Friday, March 27, 2026
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हृदयपंथी बनकर सभी के हृदय तक पहुँचने का प्रयास करें – डॉ. प्रेमशंकर त्रिपाठी

श्रीमोहन तिवारी को शुभजिता सृजन प्रहरी सम्मान -2023
कोलकाता । शुभजिता प्रहरी सम्मान – 2023 का आयोजन गत 24 मार्च को महाबोधि सोसायटी सभागार में किया गया । शुभजिता वेब पत्रिका द्वारा आयोजित इस समारोह में वर्ष 2023 के लिए यह सम्मान सेठ सूरजमल जालान पुस्तकालय के पुस्तकाध्यक्ष श्रीमोहन तिवारी को प्रदान किया गया । सम्मान स्वरूप स्मृति चिह्न, अभिनंदन पत्र, शुभादि विचार पोस्टर, शॉल एवं माला पहनाकर उनको सम्मानित किया गया । समारोह की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार एवं श्री बड़ाबाजार कुमारसभा पुस्तकालय के पूर्व अध्यक्ष डॉ. प्रेमशंकर त्रिपाठी ने कहा कि चाहे किसी भी विचारधारा को मानने वाले हों, हृदयपंथी बनकर सभी के हृदय तक पहुँचने का प्रयास करें । आज पठनीयता एवं विश्वसनीयता का संकट है मगर आज भी समाज में कुछ व्यक्ति ऐसे हैं जिनकी सक्रियता हमें आश्वस्त करती है । यह किसी रचनाकार, कृति, संस्था का सम्मान नहीं है, यह उस व्यक्तित्व का सम्मान है जिन्होंने इन सभी चीजों को बनने, संवरने एवं सहेजने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी । यह एक परम्परा का सम्मान है । उन्होंने आशा व्यक्त की कि शुभ सृजन प्रकाशन ऐसा प्रकाशन समूह बनेगा जिससे संसाधनहीन युवा लेखकों को भटकना न पड़े ।
समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित शिक्षाविद् एवं सेठ सूरजमल जालान पुस्तकालय की मंत्री दुर्गा व्यास ने सम्मानित व्यक्तित्व श्रीमोहन तिवारी को मौन साधक की तरह पुस्तकों के संरक्षण में सक्रिय रहने वाला बताया । उनके अनुशासित व्यक्तित्व के निर्माण में श्रीराम तिवारी का महत्वपूर्ण योगदान है ।


कलकत्ता विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग की प्रोफेसर डॉ. राजश्री शुक्ला ने कहा कि पुस्तकालय मनुष्य के स्वाध्याय को प्रेरित करने वाला स्थान है । अगर हम हर दिन थोड़ा – थोड़ा पढ़ें तो सृजन का संसार आगे बढ़ेगा । स्कॉटिश चर्च कॉलेज की प्रोफेसर डॉ. गीता दूबे पुस्तकालय का पुस्तकाध्यक्ष सब विषयों का विशेषज्ञ होता है । किताबों को बचाने एवं संरक्षित करने की जरूरत है । प्रधान अतिथि उमेश चन्द्र कॉलेज के हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ. कमल कुमार ने आयोजन की प्रशंसा करते हुए पुस्तकालय संस्कृति के संरक्षण पर जोर दिया ।
शुभजिता सृजन प्रहरी सम्मान पाने वाले सेठ सूरजमल जालान पुस्तकालय के पुस्तकाध्यक्ष श्रीमोहन तिवारी ने सम्मान पाने पर आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वे अपने कार्य को और अधिक बेहतर बनाकर उसे विस्तार देने का प्रयास करेंगे ।
इस अवसर पर शुभ सृजन प्रकाशन के लोगो का अनावरण भी किया गया । विवेक तिवारी एवं शुभस्वप्ना मुखोपाध्याय ने काव्य पाठ किया । समारोह में स्वागत भाषण देते हुए शुभजिता की सम्पादक एवं शुभ सृजन नेटवर्क व शुभ सृजन प्रकाशन की प्रमुख सुषमा त्रिपाठी कनुप्रिया ने कहा कि शुभजिता प्रहरी सम्मान की परिकल्पना समाज को बेहतर बनाने में सक्रिय लोगों को सामने लाने के उद्देश्य से की गयी है । समाज में पुस्तक एवं पुस्तकालय संस्कृति का महत्व सामने रखने एवं इसके संरक्षण की भावना प्रथम शुभजिता सृजन प्रहरी सम्मान के चयन का आधार रही । शुभ सृजन प्रकाशन में भी युवाओं की कलम को धारधार बनाने की चेष्टा रहेगी । धन्यवाद ज्ञापन सुरेन्द्रनाथ इवनिंग कॉलेज की प्राध्यापिका दिव्या प्रसाद ने किया । समारोह का संचालन पूजा सिंह ने किया । समारोह को सफल बनाने में प्रीति साव, सपना खरवार एवं पीहू पापिया का विशेष योगदान रहा ।

भवानीपुर कॉलेज प्रांगण में ‘सरगम’

