Friday, March 27, 2026
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स्‍कूल जहां नहीं लगती है फीस, उलटा बच्‍चों को मिलता है स्‍टाइपेंड

नयी दिल्‍ली । अभिभावकों की एक बड़ी चिंता बच्‍चों की पढ़ाई होती है। इसके लिए वे बच्‍चों को अच्‍छे से अच्‍छे स्‍कूल में दाखिला दिलाते हैं। कई तो अपना पेट काटकर अपने बच्‍चों का उज्‍ज्‍वल भविष्‍य बनाने की कोशिश करते हैं। हालांकि, प्राइवेट स्‍कूलों की मनमानी फीस के कारण कई बार पैरेंट्स को अपने मन को मसोस कर रह जाना पड़ता है। देश में ज्‍यादातर प्राइवेट स्‍कूलों की यही कहानी है। इनकी अनाप-शनाप फीस अभ‍िभावकों को रुला देती है। यह और बात है कि एक ऐसा भी स्‍कूल है जहां फीस नहीं ली जाती है। अलबत्‍ता, बच्‍चों को स्‍टाइपेंड दिया जाता है। जरूरतमंदों की जिंदगी बदलने के मकसद से इसकी शुरुआत की गई है। इसे चलाने वाले हैं जोहो कॉरपोरेशन के सीईओ और संस्‍थापक श्रीधर वेम्‍बु। उन्‍हें 2021 में पद्मश्री से सम्‍मानित किया गया था। वह भारत के 55वें सबसे अमीर शख्‍स हैं।
वेम्‍बु का जन्‍म 1968 में तमिलनाडु के तंजावुर जिले में हुआ था। परिवार मिडिल क्‍लास था। 1989 में उन्‍होंने मद्रास के इंडियन इंस्‍टीट्यूट ऑफ टेक्‍नोलॉजी (IIT) से इलेक्‍ट्र‍िकल इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन किया। फिर न्‍यूजर्सी में प्रिंसटन यूनिवर्सिटी से एमएस और पीएचडी की डिग्री हासिल की। कैलिफोर्निया में वायरलेस इंजीनियर के तौर पर उन्‍होंने क्‍वालकॉम के साथ अपने करियर की शुरुआत की। फिर 1996 में वेम्‍बु ने अपने भाइयों के साथ एडवेंटनेट नाम की सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट फर्म शुरू की। 2009 में इसी कंपनी का नाम बदलकर जोहो कॉरपोरेशन कर दिया गया। 2019 में वेम्‍बु स्‍थायी रूप से भारत लौट आए। तमिलनाडु में तेनकासी जिले के ग्रामीण इलाके में जोहो ने अपने दफ्तर बनाए। वेम्‍बु को सॉफ्टवेयर और प्रोडक्‍ट डेवलपमेंट को शहरों से ग्रामीण इलाकों में ले जाने के लिए जाना जाता है। नहीं लगती फीस, म‍िलता है स्‍टाइपेंड
2020 में वेम्‍बु श्रीधर ने रूरल स्‍कूल स्‍टार्टअप का ऐलान किया। इसका मकसद फ्री प्राइमरी एजुकेशन देना है। इसके पहले 2005 में ही श्रीधर वेम्‍बु ने जोहो स्‍कूल की नींव डाल दी थी। 2004 में जोहो यूनिवर्सिटी शुरू करने के एक साल बाद इसकी शुरुआत हुई थी। जोहो स्‍कूल में कोई फीस नहीं ली जाती है। बजाय इसके छात्रों को अलग-अलग तरह की स्किल्‍स सिखाई जाती हैं। स्‍टूडेंट्स को दो साल के कोर्स के ल‍िए 10,000 रुपये स्‍टाइपेंड दिया जाता है। जोहो कॉरपोरेशन में काम करने वाले हजारों कर्मचारियों में बड़ी संख्‍या में इस स्‍कूल के होते हैं। कभी दो बच्‍चों से शुरू हुआ था स्‍कूल
जोहो स्‍कूल छह बच्‍चों और दो टीचरों के साथ शुरू हुआ था। अब इन स्‍टूडेंट की संख्‍या बढ़कर 800 से ज्‍यादा हो चुकी है। जोहो स्‍कूल के प्रेसीडेंट राजेंद्रन दंडपाणी का बेटा भी इसी स्‍कूल में पढ़ा। फिर उसी कंपनी में कर्मचारी बन गया। राजेंद्रन बताते हैं कि जोहो में 90 फीसदी स्‍टूडेंट तमिलनाडु के होते हैं। जोहो इंस्‍टीट्यूट तेनकासी में वहीं है जहां जोहो के दफ्तर बने हैं। इसके कारण स्‍टूडेंट ऑफिस के माहौल से जल्‍द ही एक्‍सपोज्‍ड हो जाते हैं। जोहो के स्‍टूडेंट 21 साल की छोटी उम्र से काम पर लग जाते हैं। जोहो स्‍कूल में पढ़ाई ग्रेड, नंबरों या स्‍कोर पर नहीं, बल्कि योग्‍यता पर निर्भर करती है। यहीं से टैलेंट खोजा जाता है।

