Thursday, April 30, 2026
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बीएसएफ दक्षिण बंगाल फ्रंटियर के नए आईजी बने भूपेंद्र सिंह

कोलकाता। सीमा सुरक्षा बल के दक्षिण बंगाल फ्रंटियर में नया नेतृत्व स्थापित हो गया है। भूपेंद्र सिंह ने दक्षिण बंगाल फ्रंटियर के इंस्पेक्टर जनरल का कार्यभार संभाल लिया है। वे अनीश प्रसाद, आइपीएस, के उत्तराधिकारी बने हैं, जिन्हें एफएचक्यू बीएसएफ, नई दिल्ली में स्थानांतरित किया गया है। भूपेंद्र सिंह 1990 बैच के बीएसएफ कैडर के प्रत्यक्ष प्रवेश अधिकारी हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत बीएसएफ में असिस्टेंट कमांडेंट के रूप में की थी। 34 वर्षों से अधिक की विशिष्ट सेवा वाले भूपेंद्र सिंह एक अत्यंत सम्मानित और सज्जित अधिकारी हैं। अपने लंबे करियर के दौरान उन्होंने संयुक्त राष्ट्र मिशन, एनएसीपी ओखा, तथा एसपीजी में प्रतिनियुक्ति सहित कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया है। वे अमृतसर और गांधीनगर में दो बीएसएफ सेक्टरों की कमान संभालने का गौरव भी प्राप्त कर चुके हैं। आंतरिक सुरक्षा, सीमा प्रबंधन और संवेदनशील अभियानों में उनके नेतृत्व और दक्षता को व्यापक रूप से सराहा गया है। कार्यभार ग्रहण करने के बाद भूपेंद्र सिंह ने कहा कि दक्षिण बंगाल फ्रंटियर भारत–बांग्लादेश अंतरराष्ट्रीय सीमा की सबसे संवेदनशील सीमाओं में से एक है। उन्होंने बताया कि उनकी प्राथमिकताएं सीमा सुरक्षा को और मजबूत करना, तस्करी तथा अन्य अवैध सीमापार गतिविधियों पर रोक लगाना और सीमा पर तैनात जवानों के कल्याण व मनोबल को बढ़ाना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि सीमा सुरक्षा बलों के बीच सौहार्दपूर्ण संबंध बनाए रखना तथा अन्य सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों के साथ समन्वय को मजबूत करना क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए अत्यंत आवश्यक है।

सुप्रीम कोर्ट ने जताई एसिड अटैक में धीमे ट्रायल पर चिंता

– सभी हाईकोर्ट से मांगी स्टेटस रिपोर्ट
नयी दिल्ली । उच्चतम न्यायालय ने तेजाब के हमले से संबंधित मामलों के धीमे ट्रायल पर चिंता जताई है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने सभी उच्च न्यायालयों को संबंधित मामलों की स्टेटस रिपोर्ट चार हफ्तों में दाखिल करने का निर्देश दिया है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सुझाव दिया कि इससे जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए स्पेशल कोर्ट गठित किए जाएं। कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा कि वह इस संबंध में कानून में संशोधन करने पर विचार करें, ताकि तेजाब से पीड़ित लोगों को राइट आफ पर्संस विद डिसेबिलिटी एक्ट के तहत दिव्यांग की परिभाषा में शामिल किया जा सके। यह याचिका एसिड हमले से पीड़ित शाहीन मलिक ने दायर की है। एसिड अटैक के मामले में उच्चतम न्यायालय में एक और याचिका पहले से लंबित है, जिसे मुंबई के एनजीओ एसिड सर्वाइवर्स साहस फाउंडेशन ने दायर किया है। याचिका में 2023 के लक्ष्मी बनाम भारत संघ के फैसले का हवाला दिया गया है, जिसमें कहा गया है कि एसिड अटैक पीड़ित को सरकारी और निजी अस्पतालों में मुफ्त इलाज मिलना चाहिए। कोर्ट ने कहा था कि संबंधित राज्य सरकार की ओर से देखभाल और पुनर्वास लागत के रुप में न्यूनतम 3 लाख का मुआवजा दिया जाना चाहिए। चीफ जस्टिस संजीव खन्ना की अध्यक्षता वाली बेंच ने राज्य विधिक सेवा प्राधिकरणों को एक चार्ट बनाने का भी निर्देश दिया, जिसमें पीड़ितों या उनके परिवार के सदस्यों से मुआवजा मांगने का समय और इसे प्राप्त करने का दिन शामिल करने को कहा गया है। पीड़ितों को मुआवजा मिलने में देरी पर राज्य विधिक सेवा प्राधिकरणों से संपर्क करने को कहा है। याचिका में मांग की गई है कि एसिड अटैक के पीड़ितों को दिव्यांग की तरह का दर्जा दिया जाए, ताकि उसे दूसरी सुविधाएं मिल सकें।

