-शिक्षकों की भर्ती नीति में जुड़ी नयी नीति
कोलकाता। बंगाल की पहली भाजपा सरकार ने भी शिक्षकों की भर्ती नीति को लेकर एक बड़ा फैसला किया है। राज्य सरकार ने शिक्षकों की भर्ती नीति के लिए एक नई ‘शर्त’ जोड़ी गई है। नव नियुक्त शिक्षकों को अब सक्रिय राजनीति में शामिल होने या कोई चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं होगी। यह नीति न केवल सरकारी स्कूलों पर, बल्कि सरकार द्वारा प्रायोजित या सरकार से सहायता प्राप्त स्कूलों पर भी लागू होगी। आज आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में, ऐसे में इस सवाल का कि, उन शिक्षकों का क्या होगा जो पहले से ही राजनीति में शामिल हैं? मुख्यमंत्री ने इस पर भी स्पष्टीकरण दिया है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछली कैबिनेट बैठक में 45,000 पदों के सृजन के बाद, आज की बैठक में लगभग 1,200 और नए पदों के सृजन को मंजूरी दी गई है। इस तरह, पिछली कुछ कैबिनेट बैठकों के जरिए, मौजूदा सरकार ने लगभग 60,000 नौकरियों का रास्ता साफ कर दिया है।
सीएम ने कहा कि भारत के अन्य राज्यों में शिक्षक सीधे तौर पर राजनीति में शामिल नहीं होते हैं। पश्चिम बंगाल में अब तक कई शिक्षक सक्रिय रूप से राजनीति से जुड़े रहे हैं। मुख्यमंत्री ने घोषणा की है कि नए नियुक्त शिक्षकों को अब ऐसा करने का मौका नहीं मिलेगा। जो शिक्षक पहले से ही राजनीति में शामिल हैं उनके मौजूदा अधिकारों में कोई कटौती नहीं की जाएगी। हालांकि, अब से किसी भी नए नियुक्त शिक्षक को प्रत्यक्ष या चुनावी राजनीति में हिस्सा लेने की अनुमति नहीं होगी। उन्हें नगर पालिकाओं, निगमों, विधानसभा या लोकसभा के चुनाव लड़ने की इजाजत नहीं दी जाएगी। कैबिनेट की बैठक में नवनियुक्त शिक्षकों के लिए नई शर्तों पर फैसला लिया गया. मुख्यमंत्री ने कहा कि इस निर्णय को स्कूल सेवा आयोग (एसएससी) की भर्ती प्रक्रिया में शामिल किया गया है. उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार ने शिक्षा की गुणवत्ता बहाल करने के लिए यह बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस बदलाव के बाद राज्य में कुल 60,000 नई नियुक्तियों को मंजूरी दी गई है।
सीएम ने उन्होंने स्पष्ट किया कि यह नियम उन लोगों पर लागू नहीं होगा जिन्हें पहले ही नौकरी मिल चुकी है और वे विभिन्न क्षेत्रों या राजनीतिक पदों पर कार्यरत हैं, जैसे कि पंचायत या नगर पालिकाओं के जन प्रतिनिधि के रूप में काम करने वाले लोग। चूंकि उनकी नियुक्ति के समय ऐसी कोई कानूनी शर्त या प्रावधान नहीं था, इसलिए पुराने कर्मचारियों को इस नियम के दायरे से बाहर रखा जाएगा। लेकिन यह शर्त भविष्य की सभी नियुक्तियों पर सख्ती से लागू होगी।