कोलकाता ।  भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज के बत्तीस शिक्षक और शिक्षिकाओं ने सरगम कार्यक्रम के अंतर्गत देश भक्ति गीत प्रतियोगिता में भाग लिया। अन्त्याक्षरी प्रतियोगिता में में साधारण, शब्द, गीत की पंक्तियाँ, धुन आदि राउंड दिए गए। आठ टीमें जिसमें आसाभरी, बिलावल, भैरव, भैरवी, काफी, कल्याण, खमाज, मारवा राग पर आधारित टीमें रहीं हैं। प्रत्येक टीम में चार शिक्षक और शिक्षिकाएंँ रहीं ।
सरगम अन्त्याक्षरी प्रतियोगिता भवानीपुर कॉलेज के पोलिटिकल साइंस विभाग की विभागाध्यक्ष अमला ढांढनिया द्वारा आयोजित की गई। इस अवसर पर कॉलेज के टीआईसी डॉ सुभब्रत गंगोपाध्याय ने सभी को संबोधित करते हुए अन्त्याक्षरी के इतिहास पर प्रकाश डाला। प्रिन्सिपल डॉ पिंकी साहा सरदार और देवाजानी गांगुली, डॉ तथागत सेन और एजूकेशन, हिंदी, बांग्ला, गुजराती, समाजशास्त्र, इतिहास, अंग्रेजी, गणित मॉसकम्युनिकेशन, खेल और गैर शैक्षणिक विभाग आदि आर्ट्स के विभिन्न विभागों के सभी विभागाध्यक्ष और सदस्य उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का प्रारंभ एजूकेशन विभागाध्यक्ष डॉ रेखा नारिवाल के देश भक्ति गीत ‘सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्तान हमारा’ से हुआ। प्रातःकालीन सत्र के शिक्षक प्रो नितिन चतुर्वेदी ने गिटार बजाया। बांग्ला और हिंदी के देशभक्ति गीतों को सभी प्रतिभागियों ने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया।
अन्त्याक्षरी प्रतियोगिता की शुरुआत हुई गीत आओ बच्चों तुम्हें दिखाएं झांकी हिन्दुस्तान की इस मिट्टी को तिलक करें यह धरती है बलिदान की के साथ। अन्त्याक्षरी प्रतियोगिता में राग मारवा टीम ने सबसे अधिक अंक प्राप्त किए। राग काफी टीम द्वितीय स्थान पर रही और खमाज तृतीय स्थान पर रही । कार्यक्रम का संचालन किया डॉ वसुंधरा मिश्र (हिंदी विभाग) ,प्रो तृषा चटर्जी (पोलिटिकल साइंस) , प्रो सोहिनी चट्टोपाध्याय (पोलिटिकल साइंस) और प्रो स्तुति चक्रवर्ती (समाजशास्त्र) ने। धन्यवाद ज्ञापन दिया अमला ढांढनिया ने। जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।

 एन एक्ट के विद्यार्थियों ने आयोजित की थियेटर कार्यशाला 

भवानीपुर कॉलेज के एन एक्ट कलेक्टिव ने गत 14 मार्च 2023 को प्लेसमेंट हॉल में कार्यशाला का आयोजन किया।कार्यशाला का संचालन किया पेशेवर नाट्यविद् अप्रतिम चटर्जी (वर्तमान में कलर्स बांग्ला पर फेरी सोम धारावाहिक में काम कर रहे हैं) और पलाश चतुर्वेदी। कार्यशाला के दौरान, प्रतिभागियों ने अभिनय, निर्देशन, रंगमंच, और बहुत कुछ सहित रंगमंच के विभिन्न पहलुओं को सिखने के अवसर का आनंद लिया। कार्यशाला की शुरुआत रिलैक्सेशन एक्सरसाइज से हुई, जिससे सभी को अपनी ऊर्जा को सही दिशा देने में मदद मिली। रंगमंच के बारे में एक संक्षिप्त परिचय श्री अप्रतिम चटर्जी द्वारा दिया गया, जिन्होंने एक मॉक सीन तैयार किया, जहां छात्रों ने ऑस्कर नामांकित व्यक्ति के रूप में अभिनय किया और अपने विजयी भाषण दिए। इसके बाद छात्रों को रिवर्स इंजीनियरिंग की जानकारी दी गई। छात्रों द्वारा अपनी ऊर्जा को बढ़ाने और अपनी मुखर क्षमता को बढ़ाने के लिए कुछ वार्म-अप अभ्यासों का अभ्यास किया गया। इन अभ्यासों ने विद्यार्थियों को रिवर्स इंजीनियरिंग की अवधारणा को समझने में मदद की।
छात्रों को समूहों में विभाजित किया गया और प्रत्येक समूह को एक दृश्य तैयार करने और एक तस्वीर के रूप में प्रस्तुत करने के लिए पांच मिनट का समय दिया गया। सभी छात्रों को एक स्थान पर रहते हुए अभिनय करने के लिए कहा गया और कुछ सेकंड के लिए उसी स्थिति में रखा गया। इस बीच, अन्य समूह अनुमान लगा रहे थे कि वे दर्शकों को किस चित्र का चित्रण कर रहे हैं। उसके बाद, जिस समूह ने दृश्य प्रस्तुत किया, उसके बाद वह बता दिया कि वे अपने कार्यों के माध्यम से क्या दिखाना चाहते हैं। अंत में, पटकथा लेखन, अभिनय और निर्देशन में रुचि रखने वाले छात्रों को ऐसे निपुण नाट्यशास्त्रियों के साथ बातचीत करके पहला अनुभव प्राप्त करने के बाद शॉर्टलिस्ट किया गया, जिन्होंने उनकी नाट्य सफलता का मार्ग प्रशस्त किया। रचनात्मकता, प्रयोग, शारीरिक प्रशिक्षण, टीम वर्क और थिएटर की मूल बातें समझते हुए आत्म-खोज के माध्यम से संपूर्ण उत्पादन के निर्माण का पता लगाने के लिए एनेक्ट कलेक्टिव द्वारा की गई यह एक महत्वपूर्ण पहल रही।वर्कशॉप की रिपोर्ट बीए सेमेस्टर कशिश शॉ ने दी और जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।

