कोलकाता। पश्चिम बंगाल सरकार ने डूआर्स क्षेत्र के सुदूर चाय बागान इलाकों में किशोरियों और युवतियों के बीच मासिक धर्म स्वास्थ्य जागरूकता फैलाने के लिए पिछले दस वर्षों से कार्य कर रहीं ‘पैडवुमन’ प्रीति मिंज को सम्मानित किया है। एक आधिकारिक सूत्र ने बुधवार को यह जानकारी दी।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ओर से पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं आदिवासी विकास मंत्री बुलू चिक बराइक ने जलपाईगुड़ी जिले के ओदलाबाड़ी स्थित उनके आवास पर पहुंचकर उन्हें प्रशस्ति-पत्र प्रदान किया। प्रीति मिंज आदिवासी समुदाय से आती हैं और लंबे समय से जमीनी स्तर पर कार्य कर रही हैं।
पिछले एक दशक से मिंज चाय बागान श्रमिक बस्तियों में घर-घर जाकर किशोरियों और महिलाओं को मासिक धर्म से जुड़ी भ्रांतियों, अज्ञानता और सामाजिक वर्जनाओं के खिलाफ जागरूक कर रही हैं। वह स्वच्छता के सुरक्षित तरीकों पर परामर्श देती हैं और सैनिटरी नैपकिन के उपयोग के लिए प्रेरित करती हैं।
राज्य सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों के बावजूद प्रीति मिंज अपने मिशन पर अडिग रहीं। उनके प्रयासों से हजारों किशोरियों और युवतियों में मासिक धर्म स्वच्छता को लेकर जागरूकता बढ़ी है और स्वच्छ व्यवहार अपनाने की प्रवृत्ति मजबूत हुई है।
वर्षों की सतत मेहनत के परिणामस्वरूप बड़ी संख्या में किशोरियों और महिलाओं ने सैनिटरी नैपकिन का उपयोग शुरू किया है, जिससे उनके स्वास्थ्य में सुधार के साथ-साथ आत्मविश्वास और आत्मसम्मान में भी वृद्धि हुई है। क्षेत्र में लोग उन्हें स्नेहपूर्वक ‘पैडवुमन’ के नाम से जानते हैं।
मंत्री बुलू चिक बराइक ने कहा कि प्रीति मिंज जैसी महिलाएं समाज की वास्तविक शक्ति हैं। दूरदराज के चाय बागान क्षेत्रों में मासिक धर्म स्वास्थ्य को लेकर उन्होंने जो जनजागरण आंदोलन खड़ा किया है, वह पूरे राज्य के लिए एक आदर्श मॉडल बन सकता है।
सम्मान प्राप्त करने के बाद भावुक प्रीति मिंज ने मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने कभी पुरस्कार या पहचान की उम्मीद से यह कार्य शुरू नहीं किया था। उनका उद्देश्य केवल इतना था कि उनकी बहनें बिना किसी शर्म या डर के अपने स्वास्थ्य का ध्यान रख सकें। उन्होंने कहा कि यह सम्मान उनकी जिम्मेदारी को और बढ़ाता है।
सूत्रों के अनुसार, उनके नि:स्वार्थ कार्य की जानकारी राज्य सचिवालय ‘नवान्न’ तक पहुंचने के बाद विशेष रूप से यह सम्मान प्रदान किया गया। इससे पहले भी विभिन्न स्वैच्छिक संगठनों और सामाजिक समूहों द्वारा उन्हें सम्मानित किया जा चुका है।





