Tuesday, August 25, 2026
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शुभजिता स्वदेशी : एमडीएच मसाले और धर्मपाल गुलाटी

एमडीएच मसाला (महाशियान दी हट्टी) के मालिक धर्मपाल गुलाटी की कहानी भारतीय उद्यमिता की दुनिया में सबसे प्रेरणादायक कहानियों में से एक है। विभाजन से तबाह पंजाब को छोड़कर आने के बावजूद, उन्होंने दृढ़ता, प्रेरणा और गुणवत्ता के बल पर एक ऐसा मसाला ब्रांड विकसित किया है जो सालाना 1,000 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार करता है। धर्मपाल गुलाटी एक ऐसा नाम है जिसे हम दिन, हर समय याद कर सकते हैं। अपने जीवन में शून्य से शुरुआत कर शिखर पर पहुंचने वाले मसाला किंग का जीवन प्रेरणा का स्रोत है। इन्हें याद करने के लिए कोई विशेष दिन की जरूरत नहीं है।

दिल्ली में एक छोटी सी दुकान से ‘महाशय’ धर्मपाल गुलाटी ने एमडीएच को भारत के प्रमुख मसालों को ब्रांड का रूप दिया। उन्होंने 1953 में दिल्ली के मशहूर इलाके चांदनी चौक में एक दुकान किराए पर ली, जिसका नाम महाशियां दी हट्टी (एमडीएच) रखा। इस दुकान से उन्होंने मसाले बेचने शुरू किए। फिर एक मैन्युफैक्चरिंग यूनिट स्थापित करने के लिए उन्होंने कीर्ति नगर में जमीन खरीदी। वर्तमान में एमडीएच, जो लगभग 50 विभिन्न प्रकार के मसाले बनाती है, की देश भर में 15 फैक्ट्रियां हैं और ये दुनिया भर में अपने उत्पाद बेचती हैं। आज, एमडीएच कारखानों में मशीनें एक ही दिन में 30 टन से अधिक मसालों का उत्पादन कर सकती हैं।

सबसे ज्यादा वेतन पाने वाले शख्स

बाद में पूरे देश में उनके मसाले, चावल और कपड़ा समेत कई तरह के प्रोडक्ट बेचे जाने लगे। एमडीएच मसालों को देश ही नहीं विदेश में भी निर्यात किया जाता है। साल 2017 में मसाला किंग सबसे ज्यादा सैलरी पाने वाले कंज्यूमर गुड्स प्रोडक्ट कंपनी के सीईओ थे। महाशय धर्मपाल गुलाटी 2020 में आईआईएफएल हुरुन इंडिया रिच लिस्ट में शामिल भारत के सबसे बुजुर्ग अमीर शख्स थे। 1500 रुपये से शुरू होने वाले एमडीएच की दौलत आज के वक्त में करीब 5400 करोड़ से भी ज्यादा है। 2019 में भारत सरकार ने गुलाटी को भारत के तीसरे सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार पद्म भूषण से सम्मानित किया था।

90 प्रतिशत वेतन दान में दे दिए थे

गुलाटी ने महाशय चुन्नी लाल चैरिटेबल ट्रस्ट को अपने वेतन का लगभग 90 फीसदी दान में दिया। ये ट्रस्ट दिल्ली में 250 बेड के अस्पताल के साथ-साथ झुग्गियों में रहने वालों के लिए चार स्कूलों और एक मोबाइल अस्पताल संचालित करता है। अप्रैल 2020 में उन्होंने कोविड -19 से लड़ने वाले स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को 7,500 पीपीई किट दान किए। घर्मपाल गुलाटी को कुछ चीजों का खास शौक था। वे कबूतरबाजी, पहलवानी और पतंग उड़ाना पसंद था। वे पंजाबी खानों के शौकीन थे।

पाकिस्तान में हुआ था जन्म ‘महाशय’ के नाम से मशहूर गुलाटी का जन्म 1919 में सियालकोट में हुआ था। ये शहर आज पाकिस्तान के हिस्से वाली पंजाब में है। वहां उनके पिता ने एक छोटी सी दुकान शुरू की थी। मगर 1947 में बंटवारे के बाद उनका परिवार भारत आ गया।उनके परिवार ने दिल्ली का रुख किया। हालांकि दिल्ली आने से पहले वे कुछ समय अमृतसर के रिफ्यूजी कैंप में भी रहे थे।गुलाटी यहां तांगा चलाया करते थे। धर्मपाल की मृत्यु 3 दिसंबर, 2020 को 97 वर्ष की आयु में हो गई।
एमडीएच के कार्यालय दुबई और लंदन में हैं और यह लगभग 100 देशों में निर्यात करता है। 95 वर्ष से अधिक पुराना और अभी भी सक्रिय एमडीएच अब 62 उत्पादों की एक विस्तृत श्रृंखला पेश करता है, जिन्हें दुनिया भर में 150 से अधिक पैकेजों में पसंद किया जाता है। ब्रांड लगातार नए स्वाद वाले मसाले पेश करता रहता है। कंपनी के पास दुनिया भर में मसालों की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए पांच अत्याधुनिक प्रसंस्करण संयंत्र हैं। पिसे हुए मसालों से लेकर सुगंधित मसालों के मिश्रण तक, एमडीएच सब कुछ उत्पादित करता है।

यह ब्रांड बेहतरीन स्वाद और लाजवाब फ्लेवर का पर्याय बन चुका है। एमडीएच, जिसके 60 से अधिक उत्पाद हैं, अपनी अधिकांश बिक्री तीन किस्मों – देगी मिर्च, चाट मसाला और चना मसाला – से प्राप्त करता है, जिनमें से प्रत्येक की प्रति माह लगभग एक करोड़ पैकेट बिकते हैं।

(साभार – न्यूज 18, एनपीसीएस)

 

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