Sunday, March 22, 2026
खबर एवं विज्ञापन हेतु सम्पर्क करें - [email protected]
Home Blog Page 160

162वीं रवीन्द्र जयंती पर ‘खोला हवा’ देखने बंगाल पहुँचे गृहमंत्री अमित शाह

कोलकाता । कविगुरु रवींद्रनाथ टैगोर एक कवि, लेखक, नाटककार, संगीतकार, चित्रकार, दार्शनिक और समाज सुधारक थे। बंगाली और भारतीय साहित्य और संगीत के साथ-साथ भारतीय कला में उनका योगदान उल्लेखनीय है। उन्होंने देश को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति दिलाने में बड़ी अहम भूमिका निभाई। मंगलवार को कवि गुरु रवींद्रनाथ टैगोर की 162वीं जयंती के अवसर पर देश के गृह मंत्री अमित शाह मंगलवार शाम को कोलकाता पहुंचकर साइंस सिटी ऑडिटोरियम में पश्चिम बंगाल की सामाजिक-सांस्कृतिक संस्था ‘खोला हवा’ द्वारा आयोजित एक सांस्कृतिक कार्यक्रम में भाग लिया

खोला हवा की ओर से रवींद्र जयंती के मौके पर संगीत, नृत्य और चर्चा के लिए रंगारंग कार्यक्रम का आयोजन किया था। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कोलकाता के साइंस सिटी ऑडिटोरियम में इस भव्य आयोजन में पहुंचकर अपने अहम विचारों को रखा। श्री शाह ने आधुनिक भारतीय चिंतन पर कवि गुरु के प्रभाव पर कई अहम जानकारी पर प्रकाश डाला।

मंगलवार को आयोजित कार्यक्रम की शुरुआत प्रमुख बंगाली गायकों के स्वागत गीत से हुई। इस मौके पर चंद्रिमा राय ने कवि गुरु टैगोर की सुंदर कविताओं का पाठ किया। उज्जैन मुखर्जी और सोमलता आचार्य की सुरीली आवाज में पेश किए गए रवींद्र संगीत को दर्शकों ने खूब सराहा। अभिनेत्री रितुपर्णा सेनगुप्ता, कोहिनूर सेन बारात, तनुश्री शंकर और उनकी पूरी टीम ने इस मौके पर रंगारंग नृत्य प्रदर्शन कर इस कार्यक्रम में समा बांध दी। नृत्य संगीत कलाओं का प्रदर्शन करनेवालों में बंगाल की कुछ सर्वश्रेष्ठ युवा प्रतिभाओं ने मंत्रमुग्ध कर देने वाला शो प्रस्तुत किया।

खोला हवा के अध्यक्ष और पूर्व राज्यसभा सांसद डॉ. स्वपन दासगुप्ता ने बंगाल के मुक्त समाज में कवि के योगदान के बारे में विस्तृत जानकारियों पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर उन्होंने कहा, कविगुरु रवींद्रनाथ टैगोर का बंगाल के साहित्य, कला और संस्कृति के क्षेत्र में योगदान अतुलनीय है। हम आभारी हैं कि “श्री अमित शाह* ने ‘खोला हवा’ के आमंत्रण को स्वीकार कर इस भव्य उत्सव में शामिल हुए हैं।

इस कार्यक्रम में शुभेंदु अधिकारी (पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता), सांसद लॉकेट चटर्जी , श्री निशिथ प्रामाणिक (गृह राज्य मंत्री), जॉन बारला (अल्पसंख्यक मामलों के राज्य मंत्री) डॉ. सुकांत मजूमदार (सांसद), डॉक्टर सुभाष सरकार (शिक्षा राज्य मंत्री),  शांतनु ठाकुर (जहाजरानी राज्य मंत्री), अग्निमित्रा पाल (विधायक) के साथ खोला हवा टीम की तरफ से डॉ. स्वपन दासगुप्ता, शिशिर बाजोरिया, डॉ. स्वरूप प्रसाद घोष, मल्लिका बनर्जी, बिस्वजीत दास और शं

भवानीपुर कॉलेज ने किया मुक्केबाजी प्रशिक्षण कार्यशाला सम्पन्न

कोलकाता । भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज ने रोजमर्रा की जिंदगी की चुनौतियों का सामना करने के साथ साथ विभिन्न प्रकार के खतरों का सामना करने के लिए लड़ाकू प्रशिक्षण का चार दिवसीय कार्यशाला 1 से 4 मई 2023 तक कॉलेज टर्फ में  आयोजित की। जिससे छात्र संभावित रणनीति सीख कर खतरों का प्रभावी ढंग से मुकाबला करें।कार्यशाला का संचालन एक पेशेवर मुक्केबाजी कोच, जो कॉलेज के पूर्व छात्र भी हैं, श्री आशुतोष कुमार झा द्वारा किया गया।उन्होंने कॉलेज के खेल प्रभारी की उपस्थिति में अपने चार साथियों के साथ प्रशिक्षण दिया । कोच ने छात्रों को मुक्केबाजी के इतिहास और इसकी विभिन्न शैलियों से परिचित कराकर कार्यशाला की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने मुक्केबाज़ी में आमतौर पर इस्तेमाल होने वाले विभिन्न पंचों और संयोजनों जैसे जैब्स, हुक, अपरकट और क्रॉस को प्रदर्शित करना शुरू किया। प्रदर्शन के बाद, कोच ने छात्रों से जोड़े में तकनीकों का अभ्यास करने के लिए कहा। छात्रों को एक दूसरे के साथ जोड़ा गया और अभ्यास करने के लिए दस्ताने और पैड दिए गए। कोच ने प्रत्येक छात्र पर व्यक्तिगत ध्यान दिया और यह सुनिश्चित करने के लिए उनकी गलतियों को सुधारा कि वे तकनीकों का सही प्रदर्शन करें।

सत्र के बाद के आधे हिस्से में, छात्रों को उन्नत मुक्केबाजी तकनीकों और फुटवर्क से परिचित कराया गया, इसके बाद चेसबॉक्सिंग के आकर्षक हाइब्रिड खेल का प्रदर्शन किया गया, जहां उन्हें सफल होने के लिए अपने दिमाग और ताकत का इस्तेमाल करना था। उन्होंने शतरंज और मुक्केबाजी के वैकल्पिक दौरों का प्रदर्शन किया और इस नए हाइब्रिड खेल के प्रति बहुत उत्साह दिखाया। शतरंज के दौरों के दौरान, कुछ छात्र मुक्केबाजों ने एक मिनट के भीतर अपने विरोधियों को परास्त कर असाधारण कौशल दिखाया, जबकि अन्य ने बॉक्सिंग राउंड में अपनी ताकत का प्रदर्शन किया। एक खेल के रूप में शतरंज बॉक्सिंग खिलाड़ियों के शारीरिक और मानसिक विकास में मदद करता है। किकबॉक्सिंग के साथ शुरुआत करने के लिए फाइटर्स भी उत्साहित थे, जहां उन्हें अपनी किकिंग और बॉक्सिंग तकनीकों का उपयोग करने का मौका मिला। छात्रों ने बैक किक और 360° किक जैसे उन्नत किक भी किए। किकबॉक्सिंग खिलाड़ियों के दिमाग और आत्मा को विकसित करने में मदद करता है।
कुल मिलाकर, मुकाबला प्रशिक्षण सत्र एक जबरदस्त सफलता रही जो कॉलेज का लक्ष्य है। रिपोर्ट दी रुचिका सचदेव ने। डॉ वसुंधरा मिश्र ने जानकारी देते हुए कहा कि अपने छात्रों की प्रतिभा को निखारने के लिए ऐसे प्रशिक्षण सत्र जारी रखें।

