कोलकाता । कोलकाता की सबसे बड़ी लाइव एंटरटेनमेंट कंपनी ‘सेलेक्ट’ की तरफ से ‘मिलिंद गाबा के इंडिया टूर’ के तहत कोलकाता में होनेवाले ‘लाइव इन कॉन्सर्ट’ की मेजबानी की जाएगी। यह मिलिंद गाबा का पहला ‘लाइव इन कॉन्सर्ट’ इंडिया टूर है, जिसे 2 महीनों के लिए आयोजित किया गया है। जिसमे 8 शहरों में ‘लाइव इन कॉन्सर्ट’ के तहत रंगारंग कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे । लाइव एंटरटेनमेंट कंपनी ‘सेलेक्ट’ की यह पहली और अनोखी पहल है। इस पूरे कंसर्ट को एक अनोखे और नए तरीके से, जिसे पहले कभी न देखा गया हो, इस हिसाब से अत्याधुनिक तरीके से पूरे इवेंट को डिजाइन किया गया है, जहां मिलिंद गाबा फैंस के बीच अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करेंगे। इस कार्यक्रम में हर प्रशंसक को अपने चहीते, मिलिंद गाबा के साथ लाइव कंसर्ट में अपने पसंदीदा गाना गाने और झूमने का भरपूर मौका मिलेगा।
मिलिंद गाबा के इंडिया टूर की घोषणा के साथ धमाकेदार पोस्टर लॉन्च के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में बॉलीवुड गायक मिलिंद गाबा, सेलेक्ट के प्रबंध निदेशक रवि अग्रवाल, सेलेक्ट प्रतिनिधि गीतेश शर्मा मौजूद थे। मिलिंद गाबा मशहूर भारतीय गायक, गीतकार, संगीत निर्माता और अभिनेता हैं, जो पंजाबी और बॉलीवुड संगीत से जुड़े हैं। उनके मशहूर गाने “नजर लग जाएगी”, “शी डोंट नो” और “यार मोड दो” के लिए उन्हें जाना जाता है। उनके अति लोकप्रीय गीतों में, “नजर लग जाएगी”, “शी डोंट नो”, “मैं तेरी हो गई”, “जिंदगी दी पौड़ी”, “पीले पीले”, “सुंदर”, “नचुंगा ऐसे” और “क्या करू” शामिल हैं। उनके गीत “शी डोंट नो” का संगीत वीडियो 8 जनवरी 2019 को टी-सीरीज़ द्वारा यू ट्यूब पर लॉन्च किया गया था। जिस गाने के वीडियो को 500 मिलियन से अधिक बार देखा गया।
मीडिया से बात करते हुए, इस मौके पर बॉलीवुड सिंगर मिलिंद गाबा ने कहा, यह मेरा पहला भारत के अनन्य शहरों का दौरा होगा। देश के विभिन्न शहरों में अपने प्रशंसकों के लिए लाइव प्रदर्शन करने का यह अवसर पाकर मैं मेरे प्रशंसकों और आयोजकों का बहुत आभारी हूं। सेलेक्ट के साथ यह यात्रा निश्चित रूप से मेरे लिए इस जीवन में एक अविश्वसनीय अनुभव होगा। इस मौके पर सेलेक्ट के प्रबंध निदेशक रवि अग्रवाल तथा सेलेक्ट प्रतिनिधि गीतेश शर्मा ने कहा, सेलेक्ट पूरे देश भर में मौजूद संगीत प्रशंसकों को बेहतरीन लाइव संगीत का अनुभव कराने में एक अहम भूमिका निभा रहा है। हम अपने प्रशंसकों के मनोरंजन के लिए मिलिंद गाबा के पहले मेगा भारत दौरे के साथ काम करने के लिए बेहद उत्साहित हैं। मिलिंद गाबा ने अपनी भावपूर्ण धुनों से पूरे देश में मौजूद लाखों प्रशंसकों के दिलों में अपनी अलग जगह बना ली है। प्रसंशकों के इस प्यार ने उन्हें इस पीढ़ी के दिलों की आवाज बना दिया है। सेलेक्ट द्वारा क्यूरेट किया गया यह इवेंट टूट, कोलकाता के साथ मुंबई, गोवा, बेंगलुरु, हैदराबाद जैसे प्रमुख शहरों के अलावा तीन अन्य शहर में आयोजित किया गया है। उनका विश्वास है कि इस इवेंट में शामिल होनेवाले मिलिंद गाबा के प्रशंसक यहां भरपूर मस्ती कर पाएंगे।
कोलकाता । अजहर आलम मेमोरियल ट्रस्ट, ने अपनी स्थापना के अवसर पर घोषणा की थी कि यह हर वर्ष किसी एक रंगमंचीय व्यक्तित्व को अज़हर आलम मेमोरियल अवार्ड और एक शोधार्थी को रंगमंच पर शोध करने के लिए *फेलोशिप देगा। बाद में ट्रस्ट के सभी सदस्यों की सलाह पर यूपीएससी/ डब्ल्यूबीएससी की परीक्षा की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों के लिए स्कॉलरशिप की भी घोषणा की गयी है। ट्रस्ट ने लिटिल थेस्पियन द्वारा आयोजित उत्सव जश्न ए अजहर में गत 18 फरवरी 2022 को बंगाल के प्रसिद्ध रंगमंच व्यक्तित्व श्री रुद्रप्रसाद सेनगुप्ता को प्रथम अज़हर आलम मेमोरियल पुरस्कार से सम्मानित किया। अब एएएमटी की कमेटी ने प्राप्त आवेदनों के आधार पर 2022-2023 के लिए निम्नलिखित का चयन किया है – पार्वती रघुनंदन को पहला अज़हर आलम मेमोरियल फेलोशिप (विषय : इक्कीसवीं सदी के नाटककार और अज़हर आलम) और तान्या चतुर्वेदी को पहला अज़हर आलम मेमोरियल स्कॉलरशिप।
कोलकाता । मई का अंतिम सप्ताह हिन्दी पत्रकारिता के उत्स का प्रतीक है। देश में कई बड़े आयोजन होते भी हैं। इस बार ऐसा ही भव्य आयोजन कोलकाता में हुआ और देश के दिग्गज पत्रकार, शिक्षा एवं संस्कृति के प्रतिनिधि जुटे। गत 30 मई को हिन्दी पत्रकारिता दिवस था। इस अवसर पर छपते – छपते हिन्दी दैनिक एवं ताजा टीवी द्वारा कोलकाता प्रेस क्लब के सहयोग से गत 30 एवं 31 मई को आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय पत्रकारिता सम्मेलन का आयोजन एक सार्थक बहस और समाधान की रूपरेखा का केन्द्र बिन्दु बना। एक नये परिप्रेक्ष्य में पत्रकारिता और उसकी चुनौतियों को देखना और उस पर होने वाली चर्चा निश्चित रूप से ऐतिहासिक और मील का पत्थर है। बात पत्रकारिता की पक्षधरिता, संवेदना, जवाबदेही, इतिहास, भाषा और पत्रकारों की स्थितियों पर हुई। यह बात हुई कि जब समाज के हर क्षेत्र में गिरावट आयी है तो पत्रकारिता में भी गिरावट आना स्वाभाविक है क्योंकि पत्रकारिता के क्षेत्र में जो लोग आते हैं, वे इसी समाज से आते हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में काम करने वालों की अपनी चुनौतियाँ हैं और उनसे अपेक्षाएँ मिशनरी पत्रकारिता की हैं। बहरहाल आपके लिए इस विचारोत्तेजक सम्मेलन के दिग्गजों के विचार हम प्रस्तुत कर रहे हैं,इस उम्मीद के साथ कि आप जब भी मीडिया की आलोचना करें, उसकी चुनौतियों के प्रति भी थोड़ी संवेदना रखें और अखबार खरीदकर पढ़ें –