7.4 फीसदी हुआ भारत की जीडीपी वृ‍द्धि दर का अनुमान

नयी दिल्‍ली। वैश्विक रेटिंग एजेंसी फिच रेटिंग्स ने चालू वित्‍त वर्ष 2025-26 के लिए भारत की सकल घरेलू उत्‍पाद (जीडीपी) वृद्धि दर के अनुमान को 6.9 फीसदी से बढ़ाकर 7.4 फीसदी कर दिया है। एजेंसी ने इसके पीछे उपभोक्ता खर्च में बढ़ोतरी और जीएसटी सुधारों से बेहतर आर्थिक माहौल को प्रमुख कारण बताया है। फिच रेटिंग्स ने गुरुवार को दिसंबर के लिए जारी अपनी ग्लोबल इकोनॉमिक आउटलुक रिपोर्ट में कहा कि वित्त वर्ष 2025-26 के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि दर 7.4 फीसदी रहने का अनुमान है। इससे पहले रेटिंग एजेंसी ने 6.9 फीसदी आर्थिक वृद्धि दर रहने का अनुमान जताया था। एजेंसी का कहना है कि उपभोक्ता खर्च में बढ़ोतरी, व्यावसायिक माहौल में सुधार और वस्‍तु एवं सेवा कर (जीएसटी) में सुधारों से बढ़ी अर्थव्यवस्था की रफ्तार इस तेज वृद्धि के प्रमुख कारण हैं। फिच ने जारी बयान में दिसंबर के लिए अपनी ग्लोबल इकोनॉमिक आउटलुक रिपोर्ट में कहा, “चालू वित्त वर्ष 2025-26 (मार्च के आखिर तक) के बचे हुए समय में ग्रोथ कम होगी, लेकिन हमने अपने पूरे साल के ग्रोथ के अनुमान को सितंबर के 6.9 फीसदी से बढ़ाकर 7.4 फीसदी कर दिया है।” रेटिंग एजेंसी का यह अनुमान सरकारी डेटा के बाद आया है, जिसमें दिखाया गया है कि चालू वित्‍त वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही में जीडीपी ग्रोथ छह तिमाहियों के सबसे ऊंचे लेवल 8.2 फीसदी पर पहुंच गई। फिच ने कहा कि जुलाई-सितंबर तिमाही में जीडीपी की ग्रोथ और बढ़कर 8.2 फीसदी हो गई, जो अप्रैल-जून तिमाही में 7.8 फीसदी थी।

हाईकोर्ट ने रद्द किया उच्च प्राथमिक नियुक्ति में सुपर न्यूमेरेरी पद

कोलकाता। प्राथमिक शिक्षकों की नियुक्ति मामले में मिली राहत के सिर्फ एक दिन बाद ही बंगाल की ममता सरकार को बड़ा झटका लगा है। कलकत्ता उच्च न्यायालय ने उच्च प्राथमिक नियुक्ति में बनाए गए सुपर न्यूमेरेरी यानी अतिरिक्त शून्य पदों को पूरी तरह रद्द कर दिया है। गुरुवार को न्यायमूर्ति विश्वजीत बसु की एकल पीठ ने यह आदेश सुनाया। अदालत ने कहा कि नियमित नियुक्ति प्रक्रिया की तरह सुपर न्यूमेरेरी पद नहीं बनाए जा सकते। ऐसे पद केवल विशेष परिस्थिति में ही बनाए जाते हैं। न्यायालय ने यह भी टिप्पणी की कि राजनीतिक नैतिकता के सामने संवैधानिक नैतिकता कभी कमज़ोर नहीं होती। राज्य सरकार ने उच्च प्राथमिक स्तर पर कार्य शिक्षा और शारीरिक शिक्षा विषयों में प्रतीक्षा सूची से नियुक्ति करने के लिए कुल 1600 अतिरिक्त पद बनाने का निर्णय लिया था। इनमें 750 पद कार्य शिक्षा और 850 पद शारीरिक शिक्षा के लिए रखे गए थे। इस संबंध में मई 2022 और 14 अक्टूबर, 2022 को दो सरकारी विज्ञप्तियां जारी की गई थीं। गुरुवार को अदालत ने दोनों ही विज्ञप्तियों को रद्द कर दिया। न्यायालय ने कहा कि पैनल की वैधता समाप्त होने के बाद अतिरिक्त पद बनाना नियमों के खिलाफ है और समाप्त हो चुकी प्रतीक्षा सूची से नियुक्ति देना बिल्कुल संभव नहीं है। उच्च प्राथमिक नियुक्ति से जुड़े अन्य मुद्दों पर सुनवाई अब जनवरी में होगी। राज्य के लिए यह फैसला इसलिए बड़ा झटका है क्योंकि सिर्फ 24 घंटे पहले ही हाई कोर्ट की डिविजन बेंच ने 32 हजार प्राथमिक शिक्षकों की नियुक्ति को बरकरार रखते हुए सरकार को राहत दी थी।