आशा की किरण :भवानीपुर की एनएसएस टीम ने स्लम के सौ बच्चों के साथ बिताया एक दिन

रे ऑफ होप बच्चों के चेहरों के चेहरों पर ला दी मुस्कान
कोलकाता । गत 6 मई 2023 को, भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज ने ‘रे ऑफ़ होप’ नामक एक कार्यक्रम का आयोजन किया, जिसने कुछ वंचित बच्चों के चेहरे पर मुस्कान ला दी, जो हम संगठन के साथ थे। यू एंड मी (एचयूएम) मानवता के के लिए 2014 से काम कर रहे एक युवा आधारित गैर-लाभकारी संगठन है और यह समाज के वंचित वर्गों को भोजन, शिक्षा (जुगनू) और रोजगार (किरण) प्रदान करने पर केंद्रित है। उन्होंने अपनी मेहनत और दृढ़ संकल्प के माध्यम से एक ध्वस्त इमारत का पुनर्निर्माण किया है और वर्तमान में नर्सरी से मिडिल स्कूल तक के छात्रों को पढ़ा रहे हैं। इस कार्यक्रम के लिए साल्ट लेक और वीआईपी बाजार के पास झुग्गियों के 100 से अधिक छात्रों ने भाग लिया। एचयूएम का उद्देश्य इन बच्चों के लिए एक सुरक्षित और स्वस्थ पर्यावरण प्रदान करना है। वास्तव में, इन बच्चों के जीवन में बदलाव लाने के लिए उनका समर्पण और प्रतिबद्धता प्रेरणादायक है। कॉलेज एंट्रेंस और इसके आसपास की सजावट में आर्ट इन मी कलेक्टिव द्वारा प्रदर्शित विस्तार और कलात्मक कौशल बहुत ही अद्वितीय था। टीम ने मेहमानों के लिए विचित्र सेल्फी बूथ के साथ-साथ कार्टूनों की सटीक हाथ से बनाई गई प्रतिकृतियांँ बनाईं। एनएसएस टीम ने बच्चों के हितों को पूरा करने वाली विभिन्न प्रकार की आकर्षक गतिविधियों और खेलों की योजना बनाई और उन्हें क्रियान्वित किया जिसने उन्हें मोहित और व्यस्त रखा। बच्चों के बीच कपड़े, सामान, स्टेशनरी, पके हुए सामान, खिलौने और अन्य उपहार वितरित करने के लिए कई स्टॉल लगाए गए थे, जिन्हें उन्हें कॉलेज द्वारा प्रदान किए गए मुद्रा टोकन का उपयोग करके खरीदना था, जिससे बच्चे उन वस्तुओं का चयन कर सकें जिनका वे आनंद लेंगे। उन्होंने गुब्बारों को मारना, पिंग पोंग गेंदों को निशाना बनाना, कपों की व्यवस्था करना और अपने हाथों के उपयोग के बिना भोजन करना जैसे खेल खेले, जो छात्रों के लिए एक मजेदार और रोमांचक अनुभव था। बच्चों के लिए “बुद्धू सा मन है,” “बम बम बोले,” और “आशियां” जैसे लोकप्रिय गीतों पर कॉलेज के छात्रों द्वारा मंत्रमुग्ध कर देने वाली प्रस्तुतियाँ दी गईं। बदले में, झुग्गी के बच्चों द्वारा भी शानदार प्रस्तुति दी गई जो उस दिन के मेहमान थे। सांस्कृतिक रूप से समृद्ध और विविध गीत जैसे “गणेश वंदना,” “ढोली तारो,” और कुछ सुंदर बंगाली लोक गीत भी प्रस्तुति का हिस्सा थे बच्चों द्वारा दिखाए गए प्रदर्शनों की गहराई और समृद्धि उनकी जन्मजात प्रतिभा और उनके प्रशिक्षकों के समर्पण का प्रमाण थी। सामान्य धूप वाले मौसम में आइसक्रीम और जूस के रूप में प्रदान किया जाने वाला जलपान ताज़ा राहत देता है। सभी स्वयंसेवकों और नन्हे-मुन्नों ने दिल खोलकर नृत्य किया, जिससे खुशी का माहौल साफ नजर आ रहा था।

हमारे जीवन में “आशा की किरण” का प्रतिनिधित्व करने के लिए प्रत्येक प्रतिभागी को एक मोमबत्ती प्रदान करने का प्रतीकात्मक इशारा (आशार एलोये), घटना में एक मार्मिक और शक्तिशाली क्षण था। जैसा कि उन्होंने प्रेरणादायक गीत “मन में है विश्वास” गाया और अपनी मोमबत्तियां जलाईं, यह न केवल अपने लिए बल्कि समुदाय के लिए भी एक उज्ज्वल और सकारात्मक भविष्य के लिए उनकी आशा की अभिव्यक्ति थी। पूरा वालिया हॉल एक शांतिपूर्ण रोशनी के साथ जगमगा उठा। साहसी ऊर्जा, सामूहिक आशा के रूप में और पूरे अंतरिक्ष में सकारात्मक तरंगें गूंज उठीं।पेंट के साथ खेलने और कॉलेज की दीवारों पर हाथ के निशान छोड़ने की बाद की गतिविधि प्रतिभागियों के लिए स्थायी यादें बनाने का एक रचनात्मक और अभिनव तरीका था। गतिविधि ने न केवल छात्रों को रचनात्मक रूप से खुद को अभिव्यक्त करने की अनुमति दी बल्कि इस कार्यक्रम में एक व्यक्तिगत स्पर्श भी जोड़ा। अंतिम परिणाम हाथ के निशान का एक सुंदर और रंगीन प्रदर्शन था जो प्रतिभागियों की एकता और विविधता का प्रतीक था।

रे ऑफ होप का यह दिन रचनात्मकता, आनंद और एकता का एक आदर्श मिश्रण था, और यह निश्चित रूप से उन सभी लोगों द्वारा याद किया जाएगा जो इसका हिस्सा बने । कुल मिलाकर, यह आयोजन इस बात का एक आदर्श उदाहरण था कि कैसे छोटे आयोजनों का बड़ा प्रभाव हो सकता है। आयोजन का सफल परिणाम प्रो. दिलीप शाह, डीन ऑफ स्टूडेंट्स अफेयर्स, प्रो. मीनाक्षी चतुर्वेदी के साथ सुश्री गार्गी और उनकी पूरी एनएसएस टीम के निस्वार्थ प्रयासों और लोगों के जीवन में बदलाव लाने की उनकी अटूट प्रतिबद्धता का प्रमाण है। स्वयंसेवकप्रबंधन, समन्वय के साथ-साथ इस आयोजन को सामूहिक रूप से सफल बनाने के लिए ईमानदारी से उत्कृष्ट प्रदर्शन किया । छात्रों और संगठनों द्वारा जरूरतमंद लोगों के लिए यह एक यादगार दिन रहा। रिपोर्टर और फोटोग्राफी क्रमशः तनीषा हीरावत, पापोन दास ने की डॉ वसुंधरा मिश्र ने इस कार्यक्रम की जानकारी दी।