भारतीय पत्रकारिता की पहचान उसके भाषायी अखबारों के कारण है हरिवंश नारायण सिंह (राज्यसभा के उपसभापति )
कोलकाता हमेशा से चेतना, चिंतन और पुर्नजागरण का केंद्र रहा है। स्वाधीनता आन्दोलन के समय भाषायी पत्रकारिता ने नयी दिशा दी। भविष्य में जितनी दूर तक अपनी पहचान बनाना चाहते हैं तो अतीत की ओर देखिए, अतीत से ही ताकत मिलती है पहचान बनाने के लिए। भाषायी पत्रकारिता देश को नयी दिशा देने वालों को समर्पित है। 196 साल पहले 30 मई को हिन्दी पत्रकारिता आरम्भ हुई थी। 1700 से 2000 का समय है, वह विचारों का समय है। यह प्रेस भी विचारों की देन है। गुटेनबर्ग एक सुनार थे। दुनिया में विचारों का दौर था, अखबार इसी की देन हैं जिन्होंने वैचारिक तौर पर समाज को तैयार किया और वैचारिक क्रांति का नेतृत्व किया। माना जाता था कि गरीबी ईश्वर की देन है मगर मार्क्स ने विरोध किया और उनके विचार का विस्तार हुआ। आज तकनीक का दौर है, हमारी चुनौती प्रिंट मीडिया की जो है, उसे हम पहचान नहीं पा रहे हैं। तकनीक हमें नियंत्रित कर रही है। तकनीक आज हमारे जीवन को विचाररहित कर रही है। चीजें तकनीक पूरी तरह बदल चुकी है। मीडिया के सामने साख का संकट है। मिशन पत्रकारिता के अखबार मुख्यधारा के नहीं थे पर अपने ध्येय को लेकर चलते रहे। इनके संस्थापक पत्रकार उद्यमी भी थे। भारतीय पत्रकारिता की पहचान उसके भाषायी अखबारों के कारण है। उदारीकरण के बाद बाजार, पूंजी और तकनीक दुनिया को नियंत्रित कर रही है और इसमें अधिक से अधिक लाभ चाहिए। पत्रकारिता में वित्तीय असुरक्षा का सवाल है। प्रेस खोलने के लिए करोड़ों चाहिए, वेज बोर्ड चाहिए। अखबारों को मुफ्त पढ़ाने की होड़ है। लोगों को मुफ्त और ईमानदार अखबार चाहिए। पत्रकारिता व्यवसाय़ है तो व्यवसाय़ की तरह ही चलेगी। बाजार और विपणन और टीआरपी से ही यह चलेगा।
खबरों को लिखने की प्रकृति भी मानसिक प्रभाव डाल रही है। यह गम्भीरता से सोचने का विषय है। पहले परम्परा थी कि जब तक सभी की प्रतिक्रिया न मिले, खबर नहीं छापी जाती थी। लोग मुख्यधारा के प्रेस पर विश्वास करते थे, आज खबरों पर विश्वास नहीं किया जा रहा है। दुनिया में क्रांति तकनीक से हुई और तकनीक ही क्रांति के खिलाफ है। इस पर हमें विचार करना चाहिए। अब तो आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस पर बात होनी चाहिए। बड़ी टेक कम्पनियों का आपके दिमाग पर कब्जा है। नये मुद्दों को उठाएंगे तो लोग पढ़ेंगे। टेक कम्पनियों की जवाबदेही क्या हैं, इन पर सोचना होगा। रुस – यूक्रेन युद्ध में वित्तीय तकनीक हथियार इस्तेमाल की जा रही है। क्या हम आर्टिफिशियिल तकनीक के प्रति लोगों को सचेत कर रहे हैं? दिग्गज वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग ने कहा कि पर्यावरण और तकनीक, अगर इससे हम बच नहीं सके तो एक नयी दुनिया खोज लेनी होगी। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस भविष्य हैं तो एक खतरा भी है। अखबारों को इनका मुकाबला करने के लिए खुद को मजबूत होने की जरूरत है। जागरुक मानसिकता के कारण लोग ओटीटी जैसे माध्यमों से हट रहे हैं। अखबारों को नवीनता के साथ सोचने की जरूरत है। हमें संवेदनशील मुद्दों को उठाना होगा। फेसबुक पर करोड़ी फर्जी खबरें फैल रही हैं, 64 प्रतिशत भारतीय फर्जी खबरों से परेशान हैं मगर सख्त सजा नहीं है। अंग्रेजों के जमाने के कानून से सोशल मीडिया से नहीं लड़ा जा सकता।
सत्ता से दुश्मनी नहीं होनी चाहिए पर सत्ता को आईना दिखाते रहना चाहिए विनोद अग्निहोत्री (अमर उजाला के सलाहकार सम्पादक)
कोलकाता पहली बार आया हूँ। मैं नहीं मानता कि पत्रकारिता में सब कुछ खराब है पर यह एक लोकतांत्रिक पेशा है इसलिए हम अपनी आलोचना भी करते हैं। मैं जब आया तो वह पत्रकारिता का अच्छा दौर था। मुझे दिग्गज पत्रकारों के साथ काम करने का मौका मिला। उसी दौर में नवभारत टाइम्स में परीक्षा दी, चयन हुआ। मुझे राजेन्द्र माथुर, रामपाल सिंह, उदयन शर्मा, सुरेन्द्र प्रताप सिंह, कन्हैया लाल नंदन, आलोक मेहता समेत कई और लोगों के साथ काम करने का मौका मिला। दरअसल पत्रकारिता और समाज का जल और मछली का रिश्ता है, समाज सड़ेगा तो पत्रकारिता भी सड़ेगी, समाज जीवन्त होगा तो पत्रकारिता भी जीवन्त होगी। आजादी के बाद हिन्दी समेत भाषायी ने पत्रकारिता राष्ट्र निर्माण का रास्ता बनाया। एक समय था जब यह पारिवारिक पत्रकारिता बनी और जयप्रकाश के आन्दोलन के बाद इसने फिर गति बदली। पत्रकारिता को समाज से अलग करके हम नहीं देख सकते, जब हर ओर अवमूल्यन की स्थिति हो तो पत्रकारिता में भी अवमूल्यन होगा क्योंकि यहाँ भी इसी समाज से लोग आते हैं। कोरोना के दौरान 50 प्रतिशत छंटनी हुई, उन चुनौतियों का सामना मिलकर किया गया। पत्रकारिता मिशन भी है, व्यवसाय भी है और बिजनेस भी है और इसमें सन्तुलन हो तो स्वस्थ पत्रकारिता होगी, यह जरूरी है। बदलते परिवेश में कारोबार, तकनीक और मिशन के सटीक मिश्रण की जरूरत है, जिससे इस उद्योग की साख बच सके।