रेलवे खिड़की से मिलने वाले तत्काल टिकटों के लिए लागू करेगा ओटीपी प्रणाली

नयी दिल्ली। भारतीय रेल ने यात्रियों की सुविधा और पारदर्शिता को और मजबूत करने के उद्देश्य से खिड़की से मिलने वाले तत्काल टिकटों के लिए ओटीपी आधारित टिकटिंग प्रणाली लागू करने का निर्णय लिया है। यह नई व्यवस्था अगले कुछ दिनों में देशभर के सभी आरक्षण काउंटरों पर लागू कर दी जाएगी। रेल मंत्रालय के अनुसार यह कदम तत्काल सुविधा के दुरुपयोग पर प्रभावी रूप से रोक लगाने और वास्तविक यात्रियों को अधिक अवसर उपलब्ध कराने के लिए उठाया जा रहा है। रेलवे ने जुलाई 2025 में ऑनलाइन तात्काल टिकटों के लिए आधार-आधारित प्रमाणीकरण शुरू किया था। इसके बाद अक्टूबर 2025 में सामान्य आरक्षण के प्रथम दिन ऑनलाइन टिकट बुकिंग पर ओटीपी आधारित प्रणाली लागू की गई। इन दोनों पहल को यात्रियों ने व्यापक रूप से स्वीकार किया, जिससे टिकटिंग प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनी। इसी क्रम में, 17 नवम्बर 2025 को रेलवे ने आरक्षण काउंटरों पर तात्काल टिकटों के लिए ओटीपी आधारित प्रणाली का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया था। वर्तमान में यह सुविधा 52 ट्रेनों तक विस्तारित की जा चुकी है। इस व्यवस्था के तहत, तात्काल टिकट बुक कराते समय यात्री के द्वारा फॉर्म में दिए गए मोबाइल नंबर पर एक ओटीपी भेजा जाता है। ओटीपी सत्यापन के बाद ही टिकट जारी किया जाता है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, आने वाले कुछ दिनों में इस ओटीपी आधारित तात्काल आरक्षण प्रणाली को सभी शेष ट्रेनों में लागू कर दिया जाएगा। इससे टिकटिंग प्रक्रिया में पारदर्शिता, सुरक्षा और यात्रियों की सुविधा में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