भवानीपुर कॉलेज में खो खो प्रतियोगिता 

भवानीपुर कॉलेज के विद्यार्थियों ने खो-खो प्रतियोगिता का आयोजन गत 21 व  22 फरवरी 2023 को कॉलेज टर्फ में सुबह किया गया। उद्घाटन समारोह के लिए छात्र मामलों के डीन प्रो दिलीप शाह ने एक संक्षिप्त भाषण दिया, जहां उन्होंने प्रतिभागियों को इस प्रतियोगिता में भाग लेने और इस खेल को खेलने की परंपरा को जारी रखने के लिए धन्यवाद दिया।विशेषज्ञों का मानना ​​है कि खो खो की उत्पत्ति भारत के महाराष्ट्र क्षेत्र में हुई थी और प्राचीन काल में इसे रथों पर बजाया जाता था और इसे राठेरा कहा जाता था, राथेरा एक रथ का हिंदी अनुवाद है।
बालिका वर्ग के लिए, कुल 4 टीमें थीं, और प्रत्येक टीम में एक स्थानापन्न सहित 9 खिलाड़ी शामिल थे। किसी अन्य लीग सिमुलेशन की तरह सभी टीमें एक-दूसरे के खिलाफ गईं। प्रतिभागियों के उत्साह को देख दर्शक पूरी तरह से झूम उठे। खो खो जैसे खेल में टीमवर्क जरूरी है क्योंकि तभी वे हार को मजबूती से गले लगा सकते हैं और चैंपियनशिप जीत सकते हैं। सेमीफाइनल नाइट्स और थॉमसिना के बीच था, जिसमें थॉमसिना विजयी हुई। फिर फाइनल थॉमसिना और वॉरियर्स के बीच हुआ। थॉमासिना हमलावर पक्ष में थी और वे केवल 8 अंक ही ले पाए जबकि वॉरियर्स ने हमला किया और केवल 3 मिनट में 9 लोगों को ले कर खेल समाप्त कर दिया। यह 20 मिनट का खेल था, प्रति आधा 10 मिनट।
चैंपियनशिप एक पूर्ण जीत थी और प्रो दिलीप शाह को छात्रों के बीच खेल भावना को प्रोत्साहित करने के उनके निरंतर प्रयासों के लिए धन्यवाद दिया गया।इस कार्यक्रम की जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने और रिपोर्ट सहयोगी रहे अक्षत कोठारी।

इंट्रा बास्केटबाल टूर्नामेंट 2023 सम्पन्न

भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज ने गत 23 फरवरी 2023 को  कॉलेज टर्फ में इंट्रा कॉलेज बास्केटबॉल टूर्नामेंट का आयोजन किया। इस लीग में 18 टीमों ने भाग लिया। 1891 में आविष्कृत बास्केटबॉल वर्तमान समय में सबसे अधिक खेले जाने वाले खेलों में से एक बन गया है। आज यह अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी खेला जा रहा है क्योंकि यह एनबीए जैसी विभिन्न लीगों का हिस्सा बन गया है।

लीग में सभी में 9 मैच थे और फाइनल और सेमीफाइनल तक गए। जो टीम अधिकांश रैंक जीतने में सफल रही, वह ‘स्ट्रेंजर बॉयज़’ थी और उसे टूर्नामेंट का विजेता घोषित किया गया। उन्होंने एथलेटिक प्रतियोगिता में सेमी-फाइनल में ‘एली ऑप्स’ टीम के खिलाफ मुकाबला किया। लीग के लड़कियों के वर्ग में, सेमीफाइनल ‘कॉन्करर्स’ और ‘नेट रिपर्स’ टीमों के बीच खेला गया, जिसमें से ‘कॉन्करर्स’ ने मैच जीता।

इन सभी मैचों को देखना एक रोमांचकारी अनुभव था, क्योंकि कुछ मैचों में गति में लगातार परिवर्तन हुआ, जिसने दर्शकों को बांधे रखा। प्रीमियर लीग का मुख्य आकर्षण प्रत्येक टीम के कप्तानों और उनके प्रतिभागियों द्वारा प्रदर्शित टीम भावना की उच्च भावना थी।

टूर्नामेंट का श्रेय छात्र मामलों के डीन प्रोफेसर दिलीप शाह को जाता है, जिनकी प्रेरणा से एथलेटिक्स में छात्रों को शामिल किया गया।डॉ वसुंधरा मिश्र ने बताया कि टूर्नामेंट को सफल बनाने में मदद करने वाले छात्र स्वयंसेवक थे – अमन दुबे, समर्थ श्रीवास्तव, आभास राजवंश, पवनजोत सिंह, हर्ष पटेल, उत्कर्ष आनंद, झलक शाह, मेघाली सेनगुप्ता, अभिषेक शाह और आयुष तिवारी।

 विद्यार्थियों ने किया रेड बुल डूडल कला का प्रदर्शन

भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज के विद्यार्थियों ने रेड बुल डूडल आर्ट का प्रदर्शन किया जो रेड बुल की एक नयी पहल थी। जहां विद्यार्थियों को कला और तकनीक से युक्त रचनात्मक डूडलर्स के लिए नए अवसर मिले। 20 फरवरी 2023 को भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज में 50 से अधिक छात्रों ने कल्पनाशील डूडल के माध्यम से अपने दिमाग का इस्तेमाल कर कल्पनाओं की उड़ान भर नए नए रचनात्मक कार्यों में भाग लिया। प्रतियोगिता के लिए उन्हें डूडल आर्ट पेपर दिए गए, जिस पर उन्होंने अपने विचारों द्वारा डूडल बनाया और अपना आवेदन ऑनलाइन जमा किया। कॉलेज के दो बेहद प्रतिभाशाली डूडल कलाकारों, दिशानु साहा और स्वागतो मुखर्जी ने व्हाइटबोर्ड पर लुभावने डूडल बनाए। इस आयोजन की विशेषता यह थी कि इस रेड बुल डूडल आर्ट एक्टिवेशन में भाग लेने वाले 60 देशों में से प्रत्येक के एक विजेता को मई के महीने में एम्स्टर्डम में विश्व के अंतिम दिन ब्लॉकचेन पर अपना डूडल लाने के लिए आमंत्रित किया जाएगा। डॉ वसुंधरा मिश्र ने बताया कि यह कार्यक्रम नेहल मेहता द्वारा आयोजित किया गया।

 