(साभार – नवभारत टाइम्स)

गौरव मुंजाल, यूट्यूब वीडियो बनाकर खड़ी कर दी ₹ 25000 करोड़ की कंपनी

नयी दिल्ली । ऑनलाइन लर्निंग प्लेटफॉर्म अनएकेडमी दुनिया की बड़ी ईटी टेक कंपनियों में से एक है। साल 2022 में अनएकेडमी का नेटवर्थ 3.4 अरब डॉलर यानी करीब 25,000 करोड़ रुपये था। करोड़ों की कंपनी अनएकेडमी के प्लेटफॉर्म पर 50 मिलियन से अधिक यूजर्स हैं, लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि इस कंपनी की नींव एक यूट्यूब चैनल पर रखी गई है। साल 2010 में गौरव मुंजाल ने अपना यूट्यूब चैनल शुरू किया था। इसी यूट्यूब चैनल ने आगे चलकर अनअकैडमी कंपनी का रूप लिया। यानी 25,000 करोड़ रुपये की इस कंपनी की नींव एक यूट्यूब चैनल के बेस पर रखी गई है।
कौन हैं गौरव मुंजाल
गौरव मुंजल अनएकेडमी के सीईओ हैं। गौरव ने अपने दोस्त डॉ रोमन सैनी और हिमेश सिंह के साथ मिलकर अपने यूट्यूब चैनल को कंपनी के तौर पर डेवलप किया। गौरव इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे थे। बीटेक की पढ़ाई के दौरान ही गौरव ने अपना यूट्यूब चैनल शुरू किया। इस चैनल का नाम अनएकेडमी रखा। गौरव इस यूट्यूब चैनल पर कंप्यूटर ग्राफिक्स कैसे बनाए इससे संबंधित वीडियो बनाकर अपलोड करते थे। उनके वीडियोज पर अच्छा रिस्पांस मिल रहा था। साल 2014 में उनकी मुलाकात रोमन सैनी से हुई। रोमन डॉक्टर और आईएएस अधिकारी थे। रोमन, गौरव ने मिलकर अपने यूट्यूब चैनल पर प्रतियोगी परीक्षाओं को कैसे पास करें, कैसे तैयारियां करें इससे संबंधित वीडियो बनाकर डालने लगे। उस वक्त उनके चैनल पर 24,000 सब्सक्राइबर्स थे। साल 2015 में रोमन से नौकरी छोड़ दी और अपना पूरा फोकस इस यूट्यूब चैनल पर लगा दिया। 10 दिसंबर 2015 में गौरव और रोमन ने मिलकर अपने यूट्यूब चैनल अनएकेडमी की शुरुआत कंपनी के तौर पर कर दी।

कैसे बनी देश की बड़ी कंपनी
दोनों ने अपनी नौकरी छोड़कर अपना पूरा फोकस अनएकेडमी को बड़ा करने में लगा दिया। कंपनी को बड़ा करने के लिए निवेश हासिल किया। आज उनकी कंपनी बायजू के बाद देश की सबसे बड़ी लर्निंग ऐप में से एक है। आज हजारों एक्सपर्ट और लाखों स्टूडेट्स अनएकेडमी से जुड़े हैं। अनएकेडमी के यूट्यूब चैनल और मोबाइल एप्लीकेशन, के जरिए ट्यूटोरियल वीडियो तैयार कर अपलोड किए जाते हैं। छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए कोचिंग क्लास दी जाती है। कंपनी के पास बड़े-बड़े निवेशक है।
1.58 करोड़ का वेतन
गौरव मुंजाल ने अनएकेडमी को देश की टॉप कंपनियों में शामिल कर दिया है। खुद गौरव मुंजाल सीरियल इंवेस्टर बन गए हैं। उन्होंने 37 कंपनियों में निवेश किया है। वो फ्लैटचैट के भी फाउंडर हैं। साल 2022 में अनअकैडमी के सीईओ के तौर पर उनकी सैलरी 1.58 करोड़ रुपये थी। आज अनएकेडमी के प्लेटफॉर्म पर 50 मिलियन से अधिक यूजर्स हैं।

