Monday, February 23, 2026
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11 महीने की बच्ची के फ्रैक्चर के इलाज के लिए उसकी गुड़िया के पैरों पर भी चढ़ाना पड़ा प्लास्टर

नयी दिल्ली : लोकनायक अस्पताल में 11 महीने की बच्ची के दोनों पैरों के फ्रैक्चर का इलाज करने के लिए डॉक्टरों को उसकी डॉल (गुड़िया) को भी भर्ती करना पड़ा। डॉक्टरों ने बच्ची की तरह गुड़िया के पैरों पर भी प्लास्टर चढ़ाया और ठीक उसे भी वैसे रखा है, जैसे बच्ची को रखा गया है। दरअसल, 11 महीने की जिक्रा मलिक दिल्ली गेट स्थित अपने घर पर 17 अगस्त को बिस्तर से गिर गयी थी। इससे उसके दोनों पैरों में फ्रैक्चर आ गया। माता-पिता जिक्रा को लेकर अस्पताल पहुँचे। डॉक्टरों ने बताया कि बच्ची की हड्डियों को जोड़ने के लिए दो हफ्ते तक पैरों को रॉड (गैलन ट्रैक्शन- दो साल तक के बच्चों की हडि्डयों को जोड़ने वाली मेथड) से जोड़कर ऊपर की ओर लटकाकर रखना होगा। माता-पिता ने इलाज के हामी भर दी। लेकिन जिक्रा उनसे अस्तपाल से बाहर जाने की जिद करने लगी और रोने लगी। ऐसे में इलाज करना मुश्किल हो रहा था। डॉक्टरों ने जिक्रा के माता-पिता से उसका पसंदीदा खिलौना लाने को कहा। इस पर बच्ची की माँ फरीन ने डॉक्टरों को बताया कि वह अपनी गुड़िया से दिन भर खेलती है।
गुड़िया के पैरों को लटकाकर जिक्रा का लगाया प्लास्टर
डॉक्टरों ने तय किया कि बच्ची को प्लास्टर लगाने से पहले उसकी गुड़िया का इलाज करना होगा। इससे उसके दिमाग का भय निकल जाएगा। ऐसा ही हुआ। डॉक्टरों से घर से जिक्रा की गुड़िया मँगाई और जिक्रा के बेड पर ही गैलन ट्रैक्शन की पॉजीशन में उसके पैरों को बांध दिया। गुड़िया को इलाज की स्थिति में देखने के बाद जिक्रा ने भी पैरों प्लास्टर चढ़वा लिया। अब स्थिति यह है कि डॉक्टरों को जब जिक्रा को दवाई देनी होती है, तो पहले परी को दवा देने का दिखावा करना होता है। इसके बाद जिक्रा दवा लेती है। लगभग दो सप्ताह होने के बाद अब बच्ची काफी ठीक हो रही है। बच्ची के साथ गुड़िया का इलाज करने के चलते जिक्रा पूरे अस्पताल में गुड़िया वाली बच्ची के नाम से चर्चित हो गयी है। जिक्रा की माँ फरीन ने मीडिया को बताया, जिक्रा हमेशा इधर-उधर चलती रहती थी। उसे पांच मिनट भी एक स्थान पर बिठाना मुश्किल था। अस्पताल के पहले दिन वह अस्पताल में लेटने को भी तैयार नही थी। लोकनायक अस्पताल में हड्‌डी रोग विशेषज्ञ प्रोफेसर डॉ अजय गुप्ता ने बताया, ‘‘11 महीने की बच्ची के पैरों में फ्रैक्चर था, वह इलाज कराने से इनकार कर रही थी। इसलिए उसकी माँ ने आइडिया दिया कि बच्ची के इलाज से पहले उसकी गुडिया का इलाज करने का दिखावा करना होगा। क्योंकि बच्ची सबसे ज्यादा अपनी गुड़िया परी के साथ खेलती है। यह आइडिया कारगर रहा और अब बच्ची आराम से इलाज करा रही है।’’

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