कोलकाता । भवानीपुर एडुकेशन सोसाइटी कॉलेज के रीडर्स क्लब के विद्यार्थियों ने शरतचंद्र कहानियों पर चर्चा की । शरतचन्द्र चट्टोपाध्याय (१५ सितम्बर, १८७६ – १६ जनवरी, १९३८) बांग्ला के सुप्रसिद्ध उपन्यासकार एवं लघुकथाकार थे। वे बांग्ला के सबसे लोकप्रिय उपन्यासकार हैं। उनकी अधिकांश कृतियों में गाँव के लोगों की जीवनशैली, स्त्री संघर्ष एवं उनके द्वारा झेले गए संकटों का वर्णन है। 30 जून 2026 सुबह 10.30 से लाइब्रेरी में आरंभ हुई इसमें मुख्य अतिथि के रूप में प्रसिद्ध लेखिका अंचिता घटक को आमंत्रित किया गया था। अंचिता घटक ने बांग्ला से शरतचंद्र की कुछ चुनी हुई कहानियों का अंग्रेजी में अनुवाद किया।शरतचंद्र आज कितने प्रासंगिक हैं इस पर बातचीत और वक्तव्य दिए गए। उनकी कहानी, उपन्यास और साहित्य पर हुई फिल्मों को स्लाइड्स और विडियो के द्वारा दिखाया गया जिसे छात्र मो. नवाफ़ अली ने बनाया और वर्णित किया ।उनकी कहानियों और उपन्यासों में मानवीय संवेदनाओं, विशेष रूप से नारी के उत्थान और सामाजिक कुरीतियों का मार्मिक चित्रण मिलता है। उनकी कुछ रचनाओं में सबसे प्रसिद्ध उपन्यास हैं पल्ली समाज (1916), चरित्रहीन (1917), देवदास (1917), निष्कृति (1917), श्रीकांत चार भागों में (1917, 1918, 1927 और 1933), गृह दाह (1920) और शेषेर परिचय मरणोपरांत प्रकाशित (1939)।
रीडर्स क्लब की प्रतिनिधि डॉ वसुंधरा मिश्र ने बताया कि हिंदी अनुवाद के माध्यम से शरतचंद्र को बहुत ही लोकप्रिय कथाकार, उपन्यास कार के रूप में पढ़ा जाता है।
कार्यक्रम में शरतचंद्र पर कॉलेज के अंग्रेजी , एडुकेशन, बांग्ला, इतिहास और हिंदी के शिक्षक शिक्षिकाओं ने भाग लिया। पचास से अधिक छात्र छात्राओं की उपस्थिति रही। रेक्टर और डीन प्रो दिलीप शाह ने स्वागत वक्तव्य दिया। रीडर्स क्लब की सक्रिय सदस्या प्रो चंपा श्रीनिवासन ने अंचिता घटक को कॉलेज मोमेंटो देकर सम्मानित किया। इस अवसर पर प्रातःकालीन कॉमर्स सत्र की वाइस प्रिंसिपल प्रो मीनाक्षी चतुर्वेदी, डॉ रेखा नारिवाल, डॉ गार्गी तालपात्र, डॉ संपा सिन्हा बासु, प्रो वनीता शर्मा, प्रो शंख, प्रो सोम्यजित, प्रो डॉ मिली समद्दार, प्रो देविना गुप्ता आदि शिक्षक- शिक्षिकाओं की उपस्थिति रही।
प्रो सोम्यजित (अंग्रेजी) , डॉ संपा सिन्हा बासु(बांग्ला) , डॉ चंपा श्रीनिवासन अंग्रेजी) , डॉ वसुंधरा मिश्र (हिंदी) में अपना वक्तव्य रखा।
कार्यक्रम का संयोजन प्रो चंपा श्रीनिवासन और संचालन छात्रा मनीदीपा ने किया ।विद्यार्थियों में सीरीन भट्टाचार्य ने शरतचंद्र की कहानी महेश पर महत्वपूर्ण विचार व्यक्त किए। समुद्रनील ने रिपोर्ट दी। रीडर्स क्लब की प्रतिनिधि डॉ वसुंधरा मिश्र ने जानकारी देते हुए बताया कि कार्यक्रम में शरत चंद्र को साहित्यिक, नाटक, भावनाओं, सिनेमा और विभिन्न भाषाओं – सभी पहलुओं से याद किया गया। वास्तव में, मंत्रमुग्ध कर देने वाला कार्यक्रम रहा।