” ‘साहित्यिकी’ द्वारा होली प्रीति मिलन समारोह “

कोलकाता । ‘साहित्यिकी’ की ओर से होली प्रीति मिलन संगोष्ठी ‘ जनसंसार ‘ के सभाकक्ष में आयोजित की गई । कार्यक्रम का आरंभ मंजु रानी गुप्ता के स्वागत संभाषण से हुआ। उन्होंने कहा कि होली की धूम समाप्त हो गई है किन्तु फागुनी बयार अभी भी हृदय के तारों को झंकृत कर रही है।
कार्यक्रम का संचालन संस्था की वरिष्ठ सदस्या दुर्गा व्यास ने कवि पद्माकर की चंद पंक्तियों से किया। उन्होंने अपने वक्तव्य में स्पष्ट किया कि हमारी लोक-संस्कृति त्योहारों से ही जीवित है। त्योहार सौहार्द्र ,प्रेम और एकता को बढ़ावा देते हैं । रेखा ड्रोलिया ने रचना पाठ करते हुए राधा-कृष्ण की प्रेमाभिव्यक्ति को शब्द दिया। वसुंधरा मिश्रा ने ‘होली आई’ गीत में कान्हा-राधा के प्रेम को मधुर कंठ से गीतबद्ध किया। श्रद्धा टिबड़ेवाल ने काव्य पाठ किया और सविता पोद्दार ने ‘ बसंत ओ बसंत घर मेरे आना ‘ काव्य पाठ कर बसंत की प्रतीक्षा की। गीता दूबे ने अपने वक्तव्य में कहा कि होली मन की अर्गलाओं को खोलने का त्योहार है।, सामूहिकता का उत्सव है। उन्होंने अवधी लोकगीत का मधुर गायन किया। सरिता बैंगानी ने राधा-कृष्ण की प्यार- मनुहार भरी होली पर गीत प्रस्तुत किया । मंजु गुटगुटिया ने राजस्थानी लोकगीत गाया तथा विद्या भंडारी ने लज्जाशील स्त्री की प्रेमाभिव्यक्ति, लोकगीत के माध्यम से की । मंजु रानी गुप्ता ने स्वरचित रचना ‘फागुनी बयार’ द्वारा प्रकृति सौंन्दर्य को जीवंत कर दिया। मीतू कनोड़िया ने अपने काव्य पाठ में प्रेम रंग को सबसे मधुर बताया।
जहाँ रजनी शर्मा ने राधा-रुक्मिणी के साथ कृष्ण की प्रेमरस पगी होली का चित्रण किया, वहीं संगीता चौधरी ने स्वप्न में श्याम संग होली खेलने का दृश्य, मधुर गीत में प्रस्तुत किया । चंदा सिंह ने हनुमान संग श्री राम की होली खेलने का सचित्र काव्य पाठ प्रस्तुत किया।
रेणु गौरीसरिया ने केदारनाथ अग्रवाल की सुप्रसिद्ध रचना ‘बसंती हवा’ का तथा सुषमा हंस ने कविता तिवारी की रचना ‘आज़ादी का क्या मतलब है ‘ काव्य- पाठ किया ।
विद्या भंडारी ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए अपने वक्तव्य में कहा कि पर्व हमारी सांस्कृतिक विरासत हैं और ये प्रेम व एकता का प्रसार करते हैं । हास-परिहास, लोकगीतों व काव्यपाठ जैसे विविध रंगों से कार्यक्रम सफल व सार्थक रहा। कार्यक्रम के आरंभ में पद्मश्री से सम्मानित डॉ कृष्ण बिहारी मिश्र जी के निधन पर एक मिनट का मौन रखा गया।

‘पुस्तक संवाद’ श्रृंखला में छायावाद पर चर्चा

कोलकाता। भारतीय भाषा परिषद की ओर से ‘पुस्तक संवाद’ श्रृंखला का आयोजन परिषद के पुस्तकालय में किया गया। इस अवसर पर पुस्तकालय के पाठकों, विभिन्न विश्वविद्यालयों तथा कॉलेजों के विद्यार्थियों और युवाओं के साथ ‘प्रसाद का आंसू और छायावाद’ विषय पर मूर्धन्य आलोचक प्रो. शम्भुनाथ का संवाद हुआ। प्रो. शम्भुनाथ ने कहा कि छायावाद में अनुभूति की प्रधानता है। अनुभूति की प्रधानता का अर्थ है व्यक्ति की प्रधानता । छायावाद के पहले इंडिविजुअलिटी नहीं मिली थी मैथिलीशरण गुप्त ” मैं ” नहीं लिखी जाती थी । छायावाद से मैं इंडिविजुअलिटी आई। इसमें वैयक्तिकता के साथ राष्ट्रीय जागरण और विश्व बोध की प्रधानता है। विमला पोद्दार ने कहा कि हम चाहते हैं लोग पुस्तकालय में आए। इस संस्था से जुड़ने का लाभ मिले। इससे साहित्य का सम्मान बढ़ता है। इस अवसर पर मुस्कान गिरि ने सरस्वती वंदना की प्रस्तुति दी। संचालन आदित्य गिरि ने किया । धन्यवाद ज्ञापन  डॉ संजय जायसवाल ने कहा कि ‘आँसू’ में कवि ने अपनी वेदना को करुणा से जोड़ते हुए सार्वभौम सत्य और संवेदना का विषय बनाया है। प्रसाद मन की उदात्तता और व्यापकत्व में जगत का आनंद देखते हैं। कार्यक्रम में डॉ अवधेश प्रसाद सिंह, डॉ शुभ्रा उपाध्याय, सुरेश शॉ,डॉ पायल,प्रो.नवनीता दास सहित भारी संख्या में विद्यार्थी और युवा उपस्थित थे। इस अवसर पर परिषद की ओर से डॉ कुसुम खेमानी ने ओडिया साहित्यकार मिहिर साहू को सम्मानित किया।

