भारत में कई ऐसे पर्यटन स्थल हैं, जहां प्राकृतिक खूबसूरती के साथ इतिहास, आस्था और रहस्य का अनोखा मेल देखने को मिलता है। त्रिपुरा का उनाकोटी भी ऐसी ही जगह है, जो अपनी विशाल चट्टानों पर उकेरी गई प्राचीन आकृतियों और भगवान शिव से जुड़ी मान्यताओं के कारण देशभर के पर्यटकों को आकर्षित करती है। घने जंगलों और पहाड़ियों के बीच मौजूद यह स्थल उन यात्रियों के लिए खास है, जिन्हें धार्मिक पर्यटन के साथ इतिहास और प्राचीन शिल्पकला को करीब से देखने में रुचि है। एक करोड़ से एक कम मूर्तियों के कारण पड़ा उनाकोटी नाम पूर्वोत्तर भारत के त्रिपुरा राज्य में रघुनंदन पहाड़ियों की गोद में स्थित उनाकोटी का नाम ही अपने आप में इसकी सबसे बड़ी विशेषता बताता है। ‘उनाकोटी’ का अर्थ होता है एक करोड़ से एक कम। स्थानीय मान्यता के अनुसार यहां 99 लाख 99 हजार 999 देवी-देवताओं की मूर्तियां मौजूद हैं। हालांकि इतनी बड़ी संख्या में मूर्तियों की गिनती का प्रत्यक्ष प्रमाण उपलब्ध नहीं है, लेकिन चट्टानों पर बनी विशाल और छोटी-बड़ी आकृतियों की संख्या तथा विस्तार इस स्थान को असाधारण बनाते हैं।
यहां पहुंचने वाले पर्यटक सबसे पहले चट्टानों पर उकेरी गई विशाल आकृतियों को देखकर आकर्षित होते हैं। प्राकृतिक पहाड़ियों के बीच पत्थरों को काटकर बनाई गई ये प्रतिमाएं प्राचीन शिल्पकला की अद्भुत झलक प्रस्तुत करती हैं। भगवान शिव की विशाल प्रतिमा यहां का प्रमुख आकर्षण है। इसके अलावा गणेश, देवी-देवताओं और अन्य धार्मिक आकृतियों के शिल्प भी यहां देखने को मिलते हैं।
विशाल शिव प्रतिमा है सबसे बड़ा आकर्षण
उनाकोटी की पहचान भगवान शिव की विशाल चट्टानी प्रतिमा से भी होती है। इसे स्थानीय स्तर पर उनाकोटेश्वर काल भैरव के नाम से भी जाना जाता है। प्रतिमा के आसपास बनी अन्य आकृतियां और पहाड़ी का प्राकृतिक स्वरूप मिलकर ऐसा दृश्य तैयार करते हैं, जिसे देखकर पर्यटक लंबे समय तक यहां रुकना पसंद करते हैं।
विशाल चट्टान पर उकेरे गए चेहरे की बनावट, सिर पर बने आभूषण और आसपास की अन्य आकृतियां इस पूरे क्षेत्र को बेहद अलग रूप देती हैं। बारिश के मौसम में पहाड़ियों और हरियाली के बीच इन शिल्पों का दृश्य और भी आकर्षक दिखाई देता है।
भगवान शिव से जुड़ी है प्रसिद्ध कथा
उनाकोटी को लेकर कई लोककथाएं प्रचलित हैं और इनमें भगवान शिव प्रमुख रूप से जुड़े हुए हैं। एक मान्यता के अनुसार भगवान शिव एक करोड़ देवी-देवताओं के साथ काशी की ओर जा रहे थे। रात होने पर सभी ने रघुनंदन पहाड़ियों के पास विश्राम किया। भगवान शिव ने सभी से कहा कि उन्हें सूर्योदय से पहले आगे की यात्रा शुरू करनी होगी।
कहा जाता है कि अगली सुबह भगवान शिव को छोड़कर बाकी देवी-देवता समय पर नहीं उठ सके। इसके बाद भगवान शिव अकेले ही आगे बढ़ गए और अन्य देवी-देवताओं के पत्थर की प्रतिमाओं में बदल जाने की मान्यता है। इसी कथा के कारण इस स्थान को एक करोड़ से एक कम यानी उनाकोटी कहा जाने लगा।
हालांकि यह कथा धार्मिक और स्थानीय लोकविश्वास का हिस्सा है। इसे ऐतिहासिक घटना के रूप में प्रमाणित नहीं किया गया है। पर्यटक यहां पहुंचकर इस कथा के साथ-साथ वास्तविक चट्टानी शिल्प और प्राचीन कला को भी देख सकते हैं।