भवानीपुर कॉलेज ने आयोजित की कॅरियर वार्ता श्रृंखला 23

कोलकाता । भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज के वाणिज्य विभाग के आफ्टरनून और इवनिंग विभाग की छात्र गतिविधि समिति की ओर से हेल्थकेयर प्रबंधन अध्याय एक का आयोजन एक अप्रैल 2023 को किया गया।
वाणिज्य विभाग ने विशेष रूप से छठे सेमेस्टर के विद्यार्थियों के लिए दो महीने (अप्रैल ’23-मई’ 23) की अवधि में ‘कैरियर वार्ता – एक श्रृंखला’ का आयोजन किया जिसमें उनको विभिन्न कैरियर अवसरों के विषय में जागरूक करने का प्रयास रहा।
इस श्रृंखला में प्रमुख व्यावसायिक घरानों, शेयर बाजार और अपरंपरागत करियर को लिया गया जिसमें मानव संसाधन प्रबंधकों के साथ एक पैनल चर्चा रखी गई। इसमें स्वास्थ्य देखभाल प्रबंधन, उद्यमिता विकास, रोजगार कौशल / उद्योग आवश्यकताओं पर पांँच अध्यायों को शामिल किया गया जो पिछले कुछ वर्षों से कैरियर जगत में आकर्षक भी साबित हो रहे हैं।
पहला अध्याय ‘हेल्थकेयर मैनेजमेंट’ गत 1 अप्रैल  को भवानीपुर कॉलेज के सोसाइटी हॉल में आयोजित किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत संचालिका और छात्र गतिविधि समिति की समन्वयक अरुंधति मजूमदार ने श्रृंखला का आधिकारिक उद्घाटन करते हुए स्वागत वक्तव्य दिया। प्रतिष्ठित अतिथि वक्ताओं में डॉ सुभ्रोज्योति भौमिक, नैदानिक ​​निदेशक, पीयरलेस अस्पताल और डॉ स्निग्धा बसु, प्रिंसिपल आईएमएस प्रमुख रहे। सभी अतिथियों का स्वागत किया गया।
डॉ. सुभब्रत गांगुली, प्रभारी शिक्षक ने उद्घाटन भाषण दिया, जिसने सत्र के लिए माहौल तैयार किया। डॉ बसु ने स्वास्थ्य देखभाल प्रबंधन के तहत पालन किए जाने वाले पाठ्यक्रम का अवलोकन करते हुए कार्यक्रम को आगे बढ़ाया। उन्होंने छात्रों को शैक्षणिक पाठ्यक्रमों/डिग्री के बारे में बताया, जिसे छात्र वाणिज्य में स्नातक कार्यक्रम पूरा करने के बाद चुन सकते हैं।
मुख्य वक्ता डॉ. भौमिक का परिचय कराया गया और उन्हें अपने विचार-विमर्श के लिए मंच पर आमंत्रित किया गया। उन्होंने अपने स्पष्ट भाषण और मिलनसार स्वभाव के साथ, छात्रों के साथ एक त्वरित संबंध बनाया। उन्होंने कॅरियर के रूप में स्वास्थ्य सेवा प्रबंधन के दायरे को कवर करते हुए एक विस्तृत पीपीटी प्रस्तुत की । उन्होंने फार्माकोविजिलेंस में अपने विशाल अनुभव, अस्पतालों में दवा प्रबंधन और डब्ल्यूएचओ यूनिट, जेनेवा में अपने तीन महीने के प्रवास को ल्यूसियन लीप पेशेंट सेफ्टी फेलोशिप अवार्ड के हिस्से के रूप में साझा किया, ताकि छात्रों को अधिक वास्तविक समय का परिदृश्य दिया जा सके। उन्होंने अपने प्रवचन को वाणिज्य स्नातकों के लिए इस पेशे की संभावनाओं पर केंद्रित किया क्योंकि प्रबंधन इस व्यवसाय के केंद्र में है। डॉ भौमिक ने स्वास्थ्य सेवा प्रबंधन के तहत विभिन्न जॉब प्रोफाइल और अनुमानित वेतन स्लैब की भूमिकाओं और जिम्मेदारियों को भी निर्दिष्ट किया। उन्होंने स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में प्रवेश करने से पहले एक उपयुक्त मानसिकता रखने के महत्व पर बल देते हुए निष्कर्ष निकाला। डॉ भौमिक की व्याख्या संपूर्ण, निश्चित और व्यापक थी।
इसके बाद संवादात्मक सत्र का संचालन अरुंधति मजूमदार ने किया, जहां छात्रों को प्रश्न पूछने के लिए आमंत्रित किया गया। आगे के स्पष्टीकरण का अनुरोध करते हुए कई छात्रों ने प्रश्न पूछे । दोनों वक्ताओं ने धैर्य के साथ सवालों का जवाब दिया और छात्रों को व्यावहारिक जवाब दिए।
वरिष्ठ संकाय सदस्य श्री देबदत्त सेन द्वारा धन्यवाद प्रेषित किया। सभागार में तालियों की गड़गड़ाहट के रूप में विद्यार्थियों ने कॅरियर टॉक श्रृंखला को अपने लिए लाभदायक माना। डॉ वसुंधरा मिश्र ने बताया कि यह इस श्रृंखला का पहला अध्याय था।
अध्याय दो – उद्यमिता विकास की द्वितीय श्रृंखला