‘रूस यूक्रेन युद्व 2022’ का लोकार्पण एवं मिलनोत्सव सम्पन्न

कोलकाता। सांस्कृतिक पुनर्निर्माण मिशन की ओर से पुस्तक लोकार्पण एवं मिलनोत्सव कार्यक्रम का आयोजन किया गया।इस अवसर पर अवधेश प्रसाद सिंह की पुस्तक ‘रूस यूक्रेन युद्व 2022’ का लोकार्पण किया गया।इस अवसर पर फिल्म समीक्षक मृत्युंजय जी ने कहा कि कोई लेखक युद्ध के विषय मे लिखता है चाहे कविता हो कहानी , वह शांति की मांग करता है। प्रो. मंजुरानी सिंह ने कहा कि युद्ध समाप्त नहीं हुआ , लेकिन हम युद्ध नहीं शांति चाहते हैं, साहित्य के माध्यम से। जो युद्घ कर रहा है वो नहीं जानता कितना अमानवीय कार्य कर रहा है। जीवन और भविष्य दाव पर लग जाता है। युद्ध में शहादत स्त्रियों और बच्चों की होती है। इस पुस्तक के लेखक अवधेश सिंह ने कहा कि इसलिए भी यह पठनीय है कि युद्ध के माध्यम से रूस और यूक्रेन को समझाया है।

प्रो.शम्भुनाथ ने कहा कि जब समाज में हार्मोनी टूट जाती है तब युद्ध होता है। आलोचक प्रियंकर पालीवाल ने कहा कि युद्ध शुरू करना आसान है समाप्त करना मुश्किल है।युद्ध शुरू करने वाला भी नहीं जानता यह कब और कैसे समाप्त होगा। इस अवसर पर डॉ अजय राय ने कबीर, निराला, प्रसाद आदि की कविताओं पर संगीतबद्ध प्रस्तुति की। इसके अलावा पंकज सिंह, राज घोष, प्रिया श्रीवास्तव और आदित्य तिवारी ने कविता पाठ और डॉ रमाशंकर सिंह, डॉ शिप्रा मिश्रा,डॉ राजेश मिश्र, कालीचरण तिवारी, सेराज खान बातिश, मधु सिंह, सूर्यदेव रॉय और राजेश सिंह ने लोक गीत प्रस्तुत किया और रेशमी सेन शर्मा, काजल और सपना खरवार ने नृत्य प्रस्तुत किया तथा वाद्ययंत्र पर दिव्यंदु भट्टाचार्य और अभिषेक यादव ने साथ दिया। फोटोग्राफी प्रतियोगिता में शिखर सम्मान – नेहा ठाकुर, कलकत्ता विश्वविद्यालय, प्रथम स्थान- दीपक चौधरी, हावड़ा विश्वविद्यालय, द्वितीय स्थान- संयुक्त रूप से ऋतिक रोशन, दिल्ली विश्वविद्यालय और रेशमी रॉय, बेथून कॉलेज, तृतीय पुरस्कार- चंदन रे, प्रथम विशेष- अकांक्षा साव, द्वितीय विशेष- अंजलि शर्मा को मिला। धन्यवाद ज्ञापन रामनिवास द्विवेदी ने दिया।

खुदीराम बोस सेंट्रल कॉलेज में विशाखा गाइड लाइन महिला जागरूकता सेमिनार

कोलकाता। कोलकाता के खुदीराम बोस सेंट्रल कॉलेज के आईक्यूएसी और आईसीसी की ओर से ‘महिला संघर्षों की परिणति और विशाखा गाइड लाइन’ विषय पर एक सेमिनार का आयोजन किया गया। इस मौके पर कॉलेज के प्राचार्य डॉ सुबीर कुमार दत्ता ने कहा कि महिलाओं को खुद के प्रति जागरूक होना चाहिए ताकि हमारे साथ क्या गलत हो रहा है हमें इसकी जानकारी होनी चाहिए। हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ शुभ्रा उपाध्याय ने कहा कि महिलाओं के साथ घर से ही भेदभाव शुरू हो जाता है। हर परिवार को महिलाओं के प्रति संवेदनशील होना चाहिए और किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं करना चाहिए। मुख्य वक्ता के तौर पर उपस्थित महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय की प्रो. चित्रा माली ने अपने वक्तव्य में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महिलाओं के संघर्षों का उल्लेख करते हुए विशाखा गाइड लाइन के प्रमुख बिंदुओं को विस्तार से व्याख्यायित किया। उन्होंने वर्तमान की तमाम घटनाओं का हवाला देते हुए महिलाओं के प्रति पारिवारिक,सामाजिक और सांस्कृतिक स्तर पर संवेदनशील होने पर जोर दिया। हिंदी विभाग की छात्रा कनिष्का घोष ने स्रियां कविता की आवृत्ति की और जनातुल फिरदौस ने एक सुंदर गीत प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का सफल संचालन करते हुए प्रो. चंद्रानी दत्ता ने कहा कि हम सारी महिलाओं को एकजुट होकर अपने खिलाफ हो रहे किसी भी प्रकार के अत्याचार के लिए आवाज उठाना चाहिए। धन्यवाद ज्ञापन देते हुए प्रो. अनामिका नंदी ने कहा कि सभी लड़कियों और महिलाओं को अपने खिलाफ हो रहे शारीरिक शोषण या किसी भी प्रकार के शोषण के प्रति आवाज उठानी चाहिए वो भी बिना किसी डर के। कार्यक्रम का संयोजन मधु सिंह और राहुल गौड़ ने किया।