हाईकोर्ट ने बहाल की रद्द की गयी 32 हजार प्राथमिक शिक्षकों की नियुक्ति

कोलकाता। पश्चिम बंगाल में प्राथमिक शिक्षकों की नियुक्ति रद्द होने के मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए कलकत्ता उच्च न्यायालय की डिवीजन बेंच ने बुधवार को जस्टिस (सेवानिवृत्त) अभिजीत गांगुली के उस आदेश को खारिज कर दिया, जिसमें राज्य के प्राथमिक विद्यालयों में नियुक्त 32 हजार शिक्षकों की नौकरी रद्द कर दी गई थी।
जस्टिस तपोब्रत चक्रवर्ती और जस्टिस ऋतब्रत कुमार मित्रा की डिवीजन बेंच ने दोपहर में फैसला सुनाते हुए कहा कि नौ साल सेवा देने के बाद यदि इन शिक्षकों को हटाया जाता है तो इसका गंभीर प्रभाव उनके परिवारों पर पड़ेगा। साल 2014 में आयोजित टीईटी के आधार पर कुल 42,500 प्राथमिक शिक्षक नियुक्त किए गए थे। साल 2023 में जस्टिस अभिजीत गांगुली ने इनमें से 32 हजार नियुक्तियों को रद्द कर दिया था। आरोप था कि भर्ती प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुईं। साथ ही, उन्होंने राज्य सरकार को तीन महीने के भीतर नई भर्ती प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया था।
इसके खिलाफ राज्य सरकार ने डिवीजन बेंच में अपील की, जहां जस्टिस सुब्रत तालुकदार और जस्टिस सुप्रतीम भट्टाचार्य की बेंच ने सिंगल बेंच के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी और सरकार को छह माह का समय दिया। बाद में मामला उच्चतम न्यायालय पहुंचा, जहां से इसे अंतिम सुनवाई के लिए उच्च न्यायालय भेजा गया। आगामी विधानसभा चुनावों से पहले आया यह फैसला तृणमूल कांग्रेस के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है, क्योंकि शिक्षा विभाग से जुड़े भ्रष्टाचार के आरोप लंबे समय से पार्टी को घेरे हुए थे। वहीं, विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जस्टिस गांगुली ने “सही काम किया था।” उन्होंने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी के शासन में किसी भी सरकारी नौकरी की परीक्षा पारदर्शी तरीके से नहीं हुई। वहीं, तृणमूल कांग्रेस के प्रवक्ता कुणाल घोष ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि कुछ छिटपुट गलतियों और अपराधों को पूरी शिक्षा व्यवस्था की विफलता की तरह पेश किया जा रहा है। राज्य सरकार पारदर्शी तरीके से भर्ती कर रही है। जहां गलतियां हुई हैं, उन्हें सुधारा जा रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि योग्य उम्मीदवारों को जल्द से जल्द नौकरी मिले। उन्होंने विपक्ष पर राजनीतिक लाभ के लिए मामले को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए कहा कि इसमें भाजपा, सीपीएम और कांग्रेस के एक वर्ग की मिलीभगत है। उल्लेखनीय है कि, इस वर्ष मार्च में उच्चतम न्यायालय ने राज्य के कक्षा 9 से 12 तक के 25,753 शिक्षकों और गैर-शिक्षक कर्मचारियों की नियुक्ति रद्द कर दी थी। इसके बाद से शिक्षा विभाग से जुड़ी नियुक्तियों पर कानूनी और राजनीतिक विवाद लगातार बढ़ता गया।
उच्च न्यायालय के ताजा आदेश से फिलहाल प्राथमिक स्तर की भर्ती विवाद में बड़ी राहत मिली है।

केंद्र की ओबीसी सूची से हटाई गईं बंगाल की मुस्लिम समुदाय की 35 जातियां

कोलकाता। केंद्र की पिछड़ा वर्ग राष्ट्रीय आयोग (एनसीबीसी) द्वारा पश्चिम बंगाल की मुस्लिम समुदाय की 35 जातियों को केंद्रीय ओबीसी सूची से हटाने के फैसले पर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। भाजपा ने बुधवार को कहा कि यह कदम साबित करता है कि राज्य में ममता बनर्जी सरकार ने वर्षों तक तुष्टिकरण की राजनीति की है, जिससे वास्तविक रूप से पिछड़े हिन्दू वर्ग अपने उचित अधिकारों से वंचित रहे। यह जानकारी समाज कल्याण एवं अधिकारिता मंत्रालय के राज्य मंत्री बी. एल. वर्मा ने संसद में एक असितारांकित प्रश्न के लिखित उत्तर में दी है। यह प्रश्न नदिया जिले के रानाघाट से भाजपा सांसद जगन्नाथ सरकार ने पूछा था। मंत्री के उत्तर में कहा गया है कि पश्चिम बंगाल राज्य के लिए केंद्रीय ओबीसी सूची से 35 जातियों को बाहर करने की सलाह पिछड़ा वर्ग राष्ट्रीय आयोग ने 03.01.2025 को दी थी। इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा के सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के प्रमुख और पश्चिम बंगाल के केन्द्रीय पर्यवेक्षक अमित मालवीय ने कहा कि धार्मिक समुदायों को ओबीसी समूहों में शामिल कर वोट बैंक मजबूत करने की राजनीति वर्षों से चलती रही है, जिसका खामियाज़ा वास्तविक रूप से पिछड़े हिन्दू समुदायों को भुगतना पड़ा। मालवीय ने कहा कि मोदी सरकार तुष्टिकरण आधारित विकृतियों को सुधार रही है और यह सुनिश्चित कर रही है कि सामाजिक न्याय केवल वास्तविक पिछड़ेपन के आधार पर मिले, न कि वोट बैंक की राजनीति के आधार पर। ममता बनर्जी की राजनीति अब पुरानी पड़ चुकी है। इधर, पश्चिम बंगाल ओबीसी सूची के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में सुनवाई चार सप्ताह के लिए स्थगित कर दी थी और साफ कहा था कि जब तक मामला शीर्ष अदालत में लंबित है, तब तक कलकत्ता हाई कोर्ट इस पर कोई और कार्यवाही नहीं करेगा। इस वर्ष 17 जून को हाई कोर्ट की खंड पीठ ने अंतरिम आदेश देते हुए राज्य सरकार को नई ओबीसी सूची की अंतिम अधिसूचना 31 जुलाई तक प्रकाशित नहीं करने का निर्देश दिया था।

