शुभजिता आज दस साल पूरे कर रही है। 13 फरवरी 2016 को यह यात्रा अपराजिता…माने कभी न हार के साथ आरम्भ हुई। कहना न होगा कि यह एक लंबी यात्रा रही जिसमें चुनौतियां रहीं, संघर्ष रहा, निराशा रही मगर एक संतोष रहा क्योंकि हमने प्रयास किया। शुभजिता की शुरुआत अपराजिता के रूप में ही हुई..अपराजिता…जो चुनौतियों से हार नहीं मानती, जूझती है, सपने देखती है। यह वह समय था जब बतौर पत्रकार एक हिन्दी दैनिक में काम करते हुए खबरों को अपडेट करना होता था। जोर समस्याओ को उठाना जरूर था मगर उसकी दिशा सकारात्मकता होनी थी, युवाओं से जोड़ने और उनसे जुड़ने का प्रयास था। यह नहीं पता था कि क्या करना है, कैसे करना था। विज्ञापन कैसे लाने हैं और आज भी नहीं पता है। पत्रकारिता की दुनिया में सफलता का पैमाना विज्ञापनों से तय होता है, हम मानते हैं कि यह एक ऐसा पैमाना था, जिस पर खरा उतरना अभी शेष है मगर लोगों का जो सहयोग और समर्थन मिला…वह कम बड़ी उपलब्धि नहीं है। हमारी टीम बनी और इन युवाओं ने शानदार काम किया, विशेषकर कोरोना काल में । हम आभारी हैं इन सभी युवा साथियों के जो हर मुश्किल में जो कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहे। शुभजिता सृजन प्रहरी सम्मान और शुभ सृजन नेटवर्क सृजन सारथी सम्मान…एक कृतज्ञता बोध है। यूट्यूब पर भी शुभजिता देखी जाती है। हमारी वेब पत्रिका शुभजिता को अब तक दस लाख से अधिक लोगों का स्नेह मिला है। सांसारिक झंझावातों के बीच ईश कृपा ने शुभजिता की यात्रा में यह अध्याय जोड़ा है और आप सभी के सहयोग ने हमें बल दिया है।
अगर आप शुभजिता से जुड़े रहे हैं या फिर किसी न किसी रूप में शुभजिता आपके हृदय तक पहुंची है तो कृपया अपने विचार लिखित अथवा डिजिटल रूप में साझा करें। इसे शुभजिता पर प्रकाशित करके हमें असीम संतुष्टि होगी। शुभजिता वाणी प्रवाह में इस बार हम फागुन के रंग भर रहे हैं और नाम है भारत के रंग…भारत के विभिन्न राज्यों के बहुआयामी रंग अपनी लेखनी से बिखेरिए। अच्छा लगेगा और अगर हमारे उत्तर पूर्वी भारत की संस्कृति, साहित्य, इतिहास पर आपकी दृष्टि पड़े। आप अपनी पेटिंग्स भी हमें भेज सकते हैं।
आप सभी का आभार जताते हुए आपके अतिशय स्नेह के आकांक्षी हैं हम।
सुषमा त्रिपाठी कनुप्रिया
सम्पादक
शुभजिता