जानिए भारतीय नववर्ष का महत्व

आज से 2074 वर्ष पूर्व भारत में एक बहुत ही पवित्र राजा हुए थे जिनका नाम महाराजा विक्रम था, महाराजा विक्रम के नाम पर ही भारतीय वर्ष का नाम विक्रम वर्ष रखा गया था। यह वर्ष विक्रम वर्ष 2074 है। महाराजा विक्रम से पूर्व वर्ष भगवान कृष्ण के नाम पर था; इस प्रकार से यह 5,118 वाँ वर्ष है।
भारत के नव वर्ष की प्रणाली
नव वर्ष की प्रणाली ब्रह्माण्ड पर आधारित होती है, यह तब शुरु होता है जब सूर्य या चंद्रमा मेष के पहले बिंदु में प्रवेश करते हैं। आज, चंद्रमा मेष राशि में प्रवेश कर चुका है और दिन बाद अर्थात 13 अप्रैल को सूरज मेष राशि के पहले बिंदु में प्रवेश करेगा, जिस दिन हम बैसाखी मनाते हैं, यह भी एक नए साल का दिन है।
इस प्रकार में भारत के आधे भाग में नव वर्ष चंद्रमा के आधार पर मनाया जाता है और आधे भाग में सूर्य के आधार परमनाया जाता है, इनमें कोई समानता नहीं है क्योंकि प्रत्येक व्यक्ति अपनेअनुसार नव वर्ष मनाने के लिए स्वतंत्र है।पंजाब में बैसाखी, बंगाल में पोयला बैशाख) , उड़ीसा में पण संक्रांति, तमिलनाडु में पुथेंदू, असम में बिहू और केरल राज्यों में नव वर्ष सौर कैलेण्डर के अनुसार मनाया जाता है । इस दिन बैसाखी होती है। कर्नाटक में युगादि, महाराष्ट्र में गुड़ीपड़वा, आंध्र प्रदेश में उगादी और कई अन्य भारतीय राज्यों में आज के दिन उत्सव मनाते हैं, अर्थात् चंद्र कैलेंडर के अनुसार। दी आर्ट ऑफ़ लिविंग में, हम हर दिन उत्सव मनाते हैं।
प्राचीन काल में एक समय था जब पूरी दुनिया में हर व्यक्ति एक ही कैलेंडर मानता था; चंद्र कैलेंडर, आज भी, तुर्की और ईरान में, लोग चंद्र कैलेंडर ही मानते हैं; इसके अनुसार मार्च से नए वर्ष की शुरुआत होती है परंतु लंदन के राजा किंग जॉर्ज, जनवरी से नव वर्ष शुरू करना चाहते थे क्योंकि वह उस माह में पैदा हुए थे। यह उनका नव वर्ष था, इसमें कोई संदेह नहीं है, लेकिन उसने पूरे ब्रिटिश साम्राज्य पर यह नव वर्ष लागू कर दिया ! यह घटना आठवीं या नौवीं शताब्दी में किसी समय हुई थी, लेकिन लोगों ने अप्रैल में नए साल का जश्न मनाना बंद नहीं किया तो किंग जॉर्ज ने इसे अप्रैल फुल डे कहा। उन्होंने कहा कि अप्रैल में नव वर्ष मनाने वाले लोग मूर्ख होते हैं, और इसी तरह अप्रैल 1 को फूल्स डे के रूप में जाना जाने लगा।
नीम के पत्ते और गुड़ का महत्व
नए वर्ष के दिन, परंपरा के अनुसार थोड़ी नीम के पत्ते, जो बहुत कड़वे होते हैं और गुड़, जो मीठा है, को मिलाकर खाया जाता है। इसका अर्थ यह है कि जीवन कड़वा और मीठा दोनों प्रकार का है और आपको दोनों को ही स्वीकार करना होगा।
समय आपको कड़वे और मीठे दोनों प्रकार के अनुभव देता है। यह मत सोचो कि केवल दोस्त ही आपके जीवन में मिठास लाते हैं, दोस्त कड़वाहट भी ला सकते हैं। और यह भी मत सोचो कि दुश्मन हमेशा कड़वाहट लाते हैं, दुश्मन भी कुछ मिठास ला सकते हैं इसलिए, जीवन सभी विपरीत तथ्यों का मिश्रण है; जैसे यह यहां है, ठंड है और फिर भी अभी तक थोड़ी गर्मी है, है ना ? यहाँ चारों ओर बर्फ है, फिर भी यह सुखद है नव वर्ष ऐसे ही शुरू होता है।
क्या आप जानते हैं कि सभी महीनों और दिनों के नाम संस्कृत में हैं?
सप्ताह के दिनों को सात ग्रहों के नाम पर रखा गया था। जैसे कि आप कहते हैं
रविवार, तो यह सूर्य का दिन है सोमवार चंद्रमा का दिन है।
मंगलवार मंगल है,
बुधवार बुध है,
गुरूवार बृहस्पति होता है,
शुक्रवार शुक्र है और
शनिवार को शनि का दिन है।
ये सात ग्रह हैं जिनके नाम पर सप्ताह के दिनों के नाम दिए गए थे। दरअसल, यह सब संस्कृत में है। प्राचीन कैलेंडर, प्राचीन भारत में संस्कृत में बनाया गया था; वहां से यह कैलेण्डर मिस्र (Egypt) को गया।
बारह महीनों के नाम बारह राशि चिन्हों के नाम पर रखे गए थे, अर्थात् प्रत्येक नक्षत्र में सूर्य की स्थिति (मेष, वृषभ, मिथुन, कर्क, सिंह, कन्या; आदि इसी प्रकार से, महीनों के नामों की व्यवस्था की गई थी)। इस प्रकार, महीनों के नाम संस्कृत के शब्दों के अनुरूप हैं।
दशअंबर दिसंबर है; दश का अर्थ संस्कृत में दस होता है, अंबर का अर्थ है आकाश, दशंबर का तात्पर्य दसवें आकाश से है। नवअंबर नवंबर है, जिसका तात्पर्य है नौंवा आसमान। अक्तूबर अष्टमबर है, तात्पर्य आठवें आसमान से है। सितंबर का तात्पर्य सातवें आसमान से है। देखिए, यदि सिर्फ एक ही शब्द ऐसा हो तो इसे संयोग माना जा सकता है परंतु यदि सभी नाम इसी प्रकार से मिलते हैं तो यह संयोगवश नहीं हो सकता।
शष्ठ का अर्थ होता है छठवाँ, अर्थात्, अगस्त यह आठवाँ महीना नहीं है, अगस्त छठा महीना है (यदि आप मार्च से शुरू करते हैं)। यदि आप फरवरी में आते हैं, तो हम अक्सर कहते हैं कि साल का अंत खत्म होता है! फरवरी माह का आखिरी महीना है, बारहवाँ महीना। मार्च नए साल का पहला महीना है।
चंद्र नववर्ष और चंद्र कैलेंडर क्या है ?
आमतौर पर, चंद्र नववर्ष 20 मार्च को आता है, ऐसा तब होता है जब नया वर्ष शुरू होता है। हालाँकि यह सब एक ब्रिटिश राजा द्वारा विकृत कर दिया गया था, जिसने अमेरिका और कनाडा सहित लगभग आधा दुनिया पर कब्जा कर लिया और प्रभावित किया था। इसलिए, किंग जॉर्ज ने अपने जन्मदिन के अनुसार नया साल बदल दिया। यह हकीकत है। दुर्भाग्य से, भारत में, बहुत से लोग महीनों के पारंपरिक नाम व अर्थ भूल गए हैं। चंद्र कैलेंडर के अनुसार महीनों के नाम हैं: चैत्र, वैशाख, ज्येष्ठ, अषाढ, श्रावण, भाद्रपद, आश्विन, कार्तिक, मार्गशीर्ष, पौष, माघ और फाल्गुन। चंद्र कैलेंडर में हर महीने का नाम ब्रह्मांड में हमारी आकाश गंगा के 27 सितारों से मेल खाता है। दो और एक चौथाई सितारे से मिलकर एक नक्षत्र बनता है। इस संख्या को 12 से गुणा करने पर यह 27 सितारों के बराबर आती है।
जब पूर्णिमा का चांद स्पष्ट रूप से सितारों में से किसी एक सितारे के पास आ जाता है, तो उस महीने को उस तारे के नाम से जाना जाता है उदाहरण के लिए, चित्रा के नाम से एक तारा है। जब पूर्णिमा का चांद चित्रा के पास आता है, तो यह चंद्र कैलेंडर का पहला महीना है, अर्थात चैत्र अगला महीना वैशाख का होगा। आश्चर्यजनक है, कि चंद्रमा किस सितारे के नीचे आ रहा है यह देखने के लिए कितनी सटीक गणना की जाती थी, और महीनों की गणना भी कैसे की जाती है।
चंद्र कैलेंडर में, एक महीने में केवल 27 दिन होते हैं। इसलिए, हर 4 सालों में, एक लौंद का महीना होता है, अर्थात् एक अतिरिक्त महीना। जैसे लौंद वर्ष में, आपको फरवरी में 29 दिन मिलते हैं; चंद्र कैलेंडर में, आपको लौंद का एक महीना मिलता है, अर्थात् एक अतिरिक्त महीना।
सौर कैलेंडर में, अंग्रेज़ी कैलेंडर की तरह ही केवल एक दिन अतिरिक्त मिलता है। कभी-कभी, बैसाखी 13 अप्रैल को आती है, और कभी 14 अप्रैल को है। चार वर्षों में एक बार एक दिन का अंतर आता है।
(साभार – आर्ट ऑफ लीविंग)

