Friday, January 9, 2026
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मकर संक्रांति विशेष – तिलकुट

इतिहास – बिहारी व्यंजनों ने भारत के क्षेत्रीय व्यंजनों में अपनी एक अलग पहचान बनाई है। राज्य के पारंपरिक व्यंजन, जैसे  लिट्टी चोखा, पूरे देश में प्रसिद्ध हैं। हालांकि, बिहारी व्यंजनों में कई अन्य व्यंजन भी शामिल हैं, जैसे चना घुगनी, दाल पीठा और कई पारंपरिक मिठाइयाँ। पारंपरिक मिठाइयों की बात करें तो सबसे पहले स्वादिष्ट  ठेकुआ याद आता है , जिसे ज्यादातर  छठ पर्व के दौरान बनाया जाता है । ठेकुआ की तरह ही एक और खास व्यंजन है, जो आपके स्वाद को झकझोर देगा। तिलकुट एक मीठा और नमकीन व्यंजन है जो केवल सर्दियों में ही मिलता है। इसका 150 साल पुराना इतिहास है और इसे सबसे पहले गया के रामना स्थित टेकारी रियासत में बनाया गया था। कहा जाता है कि राजा को तिलकुट बहुत पसंद था और उन्होंने तिलकुट बनाने की कला को बढ़ावा दिया था।

बिहार में तिलकुट तीन प्रकार के होते हैं, जिनमें से प्रत्येक का अपना अलग स्वाद होता है। पहला है सफेद तिलकुट, जो परिष्कृत चीनी से बनता है और सबसे आम है। दूसरा है शक्कर तिलकुट, जो अपरिष्कृत चीनी से बनता है, और तीसरा है गहरे भूरे रंग का तिलकुट, जो गुड़ से बनता है। यह भारत के फसल उत्सव मकर संक्रांति के दौरान बनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण व्यंजन है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, तिलकुट का मुख्य घटक तिल है, जिसे यमराज (मृत्यु के देवता) का आशीर्वाद प्राप्त है। इसलिए, इसे अमरता का बीज माना जाता है और यह समृद्ध भविष्य का प्रतीक है।

 तिलकुट एक पौष्टिक मिठाई है जो पिसे हुए तिल से तैयार की जाती है। यह उन मिठाइयों में से एक है जिन्हें बनाने में कौशल और सावधानीपूर्वक तैयारी की आवश्यकता होती है, क्योंकि कोई भी गलती इस पारंपरिक व्यंजन के शानदार स्वाद को बिगाड़ सकती है। इसे चीनी के साथ पिसे हुए तिल को गोल करके पकाया जाता है। फिर इसे गुड़ और रुई के साथ उचित तापमान पर पकाया जाता है और फिर तिलकुट बनाने का सबसे अनोखा और कठिन चरण आता है, उन्हें बिस्कुट जैसे आकार में पीटना।

 

सामग्रीसफेद तिल, देसी घी, गुड़, इलायची पाउडर

 विधि- तिलकुट बनाने के लिए आपको करीब 150 ग्राम सफेद तिल लेने हैं। तिल के बराबर यानि 150 ग्राम गुड़ लें और 1 टीस्पून देसी घी ले लें। एक कड़ाही में तिल को मीडियम फ्लेम पर हल्का ब्राउन होने तक भून लें। बिना तेल या घी के तिल आसानी से भुन जाते हैं। बस बीच-बीच में चलाते रहें जिससे तिल नीचे से जलें नहीं। जब तिल हल्के ठंडे हो जाएं को मिक्सी में दरदरा पीस लें। अब कड़ाही में गुड़ को बारीक टुकड़ों में तोड़कर डालें और इसमें 1 चम्मच पानी मिलाकर चाशनी तैयार कर लें। गुड़ को चलाते रहें जिससे जल्दी पिघल जाए। जब गुड़ कड़ाही को छोड़ने लगे और उसमें बबल बन जाएं तो चाशनी को चेक कर लें। एक चम्मच में पानी लें और उसमें गुड़ की चाशनी की 1-2 बूंद डालकर 10 सेकेंड के लिए छोड़ दें। अब चेक करें अगर चाशनी तार जैसी खिंच रही है तो इसे थोड़ी देर और पकाएं। धीमी आंच पर लगातार चलाते हुए गुड़ को और पका लें। अब एक बार फिर से चम्मच में कुछ बूंदे डालकर चेक करें। चाशनी को इतना पकाना है कि चिपक खत्म हो जाए और गुड़ आसानी से टूट जाए। अब गैस की फ्लेम एकदम कम कर दें और पिसे हुए तिल को थोड़ा-थोड़ा करके चाशनी में मिलाते जाएं। गैस बंद कर दें और अब तिलकुट को सेट कर लें। इसके लिए एक चपटी कटोरी या कोई ढक्कन लें और उसमें नीचे थोड़ा घी लगाएं। तैयार मिश्रण को कटोरी में डालें और बेलन की नोक वाली साइड से दबाएं। अब तिलकुट की शेप बनकर तैयार हो जाएगी।

