Saturday, April 4, 2026
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नौकरियां और रोजगार देने के मामले में बेंगलुरु शीर्ष पर – रिपोर्ट

दिल्ली और मुम्बई पीछे

नयी दिल्ली।  हायरिंग प्लेटफॉर्म हायरेक्ट  के एक अध्ययन में दावा किया गया है कि बेंगलुरु 17.6 फीसदी अनुपात के साथ सबसे अधिक नौकरियों और रोजगार के साथ शीर्ष स्थान पर बना हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक बेंगलुरु के बाद सूची दिल्ली और मुंबई क्रमश: दूसरे एवं तीसरे पायदान पर हैं। हायरेक्ट की स्टडी रिपोर्ट में जहां राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली ने 11.5 फीसदी औसत के साथ दूसरा स्थान प्राप्त किया है तो वहीं 10.4 फीसदी औसत के साथ मायानगरी मुंबई तीसरे स्थान पर रही है। जबकि उत्तर प्रदेश की हाईटेक सिटी और देश का अपैरल हब माने जाने वाले नोएडा को महज छह फीसदी औसत के साथ सूची में जगह दी गई है।

हायरेक्ट की यह अपनी तरह की पहली स्टडी रिपोर्ट है। रिपोर्ट में बताया गया है कि न्यू नॉर्मल के दौर के बाद आने वाले समय में भारत को जॉब मार्केट किस तरह से बदलने जा रहा है और कैंडिडेट ड्रिवन मार्केट में सक्सेज सर्वाइवल चांस क्या हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि सेल्स एंड बिजनेस डेवलेपमेंट सेक्टर में सर्वाधिक 26.9 फीसदी रोजगार मिल रहा है।
इसके बाद आईटी और आईटीईएस सेवाओं से जुड़ा क्षेत्र 20.6 फीसदी औसत अनुपात के साथ दूसरे स्थान पर रहा है। जबकि खरीद और बिक्री क्षेत्र 0.3 फीसदी औसत के साथ साल का सबसे कम रोजगार पैदा करने वाले क्षेत्रों में से एक रहा है। हालांकि, आई टी / आईटीईएस इंडस्ट्री में पिछले वर्ष की तुलना में नौकरियों की वृद्धि दर्ज की गईं हैं। ऐसा भारतीय कंपनियों में तेजी से बढ़ते डिजिटलाइजेशन के प्रभाव के कारण भी हो सकता है। भारतीय आईटी सॉफ्टवेयर सेक्टर में भर्ती गतिविधियां साल दर साल 163 फीसदी बढ़ रही हैं।
शीर्ष 20 फीसदी सर्वाधिक वेतन वाली नौकरियों में आईटी इंजीनियरों की है। जिन्हें पांच-10 वर्षों के अनुभव के साथ 54.2 फीसदी औसत के साथ शीर्ष भुगतान वाली नौकरियों में रखा गया है। इसके बाद से सेल्स एंड बिजनेस डेवलेपमेंट सेक्टर हैं। जहां आईटी सेक्टर की तरह ही समान अनुभव श्रेणी के साथ 20.4 फीसदी तक की वेतन बढ़ोतरी देखी गई है। मोटे तौर पर देखें तो आईटी सेक्टर में पांच से 10 साल के अनुभव के बाद सेल्स एंड बिजनेस डेवलेपमेंट सेक्टर के मुकाबले 63 फीसदी तक की वेतन बढ़ोतरी हो रही है।

बेटी की अच्छी परवरिश के लिए 36 सालों से पुरुष बनकर जी रही है ये माँ

चेन्नई । हम जिस महिला की बात कर रहे हैं उनका नाम है एस पेचियाम्मल , जो तमिलनाडु के एक छोटे से गांव कटुनायक्कनपट्‌टी (थूथुकुडी शहर से क़रीब 30 किमी की दूरी पर) से संबंध रखती हैं। इनकी शादी के महज़ 15 दिन बाद पति की मृत्यु हो गई थी। तब इनकी उम्र मात्र 20 वर्ष थी. पेचियाम्मल दोबारा शादी नहीं करना चाहती थीं. इसलिए, आगे की ज़िंदगी बड़ी चुनौतियों के साथ बिताने की ठान ली। पेचियाम्मल की जब बेटी हुई थी और घर और बेटी की परवरिश के लिए काम करना शुरू कर दिया।

