कोलकाता। भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज के दीक्षांत समारोह 2022 में सर्वोच्च अंक प्राप्त चार हजार विद्यार्थियों को डिग्री प्रदान की गई ।स्नातक और स्नातकोत्तर श्रेणी जिसमें बीकॉम, बीए, बीएसई, बीबीए, एमए, एमकॉम के विद्यार्थियों को डिग्री और पदक प्रदान किए गए। कार्यक्रम सत्रह भागों में विभाजित किया गया है और 26-27-28 मई तीन दिनों तक छात्र छात्राओं को सम्मानित किया गया। डीन प्रो दिलीप शाह ने प्रत्येक सत्र के उद्घाटन सत्र को आरंभ करने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। वहीं हर सत्र में विभागाध्यक्ष, शिक्षकों और मैनेजमेंट के पदाधिकारियों ने विद्यार्थियों को डिग्री प्रदान कर विद्यार्थियों को प्रोत्साहित किया।2019-20-21 के बैच के 3325 विद्यार्थियों को डिग्री दी गई जिनमें स्नातकोत्तर के 276,बीकॉम के 2576, बीबीए के 88,बीएससी के 161, बीए के 224 विद्यार्थी रहे। इस अवसर पर दीक्षांत उद्घाटन समारोह 2022 में प्रमुख में डीन प्रो दिलीप शाह, प्रो मीनाक्षी चतुर्वेदी, मैनेजमेंट के पदाधिकारियों में उमेद ठक्कर, रेणुका शाह आदि कई गणमान्य अतिथियों का योगदान रहा। वर्तमान छात्र – छात्राओं द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी आयोजन हुआ। कॉलेज के अध्यक्ष मिराज डी शाह ने सभी विभागों के विद्यार्थियों के साथ शिक्षक गणों और उनके अभिभावकों को बधाई और शुभकामनाएँ दी। इस अवसर पर प्रो दिलीप शाह ने कार्यक्रम के हर सत्र के आरंभ में और अंत में, विद्यार्थियों को एक साथ शुभकामनाएं दीं और कॉलेज में होने वाली सभी गतिविधियों के विषय में बताया। कार्यक्रम की परिकल्पना में सोहिला भाटिया का विशेष योगदान रहा। वर्तमान विद्यार्थियों ने संचालन, वॉलंटियर्स एवं सभी व्यवस्थाओं में भाग लिया है। भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज का भारतीय भाषा परिषद और चेम्बर ऑफ कॉमर्स के साथ एमओयू भी हुआ है जो कॉलेज के विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण है। इस कार्यक्रम की जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।
डीआरएसओ ने आयोजित किया पहला शोधार्थी सम्मेलन
कोलकाता । शोधार्थियों के लिए काम कर रहे डीआरएसओ ने अपना पहला सम्मेलन हाल ही में आयोजित किया। जादवपुर विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित इस सम्मेलन में देश भर से 200 शोधार्थियों ने भाग लिया। सम्मेलन में आईआईटी, एनआईटी, आईआईएसईआर्स, सीएसआईआर के अतिरिक्त बंगाल समेत कई अन्य राज्यों के शोधार्थियों ने भाग लिया। विदेशों के कई प्रतिनिधि सम्मेलन में शामिल हुए। सम्मेलन मे विभिन्न समस्याओं जैसे फेलोशिप मुद्दों, एमफिल-पीएचडी सीट कटौती, शुल्क वृद्धि, की कमी पर चर्चा की गयी। अतिथि के रूप में यूनिवर्सिटी ऑफ एनिमल एंड फिशरी साइंसेज के पूर्व वीसी चन्द्रशेखर चक्रवर्ती, कलकत्ता विश्वविद्यालय के सेवानिवृत प्रोफेसर और एवं आईएनएसए के मानद वैज्ञानिक ध्रुबज्योति मुखर्जी, प्रोफेसर अमिताभ दत्ता, आईएनएसए के वरिष्ठ वैज्ञानिक अमिताभ दत्ता उपस्थित थे। महान राजा राममोहन राय की 250वीं जयंती की पूर्व संध्या पर उन्हें पुष्पांजलि अर्पित। इस अवसर पर डीआरएसओ की राष्ट्रीय परिषद (काउंसिल) गठित की गयी जिसके अध्यक्ष कानपुर विश्वविद्यालय के अकील मुरली एवं सटिटाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च के डॉ. अर्घ्य दास चुने गये। डीआरएसओ की परामर्शदाता परिषद (एडवायजरी काउंसिल ) के चेयरपर्सन सौमित्र बनर्जी चुने गये।