जब हम अखबार सुबह देखते हैं तो खबरें बासी लगती हैं। एक सप्ताह अखबार न पढ़ें तो भी फर्क नहीं पड़ेगा, यह सोचने का विषय है कि क्या नया किया जाये, यह एक चुनौती है। यह चुनौती मैंने महसूस की है। हम नया क्या दें, इस पर विचार हो, यह समस्या हल हुई तो अखबार फिर लोकप्रिय होंगे। बच्चों को लेकर पत्रकारिता नहीं हो रही है, हम जब छोटे थे तो पराग, चंदामामा, जैसी बाल पत्रिकाएं थीं और हम खूब पढ़ते थे। आज तो बच्चों को पत्रकारिता से बाहर कर दिया गया है, उनको कैसे साथ लाया जाए, इस पर विचार हो, महिलाएं, किसानों के मुद्दे हों। गाँवों में हिन्दी अखबार अधिक पढ़े जा रहे हैं। पाठकों की चिट्ठियाँ नहीं आतीं, लोग ट्विटर पर ही सब कुछ लिख दे रहे हैं। प्रिंट मीडिया का स्वरूप बदलना होगा। सम्भव है कि अखबार की जगह पीडीएफ मिले, तकनीक की आदत डालनी होगी। अंग्रेजी की पत्रकारिता शासन और अमीरों की पत्रकारिता थी पर 60 के दशक के बाद उनको चुनौती मिली और आज हम बराबर हैं। हिन्दी और भाषायी पत्रकारिता का अन्योयाश्रित सम्बन्ध है। समस्या यह है कि उर्दू और हिन्दी की पत्रकारिता की बात हो, तो हिन्दी पत्रकारिता हिन्दू और उर्दू पत्रकारिता मुस्लिम पत्रकारिता हो जाती है, इससे बचना चाहिए। पत्रकारिता निष्पक्ष नहीं हो सकती, वह सत्य और तथ्य के साथ होगी, तटस्थ नहीं हो सकती, उसके विचार होंगे पर पार्टी लाइन नहीं होगी। हमारे अपने विचार होंगे। हमें सत्य और तथ्य के साथ गहराई में जाना होगा, जनपक्षधरता के साथ होना चाहिए। सत्ता से दुश्मनी नहीं होनी चाहिए पर सत्ता को आईना दिखाते रहना चाहिए, कमजोरियाँ जरूर बताते रहना चाहिए।
एक समय था जब हम आकाशवाणी, दूरदर्शन और अखबार देखकर भाषा सीखते थे पर आज भाषा बिगड़ जा रही है। अंग्रेजी के शब्द हों मगर उनको ठूंसा न जाये, यह अखरता है क्योंकि यह भाषा को बिगाड़ रहा है। प्रभाष जोशी देशज भाषा के पक्ष में थे। भाषा बाजारू नहीं होनी चाहिए। इस पर गम्भीरता से बात होनी चाहिए। अभी इस पर अखबारों या चैनलों में ध्यान नहीं दिया जा रहा है। दुःख की बात यह है कि आज न्यूज रूम में नयी पीढ़ी को गढ़ने की प्रक्रिया बंद हो गयी है। अखबार, समाज और लोकतंत्र का अन्योयाश्रित सम्बन्ध है और इनके बीच सन्तुलन होना आवश्यक है।
पत्रकार की राजनीतिक लाइन हो सकती है पर उसकी पार्टी लाइन नहीं होनी चाहिए प्रो. संजय द्विवेदी (भारतीय जन संचार संस्थान के महानिदेशक)
30 मई को कोलकाता से ही उदन्त मार्तंड निकला था। भाषाएं कैसे जोड़ती हैं, कोलकाता की भूमि इसका उदाहरण है। पत्रकारिता को लेकर आलोचनाओं का दौर गर्म है। दुनिया में हर कोई अपने कार्यक्षेत्र को लेकर आशावादी है। समाज के हर क्षेत्र में जब अवमूल्यन है तो पत्रकारिता में उत्कर्ष की उम्मीद कैसे करते हैं? यह सम्भव नहीं है कि जब हर क्षेत्र में अवमूल्यन हो तो पत्रकारिता में उत्कर्ष हो। आजादी के दौरान मुख्यधारा के मीडिया ने अंग्रेजों का साथ दिया, उनको भी देखा जाना चाहिए। हम आजादी के दिनों की पत्रकारिता को लेकर अधूरा सच बताते हैं। हर अखबार और पत्र – पत्रिकाओं के संकल्प अलग हैं। वह अपनी व्यावसायिक चुनौतियों से अलग नहीं हो सकता। किसी भी व्यवसाय में सुधार की हमेशा सम्भावना रहती है, उसकी गुणवत्ता और जनपक्षधरिता पर भी बात होनी चाहिए। सोशल मीडिया पर जो हो रहा है, उसके लिए पत्रकारिता और पत्रकार जिम्मेदार नहीं ठहराई जा सकती है। पत्रकारिता एक अनुशासन का नाम है। हम जो पत्रकारिता में हैं, हम समाचार के व्यवसाय में हैं, सूचना के व्यवसाय में नहीं हैं। समाज में विभिन्न मंचों से दी जा रहीं सूचनाओं की जिम्मेदारी पत्रकार नहीं ले सकता। लाइक और शेयर के समय को पत्रकारिता पर आरोपित करने का प्रयास हो रहा है। पत्रकार की राजनीतिक लाइन हो सकती है पर उसकी पार्टी लाइन नहीं होनी चाहिए। राजनीतिक आदर्श हो सकते हैं मगर उसे पार्टी लाइन नहीं बनाना चाहिए। पत्रकारिता लोककल्याण के लिए हैं, लोकमंगल के लिए है। जब हम राष्ट्र की बात करते हैं तो व्यक्ति ही केन्द्र में हैं। हमारी जिम्मेदारी है। हमें आत्मपरिष्कार करना होगा। जनभावनाओं को सर्वोच्च रखते हुए राष्ट्र निर्माण के लिए पत्रकारों को काम करना होगा। आने वाले समय को अमृत समय में बदलें। सूचना और समाचार में अंतर होता है। सूचना गलत हो सकती है, लेकिन समाचार गलत नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि पत्रकार का धर्म आधा सच बताना नहीं है, बल्कि एक भारत और श्रेष्ठ भारत के लिए ईमानदारी से काम करना है।