पुरुष प्रधान समाज का शिकार
एस पेचियाम्मल जिस गांव से सम्बन्ध रखती थीं, उनके लिए वहां काम करना उतना आसान नहीं था। वो जहां जाती लोग उन्हें परेशान किया करते थे। बेटी की परवरिश के लिए उन्होंने होटल, चाय की दुकान और कंस्ट्रक्शन साइट्स जैसी जगहों पर काम करने की कोशिश की लेकिन वहां लोग तानों के साथ बुरी नज़र से देखते और साथ ही अभद्र बातें करते थे।
असहज भरी ज़िंदगी से गुज़र रही थीं पेचियाम्मल
जब एस पेचियाम्मल को लगा कि इस पुरुष प्रधानस समाज में एक सामान्य जीवन जीना मुश्किल है, तो उन्होंने आगे की ज़िंदगी एक पुरुष बनकर जीने का फ़ैसला किया।
इसके लिए उन्होंने अपने केश तिरुचेंदुर मुरुगन मंदिर में दान किए और स्त्री के परिधान
त्याग कर कमीज़ और लुंगी पहनना शुरू कर दिया,साथ ही अपना नाम बदलकर मुथु भी रख लिया। इंडिया एक्सप्रेस को दिए इंटरव्यू के अनुसार, मुथु बनीं पेचियाम्मल क़रीब 20 साल बाद अपने मूल स्थान में कटुनायक्कनपट्‌टी में जाकर बस गयीं। केवल उनकीबेटी और उनके सबसे नज़दीकी लोग ही उनकी असलियत जानते थे।

पुरुष बनकर ही रहना चाहती हैं

पेचियाम्मल अब 57 वर्ष की हो चुकी हैं और उनकी बेटी की भी शादी हो चुकी है लेकिन उनका मानना है कि वो इसी तरह पुरुष बनकर रहना चाहती हैं. उनका कहना है कि मैं अपनी मृत्यु तक मुथु बनकर ही रहूंगी.” जानकर हैरानी होगी कि उनके आधार कार्ड, वोटर कार्ड और राशन कार्ड में भी उनका नाम मुथु ही है।

वहीं, वो कहती हैं कि, ” मेरे पास न तो अपना घर है और न ही मेरे पास कोई बचत है। मैं विधवा प्रमाण पत्र के लिए भी आवेदन नहीं कर सकती. चूंकि मेरी उम्र हो चुकी है, इसलिए मैं काम भी नहीं कर सकती हैं। सरकार से आर्थिक सहायता देने का अनुरोध करती हूं. ” इस विषय पर कलेक्टर डॉ के सेंथिल राज ने का कहना है कि, “वो देखेंगे कि क्या किसी सामाजिक कल्याण योजना के तहत पेचियाम्मल की सहायता की जा सकती है।

रेंट एग्रीमेंट 11 महीनों का ही क्यों होता है, एक साल का क्यों नहीं?

जो लोग किराए पर रहते हैं या फिर जिन लोगों ने किराए पर घर दे रखा है, उन लोगों के लिए रेंट एग्रीमेंट काफी आम शब्द है। आपने देखा होगा कि जिस रेंट एग्रीमेंट (Rent Agreement Rules) की हम बात कर रहे हैं, वो एग्रीमेंट 11 महीने का होता है।

लेकिन, कभी आपने सोचा है कि रेंट एग्रीमेंट हमेशा 11 महीने का ही क्यों बनवाया जाता है और इसे पूरे साल यानी 12 महीने का क्यों नहीं बनवाया जाता।।
रेंट एग्रीमेंट के बिना ही लंबे समय तक एक जगह पर रहते हैं. तो पहले आपको बता दें कि ऐसा नहीं करना चाहिए और रेंट एग्रीमेंट समय पर बनवा लेना चाहिए।
क्या होता है रेंट एग्रीमेंट?
रेंट एग्रीमेंट मकान मालिक और किराएदार के बीच होने वाला एक अनुबन्ध यानी कॉन्ट्रेक्ट होता है. जिसमें बताया जाता है कि एक मकान मालिक एक सीमित समय के लिए किसी को अपनी रहने या किसी इस्तेमाल के लिए किराए पर दे रहा है और इसके लिए एक किराया तय किया जाता है। इस एग्रीमेंट में किराएदार और मकान मालिक के बीच जो शर्ते तय की जाती हैं। उन्हें लिखा जाता है और दोनों आपस में इस अनुबन्ध के जरिए कुछ शर्तों पर राजी होते हैं. ये कोर्ट में भी मान्य होता है।
11 महीना का ही क्यों होता है रेंट एग्रीमेंट?

