने दिया था। इस हफ्ते, हम उस कंपनी को खरीद रहे हैं।’
टाटा का रास्ता और प्लान बी
ऑफबिजनेस के सीईओ ने कहा, ‘बी सीरीज फंडिंग की असफलताओं के समय मैंने “टाटा के रास्ते पर चलने” के अपने दृष्टिकोण को नहीं छोड़ा और प्लान बी पर गया- हर्षा भोगले का रास्ता.. एक स्पोर्ट्स कमेंटेटर के रूप में अपनी किस्मत आजमाने का.. हाथ में माइक लेकर पूरे जोश के साथ कहूं.. बूम बूम बुमराह। उन्होंने कहा, ‘मुझे बोलना पसंद है। खासकर कमेंट्री करना। मैं एक स्पोर्ट्स कमेंटेटर के रूप में वास्तव में अच्छा करूंगा।’
बेहद मुश्किल है स्टार्टअप को यूनिकॉर्न बनाना
यूनिकॉर्न से मतलब है कि उस स्टार्टअप की वैल्यूएशन एक अरब डॉलर हो जाए। कई बार हारने के बाद, घाटा खाने के बाद और बेहद संघर्षपूर्ण समय से गुजरकर कोई स्टार्टअप सफल बनता है। ऐसे में एक स्टार्टअप को यूनिकॉर्न बना देना बिल्कुल भी आसान नहीं होता। रुचि कालरा और आशीष देश के पहले यूनकॉर्न दम्पति हैं। रुचि कालरा ने ऑक्सीजो फाइनेंशियल सर्विसेज को यूनिकॉर्न बनाया तो आशीष ने ऑफबिजनस को एक अरब डॉलर के वैल्यूएशन तक पहुंचाया।
कैसे साथ आए दोनों
रुचि कालरा 38 साल की हैं और आशीष 41 साल के हैं। दोनों आईआईटी से पढ़ाई करने के बाद मैकिन्से एंड कंपनी में काम कर रहे थे। यहां ही दोनों की मुलाकात हुई। फिर दोस्ती गहरी हो गयी। दोनों का ही एंटरप्रेन्योरशिप में जाने का मन था। वे दोनों अपना खुद का व्यवसाय करना चाहते थे और लीक से हटकर कुछ नया करना चाहते थे। ये दोनों काफी समय तक यह सोचते रहे कि कब नौकरी छोड़ें और अपना व्यवसाय शुरू करें। आखिरकार उन्होंने अपना व्यवसाय शुरू किया।
ऑक्सीजो को बनाने में है दोनों पति-पत्नी का योगदान
ऑक्सीजो नाम बड़ा रोचक है। यह ऑक्सीजन और ओजोन से मिलकर बना है। ऑक्सीजो को बनाने में सिर्फ कालरा ही नहीं, बल्कि उनके पति महापात्र का भी योगदान है। ऑक्सीजो की स्थापना ऑफबिजनस की एक ब्रांच के रूप में हुई थी। बता दें कि ऑक्सीजो से एक साल पहले साल 2016 में ही ऑफबिजनस की शुरुआत हुई थी। साल 2017 में रुचि कालरा, महपात्र और अन्य तीन लोगों ने मिलकर इस स्टार्टअप की स्थापना की थी।
लेफ्टिनेंट जनरल मनोज पांडे होंगे अगले थलसेना प्रमुख
जनरल नरवणे की लेंगे जगह
नयी दिल्ली । लेफ्टिनेंट जनरल मनोज पांडे थल सेना के अगले प्रमुख होंगे। वह जनरल एम. एम. नरवणे का स्थान लेंगे जिनका कार्यकाल इस महीने के अंत में पूरा हो रहा है। अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी। लेफ्टिनेंट जनरल पांडे अभी थल सेना के उप-प्रमुख हैं। थल सेना का उप-प्रमुख बनने से पहले वह थल सेना की पूर्वी कमान का नेतृत्व कर रहे थे। इस कमान पर सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश सेक्टर में वास्तविक नियंत्रण रेखा की रक्षा की जिम्मेदारी है।
