नयी दिल्ली। सरकार ने मौजूदा वित्त वर्ष की पहली तीन तिमाहियों में अपनी सबसे बड़ी परियोजनाओं में बजट की रकम का 40 फीसदी से थोड़ा ज्यादा खर्च किया है। उम्मीद है कि साल के आखिर तक ये खर्च 75 प्रतिशत से कम होगा। जानकारी उन 53 चुनी हुई योजनाओं के बारे में हैं, जिनका 2025-26 में बजट अनुमान 500 करोड़ रुपये या उससे अधिक था। राज्यों द्वारा लागू की जाने वाली इन योजनाओं को मंजूर शेयरिंग पैटर्न के अनुसार केंद्र और राज्य दोनों फंड देते हैं। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण के तहत इंफ्रांस्ट्रक्टर रखरखाव योजनाएं, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधावा पेशन योजना और एससी और अन्य लोगों के लिए प्री-मैट्रिक स्कॉलरशिप ही ऐसी तीन योजनाएं थीं जिनमें संशोधित अनुमान बजट की रकम के बराबर था। तीन अन्य योजनाओं, जिनमें- मनरेगा, एसटी के लिए प्री-मैट्रिक स्कॉलरशिप और प्राकृतिक खेती पर राष्ट्रीय मिशन के लिए बजट अनुमान 100 प्रतिशत से ज्यादा था। बाकी 47 योजनाओं के लिए, आर ई अलग-अलग मात्रा में बीई से कम है। सबसे बड़ी गिरावट PM कृषि सिंचाई योजना में देखी गई, जहां 150 करोड़ रुपये की आरई 850 करोड़ रुपये के बीई का मुश्किल से छठा हिस्सा है। कुल मिलाकर, इन 53 योजनाओं के लिए बीई 5 लाख करोड़ रुपये से थोड़ा ज़्यादा था, जिसे संशोधित करके 3.8 लाख करोड़ रुपये से कम, या बजटीय आवंटन का 74.4 प्रतिशत कर दिया गया। 31 दिसंबर को खत्म होने वाले नौ महीनों में जारी किया गया फंड कुल 2 लाख करोड़ रुपये से थोड़ा ज्यादा था, जो बजट आवंटन का 41.2% और RE का 55.4% था। पीएमकेएसवाई कमांड एरिया डेवलपमेंट और जल संसाधन, पीएम ई-बस सेवा, धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान, जल जीवन मिशन/राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल मिशन, प्राथमिक कृषि ऋण समितियों का कंप्यूटरीकरण और राज्य/केंद्र शासित प्रदेश घटक- पीएमएवाई शहरी की अन्य मदों के लिए RE, BE के 40 प्रतिशत से कम है। इनमें से छह योजनाओं में जारी की गई वास्तविक राशि बीई के 10 प्रतिशत से कम है। इन बड़ी योजनाओं (2,000 करोड़ रुपये या उससे ज्यादा बीई) में जल जीवन मिशन/नेशनल रूरल ड्रिंकिंग वाटर मिशन ( बी ई 67,000 करोड़ रुपये, नौ महीनों में असल खर्च आरई 31 करोड़ रुपये), पीएम स्कूल्स फॉर राइजिंग इंडिया (बी ई 7,500 करोड़ रुपये, असल खर्च 473 करोड़ रुपये), और प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना ( बीई 2,140 करोड़ रुपये, असल खर्च 40 करोड़ रुपये) शामिल हैं।