सैन्य क्षेत्र में राष्ट्र का तत्काल आत्मनिर्भर होना आवश्यक है -लेफ्टिनेंट जनरल आर पी कालिता
कोलकाता में जुलाई में आयोजित होगा मिनी डिफेंस एक्सपो
कोलकाता । सेना की पूर्वी कमान के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल आर पी कालिता ने कहा कि युद्ध प्रणाली लगातार बदल रही है। सेना विश्व स्तर पर नयी तकनीक के साथ विकसित होने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि भविष्य में किसी भी संघर्ष की स्थिति में किसी भी राष्ट्र को अकेले ही लड़ना होता है, इसलिए आत्मनिर्भर होने की तत्काल आवश्यकता है। कोलकाता में पहली बार छह से नौ जुलाई के बीच ‘मिनी डिफेंस एक्सपो’ का आयोजन किया जाएगा। मर्चेन्ट्स चेम्बर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री द्वारा आयोजित “एमसीसीआई डिफेंस कॉन्क्लेव 2022 को बतौर मुख्य अतिथि अपने उद्घाटन भाषण में उन्होंने यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यह आयोजन स्टार्ट-अप और सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) को अपने उत्पादों का प्रदर्शन करने का अवसर देगा। स्वदेशीकरण पर बोलते हुए, ले. जनरल कलिता ने नैनो टेक्नोलॉजी, एआई, मशीन लर्निंग, रोबोटिक्स, मिसाइल, नेविगेशन टेक्नोलॉजी जैसी महत्वपूर्ण तकनीक के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने आगे बताया कि रक्षा स्वदेशी निर्माताओं के लिए 2014-2020 के दौरान 1.73 लाख करोड़ के परिव्यय के साथ 239 योजनाएं शुरू की गयी हैं।
अतिथियों का स्वागत करते हुए एमसीसीआई के अध्यक्ष ऋषभ कोठारी ने कहा कि डिफेंस कॉन्क्लेव पूर्वी क्षेत्र में औद्योगिक आधार के साथ रक्षा क्षेत्र के मुख्य उत्पादकों के बीच दीर्घकालिक तालमेल विकसित करने का एक प्रयास है। “हमें यह जानकर प्रसन्नता हो रही है कि हमने लक्ष्य को पार कर लिया है और भारत में स्वदेशी रूप से निर्मित रक्षा उपकरणों की खरीद के लिए पूंजी अधिग्रहण बजट के 65.50 प्रतिशत का उपयोग किया है।”
जनरल आईएस राठौर, पूर्वी कमान (मुख्यालय), शेखर चक्रवर्ती, सीईओ, हुगली कोचीन शिपयार्ड मधुमिता चक्रवर्ती, निदेशक, सीएमएसडीएस, डीआरडीओ, ए लाहिड़ी, एड. महाप्रबंधक, एचएएल, बैरकपुर मंडल, हेमवती एम, एजीएम-रणनीतिक योजना, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड, हरिकुमार आर, महाप्रबंधक-प्रौद्योगिकी योजना, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड. हरिहर दास, उप महाप्रबंधक (वीडी और आईईपी), गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड और सुजय कुमार माजी, मुख्य प्रबंधक (आउटसोर्सिंग), एचएएल, बैरकपुर डिवीजन ने भी विचार रखे।