छात्र गतिविधि समिति, वाणिज्य विभाग यूजी (दोपहर और शाम अनुभाग) द्वारा आयोजित 12 अप्रैल को सोसाइटी हॉल में संपन्न हुई । ‘कॅरियर टॉक्स- ए सीरीज़-एंटरप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट’ के दूसरे अध्याय में गत 12 अप्रैल सभागार खचाखच भरा रहा। कार्यक्रम की शुरुआत शाम की संचालिका और छात्र गतिविधि समिति की समन्वयक सुश्री अरुंधति मजूमदार के स्वागत भाषण से हुई। इसके बाद सम्मान समारोह आयोजित किया गया, जिसमें दो प्रतिष्ठित वक्ताओं,  सीतानाथ मुखोपाध्याय, सहायक निदेशक, आईईडीएस कैडर, एमएसएमई मंत्रालय, भारत सरकार और श्री अलीव बनर्जी, सहायक प्रोफेसर, मेघनाद साहा प्रौद्योगिकी संस्थान, उद्यमिता शिक्षक औरस्टार्टअप मेंटर को सम्मान भेंट किए गए।प्रभारी शिक्षक डॉ. सुभारत गांगुली ने उद्घाटन भाषण दिया। डॉ. गांगुली ने कॅरियर के रूप में उद्यमिता की क्षमता पर ध्यान केंद्रित किया, जो शाम के लिए सही दिशा तय कर रहा था।
शाम के मुख्य वक्ता मुखोपाध्याय का परिचय हुआ और उन्हें अपने विचार-विमर्श के लिए मंच पर आमंत्रित किया गया। उन्होंने छात्रों को उद्यमिता की स्पष्ट समझ देकर अपने सत्र की शुरुआत की। उन्होंने पूर्ण उद्यमिता पर विचार करने से पहले कम से कम 2-3 वर्षों के लिए एक कर्मचारी के रूप में उद्योग में रहने के महत्व पर जोर दिया। इसके बाद  मुखोपाध्याय ने इच्छुक उद्यमियों के लिए विभिन्न सरकारी नीतियों/योजनाओं का अवलोकन प्रदान किया। उन्होंने कई सरकारी योजनाओं के आवेदन के तरीकों और लाभ प्राप्त करने की प्रक्रियाओं पर चर्चा की। अंत में उन्होंने उद्यमशीलता के सपनों को हकीकत में बदलने के लिए अनुसंधान में पहले कदम के रूप में सूचना स्कैन के महत्व को बताया।
परिचय दिए जाने पर, शाम के दूसरे वक्ता अलीव बनर्जी ने उद्यमिता और स्टार्टअप के बीच समानांतर चित्रण करके अपने सत्र की शुरुआत की। उन्होंने ब्रांड वैल्यू के बारे में विस्तार से बताया। बनर्जी ने उद्यमशीलता को आगे बढ़ाने में सक्षम होने के लिए क्षमता को पहचानने या उन समस्याओं की पहचान करने के लिए नजर रखने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला, जिन्हें बेहतर बनाया जा सकता है। जोखिम, उन्होंने कहा, एक अन्य प्रमुख पहलू था जिस पर विचार किया जाना चाहिए। स्वयं को प्रेरित रखना और समय के अनुरूप व्यवसाय मॉडल में परिवर्तनों को शामिल करना सर्वोपरि है, श्री बनर्जी ने जोर देकर कहा। छात्र सहजता से उनके वास्तविक जीवन के उदाहरणों से जुड़ते दिखे। उन्होंने विभिन्न संस्थानों के छात्रों की सफलता की कहानियों को प्रदर्शित करने वाले एक पीपीटी के साथ समापन किया, जिन्होंने हमारे छात्रों को और अधिक प्रेरित करने के लिए अपनी नाक को पीसने के लिए रखा और अपने जुनून का पालन किया।
शाम के तीसरे वक्ता अफताबुल हक, एक पूर्व छात्र (बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन विभाग, बीईएससी) और निओस फैसिलिटी मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक को आगमन पर सम्मानित किया गया और एक सफल उद्यमी बनने में उनकी यात्रा की कहानी साझा करने के लिए आमंत्रित किया गया। . छात्रों को संबोधित करते हुए, उन्होंने सबसे पहले अपने विचारों को दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए कॉलेज को धन्यवाद दिया और फिर अपने अल्मा मेटर के लिए अपनी प्रशंसा साझा की। अफताबुल ने आगे अपने उद्यमशीलता उद्यम को उतार-चढ़ाव और विभिन्न प्रयोगात्मक दृष्टिकोणों पर ध्यान केंद्रित करने से पहले बताया, इससे पहले कि वह सही मॉडल पर आए। उन्होंने जीईएम- एक सरकारी वन स्टॉप ई-मार्केटप्लेस पर विस्तार से चर्चा की जहां आम उपयोगकर्ता वस्तुओं और सेवाओं की खरीद की जा सकती है। उन्होंने प्रतिबिंबित किया कि कैसे जेम पर अपने सामान और सेवाओं को पंजीकृत करने पर उनका उद्यमशीलता का प्रयास आसमान छू गया। उन्होंने बोली लगाने की प्रक्रिया, भुगतान संरचना और पोर्टल की अन्य बारीकियों के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने आगे छात्रों की सहायता करने की पेशकश की, यदि वे इस पर पंजीकरण करना चाहते हैं। समापन करते हुए, अफताबुल ने समाज को वापस देने के लिए कड़ी मेहनत, समर्पण, वास्तविकता और भावना का सार सामने लाया।
इंटरैक्टिव सत्र का संचालन डॉ देबांशु चटर्जी द्वारा किया गया था जहां छात्रों को प्रश्न पूछने के लिए आमंत्रित किया गया था। कई छात्रों ने प्रासंगिक प्रश्न पूछे, जिनके तीनों वक्ताओं ने व्यापक गहन उत्तर प्रदान किए।
सत्र का समापन में वरिष्ठ संकाय सदस्य अरुण छेत्री द्वारा धन्यवाद दिया गया। डॉ वसुंधरा मिश्र ने बताया कि दोनों
सत्रों की सफलता न केवल इसमें भाग लेने वालों की संख्या में थी बल्कि उपस्थिति के बाद होने वाली शानदार प्रतिक्रिया में भी थी।

