कोलकाता । लिटिल थेस्पियन ने भारतीय भाषा परिषद के साथ 51वां रंग अड्डा: “एक शाम अफसाना निगारों के साथ” का आयोजन किया।, जिसमें हिंदी और उर्दू साहित्य जगत के दो प्रतिष्ठित कहानीकारों – श्रीमती कुसुम खेमानी और श्री फ़े. सीन. एजाज़- को एक साथ लाया गया। यह अड्डा 24 अक्टूबर 2026 को भारतीय भाषा परिषद के सभागार में आयोजित किया गया। यह एक ऐसी दोपहर थी जहाँ कहानियाँ लिखे हुए शब्दों से परे जाकर, प्रदर्शन के माध्यम से अभिव्यक्त हुईं और कलाकारों, समीक्षकों और दर्शकों के बीच एक सार्थक संवाद की शुरुआत हुई। पठन, चर्चा और नाट्य प्रस्तुतियों के माध्यम से, रंग अड्डा का उद्देश्य संवाद को प्रोत्साहित करना, साहित्यिक अभिव्यक्ति को बढ़ावा देना और साहित्य, प्रदर्शन और सामाजिक जीवन के बीच के संबंधों को तलाशना है। रंग अड्डा की शुरुआत लिटिल थेस्पियन की अध्यक्ष उमा झुनझुनवाला के स्वागत भाषण से हुई, जिसके बाद फ़े. सीन. एजाज़ का सम्मान किया गया और भारतीय भाषा परिषद के निदेशक डॉ. शंभुनाथ और भारतीय भाषा परिषद की बिमला पोद्दार ने संक्षिप्त भाषण दिए।यह रंग अड्डा दो सत्रों में आयोजित किया गया था, जिसमें पहले सत्र में कुसुम खेमानी की कहानी ‘घोंघा प्रसाद’ की नाट्य प्रस्तुति उमा झुनझुनवाला और गुंजन अजहर द्वारा की गई। इस कहानी का समीक्षात्मक विश्लेषण डॉ. रेशमी पांडा मुखर्जी (एसोसिएट प्रोफेसर, गोखले मेमोरियल गर्ल्स कॉलेज) और शब्बीर अहमद (उर्दू उपन्यासकार) द्वारा प्रस्तुत किया गया। यद्यपि कुसुम खेमानी स्वयं उपस्थित नहीं थीं, फिर भी उनकी उपस्थिति उनकी कहानी और मंच पर उसकी व्याख्या के माध्यम से गहराई से महसूस की गई। दूसरे सत्र में फ़े. सीन. एजाज़ की कहानी “हैवानों की ख़ुदकुशी पर एक बेज़ुबान संवाद” प्रस्तुत की गई, जिसका मंचन कविता कोठारी, हीना परवेज़, एनी दास, भावेश भगत, सत्यम पांडे, फिरोज़ हुसैन और मो. आसिफ़ अंसारी ने किया। इस कहानी का समीक्षात्मक विश्लेषण श्री कलीम हाज़िक (उर्दू कवि और समीक्षक) और डॉ. महमुदा ख़ानम (खिदिरपुर कॉलेज) ने किया। उन्होंने कहानियों, उनकी नाट्य व्याख्याओं और प्रदर्शन की बारीकियों पर अपने विचार साझा किए। धन्यवाद ज्ञापन उमा झुनझुनवाला और श्रीमती बिमला पोद्दार द्वारा दिया गया।




