यहां होती है बालू के शिवलिंग की पूजा

कानपुर. यहां मैक्सर घाट पर एक ऐसे शिवलिंग की पूजा की जाती है, जिसे बनाने में बालू और मिटटी का इस्तेमाल किया जाता है। 3 फीट ऊंचे इस शिवलिंग में 70 फीसदी बालू और 30 फीसदी मिट्टी का इस्तेमाल किया जाता है। इस शिवलिंग का श्रृंगार भी किया जाता है, जिसमें केवल फूलों का इस्तेमाल किया जाता है। कहते है इस शिवलिंग की रचना बरसो पहले एक सन्यासी ने किया था। जिसके हर साल सावन में इसको बनाया जाता और सावन के दो दिन बाद इसे विखंडित कर दिया जाता है।

उन्नाव के सन्यासी ने इसे किया था तैयार…

कानपुर मैक्सर घाट प्राचीन घाटो में से एक है। इस घाट पर बर्षो पूर्व उन्नाव जनपद के एक सन्यासी इस घाट पर आये, और यही के होकर रह गए थे। एक स्थानीय निवासी प्रमोद कुमार ने बताया कि उस सन्यासी का नाम भोला बाबा था। वो शिवभक्त के साथ सिद्धपुरुष भी थे।

इसके मुताबिक़ वो भगवान शिव की आराधना करते थे। मगर वो किसी मंदिर में जाकर भगवान भोलेनाथ की पूजन नहीं किया करते थे। वो गंगा स्नान करने के बाद घाट किनारे रेत का शिवलिंग बनाते थे। उस शिवलिंग की वो विधिवत पूजन करते थे, और पूजन अर्चन के बाद उस रेत के शिवलिंग को गंगा में प्रवाहित कर देते थे।

इस शिवलिंग की पूजा करवाने वाले वर्तमान के पंडित कल्लू दीक्षित के मुताबिक़ ये आज तक कोई नहीं जान पाया कि आखिर वो ऐसा क्यों करते थे। भोला बाबा ने ही इस शिवलिंग नाम नित्तेश्वर बाबा रखा था, जो अब श्रद्धालुओं के जुबान पर है।

आज तक कोई नहीं जान पाया इस बाबा के बारे में

पंडित कल्लू दीक्षित के मुताबिक़, बाबा ये तो बताते थे कि वो उन्नाव के है मगर किस गांव में कहां उनका घर है ये उन्होंने किसी को नहीं बताया। वो बहुत ही काम बोलते थे। शाम को उनको सुनने के लिए भीड़ लगी होती थी, वो भी भोलेनाथ की आरती करने के बाद लोगो को शिव कथा सुनाते थे।

उनके मृत्यु के बाद हम पण्डितगण और स्थानीय भक्तों ने उनकी मौजूदगी इस घाट पर बनाए रखने के लिए बालू के शिवलिंग को बनाना जारी रखा। इस जगह को घेर कर भक्तगानो ने एक छोटे से मंदिर का निर्माण भी करवा दिया । हर दिन बाबा का शृंगार ताजे फूलो से होता है।

इस शिवलिंग को बनाने और प्रवाहित करने के समय किसी को इसे देखने की इजाजत नहीं है, क्योकि भोला बाबा भी तड़के सुबह इस शिवलिंग का निर्माण करते थे, और देर रात अकेले इस शिवलिंग को गंगा में प्रवाहित कर देते थे।

पंडित कल्लू दीक्षित के अनुसार भोला बाबा यहाँ रहकर दिनरात भोले नाथ की ही आराधना करते रहते थे। उनके तन पर केवल एक धोती हुआ करता था, मौसम कोई भी हो।

बाबा कभी भी किसी के दान दिया हुआ नहीं खाते थे। बाबा अख़बार लगाते थे और जो पैसा मिलता था। उसी से ही वो अपना पेट भरते थे, पेट भरने से ज्यादा पैसा मिल जाए तो उसे गरीबो में बंटवा देते थे।

इस पर नहीं टपकता गंगा जल

कैंटोनमेंट इलाके मौजूद इस मंदिर में इस शिवलिंग की दर्शन के लिए शहर के साथ साथ अगल बगल गांव के भी भक्त आते है। एक भक्त रामकलश के मुताबिक़ नितेश्वर बाबा की सुबह सुबह दर्शन करने से पूरा दिन अच्छा जाता है।

इस मंदिर में पानी दूध या तरल प्रदार्थो को ले जाना सख्त मना है। बालू के बने इस शिवलिंग के ऊपर गंगा जल को भी नहीं रखा जाता, भोला बाबा इस शिवलिंग को बनाने में गंगा जल का ही इस्तेमाल करते थे।

 

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