– सरकार ने नियम बदले, अब लेनी होगी सरकार से मंजूरी
नयी दिल्ली । इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन इसरो के गगनयान और दूसरे अहम मिशनों से जुड़े वैज्ञानिकों और तकनीकी कर्मचारियों के इस्तीफे और स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति को अब आसानी से मंजूरी नहीं मिलेगी। अंतरिक्ष विभाग ने नया निर्देश जारी कर कहा है कि ग्रुप-ए वैज्ञानिक एवं तकनीकी कर्मचारियों के इस्तीफे या वीआरएस के आवेदन नियमित प्रक्रिया के तहत स्वीकार नहीं किए जाएं। मीडिया रिपोट्र्स के मुताबिक ये निर्देश ऐसे समय आए हैं, जब पिछने 10 महीनों के दौरान 100 से ज्यादा कर्मचारी इसरो छोड़ चुके हैं। सबसे ज्यादा इस्तीफे बेंगलुरु के यूआर राव सैटेलाइट सेंटर और तिरुवनंतपुरम के विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर से हुए हैं। इस्तीफा देने वालों में वरिष्ठ वैज्ञानिक विक्टर जोसेफ टी भी शामिल हैं। वे वीएसएससी में जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल प्रोजेक्ट के प्रोजेक्ट डायरेक्टर थे। यही लॉन्च व्हीकल गगनयान मिशन में इस्तेमाल किया जाएगा।ताजा आदेश में कहा गया है कि इस्तीफों और वीआरएस मामलों में तेजी आने से गगनयान और दूसरे राष्ट्रीय महत्व के प्रोजेक्ट्स पर असर पड़ रहा है। इसलिए नौकरी छोडऩे के आवेदनों पर अब अंतिम फैसला अंतरिक्ष विभाग करेगा। इसरो के सभी केंद्रों को निर्देश दिया गया है कि वैज्ञानिक और तकनीकी कर्मचारियों, चाहे वे साइंटिस्ट-इंजीनियर-एसजी रैंक या उससे नीचे के हों, उनके इस्तीफे या वीआरएस आवेदन केंद्र निदेशक की स्पष्ट सिफारिश के साथ अंतरिक्ष विभाग को भेजे जाएं। अंतिम निर्णय विभाग स्तर पर लिया जाएगा। इसके पहले 2020 में किए गए प्रशासनिक बदलाव में इसरो केंद्रों के निदेशकों और प्रमुखों को इस्तीफे और वीआरएस स्वीकार करने का अधिकार दिया गया था। रिपोर्ट के मुताबिक इसरो छोडऩे वाले कुछ वैज्ञानिक निजी अंतरिक्ष स्टार्टअप्स से जुड़ गए हैं। फिलहाल देश में 400 से ज्यादा पंजीकृत स्पेस स्टार्टअप हैं। इनमें करीब 500 मिलियन डॉलर का निवेश आया है। गौरतलब है कि इस्तीफों से इसरो को हाल के मिशनों में भी चुनौतियों का सामना करना पड़ा है।