अतिथि वक्ताओं ने उन व्यावसायिक अवसरों के बारे में बताया। कॉन्क्लेव में विभिन्न स्कीटर्स के 150 से अधिक उद्योग प्रतिनिधियों ने रक्षा उत्पादन इकाइयों के साथ बातचीत की। बी2बी सत्र में पूर्वी कमान, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल), बैरकपुर डिवीजन, हुगली कोचीन शिपयार्ड, गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड ने भाग लिया। डिफेंस कॉन्क्लेव में आज 66 बी2बी बैठकें आयोजित की गईं। एमसीसीआई के वरिष्ठ उपाध्यक्ष ललित बेरीवाल ने धन्यवाद दिया।
22 बार कोशिश करने के बाद 52 साल के शख्स ने पास की डाक्टरी की परीक्षा
कोलकाता। बंगाल के नदिया जिले में 52 साल के एक शख्स ने 22 बार कोशिश करने के बाद आखिरकार डाक्टरी की परीक्षा पास कर ली, हालांकि एमबीबीएस की पढ़ाई का अवसर नहीं मिलने पर वे होम्योपैथी कालेज में भर्ती हुए हैं। ये शख्स हैं नदिया जिले के कृष्णगंज थाना इलाके के प्रतापपुर के रहने वाले प्रदीप हाल्दार। प्रदीप गरीबी के कारण 10वीं के आगे की पढ़ाई नहीं कर पाए थे, हालांकि मन में डाक्टर बनने की उनकी इच्छा जिंदा रही। इसके बाद 2000 में उन्होंने आगे की पढ़ाई शुरू की और फिर से डाक्टर बनने की कोशिश में जुट गए। प्रदीप दिन में मजदूरी और रात में पढ़ाई करते थे। परिवार चलाने का जिम्मा होने के कारण उनकी पढ़ाई ठीक से नहीं हो पा रही थी, इसलिए बार-बार मेडिकल की परीक्षा में विफल हो रहे थे। प्रदीप ने हालांकि हार नहीं मानी और प्रयास करते रहे। आखिरकार 22 बार कोशिश के बाद उनकी मेहनत रंग लाई और उन्होंने इस साल डाक्टरी की परीक्षा पास कर ली।
प्रदीप की डाक्टरी की पढ़ाई का मजाक उड़ाते थे लोग
प्रदीप ने बताया कि जब वे डाक्टरी की पढ़ाई कर रहे थे तो बहुत से लोग उनका मजाक उड़ाते थे। सड़क से गुजरते थे तो कुछ लोग कहते थे कि एमबीबीएस डाक्टर जा रहा है। उनकी पत्नी को उनका इस उम्र में डाक्टरी की पढ़ाई करना एक तरह का पागलपन लगता था। प्रदीप का रैंक 3,46,234 है। इस वजह से उन्हें एमबीबीएस में मौका नहीं मिल पाया, लेकिन कोलकाता होम्योपैथी मेडिकल कालेज अस्पताल में भर्ती होकर भी वे खुश हैं। उनका कहना है कि कहलाएंगे तो वे डाक्टर ही। कालेज के अध्यक्ष रजत भट्टाचार्य ने कहा-‘मैंने इतनी उम्र वाले किसी व्यक्ति को मेडिकल की पढ़ाई के लिए कालेज में भर्ती होते नहीं देखा। प्रदीप हालदार ने साबित किया है कि इंसान ठान ले तो सबकुछ कर सकता है।’
आईबीए खिलाड़ी समिति की अध्यक्ष बनी लवलीना
नयी दिल्ली । ओलंपिक कांस्य पदक विजेता लवलीना बोरगोहेन को खिलाड़ी समिति का अध्यक्ष चुना गया और वोटिंग अधिकार के साथ निदेशक मंडल में शामिल किया गया है। अंतराष्ट्रीय मुक्केबाजी संघ (आईबीए) ने यह जानकारी दी।
महिला विश्व चैंपियनशिप 2022 के दौरान हुए चुनाव में लवलीना को सर्वाधिक मत मिले। लवलीना ने विज्ञप्ति में कहा, ‘‘आईबीए की खिलाड़ी समिति का अध्यक्ष चुने जाने पर मैं सम्मानित महसूस कर रही हूं, मैंने सदस्य बनने की उम्मीद की थी लेकिन कभी नहीं सोचा था कि मैं समिति की अध्यक्ष बनूंगी, इससे मुझे भारतीय मुक्केबाजी को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी, विशेषकर दुनिया की अन्य मुक्केबाजों के बीच महिला मुक्केबाजी का प्रचार करने में।’’
