Wednesday, August 19, 2026
खबर एवं विज्ञापन हेतु सम्पर्क करें - [email protected]

बांग्लादेश के विभाजन और विस्थापनाओं का उपन्यास ‘कुलभूषण का नाम दर्ज कीजिए

डॉक्टर वसुंधरा मिश्र ,भवानीपुर एजुकेशन सोसायटी कॉलेज, कोलकाता

अलका सरावगी का जन्म 17 नवम्बर, 1960 को हुआ। उनकी प्रमुख कृतियों में‘कलि-कथा वाया बाइपास’, ‘शेष कादम्बरी’, ‘कोई बात नहीं’, ‘एक ब्रेक के बाद’, ‘जानकीदास तेजपाल मैनशन’, ‘एक सच्ची-झूठी गाथा’, ‘कुलभूषण का नाम दर्ज कीजिए’,
‘गांधी और सरलादेवी चौधरानी’ (उपन्यास); ‘कहानी की तलाश में’, ‘दूसरी कहानी’, ‘सम्पूर्ण कहानियाँ’ (कहानी-संग्रह) आदि हैं। जर्मन, फ्रेंच, इटैलियन, स्पेनिश, अंग्रेजी तथा अनेक भारतीय भाषाओं में उनकी कृतियों के अनुवाद हुए हैं।
उनके पहले ही उपन्यास ‘कलि-कथा वाया बाइपास’ को ‘साहित्य अकादेमी पुरस्कार’ तथा ‘शेष कादम्बरी’ उपन्यास को ‘बिहारी पुरस्कार’ से पुरस्कृत किया गया।
‘कुलभूषण का नाम दर्ज कीजिए’ अलका सरावगी जी का उपन्यास विभाजन और विस्थापन की गहरी अंतर छायाएं लिए हुए है ।इतिहास और देश काल का यह उपन्यास एक ऐसा दस्तावेज है जिसमें मनुष्य को अपनी जड़ों से उखाड़ कर फिर बसने की त्रासदी का अद्भुत चित्रण है। इस उपन्यास का हर पृष्ठ मनाविक मनोभावनाओं, रिश्तों के विभाजन और विस्थापनाओं और दर्द की विभिषिका को बयान करती है।किस प्रकार से राजनीतिक परिस्थितियां मनुष्य काअचानक ही किसी भूकंप की तरह घर बार नष्ट कर देता है और उसे अनचाहे कष्ट झेलने के लिए बाध्य करता है।न चाहते हुए भी व्यक्ति को अपने अस्तित्व, नाम, धर्म ,लिंग, रंग ,नस्ल आदि को भूल कर , परिस्थितियों के साथ स्वयं को संचालित और समझौता करना पड़ता है।
‘कुलभूषण का नाम दर्ज कीजिए’ एक ऐसा ही उपन्यास है जिसमें इतिहास के काले पन्नों की कथा, अंतर्कथा और राजनीतिक परिदृश्यों के परत दर परत लिखा शब्दकोश है।
तत्कालीन ईस्ट पाकिस्तान की सीमा पर हुए विभाजन कई साल बाद तक होते रहे ।दंगों तथा मुक्ति वाहिनी के संग्राम के वर्ष रहे हैं ,जहां लगातार विस्थापन होते रहे।
‘पूर्वी पाकिस्तान से लेकर दंड कारण्य तक फैली हिंदू शरणार्थियों की व्यथा गाथा ,और मारवाड़ी -बंगाली संबंधों का एक अद्भुत विन्यास है।’ यह वरिष्ठ आलोचक भाषाविद्और रचनाकार हरीश त्रिवेदी जी ने इस पुस्तक के विषय में कहा है जो शत प्रतिशत सही है।

