आज से दस साल पहले जब अपराजिता शुरू की थी तो लगा नहीं था कि यह कभी सम्भव हो सकेगा । बतौर पत्रकार काम करते हुए वेबसाइट चला लेना आसान तो बिल्कुल नहीं था क्योंकि खबर डालने का कोई नियमित समय न तब था और न आज है। व्यस्तता और जीवन के संघर्षों के बीच एक साथ कई मोर्चों पर लड़ते हुए ये दस साल बीते हैं । शुरुआत की तो पता था कि जिस क्षेत्र में कदम रखा है, वहां अपने कदम बहुत नन्हे हैं, नवजात । यह उम्मीद नहीं की थी कि कोई लेख भेजेगा या खबर भेजेगा मगर सबसे पहले रेखा श्रीवास्तव जी ने कविताएं भेजीं । 13 फरवरी 2016 को शुभजिता ने अपराजिता के नाम के साथ जन्म लिया । लोग कहते हैं कि हर बड़ी रचना का जन्म बड़े उद्देश्य के साथ होता है पर मैं कहती हूँ कि अपराजिता का जन्म तनाव से हुआ, टूटन से हुआ और उस खालीपन से हुआ जो मैं लगातार पत्रकारिता में काम करते हुए देख रही थी । हर जगह अपराध, राजनीति, षड्यंत्र, आरोप- प्रत्यारोप और दूर – दूर तक कुछ भी सकारात्मक नहीं दिख रहा था । लड़कियां फील्ड में और डेस्क पर कमतर मानी जा रही थीं । अखबारों से लेकर टीवी में शो पीस और पेज थ्री खबरें कवर करना उनका काम था, युवाओं की बात कोई सुन नहीं रहा था और उनके पास कहने को बहुत कुछ था । महिलाओं की दुनिया फैशन, रसोई और घरेलू नुस्खों तक सिमटती दिख रही थी और फील्ड पर काम करते हुए मैंने देखा था कि औरतें कितनी बदल रही हैं । दुनिया की दूसरी खबरों को जानना उनका हक है । पाठकों का अधिकार है कि वह अपने अतीत से जुड़े, इतिहास, संस्कृति व परम्परा को समझे । यह कहना कि शुभजिता में अपराध, राजनीतिक आरोप -प्रत्यारोप,धार्मिक प्रवचन के नाम पर अंधविश्वास नहीं चलेंगे, बहुतों को आश्चर्य में डालने वाला था । बहुत से वरिष्ठ लोगों को न कहना भी आसान नहीं था । बहुत लोग नाराज हुए, बहुतों ने साथ छोड़ा तो उससे ज्यादा लोग जुड़ते चले गए । अपराजिता से शुभजिता का सफर एक जिद है…अच्छा रचने की जिद । अच्छा देखने की जिद । भारत को समझने की जिद । अपनी जड़ों को समझने की जिद….आप सबने इस जिद को अपने हृदय में जगह दी…अशेष आभार…साथ बने रहिए…जहां तक हो सके, ईश्वर की इस धरती को हम सुन्दर बना सकें, यही प्रयास है ।
सुषमा त्रिपाठी कनुप्रिया
सम्पादक
शुभजिता