शिमला में तीन दोस्तों ने पहाड़ काटकर बनाया खेल मैदान

– अब क्रिकेट स्टेडियम की तैयारी

शिमला । हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में वर्षों से युवाओं को अच्छी क्रिकेट सुविधाओं का इंतजार था, लेकिन इस कमी ने तीन युवाओं बिनू दीवान, अजय और अभय को ऐसा प्रेरित किया कि उन्होंने असंभव दिखने वाले सपने को हकीकत में बदल दिया। कसुम्पटी विधानसभा क्षेत्र के पड़ेची गांव में 5,400 फीट की ऊंचाई पर बन रहा यह शानदार क्रिकेट स्टेडियम अपने आप में मिसाल है। प्राकृतिक खूबसूरती के बीच खड़ा यह मैदान आधुनिक सुविधाओं से लैस है और गुणवत्ता में किसी अंतरराष्ट्रीय स्तर के स्टेडियम से कम नहीं माना जा रहा। तीनों युवा शिमला के रहने वाले हैं और व्यवसायी हैं। तीनों का अपना-अपना अलग निजी व्यवसाय है। पहाड़ की कटिंग सबसे बड़ा चुनौतीपूर्ण कार्य करीब पांच-छह साल पहले शुरू हुई इस पहल को मुकाम तक पहुंचाना आसान नहीं था। इन्होंने पहले पहाड़ीनुमा निजी भूमि को खरीदा था। बिनू दीवान ने बताया कि 45 डिग्री से अधिक ढलान वाले पहाड़ को काटकर उसे खेल मैदान का आकार देना सबसे कठिन काम था। करीब 70 हजार टिप्पर मलबा पहाड़ से निकाला गया। जब काम शुरू हुआ, तब वहां मशीनरी ले जाने तक की सुविधा नहीं थी। तीनों युवाओं ने सबसे पहले सड़क बनाई, फिर लगभग 150 मीटर लंबी और 20 से 40 मीटर ऊंची मजबूत रिटेनिंग वॉल खड़ी की। इन दीवारों ने मैदान को सुरक्षित आधार दिया। लगभग 90 बीघा क्षेत्र में बने इस मैदान को समतल करते हुए 91 मीटर चौड़ा और 120 मीटर लंबा ग्रीन आउटफील्ड तैयार किया गया। चारों ओर बिछी सघन हरी घास और पूरी तरह लेवल मैदान इसे खेलने योग्य बनाते हैं। स्टेडियम का करीब 80 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है और क्रिकेटर्स यहां अभ्यास भी शुरू कर चुके हैं।

सरकारी परियोजना अटकी, युवाओं ने कर दिखाया कमाल – यह भी खास है कि जहां शिमला के कटासनी में सरकार 15 साल में भी इंडोर स्टेडियम पूरा नहीं कर सकी, वहीं तीन युवाओं ने बिना सरकारी बजट और निजी संसाधनों से सिर्फ चार साल में पहाड़ काटकर आधुनिक सुविधाओं वाला मैदान तैयार कर दिया। यही कारण है कि अब शिमला, सिरमौर, किन्नौर, सोलन, मंडी और बिलासपुर के युवा इस मैदान को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का महत्वपूर्ण मंच मान रहे हैं। धर्मशाला भले एक अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम हो, लेकिन हर युवा वहां नहीं पहुंच पाता। ऐसे में पड़ेची स्टेडियम पहाड़ी खिलाड़ियों के लिए उम्मीद की नई किरण साबित हो रहा है। अप्रैल 2026 में पड़ेची मैदान में होगा प्रो-एचपीसीएल क्रिकेट प्रेमियों के लिए एक बड़ा मौका तब आएगा जब हिमाचल प्रीमियर क्रिकेट लीग प्रो-एचपीसीएल का चौथा सीजन अप्रैल 2026 में इसी मैदान पर आयोजित होगा।