आपने देखा होगा कि जब भी किराएदार, मकानमालिक या ब्रोकर भी रेंट एग्रीमेंट बनवाता है तो 11 महीने का ही कॉन्ट्रेक्ट बनवाया जाता है। इंडियन रजिस्ट्रेशन एक्ट होता है. उसके सेक्शन 17 में कुछ दस्तावेजों की जानकारी दी गयी है। उनके रजिस्ट्रेशन जरूरी है और लीज डीड भी उसमें बताई गयी है। आपको बता दें कि रेंट एग्रीमेंट को एक तरह से लीज डीज ही माना जाता है. उसमें कहा गया है कि अगर एक साल ऊपर कोई भी लीज डीड होता है तो आपको लीज डीड भी करवानी होगी। ऐसें में अगर रेंट एग्रीमेंट 1 साल से ज्यादा का होगा तो फिर इसका रजिस्ट्रेशन करवाना होगा।

इसके बाद अगर कोई रजिस्ट्रेशन करवाता है तो उसके लिए फिर ड्यूटी, स्टांप खर्च आदि देना होगा। ऐसे में इस खर्चे से बचने के लिए रेंट एग्रीमेंट को 11 महीने का ही करवाया जाता है। इसके बाद इसका नवीनीकरण करवा लिया जाता है, लेकिन ये 12 महीने से ज्यादा वक्त का अनुबन्ध नहीं होता है.

क्या किराएदार क्यों मकान पर कब्जा कर सकता है?

कानूनी जानकारों का कहना है, ‘वैसे तो कभी भी किसी भी किराएदार का मकान मालिक की संपत्ति पर हक नहीं होता है. लेकिन कुछ परिस्थितियों में किराए पर रहने वाला व्यक्ति उस पर अपना जाहिर कर सकता है। ट्रांसफर ऑफ प्रोपर्टी एक्ट के अनुसार, एडवर्स पजेशन में ऐसा नहीं होता है और इसमें जिस पर संपत्ति का कब्जा होता है, वो उसे बेचने का अधिकारी भी होता है। यानी अगर कोई 12 साल तक किसी संपत्ति पर एडवर्स पजेशन रखता है तो उसे संपत्ति पर अधिकार मिल जाता है।
उदाहरण के तौर पर समझे तो जैसे किसी व्यक्ति ने अपने जानकार को अपनी सम्पत्ति रहने के लिए दे रखी है और वो वहां 11 साल से ज्यादा साल रह रहा है तो वो उस संपत्ति पर अधिकार जमा कर सकता है।
इसके उलट अगर कोई किराएदार है और मकान मालिक समय-समय पर रेंट एग्रीमेंट बनवा रहा है तो उन्हें कोई दिक्कत नहीं होगी। इस स्थिति में कोई भी व्यक्ति उनकी संपत्ति पर कब्जा नहीं कर सकता।
( साभार – टीवी 9 भारतवर्ष)

चार महीने के अंदर घटेगा ‘ड्रोन पायलट प्रशिक्षण पाठ्यक्रम’ का शुल्क : सिंधिया

नयी दिल्ली । ‘ड्रोन पायलट प्रशिक्षण पाठ्यक्रम’ का शुल्क अगले तीन-चार महीनों में कम हो जाएगा। नागर उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने गत मंगलवार को इसकी जानकारी देते हुए कहा कि इस पाठ्यक्रम की संचालित करने वाले संस्थानों की संख्या बढ़ने जा रही है, जिससे प्रशिक्षण शुल्क में कमी आएगी।