पाठक सही सूचनाओं के लिए पैसे खर्च करता है, यह याद रखना होगा सुमन गुप्ता (भारतीय प्रेस परिषद की सदस्य और ‘जनमोर्चा’ की संपादक )
आज हिन्दुस्तानों में अखबारों के जीवन पर भी विचार करना चाहिए। अखबार पंजीकृत तो होते हैं पर संचालित नहीं हो पाते। मिशनरी पत्रकारिता समय के साथ बदलती गयी है। अगर शक्तियाँ कुछ हाथों में सीमित हो गयीं तो क्या लोकतंत्र रह जाएगा? अखबारों के पाठक कम हुए, ग्राहक बढ़ गये हैं, सम्पादकों के नाम पाठकों के पत्र जैसे स्तम्भ सिमट गये हैं। सूचनाओं से वंचित और भ्रमित करने का काम जारी है। अखबारों में खबरों का प्राथमिक स्त्रोत खत्म हो रहा है। फील्ड की रिपोर्टिंग की जगह इंटरनेट की सामग्री का उपयोग बढ़ गयी है जिसका सत्यापन नहीं हो रहा है। एजेंसियों का कथन ही हमारा वर्जन बन गया है। हम ओपिनियन बनाने का काम करते हैं तो एकतरफा ओपिनियन क्यों बना रहे हैं। पाठक सही सूचनाओं के लिए पैसे खर्च करता है। सोशल मीडिया अनगाइडेड मिसाइल है पर बहुत सी चीजें सामने ला रहा है। नागरिकों की आजादी के अधिकार का उपयोग का मीडिया कर रहा है, इस पर भी सोचना चाहिए।
जब भी राजनीति में अन्धेरा हुआ है, मीडिया सूर्योदय लाया है डॉ. शम्भुनाथ (भारतीय भाषा परिषद के निदेशक एवं वागर्थ के सम्पादक)
– 1826 में प्रकाशित हिन्दी का पहला पत्र उदन्त मार्तंड डेढ़ साल से अधिक नहीं चल सकता। आज कलम की जगह माउस आ गया है, कागज की जगह कम्प्यूटर स्क्रीन आ गया है पर उदन्त मार्तंड के जमाने में अखबार निकालना तोप के सामने खड़ा होना था। जुगल किशोर सुकुल ने खबरों में ‘लूट की छूट’ और ‘दालचीनी के पौधे’ में व्यापारी वर्ग की आलोचना की, यह आलोचना देशप्रेम का संकेत है। सर्पदंश से बचने के लिए औषधि का उपयोग करें..यह एक बुद्धिसम्यक और वैज्ञानिक दृष्टि का विकास था। चुनौतियाँ तब भी थीं, चुनौतियाँ आज भी हैं। सुकुल जी ने जाति, प्रांत के हित नहीं बल्कि हिन्दुस्तानियों के हित लिखा। निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल, इसकी चेतना उदन्त मार्तंड के समय विकसित हो रही थी। सबसे बड़ी चुनौती मीडिया की स्वायत्तता है, आज पत्रकार और सम्पादक को दुर्बल बनाया दिया गया है, उसे उसका अस्तित्व वापस चाहिए। संसाधन कम थे तब निम्न तकनीक उच्च विचार थे, आज उच्च तकनीक, निम्न विचार हैं। क्या राजनीति में अन्धेरा हो तो मीडिया ही सूर्योदय ला सकता है। इतिहास है कि जब भी राजनीति में अन्धेरा हुआ है, मीडिया सूर्योदय लाया है। छोटे – छोटे अखबार ही जनता की सच्ची खबरें ला सकते हैं। समय की जरूरत है कि पत्रकार वैज्ञानिक दृष्टि से काम करें और अंधविश्वास फैलाने से बचें। उन्होंने कहा कि पाठकों को सही और सटीक खबर जानने का अधिकार है और जब तक पाठकों के अधिकार की पूर्ति नहीं होगी, तब तब उनकी मांग जारी रहेगी।
जनता की बात छोटे अखबार ही उठाएंगे नदीमुल हक (राज्यसभा सांसद)
भाषा विचारों को दूसरों तक पहुँचाने का माध्यम है। 27 मार्च 1822 को हरिहर दत्त द्वारा मुंशी सदासुख लाल के सम्पादन में जामे जहाँनुमा प्रकाशित हुआ। इसके प्रिंटर विलियम हॉकिंग्स..यहाँ इसके सम्पादन में कोई मुसलमान नहीं था। समस्या यह है कि आज भाषा को मजहब से जोड़ दिया जाता है। राजा राममोहन राय ने सती प्रथा के खिलाफ अपनी बात पहुँचाने के लिए फारसी में मिरात उल अखबार निकाला क्योंकि अभिजात्य प्रभावी वर्ग फारसी में पढ़ता था। 1857 की क्रांति में उर्दू दैनिक के सम्पादक बाकर साहब को तोप से उड़ा दिया गया। सांसद हसरत मोहानी ने इन्कलाब जिन्दाबाद का नारा दिया और हम इस नारे की उत्पत्ति के बारे में नहीं सोचते। आज कागज के दाम बढ़ रहे हैं, विज्ञापन नहीं मिल रहे हैं मगर जनता की बात छोटे अखबार ही उठाएंगे।
इस अवसर पर यूको बैंक के जीएम नरेश कुमार बतौर विशिष्ट अतिथि मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन ‘छपते-छपते’ के प्रधान संपादक और ‘ताजा टीवी’ के चेयरमैन विश्वंभर नेवर ने किया। धन्यवाद ज्ञापन प्रेस क्लब, कोलकाता के अध्यक्ष स्नेहाशीष सूर ने दिया। सम्मेलन के दूसरे दिन महात्मा गाँधी अन्तरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय, वर्धा के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभागाध्यक्ष डॉ. कृपाशंकर चौबे, प्रभात खबर के स्थानीय सम्पादक कौशल किशोर त्रिवेदी, जनपथ समाचार, सिलिगुड़ी के सम्पादक विवेक बैद, जलते दीप एवं माणक (जोधपुर) के सम्पादक पद्म मेहता, मरु राजस्थान, जयपुर के सम्पादक आर. के. जैन, वैचारिकी के सम्पादक बाबूलाल शर्मा, आलिया विश्वविद्यालय की जनसंचार एवं पत्रकारिता विभागाध्यक्ष गजाला यास्मीन. विद्यासागर विश्वविद्यालय के सहायक प्रोफेसर डॉ. संजय जायसवाल समेत अन्य लोगों ने विचार रखे।