 

आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास को गवर्नर ऑफ दि ईयर सम्मान

नयी दिल्ली । भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास को गवर्नर ऑफ दि ईयर के सम्मान से सम्मानित किया गया है। सेंट्रल बैंकिंग ने उन्हें यह सम्मान दिया है ।
आरबीआई के पूर्व गवर्नर उर्जित पटेल के इस्तीफे के बाद शक्तिकांत दास आरबीआई गवर्नर बनाये गए थे । उसके बाद कोरोना महामारी, रूस-यूक्रेन युद्ध और आर्थिक स्लोडाउन जैसी चुनौतियों के साथ अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने सफलतापूर्वक निपटा है ।
सेंट्रल बैकिंग पब्लिकेशन पब्लिक पॉलिसी और फाइनैंशियल मार्केट से जुड़ी पब्लिकेशन कंपनी है जिसकी नजर दुनिया भर के सेंट्रल बैंकों और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों पर रहती है। इससे पहले 2015 में सेंट्रल बैंकिंग आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन को भी गवर्नर ऑफ दि ईयर के सम्मान से सम्मानित कर चुकी है  । अपने अवार्ड नोट में सेंट्रल बैंकिंग ने कहा कि भारत का जीडीपी 10 वर्ष में 90 फीसदी बढ़ा है । प्रति व्यक्ति आय में 70 फीसदी की बढ़ोतरी आई है. प्रति व्यक्ति आय 2400 डॉलर प्रति वर्ष हो गया है जो 2010 में 1000 डॉलर हुआ करता था ।
कोरोना महामारी के दौरान आरबीआई अर्थव्यवस्था को संकट से बचाने से लेकर उसे गति देने के लिए बेंचमार्क लेंडिंग रेट्स में कटौती की थी । साथ ही आम लोगों को कुछ महीने के लिए ईएमआई नहीं देने से छूट के फैसले के साथ ब्याज में राहत दी गयी थी । सेंट्रल बैंकिंग ने कहा कि कोविड महामारी जैसे संकट से निपटने में शक्तिकांत दास का बड़ा प्रभाव था । डर और भय के बीच बीच बेहद शांत आवाज के रूप में दिखाई देते रहे. राजनीतिक दबाव और आर्थिक संकट के बीच अपने फैसलों के जरिए उन्होंने संतुलन बनाए रखा।
शक्तिकांत दास के कार्यकाल के दौरान ही देश में यूपीआई पेमेंट का विस्तार बढ़ता चला गया । डिजिटल पेमेंट के क्षेत्र में भारत अग्रणी बनता चला गया । क्रिप्टोकरेंसी के बेहद खिलाफ दास रहे हैं। हाल ही आरबीआई ने उनके नेतृत्व में सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी को लॉन्च किया है। शक्तिकास दास को लगातार दूसरी बार आरबीआई गवर्नर के तौर पर एक्सटेंशन दिया गया है ।

तीनों सेनाओं को मजबूत बनाने के लिए लोकसभा में लाया गया विधेयक

संयुक्त बल कमांडरों को मिलेंगे अनुशासनात्मक अधिकार

नयी दिल्ली। रक्षा मंत्रालय ने तीनों सेनाओं को संयुक्त रूप से मजबूत बनाने के लिए बुधवार को लोकसभा में एक विधेयक पेश किया है। यह विधेयक पास होने के बाद तीनों सेनाओं के कमांडरों को उनके अधीन काम करने वाले तीनों सशस्त्र बलों के सभी कर्मियों पर अनुशासनात्मक अधिकार देगा।
अडाणी मामले में विपक्ष के हंगामे के बीच रक्षा राज्य मंत्री अजय भट्ट ने इसे संसद में ऐसे समय में पेश किया गया है, जब रक्षा मंत्रालय बदलते सुरक्षा माहौल में खतरों से निपटने के लिए थिएटर कमांड के निर्माण पर काम कर रहा है।

