उत्तर 24 परगना। फूलों की डालियां सज चुकी थीं, फल काटे जा चुके थे और आल्पना (द्वार सजाने) का काम जारी था। पीले वस्त्रों में सजे कचिकांचों के बीच धूप-धुना जलाकर पूजा शुरू करने की तैयारी पूरी थी, लेकिन हर साल की तरह इस बार भी पुरोहित की तलाश शुरू हुई। तभी सामने आया एक नया और चौंकाने वाला समाधान—कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई)।
बनगांव के सुभाषपल्ली निवासी सुषोभन घोष की पहल पर इस वर्ष सरस्वती पूजा पारंपरिक पुरोहित के बिना, एआई की मदद से संपन्न हुई। मोबाइल फोन के माध्यम से एआई द्वारा शुद्ध संस्कृत मंत्रों का उच्चारण कराया गया, जिसे सुनकर परिवार के सदस्यों और पड़ोसियों ने एक साथ मंत्रोच्चारण कर पूजा पूरी की। शुशोभन घोष ने बताया कि पुरोहित के इंतजार की समस्या को दूर करने के लिए उन्होंने यह प्रयोग किया। एआई की मदद से मंत्रों को पंचांग के अनुसार जांचा गया और सही विधि से पूजा संपन्न की गई। उन्होंने कहा कि आज हर किसी के पास मोबाइल और इंटरनेट है। सोचा, क्यों न एआई का इस्तेमाल कर देखा जाए। एआई ने पंचांग के नियमों के अनुसार पूरे मंत्र संस्कृत में पढ़े, जिससे हमलोग आसानी से पूजा कर सके। इस अनोखी पूजा में बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। महिलाओं ने भी संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि एआई की सहायता से मंत्र और विधि समझकर पूजा करने से उन्हें मानसिक तृप्ति मिली। हालांकि इस घटना को लेकर पुरोहित समाज में मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिली है। कुछ लोगों ने इसे भविष्य में पेशे पर असर डालने वाला बताया। वहीं, कई का मानना है कि एआई को सहायक के रूप में अपनाया जा सकता है, न कि पूर्ण विकल्प के तौर पर।
विद्या और बुद्धि की देवी की पूजा में एआई के इस प्रयोग ने यह संकेत दे दिया है कि आने वाले समय में मानव जीवन के साथ-साथ धार्मिक परंपराओं में भी तकनीक की भूमिका और बढ़ सकती है।




