Friday, February 20, 2026
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दुर्गापूजा डायरी

प्रेषक – रेखा श्रीवास्तव

दस दिनों तक चलने वाली दुर्गा पूजा और विजय दशमी अब जाने को है। उत्साह का दौर अपने अंतिम मुकाम पर है। सभी ने अपने अपने तरीके से इन दिनों को सहेजा। हमारे यहां अर्थात् हमारे कॉम्प्लेक्स में बड़े स्तर पर दुर्गा-पूजा का आयोजन किया गया। पूजन के साथ साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम, मंडप सज्जा, मेला, प्रीति भोजन का आनंद हमलोग उठाते रहें। विगत दस दिन हम सब अपनी दिनचर्या से अलग इस माहौल में जुड़े रहे। कुछ अच्छी, कुछ प्यारी यादें समेटे। मेरे लिए भी कई यादें रहीं। पर सबसे खास बात मुझे जो दिल तक छु लीं वह था नवमी के दिन एक दंपति का हमारे कॉम्प्लेक्स में आना। वे 99 व 97 वर्ष के थे, पर उनका हौसला देखने लायक था। वे दोनों हमारे काम्प्लेक्स में पूजा देखने आये। उनकी बहू उन दोनों को लेकर आई थी। उनको देखकर मेरा मन भी उनके प्रति श्रद्धा से भर उठा। मैं उन दोनों की कुछ फोटो क्लिक की।

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प्रेषक – नीलम सिंह

सुबह का अखबार हाथ में है,पृष्ठ पलटते ही माँ दुर्गा का स्मित रूप दिखाई पडा़।कहीं अष्टभुजा तो कहीं दस भुजा ,तरह-तरह के अस्त्र-शस्त्र से सुशोभित।इसबार माँ के दर्शन हेतु पंडाल तक न पहुँच सकी थी इसलिए माँ को स्मरण कर प्रणाम किया।अन्य पृष्ठों पर दशानन का वध करते मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम।एक दो पृष्ठ और पलटे तो पाया कि कुछ विशिष्टजन बाल कन्याओं के पाँव पखार विधिवत् पूजन कर रहे हैं।मन विचलित हो गया आडम्बर पूर्ण आचरण देखकर।आँखों के सामने घूम गया बीता वर्ष।जब इन्हीं अखबार के पन्नों पर ऐसी ही न जाने कितनी बाल अबोध कन्याओं के संग दुराचार की खबरें छपती रहीं,और वहशियों के खिलाफ किसी ठोस निर्णय की खबर सामने नहीं आयी।सदियों से माँ पूजी जा रहीं हैं और सदियों से ऐसा कुकृत्य भी किया जा रहा है। कुकर्मी को इन बाल कन्याओं में उस वक्त देवी का स्वरूप का अहसास नहीं होता,जब उनके अबोध मन पर छुरियाँ चलाई जाती हैं,धारदार हथियार से काटे जाते हैं उनके अंग,रेता जाता है गला,दफना दिया जाता है बिना कुछ कहे।
मन मेरा सवाल पूछता है,क्या इन अबोधों के वस्त्रों को हम दोष देकर छुटकारा पा सकते है,या कि इन अबोधों की शारीरिक भाव भंगिमा को दोष देंगें।अरे! नहीं साहब ये तो वह रावण है जो आज भी जिंदा है।और हम है कि रा़वण नहीं मारेंगे। माँ दुर्गा की असली पूजा तो तब होगी जब ये कन्याएँ सुरक्षित होंगी,चाहे वह माँ की कोख हो या समाज का आँगन।

 

 

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