नवरात्रि विशेष – यह है माता दुर्गा के नौ रूपों का रहस्य

चैत्र और शारदीय नवरात्रि में माता दुर्गा के नौ रूपों की पूजा होती है। इन नौ दिनों में शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चन्द्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री की पूजा होती है। आओ जानते हैं माता के 9 रूपों का क्या है रहस्य।
1. शैलपुत्री- शैलपुत्री का अर्थ पर्वत राज हिमालय की पुत्री। यह माता का प्रथम अवतार था जो सती के रूप में हुआ था।
2. ब्रह्मचारिणी- ब्रह्मचारिणी अर्थात् जब उन्होंने तपश्चर्या द्वारा शिव को पाया था।
3. चंद्रघंटा- चंद्रघंटा अर्थात् जिनके मस्तक पर चंद्र के आकार का तिलक है।
4. कूष्मांडा- ब्रह्मांड को उत्पन्न करने की शक्ति प्राप्त करने के बाद उन्हें कूष्मांड कहा जाने लगा। उदर से अंड तक वह अपने भीतर ब्रह्मांड को समेटे हुए है, इसीलिए कूष्‍मांडा कहलाती है।
5. स्कंदमाता- उनके पुत्र कार्तिकेय का नाम स्कंद भी है इसीलिए वह स्कंद की माता कहलाती है।
6. कात्यायनी- महर्षि कात्यायन की तपस्या से प्रसन्न होकर उन्होंने उनके यहां पुत्री रूप में जन्म लिया था, इसीलिए वे कात्यायनी कहलाती है।
7. कालरात्रि- मां पार्वती काल अर्थात् हर तरह के संकट का नाश करने वाली है इसीलिए कालरात्रि कहलाती है।
8. महागौरी- माता का रंग पूर्णत: गौर अर्थात् गौरा है इसीलिए वे महागौरी कहलाती है।
9. सिद्धिदात्री- जो भक्त पूर्णत: उन्हीं के प्रति समर्पित रहता है, उसे वह हर प्रकार की सिद्धि दे देती है। इसीलिए उन्हें सिद्धिदात्री कहा जाता है।
(साभार – वेबदुनिया)