एक किसान ने वीडियो क्रॉन्फ्रेंस के जरिए सिंधिया के साथ बातचीत के दौरान ‘ड्रोन पायलट प्रशिक्षण पाठ्यक्रम’ के लिए ‘उच्च शुल्क’ का मुद्दा उठाया था। सिंधिया ने कहा कि बीते पांच महीनों में विमानन नियामक डीजीसीए ने ड्रोन पायलटों के प्रशिक्षण के लिए 23 संस्थानों को मान्यता दी है।

मंत्री ने मोबाइल फोन की कीमत का उदाहरण दिया और बताया कि कैसे भारत में पिछले कुछ वर्षों में यह सस्ता हुआ है। मंत्री ने कहा, “जैसे-जैसे स्कूलों की संख्या बढ़ेगी, ड्रोन पायलटों के प्रशिक्षण की लागत भी कम होगी। अगले तीन से चार महीनों के अंदर आप उस क्रांति को भी देखेंगे, क्योंकि हम ऐसे स्कूलों की संख्या बढ़ाते रहेंगे।”

सिंधिया ने कहा कि देश को निश्चित रूप से अधिक ड्रोन पायलटों की जरूरत है और यही कारण है कि उनकी प्रमाणन प्रक्रिया पूरी तरह से विकेंद्रीकृत हो गई है।

उन्होंने कहा, “अब केवल डीजीसीए ही ड्रोन स्कूलों को प्रमाणित करेगा, और संबंधित ड्रोन स्कूल पायलटों को प्रमाण पत्र देंगे।”

महिला टी20 चैलेंज में कप्तान की भूमिका में नजर आएंगी मंधाना, हरमनप्रीत और दीप्ति

नयी दिल्ली । स्टार भारतीय खिलाड़ी स्मृति मंधाना, हरमनप्रीत कौर और दीप्ति शर्मा को 23 मई से पुणे में होने वाले महिला टी20 चैलेंज क्रिकेट टूर्नामेंट के लिए गत सोमवार को तीन टीम का कप्तान बनाया गया।
भारतीय क्रिकेट बोर्ड (बीसीसीआई) ने प्रत्येक टीम में 16 खिलाड़ियों को जगह दी है। हरमनप्रीत को सुपरनोवाज, मंधाना को ट्रेलब्लेजर्स और दीप्ति को वेलोसिटी की कमान सौंपी गई है। पिछला टूर्नामेंट 2020 में हुआ था जिसे ट्रेलब्लेजर्स ने जीता था।
अनुभवी भारतीय क्रिकेटर मिताली राज, झूलन गोस्वामी और शिखा पांडे को किसी टीम में जगह नहीं मिली है। इस प्रदर्शनी टूर्नामेंट में 12 विदेशी खिलाड़ी भी हिस्सा लेंगी जिसमें दक्षिण अफ्रीका की सलामी बल्लेबाज लॉरा वोलवार्ट और दुनिया की नंबर एक गेंदबाज सोफी एकलेस्टोन भी शामिल हैं।
थाईलैंड की नथाकेन चेनतम दूसरी बार टूर्नामेंट में हिस्सा लेंगी। टूर्नामेंट में हिस्सा लेने वाली आस्ट्रेलिया की एकमात्र खिलाड़ी लेग स्पिनर एलेना किंग हैं जबकि इंग्लैंड की खिलाड़ियों में एकलेस्टोन के अलावा सोफिया डंकले और केट क्रॉस भी शामिल है। बांग्लादेश की सलमा खातून और शरमिन अख्तर को भी चुना गया है। टूर्नामेंट में हिस्सा लेने वाली वेस्टइंडीज की खिलाड़ी डिएंड्रा डोटिन और हेली मैथ्यूज हैं।

दक्षिण अफ्रीका की कप्तान सुने लुस और वोलवार्ट क्रमश: सुपरनोवाज और वेलोसिटी का प्रतिनिधित्व करेंगी।.हाल में संपन्न सीनियर महिला टी20 टूर्नामेंट में अच्छा प्रदर्शन करने वाली खिलाड़ियों को टीम में जगह मिली है। टूर्नामेंट की सबसे सफल बल्लेबाज केपी नवगिरे और सबसे सफल गेंदबाज आरती केदार वेलोसिटी के लिए खेलेंगी।

