मुक्तांचल के 41वें और 42वें अंक का लोकार्पण

हावड़ा/कोलकाता । पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले से डॉ. मीरा सिन्हा के संपादन में प्रकाशित होने वाली पत्रिका मुक्तांचल के 41वें और 42वें अंक का लोकार्पण रविवार 7 जुलाई को विद्यार्थी मंच के कार्यालय में किया गया। इस अवसर पर मुख्य रूप से वे रचनाकार उपस्थित थे जिनकी रचनाएं इन दो अंकों में प्रकाशित हुई है। सर्वप्रथम प्रिया श्रीवास्तव ने मुक्तांचल के 42वें अंक में प्रकाशित संस्तुति का वाचन किया। इस संस्तुति में शोध पर अपनी चिंता व्यक्त करते हुए संपादक ने लिखा है कि साहित्य के संसार में बाजार की आवाजाही ने भयंकर विडंबना भर दी है। दिनोंदिन शोध और समीक्षा का दायरा संकीर्ण होता जा रहा है। नई पीढ़ी में काम करने की यांत्रिकता और सोच की गतानुगतिकता इतनी बढ़ गई है कि मौलिकता का सर्वथा अभाव हो गया है। वक्ताओं के रूप में अशोक आशीष (आसनसोल), डॉ. विनय कुमार मिश्र (बंगवासी कॉलेज, कोलकाता), प्रीति सिंह (खांद्रा कॉलेज, आसनसोल), डॉ. विजया सिंह (रानी बिरला गर्ल्स कॉलेज, कोलकाता), सरिता खोवाला, नगीना लाल दास आदि उपस्थित थे। विवेक लाल, स्वराज पांडे, प्रिया श्रीवास्तव, आकाश गुप्ता ने अपनी स्वरचित कविताओं का पाठ किया। कार्यक्रम के अध्यक्ष जनवादी कवि राज्यवर्धन थे। अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में उन्होंने कहा कि आज का समय साहित्य के उदासीनता का समय है और इसका सबसे अधिक लाभ बाजारवाद उठा रहा है। अशोक आशीष ने कहा कि जहां अधिक मात्रा में उत्पादन होता है वहां सृजन नहीं होता ; साहित्य का सृजन होता है उत्पादन नहीं। विद्यार्थी मंच के सदस्य नगीना लाल दास ने इसी माह में डॉ. मीरा सिन्हा के निर्देशन में कलकत्ता विश्वविद्यालय से अपनी पीएच.डी. की उपाधि प्राप्त की है। इसके लिए विद्यार्थी मंच और मुक्तांचल के उपस्थित सदस्यों द्वारा उन्हें शुभकामनाएं दी गई। कार्यक्रम को सफल बनाने में सुशील पांडेय, बलराम साव, संजय दास, प्रदीप धानुक, विनीता लाल आदि ने सक्रिय भूमिका निभाई। मुक्तांचल का 43वां अंक रमेश कुंतल मेघ पर केंद्रित होगा। कार्यक्रम का संचालन विनोद यादव ने किया और धन्यवाद ज्ञापन परमजीत पंडित ने दिया।

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