इससे पहले तीनों सीजन शिमला में मैदान न होने के कारण चंडीगढ़ में कराने पड़े थे। अब अपने मैदान में पहली बार इतने बड़े आयोजन का रोमांच देखने को मिलेगा। युवाओं के लिए बनेगा क्रिकेट स्कूल बिनू दीवान का अगला लक्ष्य इस मैदान में प्रोफेशनल क्रिकेट स्कूल शुरू करना है, ताकि पहाड़ी युवा खेल प्रशिक्षण लेकर बड़े स्तर पर अपनी पहचान बना सकें। उनका कहना है कि वे युवाओं को नशे और मोबाइल की लत से बाहर लाकर खेल के मैदान में लाना चाहते थे और यही सोच उन्हें इस मिशन तक लाई। पड़ेची स्टेडियम तक पहुंचना भी अब आसान हो गया है। शिमला से मेहली-अश्वनी खड्ड मार्ग से यह दूरी लगभग 11 किलोमीटर है, जबकि चायल रोड मार्ग से लगभग 35 किलोमीटर पड़ती है।

बंगाल में भी महंगी हुई शराब

-सरकार को चार हजार करोड़ की अतिरिक्त आय की उम्मीद

कोलकाता। राज्य सरकार की पूर्व घोषणा के अनुसार एक दिसंबर से पश्चिम बंगाल में शराब की कीमतों में बढ़ोतरी लागू हो गई है। नए नियम के तहत राज्य में नया आबकारी शुल्क प्रभावी हो गया है। पश्चिम बंगाल के आबकारी विभाग ने स्पष्ट किया है कि बीयर को छोड़कर देशी व विदेशी सभी तरह की शराब पर अतिरिक्त टैक्स लगाया गया है। आबकारी विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, नई नीति में 750 मिलीलीटर विदेशी शराब की बोतलें 30–40 रुपये तक महंगी हो गई हैं। वहीं 180 मिलीलीटर पैक पर 10 रुपये की वृद्धि की गई है। देशी शराब खरीदने पर भी उपभोक्ताओं को लगभग 10 रुपये अतिरिक्त चुकाने होंगे। विभाग ने शराब विक्रेताओं को पहले ही निर्देश दिया था कि उनके पास मौजूद पुराने स्टॉक को 30 नवंबर तक पुरानी कीमतों में बेच देना होगा। एक दिसंबर से पुराने स्टॉक समेत नया माल भी नई कीमतों पर ही बेचा जाएगा। इसके लिए प्रत्येक बोतल पर नई कीमत का स्टिकर लगाना अनिवार्य है।पुरानी कीमत पर शराब बेचते पकड़े जाने पर विक्रेता के खिलाफ जुर्माना, यहां तक कि लाइसेंस रद्द करने तक की सख्त कार्रवाई की जा सकती है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले चुनावों से पहले राज्य की राजस्व-आय बढ़ाने के उद्देश्य से ममता बनर्जी सरकार ने यह कदम उठाया है। प्रशासनिक अधिकारियों के एक वर्ग का कहना है कि इस बढ़ोतरी से 2025–26 वित्त वर्ष में करीब चार हजार करोड़ रुपये की अतिरिक्त राजस्व आय होने की संभावना है। राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि बढ़े हुए राजस्व का उपयोग सरकार विकास योजनाओं में आवंटित कर सकती है। अगले साल चुनाव से पहले राज्य सरकार का अंतरिम बजट पेश होना है, जिसमें इस अतिरिक्त आय को विकास परियोजनाओं में खर्च करने की घोषणा की जा सकती है। यही वजह बताई जा रही है कि राज्य में शराब के दामों में वृद्धि की गई है।