सर्दियों में तिलकुट खाने के फायदे 

आयुर्वेदिक डॉक्टर चंचल शर्मा के अनुसार, तिल में भरपूर मात्रा में हेल्दी फैट्स, फाइबर, प्रोटीन, कैल्शियम, आयरन, जिंक, मैग्नीशियम और विटामिन्स होते हैं। साथ ही इसमें अच्छी मात्रा में एंटी-ऑक्सीडेंट्स के गुण होते हैं। वहीं गुड़ में अच्छी मात्रा में कैल्शियम, मैग्नीशियम, पोटैशियम, आयरन, जिंक, विटामिन-ए, बी, ई और सी जैसे पोषक तत्व और एंटी-ऑक्सीडेंट्स के गुण होते हैं। ऐसे में सर्दियों में तिलकुट को खाने से स्वास्थ्य को कई लाभ मिलते हैं।

शरीर को मिलेगी एनर्जी- तिलकुट में बहुत से पोषक तत्व होते हैं। ऐसे में इसका सेवन करने से शरीर को नेचुरल रूप से एनर्जी देने, थकान और कमजोरी को दूर करने में मदद मिलती है।

इम्यूनिटी बूस्ट करे- तिलकुट में एंटी-ऑक्सीडेंट्स के गुण होते हैं। ऐसे में इसका सेवन करने से शरीर की इम्यूनिटी को बूस्ट करने और इंफेक्शन से बचाव करने में मदद मिलती है।

शरीर को गर्म रखे- तिल और गुड़ दोनों की तासीर गर्म होती है। ऐसे में इसका सेवन करने से शरीर को अंदर से गर्म रखने और सर्दी से बचाव करने में मदद मिलती है। इससे ठंड लगने से बचाव करने में मदद मिलती है।

खून की कमी दूर करे- तिलकुट में अच्छी मात्रा में आयरन होता है। ऐसे में इसका सेवन करने से शरीर में खून की कमी को दूर करने और में मदद मिलती है।

स्किन के लिए फायदेमंद- तिलकुट में अच्छी मात्रा में हेल्दी फैट्स होते हैं। ऐसे में इसका सेवन करने से शरीर को नेचुरल रूप से डिटॉक्स करने में मदद मिलती है, जिससे स्किन को गहराई से पोषण देने और स्किन को नेचुरल रूप से हेल्दी बनाए रखने में मदद मिलती है।

पाचन में सुधार करे- तिलकुट में अच्छी मात्रा में फाइबर होता है। ऐसे में इसका सेवन करने से पाचन प्रक्रिया में सुधार करने और इससे जुड़ी समस्याओं से बचाव करने में मदद मिलती है।

हड्डियों के लिए फायदेमंद- तिलकुट में मौजूद तिल में भरपूर मात्रा में कैल्शियम होता है। ऐसे में इसका सेवन करने से हड्डियों को मजबूती देने में मदद मिलती है, जिससे हड्डियों की समस्याओं से बचाव करने में मदद मिलती है।

पोषक तत्वों की कमी को दूर करे- तिलकुट में बहुत से पोषक तत्व होते हैं। ऐसे में इसका सेवन करने से शरीर में आयरन, कैल्शियम और हेल्दी फैट्स जैसे पोषक तत्वों की कमी को दूर करने में मदद मिलती है।

सावधानियां – तिलकुट का सेवन सीमित मात्रा में करें, तिल से किसी भी तरह की एलर्जी होने या परेशानी होने पर तिलकुट का सेवन करने से बचें। इसके अलावा, ब्लड शुगर या किसी मेडिकल कंडीशन से पीड़ित व्यक्ति को तिलकुट का सेवन डॉक्टर की सलाह के साथ ही करना चाहिए।

(स्रोत – टाइम्स नाउ हिन्दी, इंडिया टीवी और स्लर्प डॉट कॉम)

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