आगामी सत्र संभवत: महिला चैलेंज का अंतिम टूर्नामेंट होगा क्योंकि बीसीसीआई अगले साल से पूर्ण महिला आईपीएल के आयोजन की योजना बना रहा है।

टीम इस प्रकार हैं:

सुपरनोवाज: हरमनप्रीत कौर (कप्तान), तानिया भाटिया, एलेना किंग, आयुष सोनी, चंदू वी, डिएंड्रा डोटिन, हरलीन देओल, मेघना सिंह, मोनिका पटेल, मुस्कान मलिक, पूजा वस्त्रकार, प्रिया पूनिया, राशि कनौजिया, सोफी एक्लेस्टोन, सुने लुस और मानसी जोशी।

ट्रेलब्लेजर्स: स्मृति मंधाना (कप्तान), पूनम यादव, अरुंधति रेड्डी, हेली मैथ्यूज, जेमिमा रोड्रिग्स, प्रियंका प्रियदर्शिनी, राजेश्वरी गायकवाड़, रेणुका सिंह, ऋचा घोष, एस मेघना, सैका इशाक, सलमा खातून, शरमिन अख्तर, सोफिया ब्राउन, सुजाता मलिक और एसबी पोखरकर।

वेलोसिटी: दीप्ति शर्मा (कप्तान), स्नेह राणा, शेफाली वर्मा, अयाबोंगा खाका, केपी नवगिरे, कैथरीन क्रॉस, कीर्ति जेम्स, लॉरा वोलवार्ट, माया सोनवणे, नथाकेन चेनतम , राधा यादव, आरती केदार, शिवली शिंदे, सिमरन बहादुर, यस्तिका भाटिया और प्रणवी चंद्रा।

भारत ने अप्रैल में जो़ड़े रोजगार के 88 लाख अवसर : रिपोर्ट

कोलकाता । महामारी की शुरुआत के बाद से अप्रैल, 2022 में रोजगार बाजार में सबसे तेज विस्तार देखने को मिला है। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकनॉमी (सीएमआईई) के आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल में 88 लाख लोग देश के श्रमबल से जुड़े हैं। हालांकि, मांग की तुलना में उपलब्ध रोजगार पर्याप्त नहीं हैं।
सीएमआईई के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) महेश व्यास ने कहा कि अप्रैल में भारत का श्रमबल 88 लाख बढ़कर 43.72 करोड़ पर पहुंच गया। यह महामारी की शुरुआत के बाद का सबसे ऊंचा आंकड़ा है।
मार्च के अंत तक देश का श्रम बाजार 42.84 करोड़ था। आंकड़ों के अनुसार, 2021-22 में देश के श्रमबल में औसत मासिक वृद्धि दो लाख रही थी।

रिपोर्ट में कहा गया है कि 88 लाख लोगों के श्रमबल से जुड़ने का आंकड़ा तभी हासिल हो सकता है जब कुछ कामकाज की उम्र के रोजगार से वंचित लोग फिर कुछ काम पाने में सफल हुए हों।

रिपोर्ट में कहा गया है कि एक महीने में कामकाज के उम्र के लोगों की औसत वृद्धि दो लाख से अधिक नहीं हो सकती। इसका मतलब है कि अप्रैल में रोजगार बाजार में वे लोग भी लौटे हैं जिनके पास अभी कोई काम नहीं था।

अप्रैल में श्रमबल में 88 लाख की वृद्धि से पहले पिछले तीन माह में इसमें 1.2 करोड़ की गिरावट आई थी। व्यास ने कहा कि श्रम बाजार में मांग के हिसाब से बदलाव आता रहता है। अप्रैल में रोजगार में वृद्धि मुख्य रूप से उद्योग और सेवा क्षेत्रों में हुई। उद्योग क्षेत्र में जहां 55 लाख रोजगार के अवसर पैदा हुए, वहीं सेवा क्षेत्र में 67 लाख रोजगार जोड़े गए। इस दौरान कृषि क्षेत्र में रोजगार 52 लाख घट गया।