कोलकाता । भवानीपुर कॉलेज में ‘पत्रकारिता और पाठक’ विषय पर लाइब्रेरी में होने वाले कार्यक्रम की श्रृंखला में इस महत्वपूर्ण संगोष्ठी का आयोजन किया गया। छपते छपते हिंदी दैनिक और भवानीपुर कॉलेज के विद्यार्थियों ने अपने विचार को आमंत्रित अतिथि वक्ताओं के साथ साझा किया। पत्रकारिता लोकतंत्र का एक मजबूत स्तंभ है जो जनता और सरकार के बीच सामंजस्य बनाने में मदद करता है। समाज में मीडिया की महत्वपूर्ण भूमिका है। वर्तमान समय में हिंदी पत्रकारिता नित नए कीर्तिमान स्थापित कर रही है। विगत 30-31 तारीख को छपते छपते ने हिंदी पत्रकारिता दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय सम्मेलन किया। उसी कड़ी में भवानीपुर कॉलेज में पत्रकारिता और पाठक विषय पर तीन विशिष्ट वक्ताओं को आमंत्रित किया गया। काउंसिल ऑफ इंडिया के तीन बार पूर्व सदस्य और भारत सरकार के प्रेस मान्यता समिति पश्चिम बंगाल सरकार के हिंदी अकादमी के पूर्व सदस्य तथा अखिल भारतीय समाचार पत्र संपादक सम्मेलन के महासचिव ताजा टीवी और छपते छपते के निदेशक विश्वम्भर नेवर, जनसंचार विभाग महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा के अध्यक्ष और प्रोफेसर डॉ कृपाशंकर चौबे एवं आलिया विश्वविद्यालय पत्रकारिता और मास कम्युनिकेशन की विभागाध्यक्ष डॉ गजाला यासमीन विशिष्ट अतिथि के रुप में आमंत्रित रहे। डॉ कृपाशंकर चौबे जी बर्दमान विश्वविद्यालय से एमए प्रथम श्रेणी में गोल्ड मेडलिस्ट हैं और इन्होंने हिंदी पत्रकारिता परिवर्तन और प्रवृतियां विषय पर पीएचडी की है। जनसत्ता, हिंदुस्तान, सहारासमय, प्रभात खबर, सन्मार्ग आज जैसे समाचार पत्रों में लंबे समय तक काम किया है और पत्रकारिता करने के बाद 2009 से महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा महाराष्ट्र में पूर्णकालिक अध्यापन कार्य कर रहे हैं उनकी 13 से अधिक पुस्तकें हैं, कई संपादन, वृत्त चित्र आदि बहुत से कार्य किए हैं जो पत्रकारिता के आधुनिक चरण के लिए महत्वपूर्ण है। संवाद चलता रहे, मृणाल सेन , मदर टेरेसा,दलित आंदोलन और बांग्ला साहित्य, संपादित ग्रंथ महाश्वेता देवी, हजारीप्रसाद प्रसाद द्विवेदी पर और वृत्तचित्र निर्माण आदि। डॉक्टर चौबे ने अपनी बात रखते हुए पत्रकारिता की कथा यात्रा को प्रोजेक्टर के माध्यम से विद्यार्थियों के सामने रखा जो बहुत ही महत्वपूर्ण थे। बंगाल में फारसी उर्दू हिंदी अंग्रेजी अखबारों की छवि और उनकी अभिव्यक्ति किस प्रकार हमारे देश के लिए उस समय आजादी के लिए अपने आप को अभिव्यक्त कर रहे थे इस पूरी पत्रकारिता इतिहास की कथा यात्रा पर प्रकाश डाला। 17 वीं शती से लेकर आजादी के बाद के समाचार पत्रों एवं रवीन्द्र नाथ ठाकुर रामानंद चटर्जी और विशाल भारत की चर्चा करते हुए पूरे देश के पत्रों के बारे में बताया और उस मुहिम का परिचय दिया। आजादी के बाद की पत्रकारिता के तेवर सिंगूर नंदीग्राम आंदोलन आदि का जिक्र किया और समाचार पत्रों के लिए जेल जब्ती और जुर्माना इन तीनों चुनौतियों को प्रमुख बताया। एबीपी अमृत बाजार पत्रिका का जिक्र देव नागर विशाल भारत का जिक्र किया। आज हमें संवाद की विशेष रूप से आवश्यकता है। विचारों का मरनाअखबार का मरना है। डॉ ग़जा़ला ने आधुनिक युग में होने वाली पत्रकारिता सोशल मीडिया और फेक न्यूज़ इंटरनेट न्यूज़ के मूल्यों की भी बात की। डॉ ग़जा़ला का जेंडर और मीडिया स्टडीज आदि प्रमुख विषय रहे हैं जिस पर वे स्वतंत्र रूप से अनुसंधान और नीतिगत चर्चाओं का नेतृत्व करती हैं। सूचना और सांस्कृतिक मंत्रालय के साथ पैनलबद्ध हैं और लिंग जेंडर और अल्पसंख्यक विषयों पर डॉक्यूमेंट्री बनाती हैं, वैश्विक रूप से जो गलत सूचना जो घटनाएं घटती हैं। और उसको हम सही मान लेते हैं उस पर ग़जा़ला जी का गंभीर अध्ययन है, मीडिया पर छात्रों को सत्यापित करने और उन्हें खारिज करने डेटा विजुलाइजेशन टूल तक पहुंचने के लिए भी कार्य कर रही हैं। विद्यार्थियों के साथ अपनी बातों को साझा करते हुए कहा कि आज ओवरऑल जो पतन हो रहा है उसका कारण है कि हम प्रश्न नहीं करते और प्रश्न जो हमें पूछना चाहिए वह सत्ता से पूछना चाहिए पत्रकारिता संवाद और जागरुक जनता की आवाज है। संवाद और हमारे जो सवाल हैं उसी से हम पत्रकारिता को जोड़ सकते हैं और बड़े मीडिया हाउस और उनकी नीतियों पर चर्चा होनी चाहिए। विश्वंभर नेवर ने कहा कि आज घटनाओं और कंटेंट में कमी आई है जबकि वह समाज में रहकर ही देखा जाता है क्योंकि पत्रकारिता कुछ भी नहीं है बल्कि एक स्ट्रांग कॉमन सेंस है जो हमें किसी भी पुस्तक से नहीं मिल सकती है।। सूचना देना हमारा पहला कार्य है लेकिन कंटेंट से अखबार चलता है साथ ही कटेंट को प्रमुखता देना आवश्यक है यदि उसमें वर्तनी की भी भूल है तो भी लोग उसे पढ़ते हैं। कई उदाहरण देकर नेवर जी ने अपनी बात रखी। इस अवसर पर कई विद्यार्थियों ने प्रश्न भी पूछे जिसमें उज्जवल करमचंदानी और नम्रता चौधरी के प्रश्न अखबार निकालने के लिए किन सिद्धांतों की जरूरत होती है? जैसे महत्वपूर्ण प्रश्न थे। कोआर्डिनेटर प्रोफ़ेसर मीनाक्षी चतुर्वेदी जी ने पूछा कि आज के संदर्भ में महिला पत्रकारों की क्या स्थिति है? अतिथि वक्ताओं ने सभी प्रश्नों के संतोष जनक उत्तर दिए । कार्यक्रम का संचालन किया डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।