उन्होंने कहा, ‘‘यह मुक्केबाजी को बढ़ावा देने का मेरे पास बड़ा मौका है और मैंने सबसे पहले अन्य सदस्यों और दुनिया भर के मुक्केबाजों के साथ चर्चा करने की योजना बनाई है कि इस साल मुक्केबाजी में क्या करने की जरूरत है और इसके बाद समिति के निदेशक मंडल के सुझाव और शिकायतों पर गौर किया जाएगा।’’ भारतीय मुक्केबाज शिव थापा को भी 2021 आईबीए पुरुष विश्व चैंपियनशिप के दौरान हुए चुनाव में आईबीए की खिलाड़ी समिति का सदस्य चुना गया था।
लवलीना और थापा का चयन उन मुक्केबाजों ने किया जिन्होंने पुरुष और महिला विश्व चैंपियनशिप में हिस्सा लिया जिनका आयोजन क्रमश: अक्टूबर 2021 और मई 2022 में किया गया।
सेबी 16 जून को गोल्डन लाइफ एग्रो, सनशाइन एग्रो इंफ्रा की संपत्तियों की नीलामी करेगा
नयी दिल्ली । भारतीय प्रतिभूति एवं विनियम बोर्ड (सेबी) निवेशकों का पैसा निकालने के लिए गोल्डन लाइफ एग्रो इंडिया लिमिटेड और सनशाइन एग्रो इंफ्रा लिमिटेड की पांच संपत्तियों की नीलामी करेगा। यह नीलामी 16 जून को की जाएगी। इन संपत्तियों के लिए आरक्षित मूल्य 11.5 करोड़ रुपये रखा गया है।।
सेबी के अनुसार, दोनों कंपनियों ने नियामकीय मानदंडों का पालन किए बिना निवेशकों से धन जुटाया था। बाजार नियामक ने बुधवार को जारी अधिसूचना में कहा कि इस नीलामी के लिए रखी गई संपत्तियों में कुछ जमीन के टुकड़े और पश्चिम बंगाल में स्थित एक दो-मंजिला इमारत शामिल है।
सेबी ने गोल्डन लाइफ एग्रो इंडिया और सनशाइन एग्रो इंफ्रा और उनके निदेशकों के खिलाफ वसूली की कार्रवाई के तहत इन संपत्तियों की बिक्री के लिए बोलियां आमंत्रित की हैं। इन संपत्तियों की नीलामी 16 जून, 2022 को सुबह 10.30 से 11.30 बजे के दौरान ऑनलाइन माध्यम से की जाएगी।
नीलामी के लिए रखी जा रही पांच संपत्तियों में से तीन गोल्डन लाइफ एग्रो इंडिया की हैं और शेष दो सनशाइन एग्रो इंफ्रा से संबंधित हैं। इन संपत्तियों का कुल आरक्षित मूल्य 11.53 करोड़ रुपये रखा गया है। वहीं क्विकर रियल्टी को ई-नीलामी सेवा प्रदाता के रूप में नियुक्त किया गया है।
सरकार ने इस वर्ष चीनी निर्यात की सीमा एक करोड़ टन तय की
विशेष अनुमति लेकर ही हो सकेगा निर्यात
नयी दिल्ली । केंद्र सरकार ने बुधवार को कहा कि चीनी की घरेलू स्तर पर उपलब्धता और दरों में स्थिरता बनाए रखने के लिए उसने चालू विपणन वर्ष में इसके निर्यात को एक करोड़ टन तक सीमित करने के लिए अधिसूचना जारी की है।
विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) ने इस बाबत 24 मई की रात को एक अधिसूचना जारी की जिसके मुताबिक एक जून, 2022 से 31 अक्टूबर, 2022 तक, या अगले आदेश तक, जो भी पहले हो, चीनी के निर्यात की अनुमति खाद्य मंत्रालय के तहत चीनी निदेशालय की विशिष्ट अनुमति के साथ दी जाएगी।
चालू विपणन वर्ष (अक्टूबर-सितंबर) के लिए करीब 90 लाख टन के निर्यात के लिए अनुबंध किए जा चुके हैं, चीनी मिलों से करीब 82 लाख टन चीनी निर्यात के लिए निकाली जा चुकी है और करीब 78 लाख टन का निर्यात किया जा चुका है।
खाद्य मंत्रालय के मुताबिक यह निर्णय चीनी के रिकॉर्ड निर्यात की पृष्ठभूमि में लिया गया है। विपणन वर्ष 2021-22 में चीनी का निर्यात ऐतिहासिक रूप से उच्च स्तर पर पहुंच गया था। 2020-21 में निर्यात 70 लाख टन और 2019-20 में 59.6 लाख टन था।