इंडोनेशिया को 3-0 से हराकर भारत ने पहली बार जीता थॉमस कप 

बैंकॉक । भारत की पुरुष बैडमिंटन टीम ने रविवार को यहां एकतरफा फाइनल में 14 बार के चैंपियन इंडोनेशिया को 3-0 से हराकर पहली बार थॉमस कप का खिताब जीतकर अपना नाम इतिहास के पन्नों में दर्ज करा दिया।
भारतीय टीम ने टूर्नामेंट के इतिहास का अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। टीम के लिए विश्व चैंपियनशिप के पदक विजेताओं लक्ष्य सेन और किदांबी श्रीकांत के अलावा सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी की दुनिया की आठवें नंबर की जोड़ी ने यादगार जीत दर्ज की।

नॉकआउट चरण में लय हासिल करने के लिए जूझ रहे लक्ष्य ने सबसे महत्वपूर्ण मुकाबले में उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन करते हुए पहले एकल मैच में पिछड़ने के बाद वापसी करते हुए दुनिया के पांचवें नंबर के खिलाड़ी एंथोनी सिनिसुका गिनटिंग को 8-21 21-17 21-16 से हराकर भारत को 1-0 की बढ़त दिलाई।

सात्विक और चिराग की देश की शीर्ष पुरुष युगल जोड़ी ने इसके बाद प्रतिकूल हालात में शानदार वापसी करते हुए दूसरे गेम में चार मैच प्वाइंट बचाए और मोहम्मद अहसन और केविन संजय सुकामुल्जो की जोड़ी को 18-21 23-21 21-19 से हराकर भारत की बढ़त को 2-0 किया।

दूसरे एकल में श्रीकांत ने शानदार प्रदर्शन करते हुए एशियाई खेलों के स्वर्ण पदक विजेता जोनाथन क्रिस्टी को सीधे गेम में 48 मिनट में 21-15 23-21 से हराकर भारत को 3-0 की विजयी बढ़त दिला दी।

तय से कम कोयले का भंडार रखने वाले ताप बिजली संयंत्रों को देना पड़ सकता है ‘जुर्माना’

नयी दिल्ली । निर्दिष्ट से कम कोयला भंडार रखने के लिए ताप बिजली संयंत्रों को जल्द ही विभिन्न बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) को ‘निवारक शुल्क’ या एक तरह से जुर्माने का भुगतान करना पड़ सकता है। केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग (सीईआरसी) ने इन शुल्कों की गणना की प्रक्रिया पर हितधारकों से राय मांगी है।
सीईआरसी ने गत 13 मई, 2022 को एक सार्वजनिक नोटिस जारी करके हितधारकों से राय मांगी है। प्रतिक्रिया 27 मई, 2022 तक दी जा सकेगी। कोयला भंडार की बीते तीन महीने की औसत उपलब्धता के आधार पर ‘निवारक शुल्क’ की गणना के लिए 2019 शुल्क नियमों में संशोधन का भी प्रस्ताव दिया गया है।

सीईआरसी ने इस विषय पर आधाारित एक स्टाफ पेपर में कहा कि हाल के महीनों में कोयला आधारित कई ताप ऊर्जा संयंत्रों में कोयले का भंडार केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) द्वारा तय कोयला भंडार के नियमों की तुलना में कम रहा है।

इसमें कहा गया कि कोयले का भंडार इतना कम होने पर बिजली उत्पादन स्टेशन कम उपलब्धता की घोषणा करते हैं जिसके बाद राज्यों को वैकल्पिक स्रोतों से अधिक दाम पर ऊर्जा की खरीद करनी पड़ती है।
ताप ऊर्जा उत्पादन करने वाले स्टेशनों पर कोयले का पर्याप्त भंडार हमेशा बना रहे इसके लिए सीईए ने कोयला भंडार नियमों में संशोधन किया है।

फरवरी, 2022 में ऊर्जा मंत्रालय ने सीईआरसी को निर्देश जारी करके नियमों में उचित संशोधन करने को कहा था ताकि कोयले का कम भंडार रखने के लिए ताप बिजली संयंत्रों के खिलाफ दंडात्मक कदम उठाए जा सकें।

