लखनऊ । उत्तर प्रदेश में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत मतदाता सूची को दुरुस्त करने की बड़ी कवायद सामने आई है। एसआईआर के दौरान 2.89 करोड़ नाम हटाए गए हैं, जो कुल वोटर्स का लगभग 18 प्रतिशत है। छह फरवरी तक दावे-आपत्तियां ली जाएंगी, जबकि अंतिम मतदाता सूची 6 मार्च को प्रकाशित की जाएगी। 4 नवंबर से 26 दिसंबर 2025 तक चले गणना अभियान में 12.55 करोड़ मतदाताओं से प्रपत्र प्राप्त हुए, जिसमें लाखों अपात्र नामों की पहचान हुई, वहीं नए पात्र मतदाताओं को जोड़ने की प्रक्रिया तेज की गई है। आयोग ने पारदर्शी और सहभागी पुनरीक्षण के साथ अंतिम सूची 6 मार्च 2026 को जारी करने का ऐलान किया है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने बताया कि उत्तर प्रदेश में विशेष मतदाता पुनरीक्षण के तहत मतदाता सूची की व्यापक समीक्षा की गई है। गणना के दौरान 46.23 लाख मृत मतदाता, 2.17 करोड़ स्थानांतरित अथवा अनुपस्थित, और 25.47 लाख से अधिक दोहरी प्रविष्टियों वाले नाम चिह्नित किए गए हैं। दावा एवं आपत्ति की अवधि 6 जनवरी 2026 से 6 फरवरी 2026 तक निर्धारित की गई है। इस दौरान पात्र नागरिक फॉर्म-6 भरकर मतदाता सूची में नाम जुड़वा सकते हैं, जबकि एक से अधिक स्थानों पर दर्ज नामों को नियमानुसार केवल एक स्थान पर रखा जाएगा।
राज्य के 75 जनपदों में 403 निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी, 2042 सहायक ईआरओ और 1.62 लाख से अधिक बीएलओ के समन्वित प्रयास से यह अभियान सफल रहा। इसके साथ ही 5.76 लाख बूथ लेवल एजेंटों की सक्रिय भागीदारी भी रही। मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने बताया कि इस दौरान मतदाताओं से 12 करोड़ 55 लाख गणना प्रपत्र प्राप्त हुए, जो कुल मतदाताओं का 81.30 प्रतिशत है। एसआईआर में 46,23,796 लाख मतदाता मृत पाए गए, जो 2.99 प्रतिशत हैं। वहीं 79,52,190 मतदाता ट्रेस नहीं हो सके, जबकि 12,97,74,72 करोड़ मतदाता अन्यत्र स्थानांतरित हो चुके थे।
इसके अलावा 25.47 लाख मतदाता ऐसे चिह्नित किए गए, जिनके नाम मतदाता सूची में एक से अधिक स्थानों पर दर्ज पाए गए। ऐसे मामलों में मतदाता का नाम केवल एक ही स्थान पर रखा जाएगा। उन्होंने बताया कि पुनरीक्षण को जनभागीदारी से जोड़ने के लिए व्यापक जागरूकता अभियान चलाए गए और राजनीतिक दलों के साथ 1,546 बैठकें आयोजित की गईं। बीएलओ ने घर-घर जाकर गणना प्रपत्र वितरित किए, जबकि बीएलए को अधिकतम 50 प्रपत्र जमा करने की अनुमति दी गई।