महिला दिवस पर शीप्रेन्योर ने आयोजित की संगोष्ठी

कोलकाता ।  लायंस क्लब्स इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 322बी1 ने भारतीय संग्रहालय में संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से “शेप्रेन्यूर 2023” नामक एक महिला संगोष्ठी का आयोजन किया। यह एक पैनल चर्चा थी जिसका विषय था बिल्डिंग बैक: बेटर, बिगर एंड ब्राइटर, जहां प्रमुख मुद्दों को संबोधित किया गया था – पैनलिस्ट के अलग-अलग दृष्टिकोण के बारे में – महिलाओं के जीवन और उनके वास्तविक जीवन के अनुभव, चुनौतियों के बावजूद विकसित होना और वापस आना, दबावों को संभालना और व्यापक बनाना, वे कैसे आसपास के लोगों को प्रेरित और प्रभावित कर सकते हैं और एक सकारात्मक प्रभाव पैदा कर सकते हैं।
संस्था की प्रथम महिला ने एवं मुख्य अतिथि लक्ष्मी आनंद बोस ने कार्यक्रम का उद्घाटन किया। इस वर्ष परिचर्चा में वुडलैंड्स हॉस्पिटल की डॉ. रूपाली बासु, वेस्ट बंगाल स्टेट यूनिवर्सिटी की वीसी महुआ दास, अधिवक्ता राम्या हरिहरन, उद्यमी चैताली दास एवं योजना एवं कल्याण विभाग की डीआईजी कृष्णकली लाहिड़ी ने भाग लिया।  इस कार्यक्रम का संचालन सेंट जेवियर्स की डॉ. सुजाता अग्रवाल और सुश्री जोएता बसु ने किया।
कार्यक्रम का संचालन जिलाधिकारी लायन मनोज अग्रवाल के नेतृत्व में किया गया। डीसी महिला अधिकारिता लायन सुमन अग्रवाल द्वारा इसकी खूबसूरती से परिकल्पना की गई थी, जिन्होंने घटना के विवरण के प्रबंधन का भार उठाया था। सीएससीटी लायन दक्ष शाह, लायन रुद्रनाथ चटर्जी और डीसीटी लायन प्रवीण छारिया ने इस आयोजन को सफल बनाने में बहुत मदद की। हर साल मार्च में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर आयोजित होने वाले इस इवेंट शिप्रेन्योर की यह 7वीं सीरीज है। पूर्व आयोजनों में उनके पास महिला सशक्तिकरण और उनकी यात्रा पर आधारित विभिन्न विषयों पर चर्चा में उल्लेखनीय और सेलिब्रिटी महिला पैनलिस्ट और वक्ता रहे है।
यह शहर में सबसे अधिक मांग वाले और प्रतिष्ठित आयोजनों में से एक है क्योंकि यह सभी स्तरों की महिलाओं को नेतृत्व और प्रेरणा देने के लिए प्रेरित करता है। प्रत्येक पैनलिस्ट द्वारा साझा की गई यात्रा वास्तविक और अनूठी है जो दर्शकों को मंत्रमुग्ध रखती है और उन्हें अपनी व्यक्तिगत अंतर्दृष्टि और कौशल से जोड़ती है।

बीआईबीएस ने आयोजित की नवाचार और परिवर्तन पर परिचर्चा

कोलकाता । बीआईबीएस  (बंगाल इंस्टीट्यूट ऑफ बिजनेस स्टडीज) ने सप्लाई चैन में इनोवेशन और परिवर्तन पर एक पैनल चर्चा का आयोजन किया था। इस आयोजन के पीछे का विचार अपने छात्रों को सप्लाई चैन के महत्वपूर्ण घटकों से परिचित कराना था, विशेष रूप से आज के तेजी से बदलते व्यावसायिक परिदृश्य में। यह उन्हें प्रमुख उद्योग विशेषज्ञों से एक अंतर्दृष्टि प्रदान करेगा जो दिल्लीवरी, वॉलमार्ट फ्लिपकार्ट, रिलायंस, डीएचएल, लैंडमार्क समूह जैसे उच्चय ब्रांडों से जुड़े हुए हैं, क्योंकि वे अपने अनुभव साझा करते हैं और उन छात्रों के साथ बातचीत करते हैं जो इस कार्यक्रम का हिस्सा होंगे। संस्थान वास्तव में युवाओं को सप्लाई चैन में इनोवेशन और परिवर्तन पर शिक्षित करना चाहता था। वक्ताओं के पैनल में, उनके पास था श्री सुजोन पालित – सीनियर मैनेजर एचआर -गेटवे ईस्ट रीजन – दिल्लीवेरी श्री सौमोव कुंडू – रीजनल ऑपरेशन डायरेक्टर – ईस्ट – डीएचएल सप्लाई चेन इंडिया प्रा। लिमिटेड श्री सुदीप्तो घोष – एसोसिएट डायरेक्टर- एचआरबीपी – वॉलमार्ट फ्लिपकार्ट श्री आशीष पाठक – योजना प्रबंधक – रिलायंस रिटेल श्री राकेश कुमार – सीनियर मैनेजर सप्लाई चेन – मैक्स रिटेल डिवीजन (लैंडमार्क ग्रुप)। उनके पास छात्रों के साथ एक प्रश्नोत्तर सत्र था। प्रश्नोत्तर सत्र छात्रों को सप्लाई चैन प्रबंधन के क्षेत्र में उद्योग के विशेषज्ञों के मार्गदर्शन के साथ उनके प्रश्नों का उत्तर प्रदान किए गए थे। सभी सम्मानित वक्ताओं से इस बारे में बात हुई कि कैसे भारत के सप्लाई चैन प्रबंधन उद्योग को 2023 और उसके बाद महत्वपूर्ण वृद्धि का अनुभव होने की उम्मीद है, जो इनोवेशन और परिवर्तनों के साथ कई कारणों से प्रेरित है जो सप्लाई चैन प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि वे कंपनियों को कंपेटिटर बने रहने, कुशलता में सुधार करने, काम करने में मदद करते हैं और ग्राहकों की संतुष्टि में वृद्धि होती है। इनोवेशन और परिवर्तन को अपनाने वाली कंपनियां आज के गतिशील कारोबारी माहौल में सफल होने के लिए बेहतर स्थिति में हैं। 2008 में स्थापित बीआईबीएस कोलकाता, अपनी स्थापना के बाद से हमेशा कॉरपोरेट जगत के लिए प्रबंधन प्रतिभा तैयार करने में विश्वास रखता रहा है। लाइव लर्निंग, छात्रों की शिक्षा में उद्योग की भागीदारी और प्रबंधन में वैश्विक स्तर पर सीखने के लिए विश्व नेताओं के साथ सहयोग करके शिक्षा प्रबंधन के बेंचमार्क को फिर से परिभाषित करने का प्रयास किया गया है।