दरअसल, तीनों सेनाओं को संयुक्त रूप से मजबूत करने के लिए आधुनिकीकरण और पुनर्गठन करके थिएटर कमांड बनाने की प्रक्रिया को अब अंतिम रूप दिया जा रहा है। इसी के मद्देनजर रक्षा मंत्रालय ने लोकसभा में एक विधेयक पेश किया है, जिसमें तीनों सेनाओं के कमांडरों को उनके अधीन काम करने वाले तीनों सशस्त्र बलों के सभी कर्मियों पर अनुशासनात्मक अधिकार दिए गए हैं। इसे ‘इंटर-सर्विसेज ऑर्गेनाइजेशन (कमांड, कंट्रोल एंड डिसिप्लिन) बिल, 2023 का नाम दिया गया है। विधेयक में कहा गया है कि केंद्र सरकार एक अधिसूचना के जरिये ‘इंटर सर्विसेज ऑर्गनाइजेशन’ का गठन कर सकती है। इसमें वह संयुक्त सेवा कमांड शामिल हो सकती है, जिसमें यूनिट या सेवा कर्मी शामिल हैं।

इस विधेयक के जरिये किसी भी सेवा अधिनियम के अधीन कमांडर-इन-चीफ या कमांड-इन-कमांड को रखा जा सकता है। अडाणी मामले में विपक्ष के हंगामे के बीच रक्षा राज्य मंत्री अजय भट्ट ने बुधवार को लोकसभा में बिल पेश किया। इसे संसद में ऐसे समय में पेश किया गया है, जब रक्षा मंत्रालय बदलते सुरक्षा माहौल में खतरों से निपटने के लिए थिएटर कमांड के निर्माण पर काम कर रहा है। इस दिशा में काम करने के लिए चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ का पद सृजित किया गया है। तीनों सेनाओं में फिलहाल अनुशासन बनाए रखने के लिए वायु सेना अधिनियम-1950, सेना अधिनियम-1950 और नौसेना अधिनियम-1957 लागू हैं, जो संबंधित मामलों के लिए उनकी कमान के अधीन या उनसे जुड़े हुए हैं।

लोकसभा में पेश विधेयक में यह भी कहा गया है कि किसी अंतर-सेवा संगठन का कमांडर-इन-चीफ या ऑफिसर-इन-कमांड अंतर सेवा संगठन का प्रमुख होगा। इसलिए उसके अधीन कार्य करने वाले कर्मियों पर पूर्ण नियंत्रण होगा। बिल के उद्देश्यों के विवरण में कहा गया है कि इंटर-सर्विसेज ऑर्गनाइजेशन के कमांडर-इन-चीफ और ऑफिसर-इन-कमांड को अधिकार देने की आवश्यकता है कि वे अपने कमांड के अधीन या संलग्न सेवा कर्मियों पर रखरखाव के लिए नियंत्रण का इस्तेमाल कर सकें। यह बिल एक सक्षम कानून है, जो अंतर-सेवा संगठनों के प्रमुखों को सभी कर्मियों पर प्रभावी कमांड, नियंत्रण और अनुशासन का प्रयोग करने का अधिकार देता है ।

भवानीपुर कॉलेज की एनएसएस इकाई ने बंगाल केवड़ातापा स्कूल में मनाया महिला दिवस

कोलकाता । भवानीपुर कॉलेज की एनएसएस इकाई ने बंगाल केवरातापा लक्ष्मीपुर वेस्ट पश्चिम बंगाल मेंट स्कूल के गांव के विद्यार्थियों के साथ वूमेंस डे मनाया। स्कूल की 120 छात्राओं को स्कूल बैग और ज‌‌‌मैट्रिक बॉक्स दिए।एन एसएस की प्रमुख प्रोफेसर गार्गी के संयोजन में प्रोफेसर चंदन झा एवं अन्य शिक्षकों ने एनएसएस की ओर से इस विमेंस डे को अलग तरह से मनाया ।
भवानीपुर कॉलेज के स्वयंसेवी छात्र छात्राओं ने महिलाओं के अधिकार , महिलाओं के स्वास्थ्य और सफाई, सुरक्षा, खेल ,स्कॉलरशिप और योग के विषय में अपना वक्तव्य दिया। इस अवसर पर स्कूल की छात्राओं ने सांस्कृतिक कार्यक्रम में नृत्य प्रस्तुति दी। पूरे दिन को आनंद एवं सामाजिक कार्य के रूप में मनाया गया। डॉ वसुंधरा मिश्र ने बताया कि इस अवसर पर भवानीपुर कॉलेज के राष्ट्रीय स्वयंसेवी विद्यार्थियों साथ मिलकर गांव के स्कूल की छात्राओं के साथ भोजन किया और अपने विचारों को साझा कर एक नई मिसाल कायम की।