पाकिस्तान और भारत के विभाजन पर हिंदी में कई उपन्यास लिखे गए हैं । हिंदी के प्रसिद्ध लेखक यशपाल का उपन्यास झूठा सच जो भारत विभाजन पर अपने महाकाव्यात्मक स्वरूप में इस त्रास का उद्घाटन करता है।
विभाजन पर भीष्म साहनी द्वारा ‘तमस ‘की रचना जो आजाद भारत में हुए दंगों के कारण अपने शहर रावलपिंडी के दंगे की याद दिलाती है जिनकी आग गांव तक फैल गई थी। 1986 87 में यह दूरदर्शन के माध्यम से एकाएक चर्चित हुआ था ।
इसी तरह मंजूर एहतेशाम का ‘सूखा बरगद’ जिसमें स्वतंत्रता के बाद भारत के विभाजन के परिणाम स्वरूप आए सामुदायिक जीवन के बदलाव की कथा है ।भारतीय मुस्लिम समाज के अंतर विरोध और द्वंद्व को उपन्यासकार ने बेहद मार्मिक ढंग से उद्घाटित किया है ।
असगर वजाहत जी का ‘जिस लाहौर नइ वेख्या’ यह भी भारत विभाजन की एक घटना पर आधारित है जिसमें भारत से पाकिस्तान गए एक मुस्लिम परिवार को एक हिंदू परिवार की कोठी मिली है और उसमें रहने वाली बुढ़िया भारत जाने को तैयार नहीं जबकि उसके घर वाले सब चले गए ।समाज में मौजूद कट्टर और धर्म का धंधा कर रहे लोग स्थितियों को बिगाड़ते हैं ।असगर वजाहत ने निराशा और अंधकार में भी मनुष्यता और सद्भावना का उजास खोजा है।
‘सिक्का बदल गया है’ कृष्णा सोबती जी का उपन्यास विभाजन पर लिखी एक कहानी है जहां पाकिस्तान के एक मुस्लिम बहुल गांव में अकेली हिंदू बची शाहनी की कथा है ।इसी तरह अज्ञेय की ‘शरणागत ‘कहानी और मोहन राकेश का ‘मलबे का मालिक’ आदि अनेक उपन्यास विभाजन पर लिखे गए।
अलका सरावगी की मनुष्यता के निर्वाचन की मार्मिक दास्तान वाया ‘कुलभूषण का नाम दर्ज कीजिए’ उपन्यास जो संभवतः बांग्लादेश हिंदी में 2021में प्रथम प्रकाशित होता है।
डेढ़ चप्पल पहन कर घूमता है यह काला लंबा दुबला शख़्स कौन है ।हर बात पर वह इतना खुश कैसे दिखता है। उसे भूलने का बटन देने वाला श्याम धोबी कहां छूट गया कुलभूषण को । कुलभूषण का नाम दर्ज कीजिए बीते इतिहास का विस्फोटक पहलू है। इसकी कथा में कथाओं की अंतर्कथा,आप बीती में गुंथी कहानी प्याज की परतों की तरह खुलती चली जाती है । उपन्यास का नायक कुलभूषण पिछली आधी सदी से उजड़ा हुआ है। देश घर नाम जाति गोत्र तक छूट गया उसका फिर भी अर्ज कर रहा है ।मां-बाप का दिया कुलभूषण जैन नाम दर्ज कीजिए। इस किरदार के आसपास के संसार में कोई दरवाजा ताला नहीं है लेकिन फिर भी इसके पास कई तिजोरियों के रहस्य दफन है। एक लाइन ऑफ कंट्रोल, दो देश ,तीन भाषा, 5 से अधिक दशक कुलभूषण ने सब देखा जिया समझा है। जिन त्रासदियों को हम इतिहास का गुजारा समय मान लेते हैं ,वह वर्तमान तक जाकर कैसे बेखबरी से हमारे इर्द-गिर्द भटकती रहती हैं। यह उपन्यास उसे अचूक इतिहास दृष्टि के साथ दर्ज करता है। पूर्वी बंगाल से आजादी से चलता लगातार विस्थापन भारत में शरणार्थियों को बंगाल से बाहर राम सीता के निर्वासन की तरह दंडक वन में बसने की सारी कथाएं एक मार्मिक आख्यान को रचते हैं। कथा के भीतर इसकी सिरा सिरा में बिंधा हुआ एक मानवीय आशय है जो किरदार की निरीहता और प्रवहता को पाठक के मन में संकेत कर देता है। इतिहास भूगोल संस्कृति सांप्रदायिकता जाति व्यवस्था समाज और इन सब के बीच फंसे लोगों को जानने और समझने के लिए खुद निराश्रित जैसे किरदार कुलभूषण की दुनिया में यूं ही चलते फिरते मिलेंगे। उनकी बातों में आए तो फंसे ना आए तो कुलभूषण के जीवन में घुस नहीं पाएंगे ।
भारत को आजादी मिली किंतु देश विभाजन की कीमत पर मुसलमान को धर्म आधारित राष्ट्र के रूप में पाकिस्तान मिला किंतु भारत ने धर्म पर आधारित राष्ट्रीयता के सिद्धांत को नहीं माना। यहां धर्मनिरपेक्ष संविधान लागू हुआ किंतु हिंदू मुसलमान में सांप्रदायिकता की समस्या का अंत तब भी नहीं हुआ ।भारत विभाजन के समय संपूर्ण उत्तर भारत सांप्रदायिकता की आग में जल उठा था। हजारों लोग मारे गए लाखों लोग विस्थापित हुए तथा स्त्रियों और बच्चों के साथ और मनुष्य का अत्याचार हुए। देश की विशाल जनसंख्या अपना वतन छोड़कर भारत या पाकिस्तान में शरणार्थी के रूप में बसने को विवश हुई। भारत के इतिहास में यह सबसे बड़ी अमानवीय त्रासदी थी जिसे हिंदी लेखकों ने अनेक ढंग से अपने उपन्यासों में अत्यंत यथार्थ रूप में चित्रित किया है।