इसी की पृष्ठभूमि में सीईआरसी यह स्टाफ पेपर लेकर आया है जिसमें कम कोयला भंडार रखने के लिए दंडात्मक कदम उठाने और ‘निवारक शुल्क’ की गणना करने की प्रक्रिया के बारे में प्रस्ताव दिया गया है।

भारत ने गेहूं के निर्यात पर तत्काल प्रभाव से लगायी रोक

नयी दिल्ली । भारत ने घरेलू स्तर पर बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के उपायों के तहत गेहूं के निर्यात पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया है। आधिकारिक अधिसूचना से यह जानकारी मिली है।
हालांकि, विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) ने 13 मई को जारी अधिसूचना में कहा, ‘‘इस अधिसूचना की तारीख या उससे पहले जिस खेप के लिए अपरिवर्तनीय ऋण पत्र (एलओसी) जारी किए गए हैं, उसके निर्यात की अनुमति होगी।’’ डीजीएफटी ने कहा, ‘‘गेहूं की निर्यात नीति पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगाया जाता है…।’’ उसने यह भी स्पष्ट किया कि भारत सरकार द्वारा अन्य देशों को उनकी खाद्य सुरक्षा जरूरतों को पूरा करने के लिए और उनकी सरकारों के अनुरोध के आधार पर दी गई अनुमति के आधार पर गेहूं के निर्यात की अनुमति दी जाएगी।

एक अलग अधिसूचना में डीजीएफटी ने प्याज के बीज के लिए निर्यात शर्तों को आसान बनाने की घोषणा की। डीजीएफटी ने कहा, ‘‘प्याज के बीज की निर्यात नीति को तत्काल प्रभाव से सीमित श्रेणी के तहत रखा जाता है।’’ पहले प्याज के बीज का निर्यात प्रतिबंधित था।

इस सप्ताह जारी आधिकारिक आंकड़ों से पता चलता है कि ईंधन और खाद्य पदार्थों की ऊंची कीमतों के कारण अप्रैल में खुदरा मुद्रास्फीति आठ साल के उच्च स्तर पर पहुंच गई।

रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध के कारण गेहूं की वैश्विक आपूर्ति में व्यवधान के मद्देनजर निर्यात पर प्रतिबंध लगाया गया है। रूस और यूक्रेन गेहूं के प्रमुख निर्यातक रहे हैं।

मजबूत वैश्विक मांग के कारण 2021-22 में भारत का गेहूं निर्यात बढ़कर 70 लाख टन यानी 2.05 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया। डीजीएफटी के आंकड़ों के अनुसार, पिछले वित्त वर्ष में कुल गेहूं निर्यात में से लगभग 50 प्रतिशत खेप बांग्लादेश भेजी गई थी। पिछले साल इसी अवधि में 1,30,000 टन के मुकाबले देश ने इस साल लगभग 9,63,000 टन गेहूं का निर्यात किया।

भारत को 2022-23 में एक करोड़ टन गेहूं का निर्यात करने की उम्मीद थी। वाणिज्य मंत्रालय ने हाल ही में कहा था कि भारत गेहूं के निर्यात की खेप को बढ़ावा देने की संभावनाओं का पता लगाने के लिए नौ देशों-मोरक्को, ट्यूनीशिया, इंडोनेशिया, फिलीपींस, थाईलैंड, वियतनाम, तुर्की, अल्जीरिया और लेबनान में व्यापार प्रतिनिधिमंडल भेजेगा।

निजी व्यापारियों द्वारा भारी उठान और पंजाब-हरियाणा में कम आवक के कारण मौजूदा रबी विपणन सत्र में एक मई तक भारत की गेहूं खरीद भी 44 प्रतिशत घटकर 1.62 लाख टन रह गई है। सरकार ने एक साल पहले की अवधि में 2.88 लाख टन गेहूं की खरीद की थी। रबी विपणन सत्र अप्रैल से मार्च तक चलता है।

निर्यात के लिए अनाज की बढ़ती मांग के बीच निजी कंपनियों ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से अधिक कीमत पर गेहूं खरीदा है। केंद्र ने विपणन वर्ष 2022-23 में रिकॉर्ड 4.44 लाख टन गेहूं की खरीद का लक्ष्य रखा है, जबकि पिछले विपणन वर्ष में यह 4.33 लाख टन था।