मर्चेंट्स चेम्बर ऑफ कॉमर्स द्वारा महिला दिवस पर विशेष सत्र

कोलकाता । मर्चेंट्स चेम्बर ऑफ कॉमर्स द्वारा महिला दिवस पर विशेष सत्र आयोजित किया गया । इस अवसर पर समाज में परिवर्तन लाने वाली सफल महिलाओं ने अपनी संघर्ष यात्रा एवं जमीनी स्तर पर उनके काम से होने वाले प्रभाव साझा किए । इस सत्र में जबाला एक्शन रिसर्च ऑर्गनाइजेशन की संस्थापक बैताली गांगुली ने कहा कि जबाला गरीबी, अशिक्षा, तस्करी, बाल विवाह जैसी समस्याओं के खिलाफ लड़ने के लिए स्थापित हुई । जबाला ने मुख्य रूप से रेड लाइट इलाकों में काम किया है । 1500 से अधिक लड़कियाँ वापस वेश्यावृत्ति की ओर नहीं लौटीं । मुम्बई, कोलकाता, चेन्नई से 500 से अधिक लड़कियाँ छुड़वाई गयीं ।
अशोका फेलो इक्वीडायवर्सिटी फाउंडेशन की संस्थापक एवं मैनेजिंग ट्रस्टी आनंदिता मजुमदार ने कहा फाउंडेशन महिलाओं को राजनीतिक रूप से जागरूक बनाने के लिए काम कर रहा है । फाउंडेशन लैंगिक हिंसा को लेकर काम कर रहा है । ग्रामीण इलाकों में लैंगिक समानता, युवाओं में संवेदनशीलता बढ़ाने के लिए बाल संसद आयोजित की जाती है।
संलाप की नेटवर्किंग एवं पार्टनरशिप हेड ओइंड्रिला सिन्हा ने कहा कि 35 साल पुरानी उनका संगठन मानव तस्करी एवं बाल उत्पीड़न के खिलाफ काम कर रहा है । 2017 में पीड़ितों के लिए स्कूल स्थापित किया गया और कानून में रुचि रखने वालों को शिक्षा, छात्रावास और कोर्स फीस दी जाती है ।
रंगीन खिड़की की संस्थापक एवं एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर संजना गुप्ता ने कहा कि उनका संगठन युवाओं के साथ काम करता है । खासकर माहावारी के दौरान स्वास्थ्य को लेकर किशोरियों को जागरुकता लाने की कोशिश की जा रही है । अब तक 6 हजार लड़कियों को इस बारे में शिक्षित किया गया है और 1400 स्कूलों के साथ रंगीन खिड़की काम कर रही है ।
ट्रांसफार्म स्कूल्स, पिपल फॉर एक्शन की प्रोजेक्ट लीड पियाली चक्रवर्ती ने अपनी यात्रा साझा करते हुए कहा कि विज्ञान के क्षेत्र लड़कियों की भागीदारी बढ़ाने के लिए उनकी संस्था काम कर रही है । अब 42 प्रतिशत लड़कियाँ विज्ञान से जुड़े विषयों के प्रति रुचि दिखा रही हैं और 53 प्रतिशत विद्यार्थी तकनीकी शिक्षा लेकर पढ़ने को तैयार हैं ।
इस सत्र में स्वागत भाषण एमसीसीआई लेडीज फोरम की चेयरपर्सन नीता बाजोरिया ने दिया । धन्यवाद ज्ञापन फोरम की सदस्य विशाखा चौधरी ने किया ।

कलकत्ता गर्ल्स कॉलेज में महिला दिवस पर आयोजित हुई ‘रोशनी’

अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस के आयोजन में सम्मानित की गयीं प्राक्तन प्राचार्या, जीबी सदस्य एवं शिक्षिकाएं
कोलकाता । कलकत्ता गर्ल्स कॉलेज में महिला दिवस पर कॉलेज की विकास यात्रा में योगदान देने वाली महिलाओं को सम्मानित किया गया । कॉलेज की भरोसा, विमेन सेल ने आईक्यूएसी के साथ गत शनिवार, 11 मार्च को महिला दिवस पर सम्मान समारोह ‘रोशनी’ आयोजित किया । इस समारोह में कलकत्ता गर्ल्स कॉलेज की पूर्व प्राचार्या डॉ. मीरा भौमिक (1982 – 1994), डॉ. अजिता आचार्य (1997 – 2003) सम्मानित की गयीं । सम्मानित होने वाली शिक्षिकाओं एवं जीबी सदस्यों में दीपा मुखोपाध्याय, जीबी सदस्य एवं उर्दू विभाग की शिक्षिका डॉ. यास्मीन अख्तर (1995 – 2021), पूर्व टीचर इन्चार्ज एवं अंग्रेजी विभाग की प्राध्यापिका सुनीपा दे (2003), डॉ. रेवा सरकार (बांग्ला विभाग, 1975 – 2002), उर्दू विभाग की सेवानिवृत्त प्राध्यापिका डॉ. उजरा राना उस्मानी शामिल थीं । इन सभी सम्मानित अतिथियों ने कॉलेज की विकास यात्रा एवं अपनी स्मृतियों को साझा किया और वर्तमान समय में हो रही कॉलेज की प्रगति को सराहा । कलकत्ता गर्ल्स कॉलेज की प्राचार्या डॉ. सत्या उपाध्याय ने कहा कि कोई भी संस्थान आमतौर पर सेवानिवृत्ति के बाद उनको भूल जाता है जिन्होंने संस्थान के विकास में उल्लेखनीय भूमिका निभाई । कॉलेज की स्थापना का यह 60वाँ वर्ष है और इसे देखते हुए यह सम्मान समारोह आयोजित किया गया । यह कार्यक्रम बहुत सफल रहा । सम्मान समारोह की शुरुआत संस्कृत स्वागत गीत से हुई । समारोह को सफल बनाने में आईक्यूएसी की संयोजक डॉ. सुपर्णा भट्टाचार्य, सीजीसी सहारा की संयोजक डॉ. संचिता दत्ता, कॉलेज की अल्यूमनी की संयोजक गुलशन खान समेत अन्य शिक्षक – शिक्षिकाओं एवं गैरशिक्षाकर्मियों का योगदान रहा ।

नेफ्रोकेयर इंडिया ने वर्ल्ड किडनी डे पर आयोजित की संगोष्ठी

कोलकाता । समाज में आम लोगों के अलावा अपने मरीजों के स्वास्थ्य की देखभाल करनेवाली देश के सबसे सम्मानित संस्थानों में से एक नेफ्रोकेयर इंडिया ने वर्ल्ड किडनी डे के मौके पर समाज में जागरूकता फैलाने के लिए एक वैज्ञानिक संगोष्ठी का आयोजन किया। रविवार को सॉल्टलेक के गोल्डेन ट्यूलिप होटल में आयोजित इस संगोष्ठी के जरिये नेफ्रोकेयर अपनी वर्षगांठ भी मना रहा है। इस संगोष्ठी में समाज को इस साइलेंट किलर बीमारी से बचाने एवं सुरक्षित रखने के लिए लगातार उनके बीच जाकर जागरुकता कार्यक्रम का आयोजन करना इसमें शामिल हैं। इस कार्यक्रम का सफल संचालन मैप5 इवेंट्स ने किया।
वर्ल्ड किडनी डे के मौके पर आयोजित इस कार्यक्रम में प्रमुख आतिथि के तौर पर डॉ. भरत वी शाह (एमबीबीएस, एमडी मेडिसिन, नेफ्रोलॉजिस्ट और रीनल विशेषज्ञ, मुंबई), डॉ. अमित गुप्ता (एमबीबीएस, एमडी मेडिसिन, नेफ्रोलॉजिस्ट और रीनल विशेषज्ञ, लखनऊ), डॉ. शौभिक सुरल (एमडी मेडिसिन, डीएम नेफ्रोलॉजी, डीएनबी नेफ्रोलॉजी, कोलकाता), डॉ. प्रतीम सेनगुप्ता (एमडी मेडिसिन, डीएम नेफ्रोलॉजी, नेफ्रोलॉजिस्ट और रीनल ट्रांसप्लांट फिजिशियन), ममता बिनानी (सीएस एवं डॉ. एमएसएमई डेवलपमेंट फोरम पश्चिम बंगाल चैप्टर की अध्यक्ष), सुश्री शिवांगी वर्मा (फिल्म व्यक्तित्व और सेलिब्रिटी, मुंबई), इमरान खान (फिल्म व्यक्तित्व और सेलिब्रिटी, मुंबई) के अलावा समाज की कई अन्य प्रतिष्ठित हस्तियां इसमें मौजूद थे।
मीडिया से बात करते हुए डॉ. प्रतीम सेनगुप्ता (नेफ्रोलॉजिस्ट एवं नेफ्रोकेयर के संस्थापक और निदेशक) ने कहा, हर इंसान के किडनी के स्वास्थ्य और इसकी देखभाल के बारे में लोगों के बीच जागरूकता का स्तर बनाना और लगातार इसे बढ़ाते रहना अत्यावश्यक है। किडनी के कार्य को मापने के लिए सीरम क्रिएटिनिन, खून में यूरिया नाइट्रोजन और ग्लोमेरुलर निस्पंदन दर इन महत्वपूर्ण परीक्षणों का सहारा लिया जा सकता हैं। नेफ्रोकेयर इंडिया प्राइवेट लिमिटेड विश्व स्तर पर सबसे गहन किडनी के रोगियों की देखभाल पर केंद्रित सबसे सम्मानित स्वास्थ्य देखभाल संस्थानों में से एक है। इसे दिसंबर 2021 के महीने में प्रख्यात और उल्लेखनीय नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. प्रतीम सेनगुप्ता ने स्थापित किया था। सभी डॉक्टर यहां भर्ती होनेवाले मरीजों की देखभाल करने वाले व्यक्ति को एक परिवार के सदस्य के रूप में मानते हैं।