मंत्रालय ने कहा, ‘‘चीनी निर्यात अभूतपूर्व तरीके से बढ़ने के मद्देनजर और देश में चीनी का पर्याप्त भंडार बनाए रखने, देश में चीनी के दाम बढ़ने से रोकने और देश के आम नागरिकों की हितों की रक्षा के लिए भारत सरकार ने एक जून 2022 से चीनी के निर्यात का नियमन करने का फैसला लिया है।’’
इस बयान में कहा गया कि चीनी मिलों और निर्यातकों को खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग में चीनी निदेशालय से निर्यात रिलीज ऑर्डर (ईआरओ) के रूप में मंजूरी लेनी होगी। इस फैसले से सुनिश्चित होगा कि सितंबर 2022 की समाप्ति तक चीनी का भंडार 60-65 लाख टन बना रहे जो घरेलू स्तर पर दो से तीन महीने के लिए जरूरी भंडार है।
मंत्रालय ने कहा कि 31 मई तक चीनी निर्यात की इजाजत होगी। उसने कहा कि सरकार चीनी क्षेत्र में उत्पादन, उपभोग, देश भर के थोक और खुदरा बाजारों में निर्यात और कीमतों पर लगातार नजर रख रही है।
चालू वर्ष में भारत चीनी का सबसे बड़ा उत्पादक और दूसरा सबसे बड़ा निर्यातक है।
10 करोड़ से ऊपर हुए विस्थापित : संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी
बर्लिन । संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी (यूएनएचसीआर) ने कहा कि संघर्ष, हिंसा, मानवाधिकारों के उल्लंघन और उत्पीड़न से बचने के लिए दुनियाभर में 10 करोड़ से अधिक लोग विस्थापित हुए हैं।
एजेंसी ने कहा कि यूक्रेन में युद्ध के कारण लाखों लोगों को अपना घर छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा। शरणार्थियों के लिए संयुक्त राष्ट्र के उच्चायुक्त फिलिपो ग्रैंडी ने कहा, ‘‘विस्थापित लोगों की संख्या 10 करोड़ से पार हो गई है। यह एक रिकॉर्ड है जो कभी नहीं बनना चाहिए था।’’
यूएनएचसीआर ने कहा कि इथियोपिया, बुर्किना फासो, म्यांमा, नाइजीरिया, अफगानिस्तान और कांगो सहित कई देशों में हिंसा या संघर्ष की घटनाओं के कारण 2021 के अंत तक दुनियाभर में विस्थापित लोगों की संख्या नौ करोड़ तक पहुंच गई थी। यूक्रेन में युद्ध के कारण छह लाख से अधिक लोगों को देश छोड़ना पड़ा है।
ओडिशा की नर्स को फ्लोरेंस नाइटिंगेल अवार्ड
बरहमपुर । ओडिशा के बरहमपुर में बने सरकारी एमकेसीजी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल की नर्सिंग अधिकारी शिबानी दास तथा पश्चिम बंगाल के एक स्वास्थ्य केंद्र में कार्यरत नर्स स्मिता कर को 2021 के राष्ट्रीय फ्लोरेंस नाइटिंगेल अवॉर्ड के सम्मानित किया जाएगा। अस्पताल के एक अधिकारी ने गत सोमवार को इसकी सूचना दी। सर्वोच्च नर्सिंग पुरस्कार को लेकर चुनी गई स्मिता कर पश्चिम बंगाल के अलीपुरद्वार जिले के फलकता ब्लॉक के तसाती चाय बागान में एक सार्वजनिक स्वास्थ्य केंद्र में कार्यरत हैं। शिबानी दास एवं स्मिता कर को भारतीय नर्सिंग परिषद (आईएनसी) द्वारा स्थापित देश के सर्वोच्च नर्सिंग सम्मान के लिए चयनित किया गया है। एमकेसीजी अस्पताल के अधीक्षक संतोष कुमार मिश्र के अनुसार पचास वर्षीय शिबानी दास को भारतीय नर्सिंग परिषद (आईएनसी) द्वारा उनकी सेवाओं को लेकर खास तौर से कोविड महामारी के दौरान उनकी सेवाओं के लिए सर्वोच्च नर्सिंग पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। ये उनके समर्पण को दर्शाता है। दूसरी ओर नौकरी समाप्त होने के बाद आदिवासी समाज में जागरूकता फैलाने के लिए स्मिता कर को इस पुरस्कार के लिए चुना गया है.
