इतिहास के पन्नों में हाशिए पर रह गयीं कस्तूरबा : नीलिमा

रायपुर – कस्तूरबा को भी जब भी इतिहास के आइने में देखा गया तो वो गांधी जी की कठपुतली के रूप में ही दिखीं। उनकी हां में हां और ना में ना मिलाते हुए ही जीवन बिता दिया। पर उनके त्याग और तपस्या की चर्चा तो ऐतिहासिक पन्नों से गायब ही हो गई। क्या किसी ने सोचा कि जीवन पर दर्द सहकर, उपेक्षित होकर बा ने मोहनदास को लोगों की नजरों में महात्मा बना दिया। दरअसल एक संपन्न परिवार में जन्मीं बा ऐसी नहीं थीं।

कलम दैनिक भास्कर संवाद में शामिल होने रायपुर पहुंचीं नीलिमा ने कस्तूरबा के जीवन पर एक काल्पनिक किताब ‘द सीक्रेट डायरी ऑफ कस्तूरबा’ लिखी है। इसका हिंदी अनुवाद “कस्तूरबा की रहस्यमयी डायरी’ के नाम से जारी किया गया है। नीलिमा ने बताया कि यह किताब ऐतिहासिक तथ्यों की पृष्ठभूमि पर लिखी गई है। इसे कस्तूरबा की डायरी की शैली में लिखा गया है। एक साइकोलॉजिस्ट, स्त्री और मां होने के लिहाज से मैंने कस्तूरबा को उस दौर के लिहाज से जीने की कोशिश की है और उसी आधार पर बातें लिखी हैं।

रईस कपाड़िया परिवार में सबसे छोटी थीं वो

इस किताब के अंशों को पढ़ते हुए नीलिमा ने कहा कि ये कहानी है उस महिला की, जिसने मोहन दास को महात्मा गांधी बनाया। दुनिया में ‘कस्तूर’ को खुशबू के लिए जाना जाता है, उसका नाम इसी पर रखा गया था। वह रईस कपाड़िया परिवार में सबसे छोटी थी। वो कपाड़िया परिवार जो विदेशों में कपड़े, अनाज और कपास के कारोबार का स्थापित घराना था। पूरी दुनिया उन्हें कस्तूरबा के नाम से पहचानती है, लेकिन बहुत कम लोग ऐसे हैं, जो उन्हें वाकई में जानते हैं। वह ऐसे व्यक्ति की पत्नी थी, जिसे शांति के दूत के रूप में दुनियाभर में सम्मान प्राप्त हुआ। जिसे लोग राष्ट्रपिता और बापू जैसे संबोधन देते हैं। वो दुनिया के लिए जैसे थे, अपनी पत्नी और बेटे के लिए वैसे बिल्कुल नहीं थे। कस्तूरबा ने उनके साथ रहकर कई दुख सहे। अगर उनकी जिंदगी को एक शब्द में बयां करने कहें तो मैं उन्हें “व्यथा’ कहूंगी।

दोहरा चरित्र था गांधी जी का

नीलिमा ने कहा, एक तरफ गांधी जी कपोल कल्पना के आधार पर बा को चरित्रहीन कहते हुए सड़क पर फेंक देने की बात कहते हैं तो दूसरी ओर ब्रह्मचर्य के प्रयोग में 18-20 साल की लड़कियों को शामिल करते थे। एक पत्नी के लिए ये घोर मानसिक प्रताड़ना से कम नहीं था। वे जैसे दुनिया के लिए थे, घरवालों के लिए वैसे नहीं थे।

जब दो लड़कियों की चोटी खुद गांधी ने काटी

नीलिमा ने एक किस्सा शेयर किया, उन्होंने बताया महात्मा गांधी के बेटे मणिलाल काे लंबे बालों वाली एक युवती बेहद पसंद थी। वे घंटों बैठकर बातें करते थे। एक दिन मणिलाल ने अंजाने में किसी दूसरी लड़की के कंधे पर पीछे से हाथ रख दिया। वो शिकायत करने गांधी तक पहुंच गईं। उन्होंने मणिलाल और दोनों युवतियों को कक्ष में बुलाया। मणिलाल से पूछा- तुमने ऐसा क्यों किया? उन्होंने जवाब दिया- मुझे उसके लंबे बाल पसंद हैं, अंजाने में मुझसे ये गलती हो गई। गांधीजी ने कहा, यानी सारे फसाद की जड़ बाल हैं। इसके बाद उन्होंने दोनों युवतियों के बाल खुद काट दिए। मणिलाल को भी सजा दी ।

गांधीजी ने लिखा चौकाने वाला खत

नीलिमा ने एक वाकया साझा करते हुए कहा कि एक बार कस्तूरबा बीमार थीं, उन्हें गांधी की जरूरत थी। वो नहीं आए, लेकिन जो खत भेजा वो चौंकाने वाला था। उन्होंने कहा कि अभी मैं आने की स्थिति में नहीं हूं। अगर यही नियति है कि तुम्हारी मृत्यु हो तो तुम्हारे लिए वही बेहतर होगा कि तुम मुझसे पहले जाओ। मैं तुम्हें आश्वस्त करता हूं कि तुम्हारी मृत्यु के बाद मैं दूसरी स्त्री से शादी नहीं करूंगा। वहीं, दूसरी तरफ जब गांधीजी खुद बीमार पड़े तो उन्होंने तब कोलकाता में रह रही कस्तूरबा को बुला लिया।  बीमारी की खबर सुनते ही वो दौड़ी-दौड़ी आ गईं। गांधीजी इतने बीमार थे कि अगर कस्तूरबा उनका ख्याल नहीं रखती तो उनका बच पाना मुश्किल था।

बा के चरित्र पर भी करने लगे थे संदेह

कार्यक्रम में बतौर मॉडरेटर मौजूद बृजेश उपाध्याय के सवालों के जवाब में नीलिमा ने वो वाकया शेयर किया जब करमचंद की मौत के बाद मोहनदास एकदम बदल गए। जिस कस्तूरबा के बिना वो एक पल भी दूर नहीं रह सकते थे उनके चरित्र पर संदेह करने लगे। वो इसलिए क्योंकि वो प्यार करने के लिए उनसे पहल कर बैठीं। नीलिमा ने कहा कि कस्तूरबा का निधन गांधी से पहले हो चुका था, लेकिन मैंने उन्हें किताब में तब तक जिंदा रखा है जब तक गांधीजी थे। प्रभा खेतान फाउंडेशन के इस कार्यक्रम के प्रस्तुतकर्ता श्री सीमेंट थे। काशी मेमोरियल सोसाइटी सहभागी थी।

(साभार – दैनिक भास्कर)

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