जनरल नरवणे का कार्यकाल 30 अप्रैल को समाप्त हो रहा है। लेफ्टिनेंट जनरल पांडे को दिसंबर 1982 में बॉम्बे सैपर्स में कमीशन मिला था। उन्होंने अपने बेहतरीन करियर में कई अहम पदों पर काम किया और विभिन्न इलाकों में आतंकवाद विरोधी अभियानों में भाग लिया।
उन्होंने जम्मू कश्मीर में ऑपरेशन पराक्रम के दौरान नियंत्रण रेखा के पास एक इंजीनियर रेजिमेंट की कमान संभाली। इसके अलावा उन्होंने पश्चिमी लद्दाख के ऊंचाई वाले इलाकों में एक पर्वतीय डिवीजन और पूर्वोत्तर में एक कोर की भी कमान संभाली। उन्होंने इथोपिया और इरिट्रिया में संयुक्त राष्ट्र मिशन में मुख्य इंजीनियर के रूप में भी कार्य किया है। वह जून 2020 से मई 2021 तक अंडमान निकोबार कमांड के कमांडर-इन-चीफ थे।
कर्नाटक के स्कूलों में पढ़ाई जाएगी गीता, महाभारत और पंचतंत्र की कहानियां
बेंगलुरु । कर्नाटक सरकार अगले शैक्षणिक वर्ष से स्कूली पाठ्यक्रम में हिंदू महाकाव्य कहानियां- ‘भगवद गीता’ और ‘महाभारत’ शामिल करने के लिए पूरी तरह तैयार है। इससे संबंधित सारी तैयारियां कर ली गई हैं। पाठ्यक्रम तैयार है और अगले सत्र से इसकी पढ़ाई शुरू कर दी जाएगी। हालांकि इस संबंध में कुछ समय पहले एक प्रस्ताव रखा गया था, लेकिन सत्ताधारी भाजपा सरकार ने विपक्ष को देखते हुए इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया था। अब सरकार ने साफ कहा है कि स्कूलों में इन हिंदू महाकाव्यों को पढ़ाया जाएगा।
शिक्षा मंत्री बीसी नागेश ने कहा, ‘अगले साल से, नैतिक शिक्षा को स्कूली पाठ्यक्रम में जोड़ा जाएगा। ‘भगवद गीता’, ‘महाभारत’ और ‘पंचतंत्र कहानियां’ भी नैतिक शिक्षा का हिस्सा होंगी।’ उन्होंने कहा कि जो भी विचारधाराएं बच्चों को उच्च नैतिकता में मदद करती हैं, उन्हें नैतिक शिक्षा में अपनाया जाएगा। यह एक धर्म तक ही सीमित नहीं होगा। विभिन्न धार्मिक ग्रंथों के पहलुओं को अपनाया जाएगा जो बच्चों के लिए फायदेमंद हैं। हालांकि, एक विशेष धर्म के पहलुओं का पालन किया जाएगा।
मंत्री नागेश ने यह भी स्पष्ट किया कि मैसूर साम्राज्य के पूर्व शासक टीपू सुल्तान का शीर्षक ‘मैसुरु हुली’ (मैसूर का शेर) पाठ्य पुस्तकों में रखा जाएगा। भाजपा विधायक अप्पाचू रंजन ने टीपू सुल्तान पर पाठ्य पुस्तकों से सबक हटाने की मांग की है। विधायक रंजन आग्रह कर रहे हैं कि अगर टीपू सुल्तान पर सबक सिखाया जाए तो सभी पहलुओं को पढ़ाया जाना चाहिए। टीपू एक कन्नड़ विरोधी शासक था जिसने प्रशासन में फारसी भाषा थोप दी थी। कोडागु में उसके अत्याचार बच्चों को भी सिखाए जाने चाहिए।