वेश्यावृत्ति को सुप्रीम कोर्ट ने माना पेशा, कानूनी मान्यता देने को कहा
अब पुलिस नहीं कर सकेगी परेशान
यौनकर्मियों और उनके बच्चों से समानता का निर्देश
नयी दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में पुलिस बलों को यौनकर्मियों और उनके बच्चों के साथ सम्मान के साथ व्यवहार करने और मौखिक या शारीरिक रूप से दुर्व्यवहार नहीं करने का निर्देश दिया है।
जस्टिस एल नागेश्वर राव, जस्टिस बी आर गवई और जस्टिस ए एस बोपन्ना की पीठ ने कई निर्देश जारी करते हुए कहा कि इस देश में सभी व्यक्तियों को जो संवैधानिक संरक्षण प्राप्त हैं। उसे उन अधिकारियों द्वारा ध्यान में रखा जाए जो अनैतिक व्यापार (निवारण) अधिनियम 1956 के तहत कर्तव्य निभाते हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने वेश्यावृत्ति को पेशा मानते हुए कहा कि यौन उत्पीड़न की पीड़ित किसी भी यौनकर्मी को कानून के अनुसार तत्काल चिकित्सा सहायता सहित यौन उत्पीड़न की पीड़िता को उपलब्ध सभी सुविधाएं मुहैया कराई जानी चाहिए। पीठ ने कहा, यह देखा गया है कि यौनकर्मियों के प्रति पुलिस का रवैया अक्सर क्रूर और हिंसक होता है। ऐसा लगता है कि वे एक वर्ग हैं जिनके अधिकारों को मान्यता नहीं है।
यौन गतिविधि के लिए मजबूर नहीं करना चाहिए: सुप्रीम कोर्ट
पीठ ने आगे कहा, ‘पुलिस और अन्य कानून प्रवर्तन एजेंसियों को यौनकर्मियों के अधिकारों के प्रति संवेदनशील होना चाहिए। जिन्हें सभी नागरिकों को संविधान में प्रदत्त सभी बुनियादी मानवाधिकार और अन्य अधिकार प्राप्त हैं। पुलिस को सभी यौनकर्मियों के साथ सम्मान के साथ व्यवहार करना चाहिए और उनके साथ मौखिक और शारीरिक दुर्व्यवहार नहीं करना चाहिए। उनके साथ हिंसा नहीं करनी चाहिए या उन्हें किसी भी यौन गतिविधि के लिए मजबूर नहीं करना चाहिए।
मीडिया के लिए भी निर्देश जारी करने की दी सलाह
अदालत ने यह भी कहा कि भारतीय प्रेस परिषद से मीडिया के लिए उचित दिशा-निर्देश जारी करने का आग्रह किया जाना चाहिए ताकि गिरफ्तारी, छापेमारी और बचाव अभियान के दौरान यौनकर्मियों की पहचान उजागर न हो। चाहे वे पीड़ित हों या आरोपी हों और ऐसी किसी भी तस्वीर का प्रसारण या प्रकाशन नहीं हो जिसके परिणामस्वरूप उनकी पहचान का खुलासा हो।
आश्रय गृहों का सर्वेक्षण करने का भी निर्देश
इसने राज्य सरकारों को आश्रय गृहों का सर्वेक्षण करने का भी निर्देश दिया ताकि वयस्क महिलाओं को उनकी इच्छा के विरुद्ध हिरासत में लेने के मामलों की समीक्षा की जा सके और समयबद्ध तरीके से रिहाई के लिए कार्रवाई की जा सके। शीर्ष अदालत ने यौनकर्मियों के पुनर्वास के लिए गठित एक समिति की सिफारिशों पर यह निर्देश दिया। शीर्ष अदालत उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें कोविड-19 महामारी के कारण यौनकर्मियों द्वारा सामना की जाने वाली समस्याओं को उठाया गया था।