धन्यवाद नम्रता चौधरी ने दिया। इस अवसर पर कॉलेज के डीन प्रो दिलीप शाह ने सभी अतिथियों को कॉलेज का मोमेंटो प्रदान कर उनका सम्मान किया। प्रोफेसर दिलीप शाह ने डॉ कृपाशंकर चौबे को मोमेंटो प्रदान किया। डॉ गजाला यास्मिन को भवानीपुर कॉलेज के जनसंचार और पत्रकारिता विभाग अध्यक्ष डॉक्टर कपिल भट्टाचार्य ने और विश्वंभर नेवर को मोमेंटो प्रदान किया प्रोफ़ेसर मीनाक्षी चतुर्वेदी और डॉक्टर कृपाशंकर चौबे ने। नम्रता चौधरी और उज्ज्वल करमचंदानी का विशेष योगदान रहा है। कार्यक्रम की जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।
कोलकाता । भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज के दीक्षांत समारोह 2022 में सर्वोच्च अंक प्राप्त चार हजार विद्यार्थियों को डिग्री प्रदान की गई ।स्नातक और स्नातकोत्तर श्रेणी जिसमें बीकॉम, बीए, बीएसई, बीबीए, एमए, एमकॉम के विद्यार्थियों को डिग्री और मेडल प्रदान किए गए। कार्यक्रम सत्रह भागों में विभाजित किया गया है और 26-27-28 मई तीन दिनों तक छात्र छात्राओं को सम्मानित किया गया। डीन प्रो दिलीप शाह ने प्रत्येक सत्र के उद्घाटन सत्र को आरंभ करने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। वहीं हर सत्र में विभागाध्यक्ष, शिक्षकों और मैनेजमेंट के पदाधिकारियों ने विद्यार्थियों को डिग्री प्रदान कर विद्यार्थियों को प्रोत्साहित किया। 2019-20-21 के बैच के 3325 विद्यार्थियों को डिग्री दी गई जिनमें स्नातकोत्तर के 276,बीकॉम के 2576, बीबीए के 88,बीएससी के 161, बीए के 224 विद्यार्थी रहे। इस अवसर पर दीक्षांत उद्घाटन समारोह 2022 में प्रमुख में डीन प्रो दिलीप शाह, प्रो मीनाक्षी चतुर्वेदी, मैनेजमेंट के पदाधिकारियों में उमेद ठक्कर, रेणुका शाह आदि कई गणमान्य अतिथियों का योगदान रहा। वर्तमान छात्र – छात्राओं द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी आयोजन हुआ। कॉलेज के अध्यक्ष मिराज डी शाह ने सभी विभागों के विद्यार्थियों के साथ शिक्षक गणों और उनके अभिभावकों को बधाई और शुभकामनाएँ दी। इस अवसर पर प्रो दिलीप शाह ने कार्यक्रम के हर सत्र के आरंभ में और अंत में, विद्यार्थियों को एक साथ शुभकामनाएं दीं और कॉलेज में होने वाली सभी गतिविधियों के विषय में बताया। कार्यक्रम की परिकल्पना में सोहिला भाटिया का विशेष योगदान रहा। वर्तमान विद्यार्थियों ने संचालन, वॉलंटियर्स एवं सभी व्यवस्थाओं में भाग लिया है। कार्यक्रम की जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।
कोलकाता । महाबीर दानवर ज्वैलर्स ने विवाहित जोड़ों को एक दूसरे के प्रति खास महसूस करवाने के लिए ‘एमडीजे कपल नंबर 1’ नामक भव्य प्रतियोगिता का आयोजन किया। तीन माह तक चलने वाली इस प्रतियोगिता में 10 दम्पति ग्रैंड फिनाले में पहुँचे। इस कार्यक्रम में आयोजित फैशन शो के बाद इवेंट में माहिरा – द ब्राइडल ज्वैलरी कॉउचर की ओर से अपने विशेष ब्राइडल कलेक्शन का अनावरण किया गया। एमडीजे की कपल नंबर 1 प्रतियोगिता की शुरुआत गत 23 फरवरी, 2022 को शुरू हुई। फिनाले में अभिनेत्री ऋचा शर्मा, सेलिब्रिटी साड़ी ड्रेपिस्ट और स्टाइलिस्ट डॉली जैन, अभिनेत्री उशोशी सेनगुप्ता, सेलिब्रिटी मोटिवेशनल स्पीकर नैना मोरे की भूमिका सराहनीय थी। इस अवसर पर महाबीर दानवार ज्वेलर्स के निदेशक मंडली के सदस्यों में से विजय सोनी, अरविंद सोनी, संदीप सोनी और अमित सोनी उपस्थित थे। इस सफल आयोजन को लेकर महाबीर दानवर ज्वेलर्स के निदेशक अरविंद सोनी और संदीप सोनी ने कहा, हमने इसके पहले आयोजित जोड़ी नंबर 1 प्रतियोगिता की भी काफी सराहना हुई थी। इसके कारण इस बार हम विवाहित जोड़ों के साथ इसे एक नए रूप में फिर से लेकर आए हैं। इसमें भाग लेनेवाले प्रतिभागियों का उत्साह और उनके चेहरे पर खुशी देख हमे काफी हर्ष हो रहा है। “एमडीजे कपल नंबर 1” विवाहित जोड़ों के लिए अपने बंधन को और मजबूत करने और इस रिश्ते में भरपूर प्यार भरने के लिए एक अद्भुत मंच है। हम इस प्रतियोगिता में भाग लेने वाले हर कपल के बीच हर खास पल को सेलिब्रेट करने के मौके देकर उनके जीवन में खुशियां भरना चाहते हैं। इस मौके पर कम्पनी ने माहिरा – द ब्राइडल ज्वैलरी कॉउचर का ब्राइडल कलेक्शन भी पेश किया।
इस प्रतियोगिता के ग्रैंड फिनाले कार्यक्रम में विजेता कपल को प्यारे से भेंट के तौर पर उन्हें दुबई की यात्रा पर भेज रहे हैं। जिससे वे अपने जीवन साथी के साथ एकांत में जिंदगी के खुशनुमा पल गुजार सके। इस फिनाले में चुने गए नंबर 1 जोड़ी को संसीता और सहर्ष द्वारा पेश किए गए उत्कृष्ट पोशाक के साथ देखा जाएगा। इस प्रतियोगी की ग्रूमिंग और इसका मेकओवर क्लब सैलून की ओर से किया गया है। सेलिब्रिटी स्टाइलिस्ट प्रिया सक्सरिया द्वारा इन जोड़ों को स्टाइल किया जा गया है। शहर की एक ऐसी बुटीक एजेंसी, जो केवल विशेष कार्यक्रम करती है, उसी सान एंटरटेनमेंट द्वारा इस कार्यक्रम को क्यूरेट किया गया है।