विधायक ने कहा कि टीपू पर पाठ नहीं हटाया जाएगा लेकिन अनावश्यक विवरण हटाए जाएंगे। उन्होंने बताया कि किन पहलुओं को छोड़ दिया जाएगा, इसका विवरण बाद में बताएंगे। मंत्री नागेश ने आगे कहा कि उर्दू स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के माता-पिता ने उनसे उन स्कूलों में समकालीन पाठ्यक्रम शुरू करने का अनुरोध किया है। उन्हें डर है कि उनके बच्चे इस प्रतिस्पर्धी दुनिया में पिछड़ जाएंगे। हालांकि, मदरसों या अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की ओर से ऐसी कोई मांग नहीं है, उन्होंने कहा।
दक्षिण 24 परगना जिले के बारुईपुर तक जा सकती है मेट्रो ट्रेन परियोजना
कोलकाता । आने वाले दिनों में दक्षिण 24 परगना जिले के बारुईपुर तक मेट्रो चलाई जा सकती है। कुछ ऐसी ही संभावनाएं हैं। यह मेट्रो परियोजना होती है तो बड़े पैमाने पर लोगों को सहूलियत मिलेगी। सूत्रों की मानें तो शहर के विस्तारित मेट्रो नेटवर्क का लक्ष्य दिल्ली के रास्ते पर जाना है, जो बाहरी इलाकों को लेते हुए हजारों यात्रियों के साथ त्वरित, विश्वसनीय परिवहन की तलाश में आज भीड़भाड़ वाला इलाका बन गया है।
दरअसल पिछले दिनों राज्य सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा था कि हम रेल मंत्रालय को कोलकाता और उसके आसपास मेट्रो नेटवर्क के एक माड्यूलर विस्तार का प्रस्ताव देंगे, जैसा कि दिल्ली मेट्रो ने किया है। ऐसे में सर्वेक्षण से पता चलेगा कि इसमें कहीं कोई बाधा तो नहीं है। वर्तमान में जो मेट्रो परियोजनाएं चल रही हैं, उनके क्रियान्वयन के बाद ही शहर की सूरत बदल जाएगी। मेट्रो रेलवे सूत्रों की मानें तो एयरपोर्ट-कवि सुभाष लिंक का बारुईपुर तक विस्तार किया जा सकता है। माना जा रहा है कि मेट्रो नेटवर्क का विस्तार करने का राज्य सरकार का निर्णय मूल परियोजनाओं में देरी करने वाली बाधाओं को दूर करने में धीमी, लेकिन महत्वपूर्ण सफलता के बाद आया है। दरअसल एक समस्या यह भी है कि वर्तमान मेट्रो परियोजनाओं की एजेंसियों को कई बाधाओं में जमीन अतिक्रमण सहित अन्य समस्याएं शामिल हैं। हालांकि धीरे-धीरे सभी समस्याओं को दूर किया जा सका है।
जल्द सर्वे की संभावना
सूत्रों की मानें तो बारुईपुर तक मेट्रो के विस्तारीकरण को लेकर जल्द सर्वे संबंधी टेंडर भी जारी किया जा सकता है। ऐसे में सर्वे के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी कि मेट्रो परियोजना पर काम कैसे, किस ओर व कब तक शुरू किया जा सकता है। न्यू गरिया-एयरपोटमेट्रो कॉरिडोर के तहत न्यू गरिया में एक जगह भी बारुईपुर मेट्रो परियोजना को ध्यान में रखकर छोड़ी गई है। अब देखना यह है कि किस प्रकार दिल्ली की तर्ज पर ही महानगर में भी मेट्रो परियोजना होगी।
न्यू गरिया-बारुईपुर मेट्रो विस्तार के लिए आदि गंगा के साथ ट्रैक बनाने की अस्थायी योजना है। हालांकि इस पर किसी प्रकार की अब तक सही जानकारी नहीं मिल सकी है।




