Sunday, April 19, 2026
खबर एवं विज्ञापन हेतु सम्पर्क करें - [email protected]

ललिता पवार : 7 दशक तक 700 से ज्यादा फिल्मों में किया काम

ललिता पवार… हिंदी सिनेमा के प्रेमी इनके नाम और इनके चेहरे से अच्छी तरह से वाकिफ हैं। फिल्मों में खतरनाक सास का किरदार हो या रामानंद सागर के रामायण में मंथरा का, वह इतनी शिद्दत से पर्दे पर अपनी भूमिका गढ़ती थीं कि दर्शक उनकी दमदार छवि पर खूब प्यार लुटाते थे। अपनी बेजोड़ अदायगी से सिने प्रेमियों का मनोरंजन करने वाली अभिनेत्री की 18 अप्रैल को जयंती है। हिंदी सिनेमा में ‘सास’ के किरदार की छवि इतनी मजबूत हो गई कि दर्शक उन्हें देखकर डर जाते थे, लेकिन असल जिंदगी में वह बेहद मेहनती और लगनशील अभिनेत्री थीं। 9 साल की छोटी सी उम्र में फिल्मों में डेब्यू करने वाली ललिता पवार ने सात दशक तक सक्रिय रहते हुए 700 से भी ज्यादा फिल्मों में काम किया और भारतीय सिनेमा में अपना एक अलग मुकाम बनाया। ललिता पवार का जन्म 18 अप्रैल 1916 को नासिक जिले के योला कस्बे में हुआ था। उनका असली नाम अंबा लक्ष्मण राव शगुन था। उनके पिता लक्ष्मण राव शगुन सिल्क और कॉटन के बड़े व्यापारी थे। मात्र 9 साल की उम्र में उन्होंने एक मूक फिल्म में बाल कलाकार के रूप में काम किया और पहली फिल्म के लिए उन्हें सिर्फ 18 रुपए मिले थे। खास बात है कि उस समय लड़कियों को स्कूल भेजना आम नहीं था, लेकिन उनके पिता ने घर पर ही उर्दू-हिंदी शिक्षक और शास्त्रीय संगीत की व्यवस्था कर दी थी।
ललिता पवार बेहद खूबसूरत थीं और जबरदस्त अदाकारा भी। जल्दी ही वे हिंदी सिनेमा की सबसे महंगी हीरोइन बन गईं। वे खुद अपने गाने भी गा लेती थीं, लेकिन 1942 में फिल्म ‘जंग आजादी’ की शूटिंग के दौरान उनके साथ एक दुर्भाग्यपूर्ण हादसा हो गया। एक सीन में भगवान दादा ने उन्हें इतनी जोर से थप्पड़ मारा कि उनकी एक आंख की नस फट गई। डॉक्टर की गलत दवाई से उनके चेहरे पर लकवा मार गया। इस चोट के कारण उनकी एक आंख छोटी हो गई और लगभग तीन साल तक वे फिल्म इंडस्ट्री से दूर रहीं। हीरोइन बनने का उनका सपना चकनाचूर हो गया, लेकिन ललिता पवार ने हार नहीं मानी। उन्होंने खुद को मजबूत बनाया और कैरेक्टर आर्टिस्ट के रूप में वापसी की।
साल 1948 में फिल्म ‘गृहस्थी’ से उनकी वापसी हुई। 1950 में वी. शांताराम की फिल्म ‘दहेज’ में उन्होंने पहली बार क्रूर सास का रोल निभाया। इस रोल ने उन्हें रातोंरात मशहूर कर दिया। दर्शक इतने प्रभावित हुए कि कई माताएं ईश्वर से प्रार्थना करती थीं कि उनकी बेटी को ललिता पवार जैसी सास न मिले। उन्होंने दिलीप कुमार, देव आनंद, राज कपूर जैसे सितारों के साथ काम किया, जो उम्र में उनसे छोटे थे, लेकिन उन्हें मां के रोल निभाने पड़े। उनकी प्रमुख फिल्मों में श्री 420, आनंद, दाग, नसीब, बॉम्बे टू गोवा, अनाड़ी आदि शामिल हैं।
रामानंद सागर के महाकाव्य रामायण में उन्होंने मंथरा का किरदार इतनी शानदार तरीके से निभाया कि आज भी लोग उन्हें मंथरा के नाम से याद करते हैं।
ललिता पवार की दो शादियां हुईं। पहली शादी फिल्म प्रोड्यूसर जी.पी. पवार से हुई, लेकिन तलाक हो गया। दूसरी शादी राजकुमार गुप्ता से हुई, जिनसे उन्हें एक बेटा जय पवार हुआ। 24 फरवरी 1998 को 81 साल की उम्र में पुणे के अपने बंगले ‘आरोही’ में उनका निधन हो गया। जबड़े के कैंसर से पीड़ित ललिता पवार की मौत की खबर तीन दिन बाद पता चली थी।

शुभजिता

शुभजिता की कोशिश समस्याओं के साथ ही उत्कृष्ट सकारात्मक व सृजनात्मक खबरों को साभार संग्रहित कर आगे ले जाना है। अब आप भी शुभजिता में लिख सकते हैं, बस नियमों का ध्यान रखें। चयनित खबरें, आलेख व सृजनात्मक सामग्री इस वेबपत्रिका पर प्रकाशित की जाएगी। अगर आप भी कुछ सकारात्मक कर रहे हैं तो कमेन्ट्स बॉक्स में बताएँ या हमें ई मेल करें। इसके साथ ही प्रकाशित आलेखों के आधार पर किसी भी प्रकार की औषधि, नुस्खे उपयोग में लाने से पूर्व अपने चिकित्सक, सौंदर्य विशेषज्ञ या किसी भी विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें। इसके अतिरिक्त खबरों या ऑफर के आधार पर खरीददारी से पूर्व आप खुद पड़ताल अवश्य करें। इसके साथ ही कमेन्ट्स बॉक्स में टिप्पणी करते समय मर्यादित, संतुलित टिप्पणी ही करें।

शुभजिताhttps://www.shubhjita.com/
शुभजिता की कोशिश समस्याओं के साथ ही उत्कृष्ट सकारात्मक व सृजनात्मक खबरों को साभार संग्रहित कर आगे ले जाना है। अब आप भी शुभजिता में लिख सकते हैं, बस नियमों का ध्यान रखें। चयनित खबरें, आलेख व सृजनात्मक सामग्री इस वेबपत्रिका पर प्रकाशित की जाएगी। अगर आप भी कुछ सकारात्मक कर रहे हैं तो कमेन्ट्स बॉक्स में बताएँ या हमें ई मेल करें। इसके साथ ही प्रकाशित आलेखों के आधार पर किसी भी प्रकार की औषधि, नुस्खे उपयोग में लाने से पूर्व अपने चिकित्सक, सौंदर्य विशेषज्ञ या किसी भी विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें। इसके अतिरिक्त खबरों या ऑफर के आधार पर खरीददारी से पूर्व आप खुद पड़ताल अवश्य करें। इसके साथ ही कमेन्ट्स बॉक्स में टिप्पणी करते समय मर्यादित, संतुलित टिप्पणी ही करें।
Latest news
Related news