–विद्यासागर विश्वविद्यालय की पहल
-मंदारमनी और बोगुरन-जलपाई बीच पर हुई सफाई
पूर्व मेदिनीपुर । समुद्री पारिस्थिकी को बचाने और तटीय इलाकों में लोगों के बीच जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से, ‘कोस्टल ऑब्जर्वेटरी एंड आउटरीच सेंटर’ ने आज रविवार को एक बड़े “स्वच्छ सागर, सुरक्षित सागर जागरूकता और समुद्री तट की सफाई अभियान का संयुक्त रूप से आयोजन किया और उसे सफलतापूर्वक पूरा किया। इस सेंटर की स्थापना भारत सरकार के ‘इंडियन नेशनल सेंटर फॉर ओशन इंफॉर्मेशन सर्विसेज’ और विद्यासागर विश्वविद्यालय के ‘सेंटर फॉर एनवायर्नमेंटल स्टडीज’ की फंडिंग से दीघा में की गई थी।
यह कार्यक्रम पूर्वी मेदिनीपुर के दो अहम समुद्री तटों- मंदारमनी में दक्षिण पुरुषोत्तमपुर और बोगुरन-जलपाई तट पर एक साथ आयोजित किया गया। इसका आयोजन भारत सरकार के पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के तहत काम करने वाले आईएनओआईएस के औपचारिक समन्वय में किया गया।
इस अवसर पर विद्यासागर विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार डॉ. जयंत किशोर नंदी मुख्य संरक्षक के तौर पर मौजूद थे। रामनगर विधानसभा क्षेत्र के विधायक डॉ. चंद्रशेखर मंडल और मुगबेरिया गंगाधर महाविद्यालय के प्रिंसिपल डॉ. स्वपन कुमार मिश्रा ने मुख्य अतिथि के तौर पर कार्यक्रम में हिस्सा लिया और उत्साह बढ़ाया। पूरा कार्यक्रम सेंटर फॉर एनवायरनमेंटल स्टडीज़ के डायरेक्टर, कोस्टल ऑब्ज़र्वेटरी एंड आउटरीच सेंटर के कोऑर्डिनेटर और डॉ. जातिशंकर बंद्योपाध्याय के दूरदर्शी नेतृत्व में आयोजित किया गया। केंद्रीय स्तर से पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के संयुक्त सचिव श्री श्रीनिवास राव गांगी रेड्डी और वैज्ञानिक श्री ई. पट्टाभि राम राव मौजूद थे।
शिक्षा और शोध के क्षेत्र में बहुआयामी सहयोग के प्रमाण के तौर पर, ओशन जियोमैटिक्स विद एआई विभाग के डॉ. सौरव माइती और रिमोट सेंसिंग और जीआईएस विभाग के डॉ. निरूपम आचार्य और डॉ. अमृता कामिला ने इस अभियान में सक्रिय रूप से भाग लिया। भारत सरकार के INCOIS-MoES द्वारा स्वीकृत प्रोजेक्ट के तहत विश्विद्यालय के एक शोधार्थी सौम्यकांति पांडा, मुगबेरिया गंगाधर महाविद्यालय के फैकल्टी स्नेहाशीष मंडल और विद्यासागर विश्वविद्यालय के शोधार्थी अविक साहा ने इसके समग्र प्रबंधन और संचालन की जिम्मेदारी बखूबी निभाई।
पर्यावरण की सुरक्षा के लिए एकजुट होकर तीन सौ से ज़्यादा उत्साही लोगों- जिनमें अलग-अलग स्कूलों और कॉलेजों के छात्र, काजला जनकल्याण समिति के सदस्य, स्थानीय ग्रामीण और पारंपरिक मछुआरा समुदाय के लोग शामिल थे। इन्होंने समुद्र तट पर जमा कचरे को साफ़ करने और टिकाऊ तटीय जीवनशैली का संदेश फैलाने के लिए खुद से पहल की। अकादमिक शोध, सरकारी सहयोग और जन-भागीदारी का यह सफल संगम अगली पीढ़ी के लिए एक स्वस्थ, स्वच्छ और सुरक्षित समुद्री भविष्य बनाने के राष्ट्रीय संकल्प को और मजबूत करता है। कार्यक्रम में मौजूद सभी लोगों ने उम्मीद जताई कि दीघा में स्थित यह समुद्री और तटीय अनुसंधान केंद्र व्यापक रूप से विकसित होगा और पूर्वी भारत में एक अनोखे क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र के रूप में उभरेगा।