मारवाड़ी संस्कृति मंच और जीतो की ओर से ‘होली महोत्सव 2023’

कोलकाता । ग्रेटर कोलकाता की बड़ी सामाजिक और सांस्कृतिक संस्था मारवाड़ी संस्कृति मंच और जैन इंटरनेशनल ट्रेड ऑर्गनाइजेशन (जीतो) की ओर से संयुक्त रुप से शनिवार को सॉल्टलेक के सेंट्रल पार्क मेला ग्राउंड (साल्टलेक) में पौराणिक उत्सव का आयोजन नए तरीके से किया। जिसमें समाज की विशिष्ठ हस्तियों में श्री सुजीत बोस (अग्निशमन राज्य मंत्री, पश्चिम बंगाल), श्री सब्यसाची दत्ता (विधाननगर नगर निगम के अध्यक्ष) और कई अन्य प्रतिष्ठित गणमान्य व्यक्ति मौजूद थे।
रंगों के उत्सव को लेकर आयोजित इस भव्य कार्यक्रम “होली महोत्सव 2023” का आनंद लिया। इस आयोजन में बावलिया ग्रुप ने धाप-धमाल की जबरदस्त प्रस्तुति दी। इस आयोजन में वृंदावन के प्रसिद्ध कलाकारों द्वारा महारास-फूलों की होली विशेष आकर्षण का केंद्र था। इस कार्यक्रम में ठंडाई और झरिया दाल पकोड़ी के साथ मुंह में पानी लाने वाले अन्य स्वादिष्ट व्यंजन ने रंगों के इस त्योहार को और खास बना दिया! इस रंगीन कार्यक्रम में 5000 से अधिक लोगों ने होली के रंग में डूबकर उत्सव का आनंद लिया।
मारवाड़ी संस्कृति मंच के अध्यक्ष निरंजन अग्रवाल ने कहा, हमारा मुख्य उद्देश्य होली के पारंपरिक स्वरूप को बरकरार रखते हुए, मौजूदा जमाने में आज के नये सोच के लोगों को इससे जोड़ना है। बावलिया समूह की ओर से धाप धमाल, महारास और फूलों की होली ने कोलकाता के संगीत प्रेमियों का भरपूर मनोरंजन किया। इस आयोजन में शामिल होनेवाला हर कोई इस साल मस्ती की विभिन्न परंपराओं के साथ होली के रंगों में सराबोर हो गया।
जेएटीएफ के अध्यक्ष विनोद दूगड़ ने कहा, राजस्थानी संस्कृति का संरक्षण और संवर्धन हमारी पहली प्राथमिकता है। राजस्थानी संस्कृति के संरक्षण और प्रचार-प्रसार के लिए इस मंच द्वारा जिस तरह के कार्यक्रमों को आगे बढ़ाया जा रहा है, वह सराहनीय और अनुकरणीय है, इसलिए हमेशा ही जीतो ऐसे आयोजनों का हिस्सा बनता रहता है।
मारवाड़ी संस्कृति मंच के अध्यक्ष ललित प्रह्लादका और सचिव श्री आशीष मित्तल ने कहा, होली न केवल रंगों का त्योहार है, बल्कि यह खूबसूरत गीतों और भावनाओं का भी त्योहार है। संस्कृति की विविधता को रेखांकित करते हुए होली राग-रंग-रास से सबको सराबोर रखने का संदेश देने वाला पर्व है, इसलिए मारवाड़ी संस्कृति मंच हर उम्र के लोगों की पसंद के मुताबिक मनोरंजक कार्यक्रमों को प्राथमिकता देता है।
जीतो कोलकाता चैप्टर के चेयरमैन भवेन कामदार एवं कोषाध्यक्ष सुमित कोठारी ने कहा, हम होली के आयोजन के लिए विशेष रूप से जैन युवाओं में दिख रहे उत्साह से काफी उत्साहित हैं। इस आयोजन में शामिल गीत-संगीत-नृत्य ही हर पीढ़ियों को एक दूसरे से जोड़ने के लिए एक सेतु का काम करेगा। हमारी सांस्कृतिक चेतना को नई पीढ़ी तक ले जाना हमारी जिम्मेदारी है, इसलिए इस मस्ती भरे उत्सव के लिए मारवाड़ी संस्कृति मंच और जीतो एक साथ मिलकर यह भव्य आयोजन कर रहे हैं।