एओएन : भवानीपुर कॉलेज में मॉडल यूनाइटेड नेशंस का चार दिवसीय सम्मेलन

आओ, जुटें, सहयोग करें – इस आदर्श वाक्य के साथ राष्ट्र सभा 2023 का उद्घाटन 
कोलकाता ।  बीईएससी एओएन कोलकाता में स्थित ईस्ट इंडिया सर्किट में अग्रणी आदर्श संयुक्त राष्ट्र सम्मेलनों में से एक रहा है। तीन साल बाद, एओएन मॉडल यूएन के अपने 6वें संस्करण के साथ सामने आया।गत 27 अप्रैल को उद्घाटन समारोह की शुरुआत टीम द्वारा प्रस्तुत एक वीडियो के साथ की गई थी जिसमें दिखाया गया कि कैसे छात्रों ने भाग लिया है और वर्षों से आत्मविश्वास से भरे मुनर्स में उभरे हैं।

एओएन की शुरुआत शास्त्रीय नर्तकों के नृत्य के साथ की गई थी, जिन्होंने विचारपूर्ण संदेश देते हुए प्रदर्शन किया कि देशों के बीच चाहे कितने भी युद्ध क्यों न हों, दुनिया के प्रत्येक देश के बीच एकता और सहमति होने पर ही शांति हो सकती है। डॉ सुमन के.मुखर्जी, महानिदेशक ने  एक मुन और मुख्य अतिथि की अवधारणा पेश की। इसके अलावा, कॉलेज के प्रभारी शिक्षक, डॉ. सुभब्रत गांगुली ने मुख्य अतिथि, मैनफ्रेड ऑस्टर, जो जर्मनी के महावाणिज्यदूत का अभिनंदन किया । मिस्टर ऑस्टर ने मंच पर अपना वक्तव्य दिया । जर्मनी और भारत के बीच अंतरराष्ट्रीय संबंधों के बारे में बात की।उन्होंने इस तथ्य के बारे में बात की कि वर्तमान संयुक्त राष्ट्र की स्थापना में कुछ खामियों के बावजूद, संयुक्त राष्ट्र अंतर्राष्ट्रीय नियमों पर आधारित व्यवस्था का एक बहुत ही मूल्यवान हिस्सा है और चार्टर प्रावधान विश्व शांति के लिए महत्वपूर्ण हैं। छात्र मामलों के डीन प्रो दिलीप शाह ने मंच संभाला और देश के सभी हिस्सों से भाग लेने का फैसला करने वाले युवा प्रतिनिधियों की प्रतिक्रिया की सराहना की। उन्होंने पहली बार मुन-इर्स को प्रोत्साहित किया और उनका मार्गदर्शन किया कि वे प्रत्येक समिति से कितनी अच्छी तरह सीख सकते हैं जो उन्हें आवंटित की गई थी। इसके अलावा, एओएन ने सचिवालय के सदस्यों के निवेश को देखा। और अंत में, मानद सलाहकार, स्वप्नील ठाकुर ने एमयूएन के प्रति अपना आभार और प्यार स्वीकार किया और कैसे अपने स्वयं के कॉलेज में वापस आना उनके द्वारा सौंपे गए सभी एमयूएन के लिए एक फ्लैशबैक था। इसके साथ उन्होंने उप-महासचिव को धन्यवाद प्रस्ताव पारित किया, जिन्होंने तब “बीईएससी असेंबली ऑफ नेशंस के 6वें संस्करण की शुरुआत” की घोषणा की ।

पहला दिन सभी के लिए एक-दूसरे के साथ बातचीत करने का अवसर था, ताकि सभी प्रतिभागी समितियों की गतिशीलता को समझ सकें और चर्चाओं को दूसरे दिन से सुचारू रूप से शुरू किया जा सके । एमयूएन का दूसरा दिन उत्साह और क्षमता की भावना के साथ शुरू हुआ, प्रतिनिधियों ने निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार समिति की कार्यवाही के लिए आगे बढ़े। कुल सात समितियाँ थीं: राज्य सभा, जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन (यूएनएफसीसीसी) , स्टाफ की संयुक्त प्रमुख समिति (जेसीएससी), महिलाओं की स्थिति पर संयुक्त राष्ट्र आयोग (यूएनसीएसडब्ल्यू), संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी), संयुक्त राष्ट्र जनरलविधानसभा-निरस्त्रीकरण और अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा समिति (यूएनजीए – डीआईएसइसी) और अंतर्राष्ट्रीय प्रेस समिति (आईपीसी) ने पहले दिन, समितियों ने सामूहिक विनाश के हथियारों की सीमा पार तस्करी से लेकर भारतीय दंड की धारा 377 के तहत समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी से बाहर करने तक के मुद्दों पर चर्चा की कोड संहिता नियमसंग्रह, संकेतावली, जाब्ता, संकेत-लिपि, सांकेतिक शब्दों में बदलना, संक्षिप्त नाम। उन्होंने जलवायु परिवर्तन को कृषि से जोड़ने और खाद्य सुरक्षा पर इसके प्रभाव और लैंगिक समानता के मुद्दों जैसे वैश्विक मुद्दों को भी चर्चा में लाया।

एओएन के तीसरे दिन, कॉलेज नुक्कड़ नाटक समूह, “अंतरजल” ने प्रदर्शन किया और उसके बाद सभी प्रतिनिधि तीसरे दिन की कार्यवाही शुरू करने के लिए अपनी-अपनी समितियों में चले गए। कुछ उल्लेखनीय चर्चाएँ दूसरे दिन का मुख्य आकर्षण थीं, जैसे यूएनएचआरसी समिति ने महिलाओं पर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव पर चर्चा की, विशेष रूप से खाद्य सुरक्षा और कृषि के संबंध में।  सीओपी28 सम्मेलन के दूसरे दिन यूएनएफसीसीसी की शुरुआत ग्रीन क्लाइमेट फंड (जीसीएफ) के प्रवर्तन पर विचार-विमर्श की चर्चा के साथ हुई। ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ कमीशन (जीसीएफसी) कमेटी ने दूसरे दिन बगलिहार में चिनाब नदी पर एक बांध बनाने के लिए भारत द्वारा एक परियोजना पर चर्चा की, जबकि यूएनजीए (डीआईएसईसी)  ने डर्टी बम क्या है? एओएन के अंतिम दिन प्रत्येक समिति पूरी तरह से सक्रिय थी ताकि वे अंततः चर्चाओं में एक प्रस्ताव ला सकें। एओएन के चार दिनों तक चलने वाले सिमुलेशन ने छात्रों को एक-दूसरे से मिलने, एकजुट होने और सहयोग करने का अवसर दिया। इन भाग लेने वाले छात्रों में भविष्य के वैश्विक नेता देखने और सुनने के लिए एक इलाज थे क्योंकि उन्होंने अपनी व्यक्तिगत समिति की भूमिकाएं शुरू कीं और अपने विचारों के लिए खड़े होने और क्रांतिकारी सुझाव देने के लिए संसदीय सत्र में आगे बढ़े। मॉडल संयुक्त राष्ट्र एक समापन समारोह के साथ समाप्त हुआ, जिसके बाद वे सामाजिक लोगों के लिए जुबली हॉल की ओर बढ़े, जो एक बॉलरूम नाइट थी, जिसमें नृत्य किया, हँसे और शाम के बाकी समय का आनंद लिया। 30 संस्थानों के 275 से अधिक प्रतिनिधियों के साथ, एओएन एक उल्लेखनीय बौद्धिक कार्यक्रम है जो छात्रों द्वारा आयोजकों, वक्ताओं और प्रतिभागियों के रूप में संचालित होता है – या हमें कहना चाहिए कि लोकतांत्रिक विश्व व्यवस्था में छोटे कदम हैं। समापन सत्र में विभिन्न पुरस्कारों और उल्लेखों की घोषणा की गई। जादवपुर विश्वविद्यालय को सर्वश्रेष्ठ प्रतिनिधिमंडल का पुरस्कार दिया गया। सूचना दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।

है बुझानी धरा की अगर प्यास तो/पावनी प्रेम गंगा बहा दीजिए’

