-रेवंत रेड्डी 89 केस के साथ सबसे आगे
नयी दिल्ली । सांसदों-विधायकों के आपराधिक मामलों की तेज सुनवाई पर सुप्रीम कोर्ट में अहम जानकारी सामने आई। 14 राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने अपने खिलाफ मामले बताए, रेवंत रेड्डी 89 मामलों के साथ सबसे आगे हैं।
सांसदों-विधायकों के आपराधिक मामलों की तेज सुनवाई पर सुप्रीम कोर्ट में अहम जानकारी सामने आई
नयी दिल्ली । नेताओं के खिलाफ आपराधिक मामलों की तेज सुनवाई की मांग पर सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई के दौरान चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। एमिकस क्यूरी और वरिष्ठ अधिवक्ता विजय हंसारिया ने बताया कि 28 में से 14 राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने अपने खिलाफ आपराधिक मामलों की जानकारी दी है। इनमें तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी 89 मामलों के साथ सबसे ऊपर हैं, जबकि पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के खिलाफ 29 मामले दर्ज हैं।
शुभेंदु अधिकारी पर 29 मामले दर्ज
एक मीडिया संस्थान की रिपोर्ट के अनुसार, तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए रेवंत रेड्डी 89 मामलों के साथ सूची में सबसे ऊपर हैं, इसके बाद पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी 29 मामलों के साथ हैं। कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी के शिवकुमार और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू पर 19-19 मामले हैं, जबकि केरल के मुख्यमंत्री वी डी सतीशन पर 18 मामले हैं।
हेमंत सोरेन पर पांच, दो मुख्यमंत्रियों पर चार मामले
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर पांच मामले हैं, महाराष्ट्र के देवेंद्र फडणवीस और हिमाचल प्रदेश के सुखविंदर सिंह सुक्खू पर चार-चार मामले हैं, और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय और बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर दो-दो मामले हैं। रिपोर्ट में सिक्किम के मुख्यमंत्री पी एस तमांग, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान, ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी और राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा के खिलाफ एक-एक मामले का जिक्र है।
हंसारिया की 96 पन्नों की रिपोर्ट के अनुसार, गंभीर आपराधिक मामलों वाले विधायकों का सबसे ज्यादा प्रतिशत बंगाल से है – 292 में से 170 (58 प्रतिशत)। इसके बाद केरल (57 प्रतिशत), आंध्र प्रदेश (56 प्रतिशत), तेलंगाना (49 प्रतिशत), झारखंड और ओडिशा (दोनों 45 प्रतिशत), बिहार (42 प्रतिशत), महाराष्ट्र (40 प्रतिशत) और यूपी का नंबर आता है।
लोकसभा में, 170 सांसदों (कुल 543 की संख्या का 31 प्रतिशत) के खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले लंबित हैं। तेलंगाना में 17 में से 11 सांसदों, केरल में 21 में से 11 सांसदों, बिहार में 40 में से 19 सांसदों, यूपी में 80 में से 34 सांसदों, महाराष्ट्र में 48 में से 17 सांसदों, बंगाल में 42 में से 16 सांसदों और आंध्र प्रदेश में 25 में से 9 सांसदों के खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले हैं।
हंसारिया ने बताया कि जुलाई 2026 तक, मौजूदा और पूर्व सांसदों और विधायकों के खिलाफ 4,192 आपराधिक मामले सुनवाई के लिए लंबित हैं। उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा, यानी 1,171 मामले लंबित हैं।
वकील स्नेहा कलिता की ओर से दायर ‘एमिकस’ रिपोर्ट के अनुसार, राज्यसभा के 233 सदस्यों में से 75 (33 प्रतिशत) के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं; इनमें से 40 (18%) मामले गंभीर अपराधों से जुड़े हैं ,जिनमें पांच साल या उससे ज्यादा की सजा हो सकती है।
एमिकस ने कोर्ट से अनुरोध किया कि मौजूदा और पूर्व विधायकों के खिलाफ मामलों की सुनवाई के लिए विशेष अदालतें तय की जाएं और संबंधित हाई कोर्ट को इन मुकदमों की प्रगति पर सक्रिय रूप से नज़र रखने का निर्देश दिया जाए।