एग्री रीच ऐप के एआई एमएल क्यूसी मॉड्यूल को एनएबीएल की मान्यता

कोलकाता । सोहन लाल कमोडिटी मैनेजमेंट (एसएलसीएम) के ग्राउंड ब्रेकिंग एआई एमएल क्यूसी मॉड्यूल को एनएबीएल की प्रतिष्ठित मान्यता प्राप्त हुई है। एआई एमएल क्यूसी एसएलसीएम के पेटेंट प्रोसेस मैनेजमेंट सिस्टम “एग्री रीच” ऐप के तहत आता है। इस ऐप के जरिये फसलों और कृषि जिंसों की जांच की जा सकती है और उसकी गुणवत्ता का पता लगाया जा सकता है। यह पहली बार है जब किसी मोबाइल ऐप को एनएबीएल सर्टिफिकेट मिला है। फसल कटाई के बाद कृषि जिंसों की भंडारण सुविधा उपलब्ध कराने में एसएलसीएम अग्रणी सेवा प्रदाता है।
कृषि क्षेत्र में हाल के वर्षों में हुई वैज्ञानिक प्रगति से एग्री रीच ऐप के जरिये किसान रूबरू हो सकते हैं। ग्रामीण इलाके के लोग इस ऐप का अधिकतम लाभ उठा रहे हैं। लॉन्च होने के बाद केवल दो महीनों में इसका उपयोग 17 राज्यों में 303 स्थानों पर 21.59 लाख टन फसलों का निरीक्षण करने के लिए किया गया है। कृषि उत्पादों की गुणवत्ता की जांच करने के लिए एआई एमएल क्यूसी ऐप का उपयोग करना फोटो खींचने जितना आसान है। ऐप के जरिये कृषि उत्पादों पर एक क्लिक करने, फिर उसे सबमिट करने से उस फोटो के आधार पर उसकी गुणवत्ता की पूरी रिपोर्ट ऐप पर दिखने लगती है। इसके आधार पर उपयोगकर्ता को पता चल जाता है कि फसल क्षतिग्रस्त है या सिकुड़ा हुआ या अपरिपक्व है। इसके अलावा उस जिंस की ऊंचाई, लंबाई, ग्रिड, रंग और पैटर्न जैसे अन्य भौतिक मापदंडों का फोटोग्राफिक सुबूत का विवरण उपयोगकर्ता को मिल जाता है। यह ऐप आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) और मशीन लर्निंग (एमएल) सहित अन्य तकनीकों के संयोजन का उपयोग करके यह विवरण पेश करता है।
एसएलसीएम के ग्रुप सीईओ संदीप सभरवाल ने एनएबीएल से मान्यता मिलने पर कहा, “हमारे पास एक दशक पहले वेयरहाउस मैनेजमेंट सिस्टम को ‘फिजिटलाइजिंग’ (फिजिकल+डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर) के लिए विजन था। पेशेवरों की एक टीम के साथ एसएलसीएम ने ‘एग्री रीच’ बनाया। यह ऐसा सिस्टम है जो बुनियादी ढांचे और फसलों के प्रभावी भंडारण समाधान को सक्षम बनाता है। हम भारतीय कृषि क्षेत्र की एकमात्र कंपनी हैं जिसने वेयरहाउसिंग क्षेत्र में एक प्रौद्योगिकी को पेटेंट कराया है। अब मुझे यह बताते हुए गर्व हो रहा है कि हमने अपने नेतृत्व की स्थिति की फिर से पुष्टि की है। फिर से इस क्षेत्र में पहली और एकमात्र कंपनी हैं जिसे एक ऐप के लिए प्रतिष्ठित एनएबीएल मान्यता प्राप्त हुई है। यह कृषि उद्योग में कृषि जिसों की गुणवत्ता को परखने के तरीके को बदल देगा।”