कल्लू कुम्हार की कहानी भी है प्रसिद्ध
उनाकोटी से जुड़ी एक दूसरी लोकप्रिय कथा कल्लू कुम्हार की है। लोककथा के अनुसार कल्लू कुम्हार भगवान शिव और माता पार्वती के भक्त थे और वह भी उनके साथ कैलाश जाना चाहते थे। मान्यता है कि माता पार्वती ने उनकी परीक्षा लेने के लिए उन्हें एक करोड़ देवी-देवताओं की प्रतिमाएं बनाने को कहा।
कहा जाता है कि कल्लू कुम्हार ने पूरी रात मेहनत करके लगभग एक करोड़ प्रतिमाएं तैयार कर दीं, लेकिन सुबह गिनती करने पर एक प्रतिमा कम निकली। इसी वजह से वह कैलाश नहीं जा सके और इस स्थान का नाम उनाकोटी पड़ गया। यह कथा भी स्थानीय परंपरा और लोकमान्यता के रूप में पीढ़ियों से सुनाई जाती रही है।
इतिहास और पर्यटन का अनोखा संगम
उनाकोटी केवल धार्मिक आस्था से जुड़ा स्थल नहीं है, बल्कि प्राचीन शिल्पकला और इतिहास में रुचि रखने वाले पर्यटकों के लिए भी महत्वपूर्ण स्थान है। चट्टानों को काटकर बनाई गई प्रतिमाएं इस क्षेत्र की प्राचीन कलात्मक परंपरा की झलक देती हैं। इन प्रतिमाओं के निर्माण का सटीक समय और इन्हें बनाने वाले शिल्पकारों को लेकर इतिहासकारों और विशेषज्ञों के बीच अलग-अलग मत मिलते हैं।
कुछ मत इन्हें आठवीं-नौवीं शताब्दी के आसपास का मानते हैं, जबकि इनके निर्माण को लेकर अन्य ऐतिहासिक धारणाएं भी सामने आती रही हैं। इसलिए इनसे जुड़ी निश्चित तारीख या किसी एक शासक के समय में इनके निर्माण का दावा सावधानी के साथ ही किया जाना चाहिए।
हरियाली के बीच घूमने का अलग अनुभव
उनाकोटी की खूबसूरती केवल चट्टानों पर बनी प्रतिमाओं तक सीमित नहीं है। यह पूरा क्षेत्र पहाड़ियों और हरियाली से घिरा हुआ है। मानसून के दौरान आसपास का प्राकृतिक वातावरण और भी मनमोहक हो जाता है। पहाड़ी ढलानों से बहता पानी, घने पेड़ और चट्टानों के बीच दिखाई देती प्राचीन आकृतियां पर्यटकों को अलग तरह का अनुभव देती हैं।
जो लोग सामान्य धार्मिक यात्राओं से अलग कुछ देखना चाहते हैं, उनके लिए उनाकोटी एक शानदार पर्यटन अनुभव हो सकता है। यहां धार्मिक आस्था के साथ प्रकृति, इतिहास और प्राचीन कला को एक ही जगह महसूस किया जा सकता है।
अगर आप त्रिपुरा या पूर्वोत्तर भारत की यात्रा की योजना बना रहे हैं तो उनाकोटी को अपने पर्यटन कार्यक्रम में शामिल किया जा सकता है। यह स्थान उन यात्रियों के लिए खास है जो प्राचीन भारतीय कला, धार्मिक परंपराओं, लोककथाओं और प्राकृतिक वातावरण को एक साथ देखना चाहते हैं।
यहां विशाल शिव प्रतिमा और चट्टानों पर बनी अन्य आकृतियां यात्रा का मुख्य आकर्षण हैं। इसके अलावा आसपास का पहाड़ी और हरियाली से भरा वातावरण कुछ समय शांतिपूर्वक बिताने का अवसर भी देता है। यही कारण है कि उनाकोटी आज त्रिपुरा के महत्वपूर्ण पर्यटन स्थलों में अपनी अलग पहचान बना चुका है।
उनाकोटी से जुड़ी एक करोड़ से एक कम मूर्तियों और कल्लू कुम्हार सहित विभिन्न कथाएं स्थानीय धार्मिक मान्यताओं और लोककथाओं पर आधारित हैं। प्रतिमाओं की वास्तविक संख्या और उनके निर्माण की निश्चित तिथि को लेकर प्रमाणित ऐतिहासिक जानकारी सीमित है।
(साभार – खास खबर)