जालान पुस्तकालय में काव्य गोष्ठी का आयोजन

कोलकाता । सेठ सूरजमल जालान पुस्तकालय के तत्वावधान में गाजीपुर (उत्तर प्रदेश) से पधारे प्रख्यात कवि कामेश्वर द्विवेदी के सम्मान में एक अंतरंग काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर उन्हें अंग वस्त्र और पुष्प गुच्छ देकर सम्मानित किया गया।इस काव्य गोष्ठी की अध्यक्षता भोजपुरी एवं हिंदी के वरिष्ठ कवि रामपुकार सिंह ने की। इस मौके पर कवियों ने सभी रसों की कविताओं की धारा प्रवाहित की।गोष्ठी का कुशल संचालन करते हुए कवि विजय शर्मा ‘विद्रोही’ ने आज के देश के हालात पर कविता सुनायी कि शत्रुओं के गुप्तचरों से/अपने ही कुछ नरों से/ देश आज डरा हुआ है/ कहां पर खड़ा हुआ है। काव्य गोष्ठी के उत्सवमूर्ति कवि कामेश्वर द्विवेदी ने अपनी कविता- है बुझानी धरा की अगर प्यास तो/ पावनी प्रेम गंगा बहा दीजिए सहित अपनी अनेक रचनायें सुना कर श्रोताओं की भरपूूर वाह–वाही लूटी। युवा कवि परमजीत कुमार पंडित ने समाज में हो रहे भटकाव पर अपनी कविता– गहराइयों से भी घने अंधकार में ले जाता है/ जिसके बाद कोई पाठ नहीं/एक अंतहीन, भटकाव–भटकाव–भटकाव की प्रस्तुति की। गोष्ठी में वरिष्ठ कवि हीरालाल जायसवाल ने कई सारगर्भित कविताएं सुनायी। उनकी कविता की बानगी है- असंतोष उभरा है जग में /शांति नहीं मिल पाती है/जीवन के हर क्षेत्र में मां/ अब तेरी याद सताती है । गोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ कवि रामपुकार सिंह ने गांव पर केंद्रित अपनी कविता– सही में गांव है तो हिंद की पहचान है प्यारे/ कहें क्या गांव में ही बसता हिंदुस्तान है प्यारे सुनाई जिसे श्रोताओं ने खूब पसंद किया। मुख्य अतिथि के रुप में उपस्थित उमेशचंद्र कॉलेज के हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. कमल कुमार ने कहा कि कविता में कविता की संप्रेषणता सबसे जरूरी है। कविता समाज को, देश को व्यक्ति से जोड़ती है। गोष्ठी में विवेक तिवारी ने दिनकर और जयशंकर प्रसाद की रचनाओं का सुमधुर काव्य पाठ कर सबका मन मोह लिया। गोष्ठी का शुभारंभ कवियित्री हिमाद्री मिश्रा के सुमधुर सरस्वती वंदना ” *वाणी वीणा मधुर बजावे/
सप्त सुरो की माला शुचि सुंदर सरगम स्वर लहरावे” से हुआ। धन्यवाद ज्ञापन पुस्तकालयाध्यक्ष श्रीमोहन तिवारी ने दिया। इस काव्य गोष्ठी में राजकुमार शर्मा, राकेश पांडेय, पूजा चौधरी, चारुस्मिता, एवम् कुमार तेजस सहित अनेक गणमान्य सुधिजन उपस्थित थे।

‘हिंदी भाषा और साहित्य’ विषय पर संगोष्ठी

मिदनापुर। विद्यासागर विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग की ओर से ‘हिंदी भाषा और साहित्य’ विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में विश्वभारती विश्वविद्यालय के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. रवींद्रनाथ मिश्र ने कहा कि हिंदी भाषा और साहित्य भारतीय संस्कृति के अध्ययन का मार्ग है। संस्कृत भाषा की जननी है। जिस प्रकार माँ बच्चों को भाषा का ज्ञान देती है, उसी प्रकार संस्कृत भी अन्य भाषाओं को जानने में हमारी मदद करती है। उन्होंने कहा साहित्य व्यक्तित्व निर्माण का कारखाना है ।संवाद सत्र में विभाग के विद्यार्थियों और शोधार्थियों ने अपनी जिज्ञासाओं को उनके समक्ष रखा। स्वागत भाषण देते हुए विभागाध्यक्ष डॉ प्रमोद कुमार प्रसाद ने प्रो. मिश्र का स्वागत करते हुए कहा कि हिंदी भाषा का साहित्य समृद्ध होने के साथ समावेशी भी है। संचालन करते हुए विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ संजय जायसवाल ने कहा कि ईश्वरचन्द्र विद्यासागर की जन्मभूमि पर अवस्थित हमारा हिंदी विभाग भारतेंदु और विद्यासागर के बीच के हिंदी- बांग्ला संवाद और सृजन की परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।हिंदी भारतीय साहित्य के बीच एक सृजनात्मक एवं सांस्कृतिक पुल है।इस आयोजन को सफल बनाने में विद्यार्थियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। धन्यवाद ज्ञापन देते हुए सहायक प्रोफेसर डॉ श्रीकांत द्विवेदी ने कहा कि हिंदी भाषा और साहित्य की जड़ें भारतीयता,ज्ञान और मनुष्यता की ओर जाती हैं।

साहित्यिकी संस्था द्वारा वरिष्ठ सदस्याओं के साहित्यिक योगदान एवं समर्पण पर गोष्ठी

