-शिक्षक विद्यार्थियों के राष्ट्रीय और मानवीय मानस का निर्माता है: शंभुनाथ
– शिक्षक की विजय छात्र की उपलब्धि में है: प्रेमशंकर त्रिपाठी
कोलकाता । भारतीय भाषा परिषद द्वारा पूर्व–राष्ट्रपति राधाकृष्णन के जन्म दिवस और शिक्षक दिवस पर स्कूल, कालेज और विश्वविद्यालय के 20 शिक्षकों को सम्मानित किया गया । आशीष झुनझुनवाला ने अतिथियों एका स्वागत किया । प्रो. संजय जायसवाल ने शिक्षक सम्मान–2026 की पृष्ठभूमि स्पष्ट करते हुए कहा कि शिक्षक की शैक्षणिक,सामाजिक और सांस्कृतिक स्वीकार्यता का पर्व है । भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी के रेक्टर प्रो. दिलीप शाह ने कहा कि शिक्षा ऐसी होनी चाहिए जो युवाओं को रोजगार पाने के लिए सहायक हो। उन्होंने यह भी बताया कि जो शिक्षण संस्थान शिक्षा देने के क्षेत्र में आगे बढ़े हुए हैं, वे बीच–बीच में साधारण वर्ग के विद्यार्थियों के बीच जाकर शिक्षा की विषमता को दूर करें, अन्यथा विषमता असंतोष पैदा करेगी।
शिक्षा सम्मान प्रदान करने के बाद अध्यक्षीय वक्तव्य देते हुए शिक्षाविद और वरिष्ठ लेखक डा. शंभुनाथ ने कहा कि शिक्षक विद्यार्थियों के राष्ट्रीय और मानवीय मानस का निर्माता है। शायद सूरज में इतना उजाला इसलिए है कि हजारों साल से शिक्षक अपने को मिटा कर भी ज्ञान की लौ बनकर जलता रहा है ! मोबाइल पर जब बड़े पैमाने पर अज्ञान फैलाया जा रहा है, शिक्षक की जिम्मेदारी ज्ञान की रक्षा करना है।
शिक्षा सम्मान समारोह में उपस्थित सबसे वरिष्ठ सेवानिवृत्त शिक्षक प्रो. प्रेमशंकर त्रिपाठी ने आभार व्यक्त करते हुए कहा कि एक शिक्षक की विजय इसमें है कि उसके शिष्य उससे आगे निकल जाएं। .मुक्तेश्वरनाथ तिवारी ने कहा शिक्षा सम्मान हमें नैतिक जिम्मेदारी से जोड़ता है । डॉ दारोगा सिंह ने कहा शिक्षक समाज की आंख होता है,वह विद्यार्थियों को दुनिया को देखने और जानने की समझ देता है।
इस अवसर पर डॉ प्रमोद कुमार प्रसाद, डॉ शशि कुमार शर्मा, डॉ रंजना शर्मा, डॉ सुमिता चट्टोराज, डॉ जोतिमय बाग, कम्मू खटिक, डॉ सुनीता मंडल, डॉ मनोज मिश्र, सिम्मी तलवार, संजय यादव, डॉ सुमन शर्मा, मनोज यादव, मनीषा गुप्ता, डॉ राहुल शर्मा एवं डॉ अश्विनी कुमार को सम्मानित किया गया । यशवंत सिंह और डॉ अजय साव ने संदेश के जरिए कृतज्ञता प्रकट किया। भारतीय भाषा परिषद की ओर से धन्यवाद ज्ञापन विमला पोद्दार ने किया ।




