सरस्वती पूजा भी है और भारत माता के सपूत महत्वपूर्ण स्वतंत्रता संग्रामी नेताजी का जन्मदिन भी है। यह तस्वीर एक ऐतिहासिक तस्वीर है। 20वीं सदी के दूसरे दशक में, कोलकाता के सिटी कॉलेज के विद्यार्थियों ने मांग की थी कि वे अपने कॉलेज में सरस्वती पूजा बड़े धूमधाम से मनाना चाहते हैं। लेकिन कॉलेज मैनेजमेंट से उन्हें अनुमति नहीं मिली। वजह कुछ और नहीं थी, इस कॉलेज के मैनेजमेंट के सभी सदस्य ब्रह्म समाज से थे, इनलोगों में मूर्ति पूजा का निषेध था। इस पर बड़ा हंगामा शुरू हो गया। नेताजी उस समय एक उभरते हुए नेता थे, उन्होंने बहुत कम उम्र में काफी प्रसिद्धि प्राप्त कर ली थी। सिटी कॉलेज के स्टूडेंट्स उनके पास गए और उनसे इस मामले में दखल देने का अनुरोध किया। नेताजी ने अलग-अलग तरह की पूजाओं के लिए छोटे-बड़े कई आंदोलनों का सूत्रपात भी किया था। सिटी कॉलेज की घटना के बाद नेताजी और रवींद्रनाथ टैगोर के बीच व्यक्तिगत रिश्ते बहुत खराब हो गए थे क्योंकि रवींद्रनाथ ने भी मैनेजमेंट का ही साथ दिया था। उस समय बहुत से बंगाली समाज के लोगों को भी इस घटना से काफी कष्ट हुआ था। बाध्य होकर नेताजी को कॉलेज परिसर के बाहर ही व्यापक स्तर पर सरस्वती पूजा का आयोजन करना पड़ा था।
बाद में, बेशक, नेताजी और रवींद्रनाथ के बीच पिता-पुत्र जैसा अटूट रिश्ता बन गया , लेकिन यह एक अलग कहानी है।जब नेताजी जेल में थे, उस समय भी कोई पूजा होती तो वे ब्रिटिश अधिकारियों को जेल में उस पूजा का आयोजन करने के लिए बाध्य कर देते थे। यहाँ तक कि सबसे आखिर में, जब उन्हें जेल भेजा गया, तो उन्होंने दुर्गा पूजा करने के अनुरोध के साथ आंदोलन भी किया था। इसके लिए वे जानलेवा भूख हड़ताल भी शुरू किए थे।
(जानकारी साभार – डॉ. सत्यप्रकाश तिवारी)





