वर्ष 2026 आ गया है और यह वह समय है जब हम बहुत सी विषम परिस्थितियों से जूझ रहे हैं। बंगाल में इस वर्ष विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं और उस पार बांग्लादेश में हिन्दुओं का उत्पीड़न जारी है, वह मारे जा रहे हैं। दूसरी तरफ हम भारतीय ही एक दूसरे से अनजान हैं। सच कहा जाए तो इस देश को नेताओं द्वारा किये जा रहे तुष्टीकरण का दीमक चाट रहा है। एक तरफ दक्षिण भारत के लोग उत्तर भारतीय लोगों को स्वीकार करना नहीं चाहते। उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड के लोगों को प्रताड़ित करना आम बात है। एसआईआर के बाद पता चल रहा है कि हमारे देश की सरकारी नौकरियों पर विदेशी बांग्लादेशी बैठे हैं और उनको प्रश्रय दिया जा रहा है। हम सब अपनी डफली, अपना राग बजा रहे हैं। कश्मीरी हैं कि वे खुद को भारतीय नहीं कहना चाहते है। मुस्लिम हैं कि उनको वंदे मातरम् से लेकर अशोक स्तम्भ तक आपत्ति है। हिन्दुओं को सिक्खों को अलग किया जा रहा है और उत्तर -पूर्व भारत को तो हमने कभी समझा ही नहीं। हमारी किताबों से पू्र्वोत्तर भारत गायब है। हम लोकतांत्रिक होने का चाहे जितना भी दंभ भरें मगर सरकारों का सौतेला व्यवहार एक सच्चाई है। विकास इन राज्यों तक नहीं पहुंचा और इसका फायदा अलगाववादी ताकतें उठा रही हैं। सच तो यह है कि अगर हमारे उत्तर पूर्व के लोग अपनी सूरत के कारण आपको मोमो, चाइनीज और बहुत कुछ लगते हैं तो डियर, बाकी भारतीयों आप भी बांग्लादेशी और पाकिस्तानी कहकर कूटे जा सकते हो, बाहरी हमले हमसे पहले हमारे उत्तर-पूर्व के भाई- बहन झेलते हैं, कड़ाके की ठण्ड झेलते हैं, विकास के मामले में सबसे पीछे रखे गए…और उनके कारण ही हमारे बोल वचन निकल रहे हैं। ये सरकारों की गलती है कि उत्तर पूर्व भारत का इतिहास, उनकी संस्कृति से हम अनजान हैं, वैसे भी उत्तर भारतीयों का मिजाज कुछ अलग ही रहता है, उनको धन्यवाद कहिये क्योंकि देश भक्ति में उत्तर- पूर्व भारत बाकी सब पर 20 छोड़िए 21 पड़ेगा। हैरत इस बात की है प्रताड़ित करने वालों में वह लोग भी शामिल हैं जो खुद दूसरे राज्यों से धक्के मारकर निकाले जा रहे हैं। हम कश्मीरी हैं, पंजाबी हैं, गुजराती, बिहारी, बंगाली, मद्रासी, कन्नड़ में बंटे हैं मगर भारतीय अब तक नहीं बन सके हैं। हमें याद रखना होगा कि अपनी पहचान को बनाए रखते हुए हमें अलग-अलग फूलों को गूंथने के लिए हिन्दी की जरूरत है। सरकारें लड़वाती रहेंगी मगर उस मानसिकता को बदलने की जरूरत है जिसने अहंकार की चाशनी में डुबोकर हमारी भारतीयता को ढक दिया है। भारत की रक्षा के लिए भारतीय संस्कृति को हर दिशा से सहेजना हम सबका कर्त्तव्य है। नववर्ष 2026 की हार्दिक शुभकामनाएं।





