Wednesday, April 15, 2026
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बिहार का बैकुंठ धाम, श्री बालाजी नरसिंह के रूप में स्थापित हैं भगवान विष्णु

भारत अलग-अलग विविधताओं और अपनी संस्कृति के लिए मशहूर है और यही कारण है कि भारत के जिस भी हिस्से में जाएंगे, वहां के कल्चर, खान-पान और भाषा में बदलाव देखने को मिलेगा। दक्षिण भारत की शिल्प शैली अपने आप में अनूठी है और वहां के मंदिरों की दीवारें खुद इतिहास की साक्षी हैं, लेकिन अब दक्षिण भारतीय मंदिरों के दर्शन करने का आनंद बिहार में मिल जाएगा। बिहार के भोजपुर में श्री बालाजी नरसिंह मंदिर का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है और 12 अप्रैल से मंदिर को सामान्य जनों के लिए खोल दिया गया है। मंदिर खुलने के बाद से लगातार भक्त ‘तिरुपति बालाजी’ की तर्ज पर बने मंदिर में दर्शन करने के लिए पहुंच रहे हैं। खेसारी लाल यादव ने भी मंदिर की तस्वीरें साझा की हैं। ऐसे में आज हम मंदिर के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे।
‘तिरुपति बालाजी’ की तर्ज पर बने मंदिर को बनाने में 10-11 करोड़ की लागत लगी है और मंदिर को बनने में 10 महीने का लंबा समय लगा है। मंदिर को दक्षिण भारत की शिल्प शैली के साथ बनाया गया है। यही कारण है कि मंदिर ने बिहार में काफी लोकप्रियता हासिल की। मंदिर की दीवारों पर देवी-देवताओं की बारीक नक्काशी को उकेरा गया है और मंदिर को अलग-अलग रंगों से रंगा गया है।
मंदिर का मुख्य द्वार और गोपुरम बेहद भव्य तरीके से बनाया गया है। मंदिर के मुख्य द्वार पर गरुड़ भगवान और बजरंगबली की बड़ी प्रतिमा का निर्माण किया गया है, जबकि मंदिर के गोपुरम पर सूर्य देव की प्रतिमाओं बनाई गई हैं और कई छोटे मंदिरों का निर्माण किया गया है। मंदिर को बैकुंठ धाम की तरह बनाने की कोशिश की गई है, जहां बालाजी नरसिंह अवतार में विश्राम कर रहे हैं।
खास बात यह है कि मंदिर के मुख्य गर्भगृह में मौजूद प्रतिमा को कृष्णशिला पत्थर से बनवाया गया है और प्रतिमा का निर्माण उसी शिल्पकार ने किया है, जिसने अयोध्या में रामलला की मूर्ति का निर्माण किया है। मंदिर की बाकी प्रतिमाओं का निर्माण भी उन्हीं के द्वारा किया गया है, जबकि गर्भगृह का निर्माण चेन्नई के समीप महाबलीपुरम के कारीगरों से बनवाया गया है।

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