कोलकाता । लिटिल थेस्पियन ने राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एक्सटेंशन प्रोग्राम विभाग, नई दिल्ली) संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से 22 दिसंबर 2025 से 21 जनवरी 2026 तक कोलकाता स्थित ‘अनुचिंतन आर्ट्स सेंटर’ में 30 दिवसीय प्रस्तुतिपरक नाट्य कार्यशाला का आयोजन किया। इस कार्यशाला का विचार निर्देशक उमा झुनझुनवाला का था। कार्यशाला का केंद्रबिंदु नए और अनुभवी कलाकारों की छिपी प्रतिभाओं को रचनात्मक गतिविधियों के ज़रिये बाहर लाना था, जिसमें अभिनय की कला, दृश्य संयोजन और मंच के पीछे का ज्ञान शामिल था। कार्यशाला में अभिनय के अलग-अलग तरीकों और विभिन्न शैलियों, सह-कलाकारों के साथ तालमेल, मंच परे का समन्वय और भाषण एवं ध्वनि परिवर्तन पर काम किया गया।
तीन दक्ष रंगकर्मियों ने नए कलाकारों को रंगमंच के विभिन्न पहलुओं के बारे में बताया। श्री अमित बनर्जी (संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार विजेता) ने कलाकारों की आवाज़, ध्वनि परिवर्तन और अभिनय के विभिन्न बारीकियों से परिचित कराया। मनीष मित्रा (निदेशक, कसबा अर्घ्य) ने मंच की साज-सज्जा और निर्देशन पर काम किया, जबकि डॉ. गगनदीप (सहायक प्राध्यापक, नाट्य विभाग, रवींद्र भारती विश्वविद्यालय) ने कलाकारों को दृश्य संयोजन की दुनिया से परिचित कराया। इस कार्यशाला में कोलकाता के और अन्य राज्यों से कुल मिलाकर 25 कलाकारों ने सहभागिता की । इस कार्यशाला का समापन नाटक ‘दफ्तर’ के मंचन के साथ हुआ, जो उमा झुनझुनवाला द्वारा लिखा गया एक तीखा व्यंग्य है, जो दफ्तरों में फैले भ्रष्टाचार, उदासीनता और अक्षमता पर कटाक्ष करता है। यह नाटक यमराज के दफ्तर में खुलता है, जहाँ परलोक की नौकरशाही हमारे अपने संसार को दर्शाती है। यह नाटक कालातीत मुद्दों से रूबरू करवाता है, जहाँ किसान जो ज़मीन जोतने के बावजूद अपने परिवार को खिलाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं; हाशिए पर पड़े निचली जातियों और वर्गों के लोग सम्मान के लिए लड़ रहे हैं; एक मोची जिसे अपने परिवार के लिए रोटी मांगने की हिम्मत करने पर ज़िंदा जला दिया गया और एक अकालपीड़ित आम आदमी, जो परिवार और उम्मीद से वंचित है एवं सीता और द्रौपदी के समय से महिलाओं द्वारा सहे गए असहनीय कष्टों को दर्शाया गया है; फिर भी, अंधेरे के बीच इनसान उम्मीद की रोशनी से चिपके रहते हैं, एक बेहतर कल के लिए जीते हैं। उमा झुनझुनवाला की तीखी आलोचना अतीत और वर्तमान के बीच की अंधेरी असमानताओं पर प्रकाश डालती है। इस नाटक का निर्देशन डॉ. गौरव दास ने किया और मो. आसिफ़ अंसारी सहायक निर्देशक थे। शानदार रोशनी की संकल्पना राहुल सरदार ने तैयार की थी, भावपूर्ण गायन अनन्या भास्कर ने प्रस्तुत किया और त्रिदिब साहा ने पर्कशन बजाया। खूबसूरत कोरियोग्राफी नयन साधक और समर मृधा ने की। जिन प्रतिभागियों ने भाग लिया और अभिनय किया उनमें गुंजन अज़हर, संगीता व्यास, एनी दास, नुपूर भौतिका, नव्या शंकर, स्नेहा दास, बबीता शर्मा, श्रीमंती सेन, फ़िरोज़ हुसैन, आदित्य वत्स, अर्पित कुमार, बापन नस्कर, कौशिक चक्रवर्ती, कुशाग्र सक्सेना, सम्राट चक्रवर्ती, लिटन सरकार, मोहित, राम आश्रय साव, सत्यम पांडे, सौरिक बेरा, सुभाशीष बाग, सहबाज़ खान, राहुल सरदार, नयन साधक, बिप्लब नस्कर शामिल थेl