कपल नंबर 1 के विजेताओं की सूची :
1: राहुल देवतिया और बरखा देवतिया (विजेता)
2: सुदीप्त चकवर्ती और रियंका घोषाल (प्रथम उपविजेता)
कोलकाता । कोविड-19 पारंपरिक कार्यबल को नहीं रोक सकता, बल्कि कार्य, कार्यस्थल और कार्यबल का एक नया रूप तैयार कर सकता है। हाल ही में महानगर में पूर्वी भारत क्षेत्रीय सम्मेलन में 28 मई 2022 को राष्ट्रीय कार्मिक प्रबंधन संस्थान (एनआईपीएम) द्वारा पूर्वी क्षेत्रीय वाद-विवाद सत्र द्वारा आयोजित किया गया। महामारी ने भले ही हमारी गति को बाधित किया, सम्भवतः एक सीमा तक विभाजित भी हैं मगर जीवित हैं। वाद – विवाद सत्र में यह बात उठकर आई। एनआईपीएम के पूर्वी क्षेत्रीय सम्मेलन 2022 में प्रख्यात एच आऱ प्रोफेशनल शामिल थे जिन्होंने “संगठनात्मक सीमाओं का पुनर्निर्माण” पर अपने विचार व्यक्त किए।
इसकी शुरुआत एक उद्घाटन सत्र के साथ हुई जहां उद्योग, वाणिज्य और उद्यम मंत्री डॉ. पार्थ चटर्जी ने कार्यक्रम को सम्बोधित किया। यह आयोजन “कार्यस्थल के बारे में मिथक को दूर करने” और “कार्यबल परिवर्तन का नेतृत्व करने के लिए मानव संसाधन रणनीतियों” समेत कई अन्य विषयों पर चर्चा हुई।
प्रतिष्ठित बिजनेस स्कूलों, हेरिटेज बिजनेस स्कूल (कोलकाता), भवन कोलकाता, आईक्यू सिटी यूनाइटेड वर्ल्ड स्कूल ऑफ बिजनेस-कोलकाता और आर्मी इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट, कोलकाता के युवा डिबेटर्स ने पूर्वी क्षेत्रीय वाद-विवाद सत्र में खचाखच भरे दर्शकों में उत्साह भर दिया। अन्य प्रतिभागियों का मानना था कि कोविड -19 ने भावना को एक हद तक कम कर दिया है, लेकिन पारंपरिक कार्यबल को नहीं मार सकता है और इस प्रकार, युवा जीवंत भारत जल्द से जल्द अपने कार्य केंद्र पर पूरी तरह से वापस आ रहा है।
मॉडरेटिंग पैनल में श्रेयी के सीएचआरओ जयदीप चटर्जी, सीएचआरओ, प्रख्यात सदस्य निर्णायक मंडल में कई विशिष्ट व्यक्ति शामिल थे। इनमें आईआईएसडब्ल्यूबीएम के निदेशक, लोक सेवा आयोग, पश्चिम बंगाल सरकार के पूर्व अध्यक्ष दीपांकर दासगुप्ता, एनआईपीएम के राष्ट्रीय अध्यक्ष विश्वेश कुलकर्णी शामिल थे। निर्णायक मंडल के लिए निर्णय कठिन था। कड़े मुकाबले में हेरिटेज बिजनेस स्कूल के एमबीए की टीम ने बाजी मारी। असना फातमा उस्मान और मोहम्मद अरसलान आफ्टर विजेता बने।
कोलकाता । उत्तराखंड के पर्यटन सचिव दिलीप जावलकर ने कहा है कि पंजीकरण के फर्जीवाड़े से बचने के लिए तीर्थयात्री केवल आधिकारिक वेबसाइट पर ही चारधाम यात्रा का रजिस्ट्रेशन कराएं। उन्होंने कहा कि चारधाम यात्रा के लिए अभी अक्टूबर तक का समय है। ऐसे में यात्रा के दौरान अव्यवस्थाओं से बचने के लिए तीर्थयात्री किसी भी प्रकार की जल्दबाजी न करें। साथ ही उन्होंने पत्रकारों को बताया कि यात्री किसी भी अवैध स्रोत के माध्यम से न तो रजिस्ट्रेशन करें और ना ही हेली टिकट की बुकिंग! केवल आधिकारिक वेबसाइट से अथवा काउंटर से ही अपना पंजीकरण या टिकट बुकिंग करें।
उन्होंने बताया कि संज्ञान में आया है कि कुछ लोग पंजीकरण पीडीएफ को फोटोशॉप या एडिट करते हुए उस पर तस्वीर और अन्य जानकारियां बदलकर प्रशासन को धोखा देने का प्रयास कर रहे हैं परंतु क्यूआर कोड स्कैन करते ही ऐसे लोगों का पर्दाफाश हो जाता है। और ऐसे यात्रियों को आगे की यात्रा करने से रोक दिया जाता है। अतः यात्रियों को बार -बार जी आए हिदायत दी जा रही है कि वह आधिकारिक वेबसाइट अथवा काउंटर से ही अपना पंजीकरण करना सुनिश्चित करें और इसके लिए किसी भी प्रकार का भुगतान ना करें। यह पूर्णतः है निःशुल्क सेवा है। और किसी प्रकार की धोखाधड़ी करने वाले लोगों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इस मामले में उत्तराखंड पुलिस तथा साइबर पुलिस द्वारा भी अपने स्तर से कार्यवाही आरंभ कर दी गई है।
पर्यटन सचिव दिलीप जावलकर ने कहा कि तीर्थयात्री अपनी यात्रा की योजना बेहतर बनाकर अपनी यात्रा को यादगार बना सकते हैं। उन्होंने कहा कि बेहतर सड़कों और वाहनों की उपलब्धता से यात्रा की कुल समय अवधि कम हुई है। पहले अधिकांश यात्रा सरकारी वाहनों के माध्यम से की जाती थी और यात्रा में करीब नौ दिन का समय लगता था। इससे तीर्थ धामों में श्रद्धालुओं की भीड़ नहीं लगती थी। लेकिन अब बेहतर सड़क होने से तीर्थयात्री अपने निजी वाहनों से भी यात्रा कर रहे हैं और धामों तक पहुंचने में कम समय लग रहा। मौसम पूर्वानुमान की व्यवस्था भी पहले के मुकाबले बेहतर हुई है। कारण है कि मात्र 26 दिन में चार धामों में करीब 11 लाख 45 हजार तीर्थयात्री दर्शन कर चुके हैं। दिलीप जावलकर ने जोर देकर कहा कि चारधाम यात्रा अमरनाथ यात्रा की तरह सिर्फ एक महीने की यात्रा नहीं है, बल्कि छह से सात महीने के लिए यह यात्रा चलती है। ऐसे में किसी भी प्रकार की असुविधा से बचने के लिए तीर्थयात्री यात्रा के लिए कोई जल्दबाजी न करें। उन्होंने कहा कि सरकार चारधाम यात्रा को सुव्यवस्थित करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है।