कोलकाता । प्रसिद्ध संस्था साहित्यिकी ने अपनी दो वरिष्ठ सदस्याओं डॉ आशा जायसवाल और सरोजिनी शाह के व्यक्तित्व और अनुभवों को केंद्र रख मासिक गोष्ठी का आयोजन किया। सचिव मंजुरानी गुप्ता ने ज़ूम मंच पर उपस्थित सदस्याओं एवं अतिथियों का हार्दिक स्वागत किया। साहित्यिकी की संस्थापिका डॉ सुकीर्ति गुप्ता की स्मृति को नमन करते हुए रेवा जाजोदिया को संचालन के लिए आमंत्रित किया।
रेवा जाजोदिया ने साहित्यिकी संस्था की वरिष्ठ सदस्याओं डॉ आशा जयसवाल एवं सरोजिनी शाह के जीवन के महत्वपूर्ण पक्षों को उजागर करते हुए बताया कि दोनों ने ही अपने जीवन के लगभग आठ दशकों तक की यात्रा की है जिनमें संघर्ष, सुख – दुख, खट्टे – मीठे अनुभव दोनों रहे।
प्रथम वक्तव्य के लिए संस्था की सदस्य प्रसिद्ध व्यंग्यकार नुपूर अशोक को आमंत्रित किया। आशा जी के व्यक्तित्व और उनके साहित्यिक अवदान की चर्चा करते हुए नुपूर अशोक ने कहा कि एक शिक्षिका के रूप में इस उम्र में भी वे अपना कर्तव्य बहुत ही सकारात्मक ऊर्जा लिए कर रही हैं। पुरानी पीढ़ी के लिए जीवन की चुनौतियाँ अलग तरह की होती थीं। अनुशासन, आध्यात्मिक झुकाव, चिन्मय मिशन से जुड़ाव , गीता और उपनिषद की कक्षाएँ लेना आज भी उनके जीवन का अंग है। चेहरे पर हमेशा मुस्कान उनकी ऊर्जा को दर्शाता है। डॉ आशा जायसवाल ने संस्था को धन्यवाद दिया और कहा कि संस्था की स्थापना के समय से ही जुड़ी हूँ और गुरू परंपरा पर विश्वास करती हूँ। जीवन अनुभवों की श्रृंखला है । अपने दृष्टिकोण को बदलने से विचारों में नयापन आता है।
द्वितीय वरिष्ठ सदस्या सरोजिनी शाह का परिचय देते हुए कवयित्री और उद्घोषिका सबिता पोद्दार ने 30 मार्च 1942 में बुलंदशहर में जन्मी सरोजिनी शाह के जीवन का परिचय दिया। जीवंतता, अतिथि परायण और सरलता से पूर्ण उनका व्यक्तित्व रहा । मारवाड़ी परिवार में पली सरोजिनी शाह परिवार में रहकर परिवार की परंपराओं को साधक की तरह अपनाती गई जो उनको एक महत्वपूर्ण इंसान बनाता है।एम ए डिग्री प्राप्त करते ही उनका विवाह हो गया था । विवाह के पश्चात किस तरह पारिवारिक जीवन में चुनौतियों का सामना करना पड़ा और रिश्तों को निभाया, उस पर अपनी बातें रखी। साहित्यिकी से जुड़ कर उन्होंने अपनी साहित्यिक रुचियों को आगे बढ़ाया।
सरोजिनी शाह ने अपने जीवन के कठिन संघर्षों को साझा किया। स्त्रियों के स्वावलंबन और अस्मिता को उन्होंने अपने वक्तव्य में विशेष रूप से रेखांकित किया।
संवाद सत्र में गीता दूबे ने ममतामयी स्वभाव, अहंकार से परे, आडंबरहीन हौसलाअफ़जाई करने वाली आशा जी के कई अनुकरणीय विशेषताओं पर अपने विचार व्यक्त किए । रेणु गौरिसरिया ने रांची में एक साथ गुजारे समय को याद किया।उषा श्रॉफ़, उमा झुनझुनवाला के अतिरिक्त सारिका बंसल, ऋचा अहलूवालिया, शालिनी केडिया आदि ने अपने अंतरंग प्रेरक प्रसंगों को साझा किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुसुम जैन ने कहा कि संस्था एक परिवार की तरह है और हम सब का प्यार एक दूसरे की ताकत है, हमारे आपसी संबंध रक्त संबंधों से इतर होते हुए भी हृदय से जुड़े हुए हैं।
संचालन करते हुए रेवा जाजोदिया ने दोनों ही वरिष्ठ सदस्याओं को साहित्य प्रेमी, साधक, रिश्तों को साधने वाली बताया।
ज़ूम ऑनलाइन हुई इस साहित्य गोष्ठी में साहित्यिकी की सदस्याओं ने सक्रिय रूप से भाग लिया। रिपोर्ट डॉ वसुंधरा मिश्र ने दी ।

‘गांधी और सरला देवी चौधरानी’ पर भवानीपुर कॉलेज में चर्चा

कोलकाता । भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज की लाइब्रेरी में साहित्य अकादमी से पुरस्कृत कथाकार अलका सरावगी का नया उपन्यास ‘गांधी और सरला देवी चौधरानी’ बारह अध्याय पर आधारित चर्चा का आयोजन चार मई को किया गया। कॉलेज के डीन प्रो दिलीप शाह ने अलका सरावगी का स्वागत किया। हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ कविता मेहरोत्रा ने उत्तरीय प्रदान कर उनका सम्मान किया वहीं डॉ मिश्र ने मोमेंटो प्रदान किया । संचालन करते हुए डॉ वसुंधरा मिश्र ने कार्यक्रम की शुरुआत में अलका सरावगी का परिचय दिया और उपन्यास गांधी और सरला देवी चौधरानी पर चर्चा की।डॉ मिश्र ने कई सवाल पूछे जिसमें अलका जी ने बड़ी ही स्पष्टता से उनका निराकरण किया। जैसे बंगाल के मशहूर परिवार रवीन्द्र नाथ टैगोर की भांजी सरला देवी चौधरानी क्या गांधी की आध्यात्मिक पत्नी थीं? यह आपने अपने उपन्यास में किस आधार पर विश्लेषण किया। दो महान व्यक्तित्वों के आंतरिक मामलों को उजागर करने में आपने अपने लेखन में किस प्रकार की सावधानियाँ बरती आदि विभिन्न प्रश्न रहे। रवीन्द्रनाथ टैगोर की भांजी कथाकार स्वर्ण कुमारी की बेटी, बंगाल की दुर्गा और जॉन अॉ आर्क सरला देवी चौधरानी का राजनीतिक संबंध, राष्ट्रीय योगदान, गांँधी के साथ उनका नाम जुड़ना, खादी पहनना, हिंदी का प्रचार-प्रसार, गांधी की करीबी रहीं। गांधी ने उन्हें अपनी आध्यात्मिक पत्नी कहा। इस अवसर पर 25 विद्यार्थियों, शिक्षिकाओं और भारत जैन महामंडल लेडिज विंग कोलकाता की अध्यक्ष अंजू सेठिया, नेहा रामपुरिया और रूमा दास एवं मीडिया से मेघा केजरीवाल की सक्रिय उपस्थिति रही ।प्रो मीनाक्षी चतुर्वेदी, प्रो समीक्षा खंडूरी का सहयोग रहा। कार्यक्रम की सूचना दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने अलका सरावगी से उपन्यास पर नम्रता चौधरी, रवि सिंह और कशिश साह ने प्रश्न भी पूछे।