सावधान ! नाबालिगों में भी मिले एचआईवी के वायरस

– मालदह जिले में तीन हजार से अधिक मरीज
-पश्चिम मेदिनीपुर में सात महीनों में एचआईवी के सौ से अधिक मरीज मिले
मालदह। मालदह जिले में एचआईवी पॉजिटिव और एड्स से पीड़ित लोगों की संख्या चिंताजनक रूप से बढ़ रही है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में जिले में तीन हजार 100 संक्रमित मरीज दर्ज किए गए हैं। इनमें 300 नाबालिग शामिल हैं, जिनकी उम्र 15 वर्ष से कम है। जिले के मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. सुदीप्त भादुड़ी ने इस स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, मालदह के कई गांवों में काला ज्वर से कई लोगों की मौत हुई है। इनमें से बड़ी संख्या में मरीज एचआईवी पॉजिटिव पाए गए। यही नहीं, टीबी से पीड़ित कई मरीजों में भी एचआईवी संक्रमण की पुष्टि हुई है। टीबी से होने वाली मौतें अब भी जिले में जारी हैं, जिससे विभाग की चिंता और भी बढ़ गयी है। सोमवार को जिले के स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि एचआईवी रोकथाम के लिए विशेष कदम उठाए गए हैं। इसके लिए चिकित्सकों की विशेष टीम बनाई गई है। गर्भवती महिलाओं में एचआईवी संक्रमण की पहचान होने पर उनके लिए विशेष देखभाल और निगरानी की व्यवस्था की जाएगी। बच्चों के लिए भी अलग उपचार योजना तैयार की गई है ताकि संक्रमण आगे न फैले। इसके साथ ही स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि संवेदनशील क्षेत्रों में सख्त निगरानी बढ़ाई जा रही है। संक्रमण रोकथाम को ध्यान में रखते हुए लगातार मॉनीटरिंग की जा रही है। मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी ने कहा कि लोगों को जागरूक करने के लिए व्यापक अभियान चलाया जा रहा है। इसके लिए जिला प्रशासन, नगर पालिका और पंचायतों के साथ मिलकर जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग की ओर से एक टैब्लो भी तैयार किया गया है, जो विभिन्न क्षेत्रों में घूमकर लोगों को जानकारी दे रहा है। अंत में अधिकारी ने कहा कि हमारा लक्ष्य केवल मरीजों को उपचार देना नहीं, बल्कि आने वाले समय में एक एड्स-मुक्त समाज का निर्माण करना है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले सात महीनों में केवल पश्चिम मेदिनीपुर जिले में ही एचआईवी संक्रमण के सौ से अधिक मामले सामने आए हैं। घाटाल, खडग़पुर और मेदिनीपुर सदर क्षेत्रों में इस बीमारी का प्रभाव अधिक देखा जा रहा है। जिला स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि गर्भवती महिलाओं में भी संक्रमण की दर चिंताजनक है। भले ही पिछले वर्षों की तुलना में मामलों की संख्या कुछ कम हुई है, फिर भी स्थिति को गंभीर माना जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल से अक्टूबर 2025 के बीच कुल 32 हजार 453 लोगों की जांच की गई। इनमें से 106 लोगों में एचआईवी संक्रमण पाया गया। अधिकांश संक्रमित मरीज वर्तमान में उपचाराधीन हैं। इसी अवधि में चार हजार 720 गर्भवती महिलाओं की जांच की गई, जिनमें 13 महिलाएं एचआईवी पॉजिटिव पाई गईं, जबकि छह महिलाएं सिफिलिस से संक्रमित मिलीं। वित्त वर्ष 2024–25 में डेबरा में 16, घाटाल में 24, खडग़पुर में 28 और मेदिनीपुर मेडिकल कॉलेज में 73 संक्रमित मरीज मिले थे। वहीं इस वर्ष अक्टूबर तक ये संख्या घटकर डेबरा में पांच, घाटाल में 18, खडग़पुर में 15 और मेदिनीपुर में 35 रह गई है। जिला मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी सौम्यशंकर सारंगी ने बताया कि चिन्हित लगभग सभी एचआईवी संक्रमित व्यक्तियों को उपचार के दायरे में लाया गया है और उनका नियमित इलाज चल रहा है। उनके अनुसार, वर्षभर जागरूकता अभियान और विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से संक्रमण रोकने पर विशेष ध्यान दिया जाता है। इस प्रयास में ‘संपूर्णा’, ‘स्पर्श’ और ‘अग्रगामी महिला एवं बाल कल्याण समिति’ जैसी कई स्वयंसेवी संस्थाएं भी आगे आई हैं। ये संगठन स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर विभिन्न क्षेत्रों में शिविर लगाकर लोगों को जागरूक कर रहे हैं।