बीमार व्यक्ति अपने चिकित्सक का परामर्श पर्चा एवं चिकित्सक का संपर्क नम्बर एवं चिकित्सक द्वारा लिखी गयी दवाईयां अपने साथ रखें। अति वृद्ध एवं बीमार व्यक्तियों एवं पूर्व में कोविड से ग्रसित व्यक्तियों के लिए यात्रा पर न जाना या कुछ समय के लिए स्थगित करना उचित होगा। उन्होंने जलवायु अनु कुलिकरण का महत्व बताते हुए कहां की चारों धाम अत्यधिक ऊंचाई पर स्थित होने के कारण वहां पर जाने के पूर्व यात्री पड़ाव पर ठहर कर धीरे-धीरे यात्रा करें और देव दर्शन के साथ -साथ प्रकृति के सौंदर्य का भी दर्शन करें। इससे शरीर ठंडी जलवायु एवं बदलती भौगोलिक परिस्थितियों के अनुकूल हो जाता है और इन सुझावों का पालन कर किसी प्रकार की आकस्मिक और अप्रिय घटना से बचा जा सकता है। चारधाम यात्रा पर आने वाले नौजवानों से अपील करते हुए उन्होंने कहा कि वे पहले बुजुर्ग एवं महिलाओं को दर्शन करने का मौका दे।
पहली बार पर्यटन विभाग की ओर से तीर्थयात्रियों के पंजीकरण की व्यवस्था की गई है। विभाग की ओर से तीर्थयात्रियों का ऑनलाइन माध्यम से पंजीकरण कराया जा रहा है। तीर्थयात्री मोबाइल एप के जरिए भी ऑनलाइन पंजीकरण कर सकते हैं। 26 दिन पूर्व आरंभ हुई यात्रा में अब तक लगभग 12 लाख लोग चार धाम दर्शन कर चुके हैं। उन्होंने बताया कि कुछ दिनों पहले यह देखा गया था कि कुछ तीर्थयात्री ऑफलाइन माध्यम से एडवांस स्लॉट की बुकिंग करा उसी दिन दर्शन के लिए रवाना हो जा रहे हैं ऐसे में धामों में क्षमता से अधिक भीड़ होने से तीर्थयात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ऐसा करने वाले तीर्थयात्रियों की पुलिस जांच कर उन्हें बुकिंग तिथि के दिन ही यात्रा करने की सलाह दे रही है। जबकि जो तीर्थयात्री होटल और हेली सेवा की एडवांस बुकिंग कर चुके हैं, चेक पोस्ट पर उनके दस्तावेजों की जांच कर उन्हें आगे भेजा जा रहा है।
कोलकाता । सत्यजीत राय ने अपनी 5 फिल्मों के लिए कविगुरु रवीन्द्रनाथ ठाकुर की लघु कथाओं एवं उपन्यास को आधार बनाया। शाांतिनिकेतन में रहकर उन्होंने अच्छे चित्रकार एवं कलाकार के गुण सीखे। हाल ही में कविगुरु और सत्यजीत राय की सृजनात्मक जुगलबंदी का उत्सव मनाते हुए प्रवासन क्लब ने अनुभव, रेनेसां, अंहिता हेरिटेज इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के लैंग्वेज क्लब के सहयोग से विशेष उत्सव आयोजित किया। गत 19 एवं 20 मई को आयोजित इन दो कार्यक्रमों यानी राय – ट्रोसपेक्टिव एवं गीतांजली में सत्यजीत राय एवं रवीन्द्रनाथ ठाकुर की सृजनात्मकता का उत्सव मनाया गया। राय की कविगुरु के साहित्य पर आधारित फिल्मो से प्रेरित पोस्टर इंजीनियरिंग के विद्यार्थियों द्वारा प्रदर्शित किये गये। विद्यार्थियों द्वारा निर्मित 2 फिल्में भी प्रदर्शित की गयीं।
कोलकाता । टीसीएस कोड वीटा 2022 एक प्रतिष्ठित वैश्विक कोडिंग चुनौती जिसे टीसीएस द्वारा छात्रों के बीच कौशल विकास और नवाचार की भावना को बढ़ावा देने के लिए डिजाइन किया गया है, हर साल प्रतियोगिता में दुनिया भर में 350000 से अधिक छात्रों की भागीदारी देखी जाती है।
हेरिटेज इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एचआईटीके),बी.टेक-कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग की छात्रा रितुपर्णा पदिरा ( बैच -2023) ने राउंड -2 को पास करने के बाद टीसीएस कोडवीटा सीजन -10 में ग्रैंड फिनाले के लिए क्वालीफाई किया, जिसके परिणाम 21 अप्रैल को घोषित किए गए थे।
अंतिम परिणाम घोषित में रितुपर्णा शीर्ष 30 फाइनलिस्टों में एकमात्र महिला फाइनलिस्ट बन गईं, जिन्हें 15 मई 2022 को आयोजित ग्रैंड फिनाले के लिए चुना गया। जहां आईआईटी दिल्ली के कलश गुप्ता को टीसीएस कोड वीटा 2022 सीज़न -10 में विजेता घोषित किया गया, वहीं रितुपर्णा पदिरा को दुनिया भर के 30 शीर्ष फाइनलिस्टों में एकमात्र महिला फाइनलिस्ट के रूप में घोषित किया गया, जिसने न केवल बंगाल को बल्कि स्त्री लिंग को भी गौरवान्वित किया।
कोडिंग के प्रति उत्साही, रितुपर्णा खुद को दुनिया के शीर्ष प्रोग्रामर में देखती हैं। रितुपर्णा ने कहा, “मुझे कोडिंग पसंद है और इस प्रतियोगिता ने मेरे आत्मविश्वास को बहुत बढ़ा दिया है। मुझे वास्तव में आश्चर्य हुआ जब मुझे कल टीसीएस से आधिकारिक तौर पर मेल मिला और मुझे अपनी आंखों पर विश्वास नहीं हो रहा था कि मैं दुनिया के शीर्ष 30 फाइनलिस्टों में से हूं।”
हेरिटेज ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस, कोलकाता के सीईओ पी.के.अग्रवाल ने कहा, “एचआईटीके के लिए गर्व का क्षण है क्योंकि यह दिखाता है कि संस्थान के छात्र इस तरह के अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में कितना अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं।”
एचआईटीके के , कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग विभागाध्यक्ष डॉ. एस. मजुमदार ने ऋतुपर्णा की सराहना की।