Saturday, November 7, 2026
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दिवाली पर लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति खरीदते समय रखें ध्यान

दिवाली की तैयारियों में घर की सजावट से लेकर पूजा की खरीदारी तक हर चीज का अपना खास महत्व होता है। इस पर्व पर धनतेरस के साथ ही बाजारों में माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की सुंदर प्रतिमाओं की रौनक बढ़ जाती है। मान्यता है कि दिवाली पर नई लक्ष्मी-गणेश प्रतिमाओं की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि और खुशहाली आती है। ऐसे में पूजा के लिए मूर्ति खरीदते समय उसकी सुंदरता के साथ-साथ कुछ धार्मिक और वास्तु संबंधी बातों का ध्यान रखना भी जरूरी माना जाता है। आखिर माता लक्ष्मी की प्रतिमा किस मुद्रा में होनी चाहिए, गणेशजी की सूंड किस ओर मुड़ी हो और मूर्ति का आकार व रंग कैसा होना चाहिए? वास्तु के अनुसार, इन बातों का ध्यान रखकर दिवाली पूजन के लिए उचित प्रतिमा का चयन किया जा सकता है।

कैसी होनी चाहिए माता लक्ष्मी की प्रतिमा?
वास्तु मान्यताओं के अनुसार, दिवाली पूजन के लिए माता लक्ष्मी की ऐसी प्रतिमा खरीदनी चाहिए जिसमें वे कमल के फूल पर विराजमान हों। बैठी हुई मुद्रा वाली माता लक्ष्मी की प्रतिमा को घर के लिए शुभ माना जाता है। मान्यता है कि खड़ी हुई मुद्रा में माता लक्ष्मी की प्रतिमा घर में धन की स्थिरता के लिए अनुकूल नहीं होती। इसलिए पूजा के लिए बैठी हुई प्रतिमा को प्राथमिकता दी जाती है।
प्रतिमा में माता लक्ष्मी के हाथ से धन की वर्षा होती हुई दिखाई दे, जिसे धन वर्षा की मुद्रा कहा जाता है। ऐसी प्रतिमा को सुख-समृद्धि और संपन्नता का प्रतीक माना जाता है।
गणेशजी की सूंड की दिशा का रखें ध्यान
भगवान गणेश की प्रतिमा खरीदते समय उनकी सूंड की दिशा पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी जाती है। वास्तु के अनुसार, घर में पूजा के लिए गणेशजी की सूंड बाईं ओर मुड़ी हुई होनी चाहिए। इसे वाममुखी गणेश कहा जाता है। धार्मिक मान्यता में इस स्वरूप को गृहस्थ जीवन के लिए शुभ माना गया है।
लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति के लिए कौन-से रंग शुभ?
मूर्ति के रंग को लेकर भी वास्तु में कुछ मान्यताएं बताई गई हैं। माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की प्रतिमाओं के लिए गुलाबी, सुनहरा और हल्का पीला रंग शुभ माना जाता है। प्रतिमाओं पर लाल, गुलाबी या पीले रंग के वस्त्र हों तो इन्हें भी अच्छा माना जाता है। वहीं, वास्तु गुरु गहरे और काले रंग की प्रतिमाएं खरीदने से बचने की सलाह देती हैं।

घर के मंदिर के लिए कितना होना चाहिए मूर्ति का आकार?

घर के मंदिर में स्थापित करने के लिए लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमाओं का आकार छोटा रखने की सलाह दी जाती है। वास्तु के अनुसार, घर में पूजा के लिए एक से नौ इंच तक की मूर्तियां उपयुक्त मानी जाती हैं। मान्यता है कि इससे बड़ी प्रतिमाओं की प्राण-प्रतिष्ठा और पूजा से जुड़े नियम अधिक विस्तृत होते हैं। इसलिए बड़ी प्रतिमाएं आमतौर पर मंदिरों में स्थापित की जाती हैं।
मूर्ति खरीदते समय इन बातों का भी रखें ध्यान
प्रतिमा कहीं से खंडित न हो: लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति खरीदते समय अच्छी तरह जांच लें कि उसमें कोई दरार, टूट-फूट या चटकन न हो। प्रतिमा पूरी तरह सुरक्षित और अखंडित होनी चाहिए। छोटी-सी खरोंच या क्षति भी दिखाई दे तो ऐसी मूर्ति खरीदने से बचने की सलाह दी जाती है।
दोनों प्रतिमाएं अलग-अलग हों: लक्ष्मी और गणेशजी की मूर्तियां अलग-अलग होनी चाहिए। ऐसी प्रतिमा लेने से बचें जिसमें दोनों की आकृतियां एक-दूसरे से जुड़ी हुई हों।
वाहन की मौजूदगी भी देखें: भगवान गणेश की प्रतिमा के साथ उनका वाहन मूषक होना चाहिए। वहीं, माता लक्ष्मी की प्रतिमा के साथ उल्लू या हाथी का स्वरूप होना शुभ माना जाता है।
मान्यताओं के अनुसार करें प्रतिमाओं का चयन
दिवाली पूजन के लिए लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां खरीदते समय इन बातों को ध्यान में रखा जा सकता है। हालांकि, मुद्रा, रंग, आकार और अन्य विशेषताओं से जुड़े ये नियम वास्तु एवं धार्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं। प्रतिमा का चयन अपनी श्रद्धा, परंपरा और पूजा की व्यवस्था को ध्यान में रखकर करना चाहिए।

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