नयी दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि अगर कुत्तों के काटने से किसी बुजुर्ग या बच्चे की मौत होती है तो हम कुछ न करने के लिए राज्य सरकार को जवाबदेह मानते हुए उस पर भारी जुर्माना लगाएंगे। मामले की अगली सुनवाई 20 जनवरी को होगी। उच्चतम न्यायालय ने आवारा कुत्तों को खुले में खाना खिलाने वालों के रवैये पर सवाल खड़ा करते हुए यह टिप्पणी की। आवारा कुत्तों के मामले पर सुनवाई करते हुए जस्टिस विक्रम नाथ की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि कुत्तों को खुले में खाना खिलाने के हिमायती लोगों को भी जवाबदेही तय की जानी चाहिए। उच्चतम न्यायालय ने कहा कि अगर लोगों को कुत्तों को खाना खिलाना ही है, तो अपने घर में खिलाइये। उन्हें घर में रखिए। कुत्ते क्यों सड़क पर घूमते रहे, गन्दगी फैलाते रहे या लोगो को काटते रहे। उच्चतम न्यायालय ने पूछा कि क्या सारे जज़्बात कुत्तों के लिए ही है, इंसानों के लिए नहीं। कोर्ट ने कहा कि अगर 9 साल की बच्ची को आवारा कुत्ते मार डालते हैं, तो इसके लिए किसको जिम्मेदार माना जाए। क्या कुत्तों को खुले में खाना खिलाने के हिमायती संगठन को इसके लिए जिम्मेदार न माना जाए।





