कोलकाता । अर्चना संस्था ने स्वरचित कविता द्वारा काव्य गोष्ठी आयोजित की जूम पर हुई 25 जून को शाम 4 बजे से ग्यारह सदस्यों ने अपनी रचनाएं सुनाई ।इस कार्यक्रम का संचालन और संयोजन इंदु चांडक ने सरस्वती वंदना के साथ किया। विद्या भंडारी, मृदुला कोठारी, चिराग चतुर्वेदी, सुशीला चनानी, डॉ वसुंधरा मिश्र, हिम्मत चोरड़िया ‘प्रज्ञा’ , भारती मेहता, संजू कोठारी, संगीता चौधरी, सुशीला सुराना, इंदू चांडक ने स्वरचित रचनाएँ सुनाई। राजनीति धर्म प्रकृति नई सोच सत्य मंहगाई संवेदना प्रेम आदि विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों के माध्यम से कविता, गीत, हाइकु, दोहे रचे गए ।
*मेरी कुर्सी खाली है।1)बंगाल भूमि बदली नहीं,बदलाव आया है।/नईउमंग ,नई उम्मीद, नई विचारधारा, नया इतिहास रचाया है।2)न तो मन्नत मांगी थी बेटी के लिए, न ही जश्न मनाए।-विद्या भंडारी ने कविता के माध्यम से बंगाल में हुए चुनाव को नई उम्मीद और नए विचारधारा का बदलाव बताया और बंगाल की भूमि वही है।
*हाइकु की विधा में 1)पच्चीस जून /संविधान का खून। पद जुनून!2)पराया रूप /जीता है अभिनेता /सत्य स्वरूप !
3)सभी ढूंढते /प्रभु तुम्हारा पता! /तुम लापता! 4)रचीकविता /शब्द बने स्पंदन /भाव सरिता !5)केश राशि में /हो चांदी का आभास /नारी उदास !6)नहीं निकास / फ्लैट देख गौरैया
हुई उदास ! /7)पलकों तले /पले स्वप्न सुहाने कोई न जाने ! और एक गीत -पड़ रही महंगाई की मार , हम तो हो गये हैं बेजार /कुछ भी हमारे वश में नहीं है , ऐसे हम लाचार। सुशीला चनानी ने समाज में बढ़ती मंहगाई की मार पर ज्वलंत मुद्दों को लेकर अपनी रचना सुनाई ।
निशब्द अंधेरी रात मेरा /अबोलापन अक्सर करता है पेड़ों पत्तों से बात /2 उदासियों की अग्नि शिखा /अक्सर घूमती मेरे आस-पास /3 गीत*कौन सी आरती गाऊं /सकल विश्व में एक तू ही तू /कौन सा रूप में पाऊं*कौन सी*-मृदुला कोठारी ने मधुर स्वर में अपनी रचना में आध्यात्मिक प्रस्तुति दी।
*कुण्डलिया छंद भाग्य भरोसे हों अगर/2. अंबर की खिड़की खुली/गीत-धन दौलत सब नश्वर, हिम्मत चोरड़िया प्रज्ञा ने अपनी रचनाओं की प्रस्तुति आरती के तर्ज पर दी।
*बचाना जो कली को धूप से था, /शायद इसलिए ही भ्रमर को काला होना पड़ा l/*गाली न दो इस जिंदगी को तुम ,ये तो बेचारी खुद गुजारी जाती है l/*प्यार की मिठास ‘दो’ से पूछिए ,/मगर प्यार की कड़वाहट ‘एक’ से ही पूछिए l-भारती मेहता ने वर्तमान समय में होने वाले प्यार के कई रूपों पर अपनी क्षणिकाएं सुनाई।
*है विवाह प्यारा सफ़र,त्याग प्रेम आधार।/इक दूजे के मान से,बने सुखी परिवार।।/2)बातें हो जब फूल सी,लहजे बने सुगंध।/अंतस को सुरभित करे, गहराता संबंध।।/3)दुनिया के बाजार में,रिश्तों की भरमार।/विपद घड़ी जो साथ दे,वो ही सच्चा यार।।/4)जन-जन में अपनत्व की,आने लगे सुवास।
कण-कण में भगवान का, मिले सुखद अहसास।।/5) माना घोर निराशा है / टूटती हर आशा है /धीरज के संग चल मेरे बंधु गुजर जाएगा यह दौर /चल प्रकाश की ओर- संगीता चौधरी के दोहों ने जीवन दर्शन और हकीक़त से परिचय करवाया।
*जहाँ ललछौंह सूरज, प्राची उगता है/ले-चल माँझी उस पार मुझे/जहाँ सूरज के चमकीले पल छिन/नित गीतों में ढलते हैं/जहाँ सपनों से मिल कर/नींदें जश्न मनाती है/उस छोर जहाँ/धरा प्रेयसी नित रूप धरे/अम्बर से मिलने आती है।सुशीला सुराना प्रकृति को प्रेमी और प्रेयसी के रूप में देखती हैं
*शुष्क बांस के वन में/नव कोंपल आयेगी/इसीलिए कहती हूं,/मन में विश्वास लिए/प्यार भरी पाती वे बांचें जरूर हैं/आयेंगे प्रिय मेरे/बसते जो दूर हैं।।–चिराग चतुर्वेदी ने कविता के माध्यम से आशा और उम्मीद जगाई है।
*डॉ वसुंधरा मिश्र की कविताएं प्रेम के अंकुर की पंक्तियाँ – दुख के अथाह सागर में /विराट को मैंने छुआ था /उसे हौले से सहेजा था /उसमें प्रेम के अंकुरों को उगते देखा ।-छोटा होना कितना अच्छा कविता की पंक्तियाँ – – देह ही नहीं, मन भी एक बारगी उसका हो गया /न जाने क्यों? /बिना किसी शर्त/ बिना किसी अहं/ और बिना किसी शब्द के.. पसंद की गईं।
*बुला मन से /अधर्म के नाश को /आयेंगे कृष्ण, धन न माया
साथ देगी तुम्हारा /निरोगी काया, कभी मिठाई /कभी खारी दवाई!/है ये जिंदगी, मानें न मानें /थी विज्ञान सम्मत /जीवन शैली-संजू कोठारी ने धर्म, दवाई मिठाई विज्ञान आदि शब्दों के माध्यम से हाइकू सुनाए ।
*अहंकार वश मत करो, जैसे तैसे कर्म।/सबका फल है भोगना, हमें सिखाता धर्म।।/कल क्या होगा क्यों डरे,कल का करें न शोक। किसमें ताकत आज भी , सके समय को रोक।।-इधर उधर भटके सदा, भ्रमित व्यथित इंसान।/दिशा मिले बदले दशा,पाकर गुरु से ज्ञान। इंदु चाँडक ने वर्तमान जीवन में भ्रमित इंसान को अपने दोहों से संदेश दिया।
अर्चना संस्था में हुई काव्य गोष्ठी में सभी सदस्यों ने ऑनलाइन अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।