केंद्रीय पूल के लिए कम खरीद के बीच केंद्र ने थोक उपभोक्ताओं को मुक्त बाजार बिक्री योजना (ओएमएसएस) के तहत गेहूं की बिक्री रोक दी है और उन्हें अनाज खरीदने के लिए योजना के शुरू होने की प्रतीक्षा नहीं करने को कहा है। कृषि मंत्रालय के दूसरे अग्रिम अनुमान के मुताबिक, फसल वर्ष 2021-22 (जुलाई-जून) में गेहूं का रिकॉर्ड 11.13 लाख टन उत्पादन होने का अनुमान है।

हिन्दी भारतवर्ष में सेतु है-सोमा बंद्योपाध्याय

बंगाल में हिन्दी की दशा और दिशा पर संगोष्ठी
 हावड़ा। हावड़ा के हिंदी विश्वविद्यालय में ‘पश्चिम बंगाल में हिंदी की दशा और दिशा’ विषय पर एक दिवसीय राज्य स्तरीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आरम्भ पश्चिम बंगाल शिक्षक प्रशिक्षण, शिक्षक योजना एवं प्रबंधन विश्वविद्यालय एवं डायमंड हार्बर महिला विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. सोमा बंद्योपाध्याय एवं हिंदी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ दामोदर मिश्र ने किया। प्रथम सत्र की मुख्य अतिथि प्रो. सोमा बंद्योपाध्याय ने कहा कि हिंदी भारतवर्ष में सेतु की तरह है और इस सेतु से होते हुए तमाम भारतीय भाषाएं यात्रा करती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कोलकाता महानगर एक बरगद के पेड़ के समान है जिस तरह से बरगद के पेड़ के नीचे छोटे-छोटे पेड़ों और मनुष्यों को संरक्षण मिलता है उसी तरह महानगर कोलकाता वह भूमि है जहां अलग-अलग जगहों से आए लोगों को संरक्षण मिलता है। प्रो. दामोदर मिश्र ने कहा कि बंगाल में हिन्दी की क्या स्थिति है इसका जीता जागता उदाहरण हिंदी विश्वविद्यालय है। संगोष्ठी के संयोजक डॉ. अभिजीत सिंह ने कहा कि बंगाल में हिन्दी के लिए काफी काम हो रहा है। विश्वविद्यावय के कुलसचिव सुकृति घोषाल ने कहा कि हिन्दी विश्वविद्यालय की स्थापना हिन्दी और बांग्ला के बीच अच्छा संबंध बनाने के लिए की गयी।

दूसरे सत्र में विशिष्ट वक्ता सूचना एवं संस्कृति पश्चिम बंगाल के हिन्दी सचिव जय प्रकाश मिश्र ने कहा कि हिन्दी को राष्ट्रभाषा के पद पर आसीन करने में आपसी विद्वेष बाधक है। रवींद्र भारती विश्वविद्यालय के प्रो. ऋषि कुमार ने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन के समय बंगाल के समाज सुधारकों का महत्वपूर्ण स्थान था और उन्होंने संपर्क के लिए हिन्दी भाषा को अपनाया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विद्यासागर विश्वविद्यालय के प्रो. प्रमोद कुमार प्रसाद ने कहा कि हिन्दी की दशा एवं दिशा सुधारने के लिए इसे और ज्यादा रोजगारमूलक बनाना होगा। समानांतर सत्र की अध्यक्षता करते हुए काजी नजरूल इस्लाम महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य डॉ. संतराम ने कहा कि हिंदी में रोजगार की अपार संभावनाएं हैं। इस अवसर पर छात्र सप्ताह समारोह में उत्कृष्ट प्रदर्शन हेतु हिन्दी विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को पुरस्कृत किया गया। कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. जे.के. भारती, डॉ. श्रीनिवास यादव सिंह और मधु सिंह ने किया। धन्यवाद ज्ञापन डॉ. विकास कुमार साव एवं परीक्षा नियंत्रक सुब्रत मंडल ने दिया। संगोष्ठी का संयोजन प्रो. मंटू दास और प्रो. प्रतीक सिंह ने किया। तकनीकी सहयोग राहुल गौड़ ने किया।