कोलकाता । पश्चिम बंग हिन्दी अकादमी, सूचना एवं संस्कृति विभाग, पश्चिम बंगाल सरकार के तत्वाधान में शुक्रवार 16 जनवरी 2025 को “पुस्तक मित्र” कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। पुस्तक मित्र श्रृंखला की यह पंचम कड़ी थी जिसकी चयनित पुस्तक थी प्रसिद्ध कवि, लेखक और विचारक सुरेश चौधरी ‘इन्दु’ जी का शोधपरक संकलन “भ्रम और भ्रांतियाँ”।इस पुस्तक में अनेक ऐसी हिंदू परंपराओं, जिन्हें हम रूढ़िवादिता या अंधविश्वास कहकर नकार देते हैं, उनसे संबंधित वैज्ञानिक तर्कों की व्याख्या और वर्षों से प्रसारित मिथकों की सत्यता भी आँकडों के साथ स्थापित की गई है।
पाठकों में पुस्तकों के प्रति जिज्ञासा जागृत करने के उद्देश्य से प्रारंभ की गई इस श्रृंखला का संयोजन और संचालन अकादमी की सदस्य रचना सरन और शुभा चूड़ीवाल करती हैं।
रचना सरन ने सभी अतिथियों का स्वागत कर कार्यक्रम प्रारम्भ किया। शुभा चूड़ीवाल ने विशेषज्ञों और लेखक का परिचय देते हुए कार्यक्रम की रूपरेखा स्पष्ट की। अकादमी के वरिष्ठ सदस्य रावेल पुष्प जी ने उत्तरीय और माला प्रदान कर अतिथियों का अभिनन्दन किया। कवि आलोक चौधरी ने सुरेश चौधरी जी द्वारा रचित जगदम्बा स्तुति प्रस्तुत की। डॉ. शिप्रा मिश्रा जी ,मीतू कनोडिया जी और प्रणति ठाकुर जी ने पुस्तक के कुछ महत्वपूर्ण अंशों का पाठ किया। विशेषज्ञ के रूप में डॉक्टर वसुंधरा मिश्र जी और डॉक्टर शुभ्रा उपाध्याय जी उपस्थित थीं। डॉ वसुंधरा मिश्रा ने कहा कि यदि हम सहस्त्र वर्षों की परंपराओं को सही तरीके से समझते, तो दृश्य भिन्न होता।संपूर्ण वांग्मय को गलत धारणाओं पर रखा गया है।पुस्तक के सभी अध्यायों पर उन्होंने समीक्षात्मक टिप्पणी करते हुए कहा कि इस तरह की बातें लिखना एक लेखक के लिए यह चुनौती भरा कार्य है । अपनी बात रखते हुए डॉक्टर शुभ्रा उपाध्याय ने कहा कि इतिहास में उतना सत्य नहीं होता जितना साहित्य में क्योंकि इतिहास लिखवाया जाता है और साहित्य स्वयं लिखा जाता है। उन्होंने इस पुस्तक को समसामयिक मुद्दों के चिंतन -अचिंतन की गंभीर नोटबुक बताया और कहा कि यह पुस्तक भारतीयता की खोज है। लेखक सुरेश चौधरी ने अकादमी के प्रति आभार प्रकट करते हुए बताया कि इस पुस्तक को लिखने के लिए उन्होंने 7वर्ष तक शोध तथा तथ्यों की पुनः पुष्टि की। उन्होंने पुस्तक में संकलित तथ्यों के संदर्भों के बारे में भी जानकारी दी। दर्शकों ने बहुत रुचि के साथ इस कार्यक्रम को सुना और अपनी जिज्ञासाओं को लेखक के समक्ष रखा। उनके प्रश्नों का सुरेश चौधरी ने विस्तार से जवाब दिया। कार्यक्रम के अंत में रावेल पुष्प सर ने धन्यवाद ज्ञापित करके आने वाले कार्यक्रमों की घोषणा की। हिंदी अकादमी की इस अनोखी साहित्यिक श्रृंखला को सभी ने सराहा।