सरल होगी तलाक की प्रक्रिया, जरूरी नहीं होगा 6 महीने तक इंतजार

नयी दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट ने व्यवस्था दी है कि अगर पति-पत्नी का रिश्ता टूट चुका है और उसमें सुलह की कोई गुंजाइश नहीं बची है, तो कोर्ट संविधान के अनुच्छेद-142 के तहत तलाक को मंजूरी दे सकता है। इसके लिए छह महीने का इंतजार अनिवार्य नहीं होगा। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट को इस बात पर पूरी तरह संतुष्ट होना होगा कि शादी काम नहीं कर रही है और भावनात्मक स्तर पर खत्म हो चुकी है।
छह महीने के कूलिंग ऑफ पीरियड मानना जरूरी नहीं
सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की संवैधानिक बेंच ने गत सोमवार को ऐसी शादियों के लिए तलाक का आधार तय किया जो पूरी तरह टूट के कगार पर हैं और सुलह की कोई गुंजाइश नहीं बची है। बेंच ने कहा, आपसी सहमति से तलाक का मामला है तो अदालत को यह अधिकार होगा कि वह हिंदू मैरिज ऐक्ट के तहत तय प्रक्रिया की शर्त हटा दे यानी सुप्रीम कोर्ट छह महीने के कूलिंग ऑफ पीरियड की अनिवार्यता मानने को बाध्य नहीं होगा। ऐसे मामलों में तलाक किसी का अधिकार नहीं होगा। कोर्ट ने यह भी कहा कि वह अपने विशेष अधिकार का प्रयोग कर वैवाहिक विवाद में लम्बित आपराधिक कार्रवाई, गुजारा भत्ते और धारा-498 ए के केस, घरेलू हिंसा के केस भी खारिज कर सकता है।
कोर्ट ने कहा कि तलाक का फैसला देने से पहले ये तथ्य देखने जरूरी होंगे। मसलन शादी संबंध में दोनों कितने दिन रहे । आखिरी बार दोनों में कब संबंध बने । दोनों के बीच आपसी आरोप-प्रत्यारोप कैसे थे । कितनी बार कोशिश की गई कि दोनों में समझौता हो जाए। इसके अलावा आर्थिक, सामाजिक, शैक्षणिक, पति-पत्नी की उम्र आदि देखकर फैसला लेना होगा।
यह है सहमति से तलाक का मौजूदा नियम
हाई कोर्ट के वकील मुरारी तिवारी के मुताबिक हिंदू मैरिज ऐक्ट 1955 में प्रावधान है कि तलाक के लिए पहला मोशन जब दाखिल किया जाता है तो दोनों पक्ष कोर्ट को बताते हैं कि समझौते की गुंजाइश नहीं है और दोनों तलाक चाहते हैं। याचिका में दोनों बताते हैं कि कितना गुजारा भत्ता तय हुआ है और बच्चे की कस्टडी किसके पास है। कोर्ट तमाम बातों को रेकॉर्ड पर लेती है और दोनों से छह महीने बाद आने को कहती है। इस दौरान अगर समझौता नहीं हुआ तो 6 से लेकर 18वें महीने के बीच दोनों सेकंड मोशन के लिए अर्जी दाखिल करते हैं और कोर्ट को बताते हैं कि समझौता नहीं हो सका। इसके बाद कोर्ट तलाक की डिक्री पारित कर देता है।
और एक अजीब फैसला
अगर कोई शख्स अपने शादीशुदा होने और बच्चे का बाप होने की बात बताकर किसी के साथ लिव इन रिश्ते में प्रवेश करता है तो इसे लिव इन पार्टनर धोखा नहीं कह सकता। कलकत्ता हाई कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान यह बात कही। निचली अदालत ने एक होटल इग्जेक्युटिव पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया था। उस पर अपने 11 महीने पुराने लिव इन पार्टनर को छोड़कर जाने और उससे शादी का वादा पूरा न करने पर धोखेबाजी का आरोप लगा था। हाई कोर्ट ने कहा कि अगर लिव इन मामले में छल का आरोप लगाया जाता है तो यह साबित करना होगा कि प्रतिवादी ने संबंध बनाने के लिए जो शादी का वादा किया था, वह झूठा था।

छत्रपति शिवाजी महाराज से है महाराष्ट्र स्थापना से जुड़ी स्वर्ण मुद्रा का सम्बन्ध

नागपुर । एक मई 1960 को महाराष्ट्र राज्य की स्थापना हुई और भारत के मानचित्र पर स्वतंत्र रूप से ‘महाराष्ट्र’ राज्य अस्तित्व में आया। 30 अप्रैल 1960 को मध्य रात्रि 12 बजे भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने महाराष्ट्र राज्य का नक्शा प्रकाशित क‍िया और महाराष्ट्र राज्य के गठन की घोषणा की। पंडितजी ने महाराष्ट्र की बांगडोर यशवंतराव चव्हाण को सौंपकर नए महाराष्ट्र का नेतृत्व सौंपा था। इस शुभ घड़ी को महाराष्ट्र वासियों के लिए यादगार बनाने के मकसद से ‘महाराष्ट्र राज्य स्थापना महोत्सव मुद्रा’ का प्रकाशन किया गया है।
1 मई, 1960 को स्थापना दिवस के उद्घाटन समारोह में उपस्थित सभी गणमान्य व्यक्तियों को महाराष्ट्र राज्य फाउंडेशन महोत्सव सिक्का उपहार में दिया गया था। साथ ही यह मुद्रा बाद में महाराष्ट्र सरकार के सभी कर्मचारियों को वितरित की गयी। यह मुद्रा सोने, चांदी, तांबे और निकल में ढाली गई थी। लेकिन आज महाराष्ट्र की स्थापना के 63वें वर्ष में उस ऐतिहासिक क्षण का साक्षी ‘राजमुद्रा’ दुर्भाग्य से इतिहास बन गया है। समय बीतने और प्रगति की गति के साथ कई बार वित्तीय लाभ के लालच में कई लोगों ने इस शाही सिक्के को सुनार की भट्टी में पिघला दिया। अपने आभूषण बनाते समय बहुत से लोगों ने इसे खो दिया क्योंकि वे मुद्रा के महत्व को नहीं समझते थे।
किसके पास है मूल्यवान संपत्ति ?
चंद्रपुर के एक वरिष्ठ मुद्राशास्त्री और विद्वान अशोक सिंह ठाकुर ने इस अनमोल खजाने को अपने संग्रह में सहेज कर रखा है। 20 साल के लगातार संघर्ष के बाद उन्होंने आज तक इस दुर्लभ सिक्के को बचाने का संकल्प लिया है। आज तक उन्होंने 319 शाही टिकटों का संग्रह करके महाराष्ट्र की स्थापना की ऐतिहासिक विरासत को संरक्षित किया है।
ठाकुर के संग्रह में 319 सिक्के
अशोक सिंह ठाकुर बताते हैं क‍ि मेरे संग्रह में 20 साल पहले महाराष्ट्र राज्य स्थापना महोत्सव की चांदी की मुद्रा थी। जैसे-जैसे मुझे समय के साथ संदर्भ पुस्तकें और उनके बारे में जानकारी मिलती गई, मुझे प्रिंट के महत्व का एहसास हुआ और इसे अपने संग्रह में पाकर मैं गौरवान्वित महसूस कर रहा था। तब मैंने अपने संग्रह में जोड़ने के लिए इस अनमोल खजाने की उत्सुकता से खोज की। आज मेरे संग्रह में 319 सिक्के हैं। यह मुद्रा सोने, चांदी और निकल से बनी होती है। लेकिन फिर भी मुझे इसमें सोने का सिक्का (सुवर्णा राजमुद्रा) नजर नहीं आता। लेकिन ठाकुर ने कहा कि सरकारी दस्तावेजों में इसका जिक्र है।
उत्सव कैसा है?
इस राजमुद्रा की सतह पर अशोक चक्र खुदा हुआ है और यह राजमुद्रा गोलाकार है। यह शाही मुद्रा ‘महाराष्ट्र राज्य स्थापना महोत्सव’ और वैशाख 11, 1882। 1 मई 1960 को भी आज ही का दिन है। सिक्के के नीचे ‘प्रतिपचंद्रलेखेव वर्धिष्णुर्विश्वा वंदिता’ और ‘महाराष्ट्रस्य राज्यस्य मुद्रा भद्राय राजते’ लिखा हुआ है। ये पंक्तियां छत्रपति शिवाजी महाराज की राजमुद्रा से प्रेरित हैं। यह सिर्फ एक सिक्का नहीं, एक मुद्रा है, बल्कि एक अमूल्य खजाना है, जो हमें महाराष्ट्र की स्थापना के सुनहरे पलों की याद दिलाता है। मुद्राशास्त्री और सिक्का संग्राहक के रूप में ठाकुर ने राय व्यक्त की कि सरकार और नागरिकों को भी इसका संरक्षण करना चाहिए।
(साभार – नवभारत टाइम्स)