दीपंकर एडबार
नवद्वीप (नदिया) । पश्चिम बंगाल के नवद्वीप स्थित फांसीतला मोड़ की श्रीश्री कृष्णकाली बारोयारी समिति की दुर्गापूजा इस वर्ष एक खास वजह से चर्चा में है। पांच दशक से अधिक पुरानी इस पूजा को स्थानीय निवासियों की पहल पर फिर से सार्वजनिक स्वरूप देने की कोशिश की गई है। लंबे समय तक गोपाल मंदिर में आयोजित होने वाली यह पूजा धीरे-धीरे निजी आयोजन जैसी बन गई थी। अब क्षेत्र के लोगों की मांग और सामूहिक प्रयास से इसे दोबारा सर्वजन की भागीदारी वाला उत्सव बनाने की पहल की गई है।
श्रीश्री कृष्णकाली बारोयारी समिति की ओर से आयोजित इस पूजा में स्मृति संघ सहयोग कर रहा है। आयोजकों के अनुसार, इस आयोजन की पहचान पारंपरिक बंगाली रीति-रिवाज और सादगीपूर्ण धार्मिक परंपरा से जुड़ी रही है। यहां देवी दुर्गा की एकचाला प्रतिमा स्थापित की जाती है, जिसे पारंपरिक ‘डाकेर साज’ से सजाया जाता है। इस शैली में प्रतिमा की सजावट पूजा की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को दर्शाती है।
पूजा में फांसीतला मोड़ के अलावा पाताल साधु सरणी, स्टीमरघाट रोड, बागानियापाड़ा और मणिपुर बाई लेन सहित आसपास के इलाकों के लोगों की भी भागीदारी रहती है। आयोजकों का मानना है कि पूजा को फिर सार्वजनिक स्वरूप देने से स्थानीय लोगों के बीच सामुदायिक जुड़ाव को मजबूती मिलेगी।
पूजा समिति के संयुक्त सचिव सौरभ घोष और राजकुमार चक्रवर्ती ने बताया कि पहले यह पूजा गोपाल मंदिर में होती थी। स्थानीय निवासियों की पहल से अब इसे फिर सामूहिक आयोजन का रूप दिया गया है। समिति के सलाहकार आशीष कुमार पाल ने कहा कि लंबे समय तक सार्वजनिक पूजा का स्वरूप लगभग निजी आयोजन जैसा हो गया था। स्थानीय लोगों की मांग पर इसे फिर सर्वजन की पूजा के रूप में स्थापित करने का प्रयास किया गया है।
पंचमी की शाम पूजा का उद्घाटन होगा। इस अवसर पर नवद्वीप के विधायक श्रुति शेखर गोस्वामी, नगरपालिका प्रशासक प्रसनजीत कुंडू, नगरपालिका के कार्यकारी अधिकारी संजीव कुमार राहा और नवद्वीप थाने के प्रभारी बरुण गाइन के उपस्थित रहने की संभावना है।
धार्मिक आयोजन के साथ सामाजिक पहल भी जोड़ी गई है। उद्घाटन के दिन पूर्व बर्धमान जिले के चांदपुर आधार कॉलोनी के 100 से अधिक स्कूली बच्चों को नए कपड़े दिए जाएंगे।
षष्ठी को देवी का बोधन होगा। सप्तमी, अष्टमी और नवमी के दौरान फल के साथ विभिन्न प्रकार के अन्नभोग, खिचड़ी, पांच तरह की सब्जियां, पुष्पान्न, परमान्न और मिठाइयां अर्पित की जाएंगी। महाष्टमी की दोपहर करीब 1,500 लोगों के बीच खिचड़ी, पांच तरह की सब्जियां और परमान्न प्रसाद के रूप में वितरित करने की योजना है।
दशमी को पारंपरिक रूप से खई, चिउड़ा, मुरकी और दही का भोग लगाया जाएगा। शाम को शोभायात्रा के साथ प्रतिमा का विसर्जन फांसीतला घाट पर होगा। इसी रात नवद्वीप के प्रसिद्ध रास उत्सव से जुड़ी श्रीश्री कृष्णकाली माता की काठामो पूजा भी आयोजित की जाएगी।
51 वर्षों की परंपरा के बीच इस वर्ष का आयोजन केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है। स्थानीय लोगों की पहल पर पूजा को फिर सार्वजनिक स्वरूप में लाने का प्रयास यह संकेत देता है कि धार्मिक परंपराओं की निरंतरता में सामुदायिक भागीदारी की अहम भूमिका होती है।