अलका सरावगी जी ने कुलभूषण का नाम दर्ज कीजिए में कुलभूषण जैन एक मारवाड़ी परिवार का पुत्र जो बांग्लादेश की गोराई नदी को अपना मानता है ,कुष्टिया का है, विभाजन के कारण अपने नाम को भी बदल कर मानो अपने जीवन को बचा रहा था । ऐसे कई सवालों का उत्तर उपन्यास में निहित है जो विस्थापन और विभाजन की त्रासदी को दर्शाता है।
अपनी धन संपत्ति मकान जमीन जायदाद और रिश्तों को छोड़कर आना, कहीं और बसना जहां पर अपना कुछ भी नहीं है ,अपने देश की मिट्टी भी नहीं है, यह बहुत ही मार्मिक उपन्यास है।

शुभजिता

शुभजिता की कोशिश समस्याओं के साथ ही उत्कृष्ट सकारात्मक व सृजनात्मक खबरों को साभार संग्रहित कर आगे ले जाना है। अब आप भी शुभजिता में लिख सकते हैं, बस नियमों का ध्यान रखें। चयनित खबरें, आलेख व सृजनात्मक सामग्री इस वेबपत्रिका पर प्रकाशित की जाएगी। अगर आप भी कुछ सकारात्मक कर रहे हैं तो कमेन्ट्स बॉक्स में बताएँ या हमें ई मेल करें। इसके साथ ही प्रकाशित आलेखों के आधार पर किसी भी प्रकार की औषधि, नुस्खे उपयोग में लाने से पूर्व अपने चिकित्सक, सौंदर्य विशेषज्ञ या किसी भी विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें। इसके अतिरिक्त खबरों या ऑफर के आधार पर खरीददारी से पूर्व आप खुद पड़ताल अवश्य करें। इसके साथ ही कमेन्ट्स बॉक्स में टिप्पणी करते समय मर्यादित, संतुलित टिप्पणी ही करें।

शुभजिताhttps://www.shubhjita.com/
शुभजिता की कोशिश समस्याओं के साथ ही उत्कृष्ट सकारात्मक व सृजनात्मक खबरों को साभार संग्रहित कर आगे ले जाना है। अब आप भी शुभजिता में लिख सकते हैं, बस नियमों का ध्यान रखें। चयनित खबरें, आलेख व सृजनात्मक सामग्री इस वेबपत्रिका पर प्रकाशित की जाएगी। अगर आप भी कुछ सकारात्मक कर रहे हैं तो कमेन्ट्स बॉक्स में बताएँ या हमें ई मेल करें। इसके साथ ही प्रकाशित आलेखों के आधार पर किसी भी प्रकार की औषधि, नुस्खे उपयोग में लाने से पूर्व अपने चिकित्सक, सौंदर्य विशेषज्ञ या किसी भी विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें। इसके अतिरिक्त खबरों या ऑफर के आधार पर खरीददारी से पूर्व आप खुद पड़ताल अवश्य करें। इसके साथ ही कमेन्ट्स बॉक्स में टिप्पणी करते समय मर्यादित, संतुलित टिप्पणी ही करें।
Latest news
Related news