Friday, March 13, 2026
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सीयू के हिंदी विभाग द्वारा आयोजित एकदिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी

कोलकाता । कलकत्ता विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग द्वारा एकदिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी का विषय था-“आधुनिक हिंदी कविता : राष्ट्रीयता के बदलते स्वरूप।” विभागाध्यक्षा प्रोफेसर राजश्री शुक्ला ने कार्यक्रम के प्रथम सत्र के अध्यक्ष, सभी वक्ताओं एवं श्रोताओं का स्वागत किया। बतौर वक्ता इस संगोष्ठी में सुरेन्द्रनाथ सांध्य कॉलेज के पूर्व आचार्य डॉ. प्रेमशंकर त्रिपाठी, खिदिरपुर कॉलेज की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. इतु सिंह, राष्ट्रीय होम्योपैथी संस्थान के हिंदी अधिकारी श्री अजयेंद्रनाथ त्रिपाठी, वेथुन कॉलेज की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. नमिता जायसवाल, प्रेसिडेंसी विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. वेदरमण पांडे, सेठ सूरजमल जालान गर्ल्स कॉलेज की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. इंदिरा चक्रवर्ती, कलकत्ता विश्वविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ विजय साव, प्रोफेसर डॉ. राजश्री शुक्ला एवं डॉ. राम प्रवेश रजक के साथ विविध महाविद्यालय और विश्वविद्यालय के अध्यापक और विद्यार्थी उपस्थित रहें। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन, राष्ट्र वंदना और अतिथियों एवं वक्ताओं के स्वागत के साथ हुआ।विभाग के अध्यापक डॉ .राम प्रवेश रजक ने संगोष्ठी के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए संचालन का कार्यभार संभाला।
प्रथम सत्र में वक्ता के रूप में उपस्थित डॉ. इतु सिंह ने विषय पर अपने विचार रखा और गंभीरता से राष्ट्रीयता के संदर्भ में आइडेनटिटी की विशेषताओं को रेखांकित किया । द्वितीय वक्ता के रूप में डॉ. इंदिरा चक्रवर्ती ने कहा कि-” राष्ट्रवाद वह भावना है जो व्यक्ति को अपने देश,अपनी मातृभूमि सभ्यता,संस्कृति,इतिहास और परंपराओं से जोड़ती है। डॉ. वेदरमण पांडे ने ‘राष्ट्र’ और ‘राष्ट्रीयता’ को परिभाषित करते हुए भारतबोध और आर्यावर्त की अवधारणा को श्रोताओं के समक्ष प्रस्तुत किया। प्रथम सत्र की अध्यक्षता कर रहें आचार्य प्रेमशंकर त्रिपाठी ने आधुनिककाल के कवियों की कविताओं का उदाहरण प्रस्तुत करते हुए मातृभूमि के प्रति अनुराग के महत्व पर प्रकाश डाला। राष्ट्रीय होमियोपैथी संस्थान के हिन्दी अधिकारी अजयेंद्रनाथ त्रिपाठी ने कहा कि भारतीय साहित्य में कवियों की विचारधाराएँ भले ही अलग- अलग रही हों परन्तु राष्ट्रीयता के मामले में सभी एक बिंदु पर खड़े दिखाई देते हैं। डॉ .नमिता जायसवाल माखनलाल चतुर्वेदी, रामधारी सिंह दिनकर जैसे रचनाकारों की रचनाओं के आधार पर ‘भारतीयता’ और भारत के विश्व गुरु की अवधारणा को राष्ट्रीयता के संदर्भ में व्याख्यायित किया डॉ. विजय साव ने भारतीय राष्ट्रीयता के संपूर्ण ऐतिहासिक परिदृश्य को अपने वक्तव्य के माध्यम से प्रस्तुत किया। दूसरे सत्र की अध्यक्षता प्रोफेसर राजश्री शुक्ला ने की। कार्यक्रम में अर्चना सिंह, शुभांगी उपाध्याय,प्रीतम रजक और प्रियंका सिंह ने पत्रवाचन किया।

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